स्वास्थ्य स्वर: हड्डी में बुखार (ज्वर) का घरेलू उपचार…

ग्राम-रहंगी, पोस्ट-लोरमी, जिला मुंगेली (छत्तीसगढ़) से वैद्य चन्द्रकान्त शर्मा आज हमें हड्डी में बुखार (ज्वर) का एक घरेलू उपचार बता रहे हैं: वे कह रहे हैं कि जवा क्षार, यह सभी दवाई दुकानों में उपलब्ध होता है, जो आसानी से आप के आसपास मिल जाता है, हड्डियों में बुखार होने से, जवा क्षार 1-2 रत्ती की मात्रा में नीम के पत्ती के रस के साथ लगातार सुबह शाम सेवन करने से बुखार पसीने के रूप में बाहर होकर बुखार कम हो जाता है, इसके साथ चन्दन का तेल पांच बूंद, बतासे के साथ सेवन कर उपर से ताजा पानी पीने से भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है, यह उपचार घर में ही कर सकते हैं जिसका कोई शुल्क नही लगता है: वैद्य चन्द्रकान्त शर्मा@9893327457.

Download (4 downloads)

Share This:

स्वास्थ्य स्वर: गूमा (द्रोण पुष्पी) के पौधे के औषधीय गुण…

जिला-टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) से वैद्य राघवेन्द्र सिंह राय आज हम सभी को गूमा या द्रोण पुष्पी के पौधे के औषधीय गुण बता रहे हैं: गूमा (द्रोण पुष्पी) का यह औषधीय पौधा हमारे प्राकृतिक वातावरण में ही हमारे आसपास पाया जाता है, यह औषधि आधे सिर दर्द होने पर (यह दर्द प्रातः काल से शुरू होकर दिन ढलने तक होता है) में काफी उपयोगी है यह तकलीफ होने पर गूमा के पत्ते के कर्क (काढ़ा) बनाकर कपाल (माथा) लेप करने से आराम मिलता है| इसके अतिरिक्त गूमा के पत्तों के रस को 1-1 बूंद नासिका में डालने से भी लाभ मिलता है, यह सरल एवं सुखद घरेलु उपचार है जो सभी कर सकते हैं बहुत प्रभावकारी होता है:वैद्य राघवेन्द्र सिंह राय@9424759941.

Download (3 downloads)

Share This:

उपस्वास्थ्य केंद्र नही होने से हम 7 गाँव के लोग 6 किलोमीटर किसी भी इलाज के लिए पैदल जाते हैं…

ग्राम-ताड़वेली, प्रखंड-कोयलीबेड़ा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर, (छत्तीसगढ़) से मंगू राम, कुम्मा राम, तेका कवाची और नडगू उइके बता रहे हैं कि उनके क्षेत्र में लगभग 6-7 गाँव पड़ते हैं, जहां उप स्वास्थ्य केंद्र नही होने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लोग 5-6 किमी इलाज के लिए पैदल और साइकिल से जाते हैं, डाक्टर गाँव में नही आते, पहले लोग जंगली जड़ी -बूटी से इलाज करते थे पर जिसका असर धीरे से होता है, वर्तमान समय में लोग आधुनिक दवा का उपयोग करने लगे है, कभी कभी आधुनिक दवा न रहने पर जड़ी बूटी का उपयोग आज भी लोग करते है l इसकी शिकायत लिखित रूप में भी किया,पर बन जाएगा बोलकर आज तक टाल रहें हैं : कलेक्टर@9425263044. संपर्क नम्बर ग्रामीण@9479104296.

Download (2 downloads)

Share This:

स्वास्थ्य स्वर : दाल मखाना के पौधे के औषधीय गुण…

जिला-टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) से वैद्य राघवेन्द्र सिंह राय दाल मखाना के औषधीय गुण के बारे में बता रहे हैं: दाल मखाना का पौधा अधिकतर तालाबों में मिलता है, इस पौधे की अधिकतम लम्बाई 2 फीट होती है इसकी पत्ती हल्की, लम्बी और चौड़ी होती है, जोड़ों में दर्द में इन पत्तियों को अच्छी तरह से पीसकर लेप करने से लाभ मिलता है, ताकत के लिए इसके बीजों के साथ कोंचबीज (फल) को शुद्ध करके चूर्ण बनाकर 3 ग्राम शक्कर या मिश्री के साथ मिला कर दूध के साथ सेवन करने से शक्ति मिलता है, कोंच के बीजो को गाय के दूध में गर्म करके शुद्ध किया जा सकता है, ये उपचार निशुल्क घर में बिना कोई पैसे दिए कर सकते हैं | संपर्क नम्बर@9424759941.

Download (1 download)

Share This:

स्वास्थ्य स्वर: अडुषा के पौधे का औषधीय गुण..

जिला-टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) से वैद्य राघवेंद्र सिंह राय आज हम सभी को अडुषा के पौधे का औषधीय गुण बता रहे है: अणुषा (बाशा) का उदर कृमि (पेट में कीड़े हो) के रोग में अच्छा उपयोग हो सकता है. अणुषा के पत्तो के रस में मधु या शहद मिलाकर सेवन करने से पेट के कृमि नष्ट हो जाती है और वह बाहर निकल जाते है चर्म रोग में दाद खाज खुजली में इसके 20 पत्तो में 10 ग्राम हल्दी चूर्ण और गौमूत्र में पीसकर दाद, खाज, खुजली के स्थान पर लेप लगाने से दाद, खाज, खुजली की समस्या में लाभ होता है अगर किसी को बमन या उल्टी होती है तो अणुषा के पत्तो के रस में मधु अथवा नीबू का रस मिलाकर के सेवन करने से लाभ होता है| सम्पर्क नम्बर 9424759941

Download (1 download)

Share This:

स्वास्थ्य स्वर: प्रातः काल ताजे गाय का मूत्र पान करना चाहिए…

सेतगंगा, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से वैद्य रमाकांत सोनी गौमूत्र के सम्बध में बता रहे है:
गौमूत्र से चिकित्सा का वर्णन प्राचीन धर्मग्रंथों में मिलता है l गाय के मूत्र में रोग नाश करने की शक्ति हैl आज के आधुनिक विज्ञान ने भी रिसर्च से यह सिद्ध किया है, कि गौमूत्र से रोगों का निवारण होता हैl कैंसर जैसी घातक जान लेवा रोग भी गौमूत्र से दूर होता है, ऐसे उदाहरण हैं l गौ मूत्र में कैल्सियम सोडियम पेटोसियम एन्जाइम तथा सभी विटामिन का समावेश होता हैl इससे थायराईड टी.बी.ब्लड प्रेशर सुगर चर्म रोग तथा कैंसर जैसे रोगों का भी नाश होता हैl अतः सत्य हो या असत्य सभी लोगो को प्रातः काल ताजे गाय का गौमूत्र पान करना चाहिए| सम्पर्क नम्बर@9589906028.

Download (1 download)

Share This:

स्वास्थ्य स्वर: हिचकी ठीक करने का घरेलू उपचार…

ग्राम-घोंघा, थाना-बोड्ला, तहसील-बोड्ला, जिला कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से वैद्य भगत राम लांझी हिचकी को ठीक करने का एक घरेलू उपचार बता रहे हैं. वे कह रहे हैं कि हिचकी आने पर परसा (पलाश) के पत्ते को चिलम (बीडी) जैसा बनाकर उसमे राहर (अरहर) के पत्तों को तम्बाखू के जगह भरकर पीने से हिचकी से आराम मिलता है, यदि अरहर के पत्ते उपलब्ध नहीं है तो इसके स्थान पर चने के पत्ते को भी इसी तरह उपयोग किया जा सकता है | ये औषधि हमारे वातावरण के आस-पास ही उपलब्ध हो जाती है यह उपचार बिना कोई खर्चा किये घर में ही किया जा सकता है |अधिक जानकारी के लिए संपर्क नम्बर@7389964276.

Download (1 download)

Share This:

स्वास्थ्य स्वर: लहसुन का सेवन करें, बीमारियों से बचें…

वैद्य रमाकांत सोनी, सेतगंगा, जिला-मुंगेली (छतीसगढ़) से आज हम सभी को हर घर में पाए जाने वाले लहसुन की उपयोगिता के बारे में बता रहे है: आयुर्वेद ग्रंथो में लहसुन का वर्णन मिलता है l प्राचीन काल से घरेलू उपचार के रुप में लहसुन का उपयोग होता रहा है l यह अनेक रोगों को नष्ट करने की बेजोड़ शक्ति रखता है l यह अत्यंत पौष्टिक और शक्तिवर्धक होता है | इसमें अम्ल रस छोड़कर सभी पांच रस विद्यमान रहते है, इसलिए इस रसायन को रसुन कहते है l इस रसायन गुण का नियमित सेवन करने से कई बीमारियाँ जैसे पेट के रोग, जोड़ो का दर्द, ब्लड प्रेशर और पक्षाघात जैसे रोगों को नष्ट करता है तथा रोग प्रतिरोधक शक्ति की वृद्धि करता है l संपर्क@9589906028

Download (1 download)

Share This:

स्वास्थ्य स्वर : नीम के औषधीय गुण और उपयोग-

ग्राम-तडहू, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से बलीराम कतलामी नीम के औषधीय गुणो के बारे में बता रहे हैं, नीम बहुत तरह की बीमारी दूर करने में सहायक होता है, इसके छाल से साबुन बनता है, इसे दातुन के लिए भी उपयोग में लाया जाता है, उनका कहना है दातून करते समय नीम का रस हमारे शरीर में चला जाता है, जिससे जहरीले जीवो के काटने पर कम असर होता है, नीम के पत्ते को गर्म कर नहाने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है, ऐसा करने से शरीर के फोड़ा फुंसी में लाभ मिलता है, उसका गर्म पानी पी भी सकते हैं, इस तरह से नीम का अलग- अलग तरह से प्रयोग हम सभी अपने अच्छे स्वास्थ्य के लिए कर सकते हैं : अमर मरावी@9754684672.

Download (1 download)

Share This:

स्वास्थ्य स्वर: मलेरिया का घरेलू उपचार-

ग्राम-रहगी, पोस्ट-लोरमी, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से वैद्य चंद्रकात शर्मा आज हमें मलेरिया रोग का एक घरेलू उपचार बता रहे हैं. वे कह रहे हैं कि अपामार के पत्ते और काली मिर्च बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और फिर इसमें थोड़ा सा गुड़ मिलाकर मटर के दानों के बराबर गोलियां तैयार कर लें फिर एक-एक गोली को भोजन के बाद नियमित सेवन करने से मलेरिया ज्वर नहीं पकड़ता है | इन गोलियों का सेवन दो से चार दिन करना पर्याप्त होता है | नोट-अपा महारक को छिछला के नाम से भी जाना जाता है, जो आसानी से मिल जाता है | अधिक जानकारी के लिए संपर्क वैद्य चंद्रकात शर्मा@9893327457

Download (2 downloads)

Share This: