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आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : आँख और नाक की शुष्कता दूर करने के लिए घरेलू उपचार

ग्राम-उभेगाँव, जिला-छिंदवाड़ा (मध्यप्रदेश) से माला धुर्वे आँख और नाक की शुष्कता दूर करने के लिए घरेलू उपचार बता रही हैं, वे बता रही हैं रात को नाभि में सरसों का तेल लगाकर सोएं, त्रिफला चूर्ण को पहले उबालें फिर उसकों महीन कपडे में छान कर दिन में दो बार उस पानी से आँख धोने से लाभ होगा। सप्ताह में एक बार गुलाब जल से आँखों को धोना चाहिए। खाली पेट 5-6 काली मिर्च गरम पानी के साथ खाएं यह शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालता है, प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिए रोज भिगोई हुयी मुट्ठी भर बादाम खाएं इससे जोड़ो में चिकनाहट बनी रहती है ,रोज दो कली लहसुन भी खाएं ,खाली पेट अदरक खाने से कोलेस्ट्रोल भी कम होता है|

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आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : आसपास पाए जाने वाले वनस्पतियों के औषधीय गुण-

सर्फिंन पौधा के पत्ते काटे-काटे से होते है, पीला-पीला फूलता है उसके डोप को तोड़ने से पीला रंग का तरल पदार्थ निकलता है, जिस किसी को मुह में छाले पड़े हो तो उसको लगाने से तीन दिन में छाले ठीक हो जायेंगे. (२) बनसुनसुनिया होता है श्वास, दमा के रोगी उसकी माला को गले में पहनने से दमा ठीक होता है. (३) तुलसी के पत्तो का काढ़ा पीने से सर्दी खांसी, ज्वर ठीक होता है. (४) किसी को सांप ने काटा हो तो चोखन्डी नाम का पेड़ होता है, उसके रस को पीड़ित व्यक्ति के नाक, कान में डालने से वह व्यक्ति बेहोश नही होता है. ऐसे ही कई वनस्पति औषधीय गुणों से भरे पेड़ पौधे हमारे आस पास होते है

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आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में: ब्राह्मणी के पत्ते और पीपल की छाल के औषधीय गुण

ग्राम-तमनार, जिला -रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी कुछ घरेलू नुस्खे बता रहे है. वे कह रहे हैं कि ब्राह्मणी एक पौधा होता है वह नदी के किनारे मिलता है या जहाँ पर पानी होता है। ब्राह्मणी पत्ता छोटे बच्चो को 5 से 6 पत्ते 2 दिन में दो बार सुबह और शाम को और बड़े उम्र के लोगो के लिए 2 बार 10 से 20 पत्ते, बुजुर्ग लोगो को दिन में तीन बार दीजिये इससे मस्तिष्क ठीक रहता है, याददाश्त तेज रहती है और ह्रदय रोगी को भी फायदा होता है, (2) पीपल की छाल को पीसकर चाय जैसे दिन में दो बार नियमित लेने से जिन महिलाओ को गर्भ धारण नही होता है उससे गर्भवती हो जाती हैं. यह लगभग एक साल तक नियमित सेवन करना चाहिए। इसका कोई दुष्परिणाम नहीं होता।

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आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में: बकरी के पेशाब से दमा का इलाज-

ग्राम-सलेय्या कला, पोस्ट-सावरी बाज़ार, तहसील-मोहखेड़, जिला-छिन्दवाडा (मध्यप्रदेश) से सविता धुर्वे प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में जानकारी दे रही है कि कैसे बकरी के पेशाब से दमा और खांसी का उपचार किया जाता है. छोटे बच्चों को इंजेक्शन नही लगाते है बचपन में तो अगर उनको सर्दी खांसी हो जाती है तो क्षेत्र के लोग सुबह सुबह गर्म बकरी का मूत्र २ चम्मच पिला देने से ठीक हो जाते है. किसी को दमा साँस की बीमारी हो तो वो भी सुबह एक कप बकरी का मूत्र पीने से ठीक हो जाता है. वे बता रही हैं कि गाँव के लोगों के पास पैसे काम होते हैं इसलिए इस तरह की प्राकृतिक चिकित्सा उनके लिए अधिक उपयोगी है इस तरह की चिकित्सा में साइड अफेक्ट भी नहीं होता। सविता धुर्वे@7509070023.

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आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में: दमा खांसी का घरेलू उपचार

Mithanlal Yadav calling from Kumli village, Block Mawai Mandla distrcit MP shares treatment of Asthma cough through easily found flora. Take Santalum ( charota) seeds, sandalwood bark, Arjuna bark all in same proportion of 100 gms and blend them thoroughly. Put the mixture in tea and consume it. Also, one can have some seeds of Ziziphus mauritiana ( Bhelva), crush them and put them in tea in place of tea leaf. It may help reduce Asthma cough. For more Vaid Mithanal Yadav@7828287936

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आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : नीम के औषधीय गुण की कहानी-

कान से मवाद आता हो तो नीम की पत्ती को पीसकर सरसों के तेल में उबालकर जलाकर तेल को छानकर दिन में दो तीन बार डालने से मवाद आना बन्द हो जायेगा. चर्म रोगों में नीम की छाल को उबालकर उसका काढ़ा बनाकर नहाने से बहुत लाभदायक होता है| नीम की कुपले (कलसी ) 10 दिनों तक प्रतिदिन खाया जाए तो पेट में कीड़े की शिकायत नहीं होगी। एक बार एक बीमार व्यक्ति उत्तर भारत से दक्षिण की तरफ जा रहा था, वहा उसे ईमली बराबर खाने को मिल जाते थे, उस व्यक्ति से वैद्य ने कहा था कि जहां भी नीम का वृक्ष मिले वहा पर बैठकर आराम करना कम से कम 12 घन्टे तक, फिर चलना उसने वैसे ही किया जब वह घर पंहुचा तो पूरी तरह से स्वस्थ हो चुका था तो यह है नीम के औषधीय गुण की कहानी। सुनील कुमार@9308571702.

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आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में: गर्मी से बचने के फल

Dr Deepak Acharya from Ahmedabad today is telling us about fruits which are beneficial for saving us from heat wave in this summer. He says carbonated cold drinks give us some temporary relief but they are harmful in long run. He suggests to take juice of Bel (wood apple) in summer. Papaya is another very useful fruit to be taken in summer. Another useful fruit for summer is Jamun ( Java plum or blackberry or Syzygium cumini). For more you can reach Dr Deepak Acharya@7926467407

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आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में: काली मिर्च के औषधीय गुण

Black Pepper (Piper nigrum): In stomach pain take seeds of Black pepper and mix with Ginger and Garlic to make a paste and use. It For indigestion take black pepper in butter milk with salt. If you are not feeling hungry take black pepper powder with honey it will help. In fever, cough, cold mix black pepper powder in tea and hot drinking water. In tooth ache rinse with brew of black pepper. For removing cough take it with honey and celery. For skin disease apply it with ghee. Dr Acharya@9824050784

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आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : बेल और पाताल कुम्हड़ा के औषधीय उपयोग-

ग्राम पंचायत जमुड़ी के ग्राम-बैरीबांध जिला-अनुपपुर, (मध्यप्रदेश) से बाबूलाल नेटी के साथ है आयुर्वेद के वैद्य कमला सिंह उइके है जो गर्मी में होने वाली बीमारियों से बचने के नुस्खे बता रहे है, शरद गर्मी जिस किसी को भी हो, वह बेल का फल या पत्ते हो अगर फल नही है तो पत्ते ले उसे पीसकर छानकर शक्कर डालकर १ लीटर पानी में भरकर रखिये और सुबह, दोपहर, शाम कभी भी पीजिए कोई नुकसान नही है फ़ायदा होगा. दूसरा पाताल कुम्हड़ा जंगल में पाया जाता है, इसे मिश्री, मुसरमुंडी, कालीमिर्च ५ दाना साथ में मिलाकर खाने से स्फूर्तिदायक, ताकतवर बनाता है जिस किसी को भी पेशाब के साथ जलन हो खून आता हो वह व्यक्ति दिन में दो बार ले सुबह शाम उसके लिए लाभकारी रहेगा। बाबूलाल नेटी@7354844617.

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आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : जापानी इंसेफेलाइटिस के बारे में जानकारी –

जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से स्वास्थ्य कार्यकर्ता मनोज जापानी इंसेफेलाइटिस बीमारी
के बारे में जानकारी दे रहे है. पानी व गंदगी वाली जगह पर मच्छर पनपते हैं जिससे यह रोग होता है अगर तेज़ बुखार के साथ मुंह से झाग आए, बेहोश हो जाए और अगर चिमटी काटने से शरीर में कोई हलचल नही हो तो इससे पता चल जाता है कि रोगी जापानी बुखार से प्रभावित है. सबसे पहले रोगी को छायादार, हवा वाली जगह पर ले जाएं। शरीर से कपडे उतारकर सूती कपडे को गीला कर शरीर पर लगाये जिससे बुखार में आराम मिलता है. बुखार थोड़ा उतरते ही
तुरन्त मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र ले जाऐ जहां इसका इजाज़ मुफ्त में किया जाता है| सुनील कुमार@9308571702

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