Category Archives: Registered – पंजीकृत

प्राकृतिक डिओडोरेंट / Natural Deodorant

यह सन्देश डॉ. दीपक आचार्य का अभूमका हर्बल्स अहमदाबाद से है. इस सन्देश में दीपकजी हमें प्राकृतिक डिओडोरेंट बनाने की विधि बता रहे है. इनका कहना है की इस प्राकृतिक डिओरेंडोट को बनाने के लिए एक तिहाई कप सिरका (एसिटिक एसिड) और इतनी ही मात्रा में पानी लेकर इन दोनों को आपस में मिला ले. अब एक अलग बर्तन में 3 लौंग, धनिया, पुदीने की पत्तियाँ, 4-5 नीलगिरी की पत्तियाँ और थोड़ी सी दालचीनी को पहले से बनाये सिरके और पानी के गर्म घोल में डाल दे और थोड़ी देर बाद इसे छान ले. बस बन गया आपका प्राकृतिक डिओडोरेंट इसे किसी बोतल में भरकर फ्रिज में रखा जा सकता है. इसे नहाने के बाद थोडा सा लेकर बाँहों और ज्यादा पसीना आने वाले स्थानों पर लगाया जा सकता है. इससे पसीना आना तो कम होता ही है साथ ही यह दुर्गन्ध का नाश भी करता है. प्राकृतिक रूप से बने होने के कारण यह खतरनाक और केमिकल युक्त डिओरेंडोट से कई गुना बेहतर है..दीपकजी का संपर्क है 9824050784

This is a message of Dr. Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message he is telling us method to prepare home made natural Deodorant. He says boil one third cup of Vinegar (Acetic acid) and water in equal quantity then add 3 cloves, coriander & mint leaves, little cinnamon and 4-5 eucalyptus leaves. After some time filter this preparation and fill it in the bottle & keep in refrigerator. Now your deodorant is ready. After bathing apply this natural deodorant on under arm and sweating parts of body to get rid of odor. contact of Deepak Acharya is 9824050784

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अडूसा के औषधीय गुण / Medicinal Properties of Adhatoda vasica

यह संदेश लोमेश कुमार बच का लिमरू वन औषधालय, जिला कोरबा, छतीसगढ़ से है. इस संदेश में वह अडूसा जिसे वासा भी कहा जाता है. इसका पौधा 4 से 10 फीट तक ऊँचा होता है और इसके पत्ते 3 से 8 इंच लम्बे होते है. इसके फूल सफ़ेद रंग के होते है. यह दो प्रकार का होता है श्वेत वासा और श्याम वासा पर श्वेत वासा ही बहुतायत में पाया जाता है…वासा का गुणधर्म उत्तम उत्तेजक, कफ निसारक, आक्षेपकहर है इसका फूल उष्ण, कडवा, ज्वराग्न और रक्त की उष्णता और मांसपेशियों के खिचाव को कम करने वाला होता है.

इसके औषधीय उपयोग हेतु इस पौधे के विभिन्न भागो की अनुशंसित मात्रा इस प्रकार है:

1. पत्र का स्वरस (पत्तियों का अर्क) 1-2 तोला

2. मूल तत्व चूर्ण (जड़ों का चूर्ण) 2-5 रत्ती

3. मूल क्वाथ को 4-8 तोला

इसका प्रयोग कई रोगों के निदान के लिए किया जाता है. उनमे से नया पुराना फुस्फुस रोग, जिसे (ब्रोंकाइटिस) भी कहते है, के उपचार के लिए इसके पत्ते, कंठकारी (जिसे भट्टकटैया भी कहते है), नागरमोथा और सौंठ को समभाग मिलाकर काढ़ा बनाकर 4-8 तोला तक दिया जाता है.

रक्तपित्त, में जिसमे नाक से या खांसी से खून आता है, के उपचार के लिए इसकी पत्तियों का रस शहद में मिलाकर दिया जाता है. बच्चों की कुकूर खांसी में इसकी जड़ का काढ़ा बनाकर देने से कुकूर खांसी और ज्वर में आराम मिलता है. शरीर पर फोड़ा होने पर वाचा की पत्तियों को पानी में पीसकर उसकी लुगदी फोड़े पर लगाने से फोड़ा बैठ जाता है. हाथ-पैरों की ऐंठन और वेदना होने पर वाचा के पत्तियों का रस 500 मी.ली और तिल का तेल 250 मी.ली को पकाकर तेलपाक होने पर इस तेल की मालिश करने से लाभ होता है.

लोमेशजी से संपर्क 9753705914 पर कर सकते है.

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पुनर्नवा की औषधीय उपयोगिता / Medicinal usage of Punarnava (Boerhavia diffusa)

यह संदेश निर्मल अवस्थी का वार्ड क्रमांक 4, कस्तूरबा नगर, बिलासपुर से है…अपने इस संदेश में अवस्थीजी हमें दिव्य औषधि पुनर्नवा के चिकित्सीय गुणों के बारे में बता रहे है…इनका कहना है की पुनर्नवा पगडंडियों के किनारे, बाड़ो में, खेतों की मेड़ो पर आसानी से देखी जा सकती है…इसका पंचांग शीत ऋतु के अंतिम चरण में सुखाकर बंद डिब्बों में रखना चाहिये… इस प्रकार रखने से यह 6 माह से 1 वर्ष तक गुणकारी रहती है… इनका कहना है की पुनर्नवा के उपयोग से मूत्र की मात्रा में पर्याप्त वृद्धी होती है…हृदय का कार्य व्यवस्थित हो जाता है तथा धमनियों में रक्त संचार बढ़ जाता है…जिसके परिणाम स्वरूप शोथ दूर हो जाता है और शरीर को बल मिलता है. पुनर्नवा का 25-40 ग्राम पंचांग 8 गुना जल में मिलाकर पकाएं जब वह चौथाई शेष रह जाये तो उसे छानकर रख लें. इसका सुबह और शाम 10 मी.ली मात्रा में 1 ग्राम सौंठ का चूर्ण मिलाकर सेवन करें…पुनर्नवा बाल-शरबत -पुनर्नवा की पत्तियों का रस 100 मी.ली., मिश्री चूर्ण 200 ग्राम तथा छोटी पीपली का चूर्ण 12 ग्राम मिलाकर पकाएं जब गाढ़ी चाशनी बन जाये तो छानकर रख लें..मात्रा 4-8 बूंद उम्रनुसार बच्चों को दिन में 4-5 बार चटायें. यह बच्चों को होने वाले अनेक प्रकार के रोगों जैसे खांसी, श्वास, दमा, लार बहाना, यकृत विकार, सर्दी-जुकाम, वमन तथा हरे-पीले दस्त के उपचार में लाभदायक है…निर्मल अवस्थीजी का संपर्क 9685441912

This is a message of Nirmal Awasthi from ward no. 4, Kasturba Nagar, Bilaspur..In this message Nirmalji is describing us medicinal usages of Punarnava (Boerhavia diffusa).. Punarnava is a herb & commonly found in farms, rural trails & at road sides. Punarnava enhances the amount of urine discharge…organised  heart functioning..increases blood flow in arteries which results inflammation goes away… Boil 25-40 grams Punarnava panchang (Leaves, flower, bark, seeds & root) in eight times more water than the weight of panchang.. when quarter water remains filter this preparation and take this in 10 ml in quantity after adding 1 gram dry ginger powder twice a day. To prepare Punarnava syrup for children take 100 ml juice of Punarnava leaves, 200 gram sugar candy (Mishri) and 12 gram (Choti Pipli) powder and boil until this combination converts into paste after filtering give 4-5 drops according to child’s age…Contact of Nirmal Kumar Awasthi is 9685441912

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अडूसा के औषधीय गुण / Medicinal properties of Adusaa

यह संदेश निर्मल अवस्थी का वार्ड क्रमांक 4, कस्तूरबा नगर, बिलासपुर से है…इस संदेश में निर्मलजी हमें अडूसे की चिकित्सीय उपयोगिता के विषय में बता रहे है…इसे वासा के नाम से भी जाना जाता है…इनका कहना है की खांसी होने पर अडूसे की पत्तियों का रस 10 ग्राम और शहद 5 ग्राम प्रातः और शाम दोनों समय सेवन करना चाहिए और ताज़ी पत्तियों के न मिलने की दशा में छायादार जगह पर सुखाये अडूसे के फूलों का चूर्ण का भी उपयोग कर सकते है…बच्चों को जो काली खांसी होती है जिसे कुकुर खांसी भी कहते है के होने पर…वासा की जड़ का काढ़ा डेढ़ से दो चम्मच दिन में दो से तीन बार बच्चों के देने से लाभ होता है…काढ़ा बनाने के लिए अडूसे की जड़ को पानी में उबलना चाहिए जब पानी आधा रह जाये उसे है काढ़ा कहते है…वासा की जड़ का शरबत बनाकर विधिपूर्वक उपयोग करने से पुरानी से पुरानी खांसी और क्षय रोग तक नष्ट होता है…वासा के फूलों को दूगनी मात्रा में मिश्री मिलाकर मिट्टी या कांच के पात्र में रखने से गुलकंद तैयार हो जाता है…इस गुलकंद की 10 ग्राम मात्रा का नित्य सेवन करने से वात / श्वांस / पुराना जुकाम / रक्त-पित्त के रोगियों को लाभ मिलता है… यह ज्वरनाशक और रक्तशोधक है… इसके अतिरिक्त यह रक्तस्राव को रोकने वाला है…इसका प्रयोग शरीर में धातु निर्माण क्रिया को बढ़ाने के लिए कमजोरी दूर करने वाले टॉनिक के रूप में भी होता है… निर्मलजी का संपर्क है 9685441912

This is a message of Nirmal Awasthi from ward no. 4, Kasturba Nagar, Bilaspur… In this message he is describing us the medicinal usages of Justicia adhatoda, commonly known as “Adusaa” or “Vasa” in Hindi language…He said for curing cough take 10 gram juice of Adusaa leaves, add 5 gram Honey in it and take this morning & evening… In case of unavailability of fresh leaves of Adusaa, shadow dry flowers of Adusaa could be taken…In case of Whooping cough this is commonly happens is children give them decoction of Adusaa root…Procedure to make decoction is take root of Adusaa and boil it with water & when water remains half of its actual quantity is known as decoction…Store flowers of Adusaa in Clay or Glass jar add sugar candy (Mishri) in just double quantity of flowers…few days later “Gulkand” become formed…This is a tonic & could be taken in weakness & to improve vitality…Nirmalji’s at 9685441912

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कील-मुहांसों का उपचार / Treatment of Acne & Pimples

यह संदेश सरोजनी गोयल का बाल्को कोरबा, छत्तीसगढ़ से है इस संदेश में वह कील और मुहांसो के उपचार के बारे में बता रहीं है…लाल चन्दन और जायफल को पानी में घिसकर चेहरे पर लगाने से मुहांसे नष्ट होते है…चौथाई नीबू का रस थोड़ी सी हल्दी और चुटकी भर नमक मिलाकर थोड़े से गुनगुने पानी में मिलाकर चेहरे पर लगाकर थोड़ी देर रहने दे फिर ठन्डे पानी से धो ले…इसे सप्ताह में 2 बार दोहराए लाभ होगा….नीम की जड़ को पानी में घिसकर चेहरे पर लगाये शीघ्र लाभ होगा…हल्दी और बेसन घोलकर नहाने से पहले चेहरे पर लगाने से लाभ होगा…

नीबू का रस शहद में मिलाकर चेहरे पर लगाने से झाइयाँ और झुर्रियां दूर होंगी…30 ग्राम पिसा अजवाइन 30 ग्राम दही में मिलाकर चेहरे पर रात को सोते समय लगाये और सुबह ठन्डे पाने से धो ले लाभ होगा…मसूर को नीबू के रस के साथ पीसकर चेहरे पर लगाने से लाभ होगा…त्वचा की रंगत बरकरार रखने के लिए जामुन और आप के पत्तों को हल्दी और गुड में लुगदी बनाकर त्वचा पर लेप करें इससे त्वचा कांतिमय हो जाएगी…. बरगद का दूध ऊँगली से चेहरे पर मलने से चेहरे का रंग निखर आता है…थोडा सा दूध चुटकी भर नमक मिलाकर रुई से चेहरे पर मलने से कांति बढती है…सरोजनीजी का संपर्क है: 9165058483

This is a message of Sarojini Goyal from Balko, Korba, Chhatisgarh…In this message she is telling us traditional treatment of Acne & Pimples…She said rub Red Sandalwood (Rakt Chandan) & Nutmeg (Jaayfal) on rough stone with little water until smooth paste is formed and apply this paste on face to cure pimples… Mix quarter lemon juice, little bit turmeric powder & one pinch common salt to small amount of lukewarm water & apply this on face & after few minutes wash your face with cold water…repeat this procedure twice a week…Dilute turmeric powder & gram floor in water and apply this on your face… By applying mixed combination of lemon juice & honey can reduce wrinkles…Apply Banyan tree milk on face with the help of finger tips this can useful for enhancing glossiness & shining on face…Sarojaniji’s at 9165058483

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मुनक्का के औषधीय गुण / Medicinal Properties of Dry Grapes

यह संदेश डॉएचडीगाँधी का स्वास्थय स्वर से है आज यह हमें सर्दी की दिनों में मुनक्का के प्रयोग के बारे में बता रहे हैइनका कहना है की मुनक्का का उपयोग सर्दीजुकामचर्मरोगकब्ज और पौष्टिकता के लिहाज से किया जाता हैरात भर पानी में भीगी 10-12 मुनक्का सुबह बीज निकालकर चबाचबा के खाने से खून की कमी दूर होती है साथ ही चर्मरोग और नकसीर में भी लाभ मिलता हैएक पाव दूध में 10 मुनक्का उबाल लेउसमे एक चम्मच शुद्ध घी और स्वादानुसार मिश्री मिलाकर सुबह खाली पेट सेवन करने से शारीरिक कमजोरी में लाभ मिलता है…8-10 नग मुनक्का भूनकर उसमे काला नमक मिलाकर खाने से कब्ज में राहत मिलती है… नजलाजुकाम और एलर्जी में4-6 नग मुनक्का और लहसुन भूनकर खाने से लाभ होता है पर इसे खाने के बाद पानी न पियें… जो बच्चे रात को बिस्तर में पेशाब करते है उन्हें 2-3 मुनक्का बीज निकालकर रात को सोने के पहले 21 दिनों तक खिलाने से लाभ मिलता है… डॉएचडीगाँधी का संपर्क है 9424631467

This is a message of Dr. H.D. Gandhi from Swasthya Swara… In this message he is telling about the medicinal usages of Dry Grapes (Munnaka). He said it is very useful for curing cough-cold, skin disease, nosebleed & for nourishing health. To get relief in physical weakness boil 10 nos Dry Grapes in 250 ml milk add 1 tablespoon pure ghee & sugar candy… take this combination empty stomach regularly in morning & this should be continued until winter…By eating overnight soaked 10-12 nos Dry Grapes can be useful for curing skin diseases & can also beneficial for Anemic persons…To get rid of constipation eat 8-10 nos roasted Dry Grapes with rock salt… 4-6 nos Dry Grapes & Garlic could be taken to get relief from cough-cold…Don’t drink water after eating this preparation. 2-3 seedless Dry Grapes could be given at bed time to Nocturnal enuresis suffering children & it should continued for 21 Days…Dr. H. D. Gandhi’s at 9424631467

 

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कपास के पेड़ की उपयोगिता / Importance of Cotton Plant

यह संदेश श्री निर्मल कुमार अवस्थीजी का वार्ड क्रमांक 4, कस्तूरबा नगर, छत्तीसगढ़ से है…आज निर्मलजी हमें कपास के पेड़ की उपयोगिता को वर्णित कर रहे है…उनका कहना है की ईश्वर ने मानव को स्वास्थ्य रखने के लिए आलग -अलग प्रकार की वनस्पतियों की उत्त्पति की है…ईश्वर ने कुछ ऐसी वनस्पतियाँ बनाई है जिस पर पुष्प लगे बिना फल प्राप्त, तो कुछ ऐसी भी जिस पर पुष्प तो लगते है  पर फल नहीं आते है…पुष्पों में ऐसा प्रकृति प्रद्दत दिव्य गुण अन्तर्निहित रहता है जिसके यथा-विधि उपयोग से हम अपना जीवन सुखी बना सकते है…निर्मलजी, कपास के पुष्पों और बीजों के चिकित्सीय गुणों के विषय में बता रहे है…इस वनस्पति पर आधारित  नुस्खे विभिन्न प्रकार के चर्म-रोगों, विषैले जंतुओं के काटने, और गर्भाशय से संबंधित चिकित्सीय निदानों पर प्रमुखता से है.. यह मुत्रक, निष्कारक और कान की सभी प्रकार की तकलीफों को दूर करने वाले होते है…इसके बीज (बिनौले) दूध बनाने वाले होते है… कपास की जड़ को पीसकर चावल  के पानी के साथ पिलाने पर श्वेत प्रदर में लाभ होता है… इसके बिनौले की मींगी और सौंठ को जल के साथ पीसकर अंडकोष पर लगाने से अंडकोष वृद्धी रूकती है….कपास के पुष्प का शरबत पिलाने से पागलपन में लाभ होता है और चित्त प्रसन्न होता है….बिनौले को पानी में औटाकर उसके पानी से कुल्ले करने से दन्त पीड़ा कम होती है…कपास की जड़ का काढ़ा पिलाने से पेशाब करने में होने वाली जलन मिटती है और मुत्रदाह में लाभ होता है…इसके बिनौले की मींगी को पानी के साथ पीसकर जलने वाले स्थान पर लगाने से आग की जलन कम होती है…खुनी बवासीर में इसके केसर को शक्कर और मक्खन के साथ देने से लाभ होता है…. रक्त प्रदर और रक्तार्श में कमल का केसर, मुल्तानी मिट्टी और शक्कर मिलाकर फांकने से लाभ होता है…कमलडंडी और नागकेसर को पीसकर दूध के साथ पिलाने पर दूसरे महीने में होने वाला गर्भस्राव (गर्भपात) मिट जाता है… धातु रोग में कपास के बीजों की मींगी को पीसकर दूध के साथ पिलाने से लाभ होता है….श्री निर्मल अवस्थीजी का संपर्क है: 09685441912

 This message is recorded by Shri Nirmal Kumar Awasthi from ward No. 2, Kasturba Nagar , Chattisgarh …..In this message he is telling us about the medicinal properties of flowers & seeds of Cotton plant. Various parts of this plant can be used to cure different diseases….Remedy for Leucorrhoea is first grind Cotton plant add some rice water in it. This can be used as a tonic for Leucorrhoea patients. Boil cotton seed in water & this water can me used as mouthwash to strengthen teeth & gums…Squash of flowers of Cotton plant can useful in madness..For more information Nirmal Awasthi is at 09685441912

 

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घृतकुमारी के चिकित्सीय गुण / Medicinal Properties of Aloe vera

यह सन्देश लोमेश कुमार बच का जिला कोरबा, छत्तीसगढ़ से है…वह आज हमें एक बहुउपयोगी वनस्पति के औषधीय गुणों के बारे में बता रहे है जिसे घृतकुमारी / ग्वारपाठा / कुमारिका आदि नामो से जाना जाता है…इसका वैज्ञानिक नाम है एलो वेरा इनका कहना है की यह सम्पूर्ण भारतवर्ष में पाया जाता है… यह वनस्पति त्रिदोषनाशक है, सरदर्द होने पर ग्वारपाठे के रस में थोड़ी दारुहल्दी मिलाकर सहने योग्य गरम करके दर्द वाले स्थान पर बांधने से आराम मिलता है….फोड़े-फुंसी या घाव होने के दशा में ग्वारपाठे का गुदा सहने योग्य गर्म कर बाँध देने और उसे थोड़े-थोड़े  अंतराल में बदलते रहने से फोड़ा ठीक होने लगता है और यदि फोड़ा पकने लगा हो तो यह जल्दी पककर फूट जाता है…फोड़े के फूटने पर उसपर ग्वारपाठे के गुदे में हल्दी मिलाकर उसपर बांध देना चाहिए…इससे से रक्त का शोधन होकर शीघ्र घाव भर जाता है…इसी प्रकार अगर किसी उभरते हुए फोड़े को पकाना हो तो ग्वारपाठे के गुदे में थोडा सा सज्जीखार जिसे पापड़ खार भी कहते है उसे और हल्दी को मिलाकर सूजन वाले स्थान पर बांध देने से फोड़ा जल्दी पककर फूट जाता है…

This is a message of Lomesh Kumar Bach from Dist. Korba, Chhatisgarh…Lomeshji telling us about medicinal usages of Aloe vera. It is commonly found across India & mainly known as “Gwarpatha” in Hindi…In case of headache take extract of Aloe vera (Juice) and mix small amount of Berberis aristata (Daru Haldi) in it and bearable warm this combination and tie it on the place of pain. To cure Boil warm the pulp of Aloe vera  and tie it on the boil and repeat this procedure some times. By doing so the pus of boil can be washed out and wound can recover soon…Contact of Lomesh Kumar Bach is:9753705914

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अस्थमा की पारंपरिक चिकित्सा / Traditional Treatment of Asthma

यह संदेश अवधेश कुमार कश्यप का बिलासपुर छत्तीसगढ़ से है… इस संदेश में अवधेशजी हमें अस्थमा जिसे दमा भी कहते है उसके पारंपरिक इलाज और इसकी औषधि निर्माण के बारे में बता रहे है…इनका कहना है की भट्टकटैया के बारे में काफी लोग जानते है अस्थमा होने पर भट्टकटैया के 3-5 किलो पके फल इकट्ठे कर उसके गुदे जिसमे बीज रहते है उसे निकाल दे…फिर उस गुदारहित छिलकों को सरसों के तेल में कालापन आने तक तल ले…अब उन छिलकों को तेल से निकालकर उसमे सैंधा नमक या गुड मिलाकर किसे डब्बे में रख ले… यह औषधि तैयार है…इस सुबह नाश्ते के बाद एक चम्मच और शाम को भोजन उपरांत एक चम्मच लें….दमे के रोगियों को लाभ होगा…अवधेशजी का संपर्क है 7587038414

This is a message of Awdhesh Kumar Kashyap from Dist. Bilaspur, Chhatisgarh…In this message Awdheshji sharing us the traditional medicine of Asthma & its preparation. He said Solatium indicum (Bhatkataiya) is a well known herb..Procedure to prepare traditional medicine from Solatium indicum is, first collect 3-5 kg ripen fruit of this plant and remove its pulp & seeds and fry remaining skin in Mustard oil until its become dark then mix some rock salt or Jaggery and keep this preparation in the jar. Now medicine is ready to use. Take this one tablespoon medicine after breakfast & one tablespoon after dinner…This medicine is very useful for Asthma patient…Contact of Awdheshji is 7587038414

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अस्थमा / दमे का परंपरागत इलाज / Traditional Treatment Of Asthma

इस सन्देश में डॉ. एच.डी गाँधी, डॉविजय चौरसिया जो कि गढ़ासराईजिला डिंडोरी मध्यप्रदेश से है का साक्षात्कार कर रहे है…. डॉचौरसिया पिछले 40 वर्षों से बैगा जनजाति की चिकित्सा पद्धति पर कार्य कर रहे है और इस विषय पर उन्होंने पुस्तकें भी लिखी हैइनका यह अनुभव रहा है की बैगा जनजाति के लोग वास्तव में बैगा वैद्य है जो अधिकतर मध्यप्रदेश के मंडला और डिंडोरी क्षेत्रों में बसते हैइनका मानना है भारतवर्ष में जड़ीबूटियों के मामलों में दो क्षेत्र ही अधिक प्रसिद्ध है एक हिमालय और दूसरा मध्यप्रदेश और छतीसगढ़एशिया महाद्वीप की पुरानी जन जातियों में से एक बैगा जनजाति इन्ही क्षेत्रों में सदियों से निवास करती आ रही हैती है… बैगा जनजाति के लोग सदियों से जंगल में मिलने वाली जड़ीबूटियों से इलाज करते आये है.. और यह अपने आप को सुषेण वैद्य के वंशज मानते है… यह बैगा जनजाति के लोग अस्थमा”  या दमा” जिसके बारे में कहा जाता है की दमा दम के साथ ही जाता है इसका इलाज बड़ी विश्वसनियता से जड़ी बूटी के माध्यम के से करते है… बैगा जनजाति की लोग इसके इलाज के लिए सफ़ेद अकौआ जिसे सफ़ेद मदार भी कहा जाता है इसके जड़काली हल्दीतुलसी की जड़ और अजवाइन का मिश्रण देते है जिससे पुराने से पुराना दमाश्वास एलर्जिक अस्थमा हमेशा के लिए समाप्त हो जाते है… डॉ चौरसिया का कहना है की इन्होने अभी तक अस्थमा की इस दवा से भारतवर्ष में 8-9 हजार लोगो का इलाज किया है और उन मरीजों के नाम और संपर्क नंबर भी इनके पास हैभारत के लगभग हर क्षेत्र में उनकी दवा का उपयोग हो चूका है और इसके लिए कोई विज्ञापन नहीं दिया गया सिर्फ मौखिक रूप से सुनकर लोग उनके पास इलाज करवाने के लिए आते है….

In this message Dr. Gandhi is talking to Dr. Vijaya Chourasiya of village Garhsarai, Distt. Dindori who tells us about traditional treatment of Asthma as practiced by primitive Baiga Tribe of Dist. Mandla in Chhatisgarh State. Dr. Chourasiya has been working for the last 40 years in this traditional method and has written many books on Baiga Tribe and their tribal treatment methods. According to him the Baiga Tribe is actually the Baiga Vaids who have settled in the Dindori and Mandla region of Madhya Pradesh. As per him the Himalayan range and the region of Madhya Pradesh & Chattisgarh are the two prime areas where there is abundance of herbal plants and roots. Baiga’s traditional healing of Asthma is by combination of Calotropis Gigantea (Madar), Black Turmeric, Basil plant root & Carom seeds and has been successfully used to treat oldest of ailments. Dr. Chourasiya is treating  Asthma for many year and about 8-9 thousand patients have benefited by his medicine. He also has names & contact numbers of treated patients. People have been coming to him purely on word of mouth publicity…

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