Category Archives: Nirmal kumar awasthi – निर्मल कुमार अवस्थी

पुनर्नवा की औषधीय उपयोगिता / Medicinal usage of Punarnava (Boerhavia diffusa)

यह संदेश निर्मल अवस्थी का वार्ड क्रमांक 4, कस्तूरबा नगर, बिलासपुर से है…अपने इस संदेश में अवस्थीजी हमें दिव्य औषधि पुनर्नवा के चिकित्सीय गुणों के बारे में बता रहे है…इनका कहना है की पुनर्नवा पगडंडियों के किनारे, बाड़ो में, खेतों की मेड़ो पर आसानी से देखी जा सकती है…इसका पंचांग शीत ऋतु के अंतिम चरण में सुखाकर बंद डिब्बों में रखना चाहिये… इस प्रकार रखने से यह 6 माह से 1 वर्ष तक गुणकारी रहती है… इनका कहना है की पुनर्नवा के उपयोग से मूत्र की मात्रा में पर्याप्त वृद्धी होती है…हृदय का कार्य व्यवस्थित हो जाता है तथा धमनियों में रक्त संचार बढ़ जाता है…जिसके परिणाम स्वरूप शोथ दूर हो जाता है और शरीर को बल मिलता है. पुनर्नवा का 25-40 ग्राम पंचांग 8 गुना जल में मिलाकर पकाएं जब वह चौथाई शेष रह जाये तो उसे छानकर रख लें. इसका सुबह और शाम 10 मी.ली मात्रा में 1 ग्राम सौंठ का चूर्ण मिलाकर सेवन करें…पुनर्नवा बाल-शरबत -पुनर्नवा की पत्तियों का रस 100 मी.ली., मिश्री चूर्ण 200 ग्राम तथा छोटी पीपली का चूर्ण 12 ग्राम मिलाकर पकाएं जब गाढ़ी चाशनी बन जाये तो छानकर रख लें..मात्रा 4-8 बूंद उम्रनुसार बच्चों को दिन में 4-5 बार चटायें. यह बच्चों को होने वाले अनेक प्रकार के रोगों जैसे खांसी, श्वास, दमा, लार बहाना, यकृत विकार, सर्दी-जुकाम, वमन तथा हरे-पीले दस्त के उपचार में लाभदायक है…निर्मल अवस्थीजी का संपर्क 9685441912

This is a message of Nirmal Awasthi from ward no. 4, Kasturba Nagar, Bilaspur..In this message Nirmalji is describing us medicinal usages of Punarnava (Boerhavia diffusa).. Punarnava is a herb & commonly found in farms, rural trails & at road sides. Punarnava enhances the amount of urine discharge…organised  heart functioning..increases blood flow in arteries which results inflammation goes away… Boil 25-40 grams Punarnava panchang (Leaves, flower, bark, seeds & root) in eight times more water than the weight of panchang.. when quarter water remains filter this preparation and take this in 10 ml in quantity after adding 1 gram dry ginger powder twice a day. To prepare Punarnava syrup for children take 100 ml juice of Punarnava leaves, 200 gram sugar candy (Mishri) and 12 gram (Choti Pipli) powder and boil until this combination converts into paste after filtering give 4-5 drops according to child’s age…Contact of Nirmal Kumar Awasthi is 9685441912

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अडूसा के औषधीय गुण / Medicinal properties of Adusaa

यह संदेश निर्मल अवस्थी का वार्ड क्रमांक 4, कस्तूरबा नगर, बिलासपुर से है…इस संदेश में निर्मलजी हमें अडूसे की चिकित्सीय उपयोगिता के विषय में बता रहे है…इसे वासा के नाम से भी जाना जाता है…इनका कहना है की खांसी होने पर अडूसे की पत्तियों का रस 10 ग्राम और शहद 5 ग्राम प्रातः और शाम दोनों समय सेवन करना चाहिए और ताज़ी पत्तियों के न मिलने की दशा में छायादार जगह पर सुखाये अडूसे के फूलों का चूर्ण का भी उपयोग कर सकते है…बच्चों को जो काली खांसी होती है जिसे कुकुर खांसी भी कहते है के होने पर…वासा की जड़ का काढ़ा डेढ़ से दो चम्मच दिन में दो से तीन बार बच्चों के देने से लाभ होता है…काढ़ा बनाने के लिए अडूसे की जड़ को पानी में उबलना चाहिए जब पानी आधा रह जाये उसे है काढ़ा कहते है…वासा की जड़ का शरबत बनाकर विधिपूर्वक उपयोग करने से पुरानी से पुरानी खांसी और क्षय रोग तक नष्ट होता है…वासा के फूलों को दूगनी मात्रा में मिश्री मिलाकर मिट्टी या कांच के पात्र में रखने से गुलकंद तैयार हो जाता है…इस गुलकंद की 10 ग्राम मात्रा का नित्य सेवन करने से वात / श्वांस / पुराना जुकाम / रक्त-पित्त के रोगियों को लाभ मिलता है… यह ज्वरनाशक और रक्तशोधक है… इसके अतिरिक्त यह रक्तस्राव को रोकने वाला है…इसका प्रयोग शरीर में धातु निर्माण क्रिया को बढ़ाने के लिए कमजोरी दूर करने वाले टॉनिक के रूप में भी होता है… निर्मलजी का संपर्क है 9685441912

This is a message of Nirmal Awasthi from ward no. 4, Kasturba Nagar, Bilaspur… In this message he is describing us the medicinal usages of Justicia adhatoda, commonly known as “Adusaa” or “Vasa” in Hindi language…He said for curing cough take 10 gram juice of Adusaa leaves, add 5 gram Honey in it and take this morning & evening… In case of unavailability of fresh leaves of Adusaa, shadow dry flowers of Adusaa could be taken…In case of Whooping cough this is commonly happens is children give them decoction of Adusaa root…Procedure to make decoction is take root of Adusaa and boil it with water & when water remains half of its actual quantity is known as decoction…Store flowers of Adusaa in Clay or Glass jar add sugar candy (Mishri) in just double quantity of flowers…few days later “Gulkand” become formed…This is a tonic & could be taken in weakness & to improve vitality…Nirmalji’s at 9685441912

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कपास के पेड़ की उपयोगिता / Importance of Cotton Plant

यह संदेश श्री निर्मल कुमार अवस्थीजी का वार्ड क्रमांक 4, कस्तूरबा नगर, छत्तीसगढ़ से है…आज निर्मलजी हमें कपास के पेड़ की उपयोगिता को वर्णित कर रहे है…उनका कहना है की ईश्वर ने मानव को स्वास्थ्य रखने के लिए आलग -अलग प्रकार की वनस्पतियों की उत्त्पति की है…ईश्वर ने कुछ ऐसी वनस्पतियाँ बनाई है जिस पर पुष्प लगे बिना फल प्राप्त, तो कुछ ऐसी भी जिस पर पुष्प तो लगते है  पर फल नहीं आते है…पुष्पों में ऐसा प्रकृति प्रद्दत दिव्य गुण अन्तर्निहित रहता है जिसके यथा-विधि उपयोग से हम अपना जीवन सुखी बना सकते है…निर्मलजी, कपास के पुष्पों और बीजों के चिकित्सीय गुणों के विषय में बता रहे है…इस वनस्पति पर आधारित  नुस्खे विभिन्न प्रकार के चर्म-रोगों, विषैले जंतुओं के काटने, और गर्भाशय से संबंधित चिकित्सीय निदानों पर प्रमुखता से है.. यह मुत्रक, निष्कारक और कान की सभी प्रकार की तकलीफों को दूर करने वाले होते है…इसके बीज (बिनौले) दूध बनाने वाले होते है… कपास की जड़ को पीसकर चावल  के पानी के साथ पिलाने पर श्वेत प्रदर में लाभ होता है… इसके बिनौले की मींगी और सौंठ को जल के साथ पीसकर अंडकोष पर लगाने से अंडकोष वृद्धी रूकती है….कपास के पुष्प का शरबत पिलाने से पागलपन में लाभ होता है और चित्त प्रसन्न होता है….बिनौले को पानी में औटाकर उसके पानी से कुल्ले करने से दन्त पीड़ा कम होती है…कपास की जड़ का काढ़ा पिलाने से पेशाब करने में होने वाली जलन मिटती है और मुत्रदाह में लाभ होता है…इसके बिनौले की मींगी को पानी के साथ पीसकर जलने वाले स्थान पर लगाने से आग की जलन कम होती है…खुनी बवासीर में इसके केसर को शक्कर और मक्खन के साथ देने से लाभ होता है…. रक्त प्रदर और रक्तार्श में कमल का केसर, मुल्तानी मिट्टी और शक्कर मिलाकर फांकने से लाभ होता है…कमलडंडी और नागकेसर को पीसकर दूध के साथ पिलाने पर दूसरे महीने में होने वाला गर्भस्राव (गर्भपात) मिट जाता है… धातु रोग में कपास के बीजों की मींगी को पीसकर दूध के साथ पिलाने से लाभ होता है….श्री निर्मल अवस्थीजी का संपर्क है: 09685441912

 This message is recorded by Shri Nirmal Kumar Awasthi from ward No. 2, Kasturba Nagar , Chattisgarh …..In this message he is telling us about the medicinal properties of flowers & seeds of Cotton plant. Various parts of this plant can be used to cure different diseases….Remedy for Leucorrhoea is first grind Cotton plant add some rice water in it. This can be used as a tonic for Leucorrhoea patients. Boil cotton seed in water & this water can me used as mouthwash to strengthen teeth & gums…Squash of flowers of Cotton plant can useful in madness..For more information Nirmal Awasthi is at 09685441912

 

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मैथी के गुण / Medicinal Properties of Fenugreek

यह संदेश श्री निर्मल कुमार अवस्थीजी का वार्ड क्रमांक 4 कस्तूरबा नगर, छत्तीसगढ़ से है…यह आज मैथी के गुणों के बारे में बता रहें है… इनका कहना है की हमारे आहार में हरी साग-सब्जियों का काफी महत्व है आधुनिक विज्ञान के मतानुसार हरी सब्जियों में क्लोरोफिल नामक तत्व होता है जो जीवाणुओं का नाशक है और यह दाँतों और मसूड़ों में सडन पैदा करनेवाले कीटाणुओं का यह नाश करता है….हरी सब्जियों में प्रोटीन और लौहतत्व भी भरपूर मात्र में होता है जो शरीर में रक्त को बढ़ता है…यह शरीर के क्षार को घटा कर उसका नियमन करता है…हरी सब्जियों में मैथी का प्रयोग भारत के सभी भागों में बहुतायत से किया जाता है…कई लोग इसे सुखाकर कर भी उपयोग में लाते है… मैथी के दानो (बीजों) का प्रयोग प्रायः हर घर में बघार (छौंक) लगाने में होता है…वैसे तो मैथी वर्षभर उगाई जाती है पर विशेषकर मार्गशीर्ष से फागुन माह में ज्यादा उगाई जाती है…कोमल पत्ते वाली मैथी कम कडवी होती है… मैथी की भाजी तीखी, कडवी, रुक्ष, गरम, पित्तवर्धक और भूखवर्धक पचने में हलकी और हृदय को बल प्रदान करने वाली होती है… मैथी के बीजों की अपेक्षा मैथी की भाजी कुछ ठंडी, पचने में आसान, प्रसूता, वायु दोष वालो के लिए उपयोगी है…यह बुखार, अरुचि, उलटी, खांसी,  वातरोग, बवासीर, कृमि तथा क्षय का नाश करने वाली होती है…मैथी पौष्टिक और रक्त को शुद्ध करने वाली है…यह वायुगोला, संधिवात, मधुमेह, प्रमेह और निम्न रक्तचाप के घटाने वाली है… मैथी माता का दूध बढाती है…काम दोष को मिटाती और शरीर को पुष्ट करती है…कब्जियत और बवासीर में मैथी से सब्जी रोज खाने से लाभ मिलता है… जिसे बहुमूत्रता की शिकायत हो उसे 100 मी.ली मैथी के रस में डेढ़ ग्राम कत्था और तीन ग्राम मिश्री मिलकर प्रतिदिन सेवन करना चाहिये… इससे लाभ होगा.. निर्मल अवस्थी का संपर्क है: 9685441912

This is a message from Nirmal Awasthi from ward no. 4, Kasturba Nagar, Chhatisgarh.

In this message Nirmalji is telling us about the medicinal properties of Fenugreek (Trigonella foenum-graecum). He says – As per modern science green vegetables contain an element named “Chlorophyll”  which helps destroy bacterial & fungal infections. Green vegetables are also a very good source of Iron & minerals. Fenugreekin  is an perennial vegetable  and is commonly used in every home throughout India. Fenugreek is used both as dried as well as fresh leaves. The seeds & dried leaves of this vegetable can be used as a condiment in many foods before final serving to give flavor & aroma. This vegetable has a number of health benefits and is used in traditional medicine.

Medicinal Usages:

Fenugreek is very helpful to increase & stimulate lactation for nursing mothers.

It is beneficial for people with diabetes.

It is also helps to relieve cough & pain

Daily use of  100 gram Fenugreek juice with Catechu & sugar can cure frequent urination problem.

It is also helpful for piles patients.

Nirmal Awasthi jis contact number is: 9685441912

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एक्जिमा एवं आधासीसी दर्द का उपचार

यह संदेश श्री. निर्मल कुमार अवस्थीजी का वार्ड क्रमांक 4, कस्तूरबा नगर, छत्तीसगढ़ से है..आप वह एक्जिमा के उपचार के बारे में बता रहें है… उनका कहना है यह दो अचूक नुस्खे है जो एक्जिमा रोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है…

पहला नुस्खा है: जमीन में एक फीट का गड्ढा खोदकर एक चूल्हा बना ले.. उसमे ऊंट की सुखी लेंडी भरकर आग लगा दें…फिर पीतल की एक थाली में पानी भरकर उसे उसी चूल्हे पर  चढ़ा दें..धीरे-धीरे पीतल की थाली के निचले पेंदे में धुंए का काजल इकठ्ठा हो जायेगा…आग के बुझने पर पीतल की उस थाली से काजल को  निकालकर किसी डिबिया में रख ले…इसी काजल को नित्य एक्जिमा पर लगाने से पुराने से पुराना एक्जिमा ठीक हो जाता है…

दूसरा नुस्खा है: करेले के पत्तों का रस निकालकर गरम करें..उसी अनुपात में  तिल का तेल भी गरम करें…फिर दोनों को मिलाकर गरम करें… करेले के रस की मात्रा सुखकर कम हो जाने पर उसे एक शीशी में भरकर रख लें..इसे एक्जिमा पर लगाये अवश्य लाभ होगा….

आधासीसी के दर्द का उपचार: आधासीसी का दर्द काफी पीड़ादायक होता है…इसे ठीक करने के लिए सतावर की ताज़ी जड़ को कूटकर उसका अर्क निकल लें… और  उसी मात्रा में तिल का तेल मिलाकर गर्म करें और जब तेल से सतावर का अर्क सूखकर सिर्फ तेल रह जाये तो उसे छानकर किसी बोतल में भरकर रख लें… इसी तेल को जिस भाग में दर्द हो रहा हो वहां लगायें और सूंघे अवश्य लाभ होगा…यह स्वनुभूत योग है…

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शहद की उपयोगिता

यह संदेश श्री निर्मल अवस्थी का कस्तूरबा नगर, वार्ड क्रमांक 4, बिलासपुर से है…वह आज शहद के बारे में जानकारी दे रहें है…उनका कहना है की शहद आयुर्वेदिक चिकित्सा का महत्वपूर्ण अवयव है इसके बिना आयुर्वेदिक उपचार अधुरा माना गया है…मधुमक्खियाँ विभिन्न प्रकार के फूलों से यह मधुरस एकत्रित करती है…शहद में वह सभी पोषक तत्व पाए जाते है हो शरीर के विकास और पाचन क्रिया को सुचारू रखने के लिए आवश्यक होते है….यह रोगाणुनाशक और उत्तम भोज्य पदार्थ है…आयुर्वेद में माँ के दूध के बाद शहद को ही बच्चे के लिए सर्वाधिक पोषक बताया गया है.. शीतकाल में सोते समय ठन्डे दूध के शहद लेने से यह शरीर को मोटा और सुडौल बनाता है…इसके विपरीत सुबह शौच के पहले एक चम्मच शहद पानी के साथ लेने से यह मोटापा कम करता है…इसके अलावा शहद को हलके गर्म दूध, पानी, दही, दलिया, नीबू के रस, खीर, सलाद में भी अलग-अलग समय प्रयोग किया जाता है…. शहद को पके आम के रस साथ खाने से पीलिया दूर होता है…गोखरू के चूर्ण में शहद मिलकर खाने से पथरी में लाभ होता है…अदरक के रस के साथ शहद को चाटने से यह पेट के लिए उपयोगी है…अडूसे के काढ़े में शहद मिलकर पीने से खांसी में लाभ होता है…बैंगन के भर्ते में शहद मिलाकर खाने से अनिद्रा रोग में फ़ायदा होता है…थकान होने पर शहद के सेवन से ताजगी आती है…शहद को केवड़ा रस व पानी के साथ पीने से मांसपेशियों को ताकत मिलती है… काली खांसी होने पर 2 बादाम के साथ शहद लेने पर लाभ होता है… बवासीर में एक चुटकी त्रिफला चूर्ण के साथ शहद लेने से आराम मिलता है… शरीर के किसी जले हुए भाग पर शहद लगाने से आराम मिलता है… निर्मल अवस्थी का संपर्क है: 09685441912

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अशोक वृक्ष के लाभ

यह संदेश निर्मल अवस्थीजी का कस्तूरबा नगर, वार्ड क्रमांक 4, छत्तीसगढ़ से है…इस संदेश में निर्मलजी अशोक के गुणों के बारे में बता रहे है….इनका कहना है की अशोक का वृक्ष सम्पूर्ण भारतवर्ष में पाया जाता है…लोग इसे घर पर भी लगाते है…आज वह अशोक से सौंदर्यवर्धक उबटन बनाने की विधि बता रहें है…गेहूं का आटा 4 चम्मच, सरसों का तेल 2 चम्मच, अशोक का चूर्ण 4 चम्मच इन तीनो को मिलाकार गाढ़ा घोल बना लें…यदि घोल ज्यादा गाढ़ा बन जाये तो इसमें थोडा दूध या पानी मिलाकर पतला कर ले….इस उबटन के प्रतिदिन चहरे, हाथों और पैरों पर लगाये….इससे रंग साफ़ होगा और तेजस्विता आएगी…..दूसरा उपयोग अशोक की 250 ग्राम छाल का बारीक़ चूर्ण बना ले और इसमें 250 ग्राम मिश्री मिलकर रख ले…यह चूर्ण श्वेत और रक्त प्रदर के लिए बड़ा उपयोगी है….मात्रा 10 ग्राम चूर्ण फांक कर ऊपर से चावल के धोवन का आधा गिलास पानी पी ले…तीसरा उपयोग गर्भस्राव को रोकने के लिए है… उपर लिखी विधि का प्रयोग गर्भधारण के पूर्व और बाद का प्रयोग करना है….साथ में अशोकघनसत्व वटी 2 गोली, प्रवालपिष्टी 2 रत्ती, गिलोय सत्व 4 रत्ती ऐसी मात्रा दिन में तीन बार देते रहें….साथ ही शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दे…इसका प्रयोग कुछ दिनों तक करने से लाभ होता है.. निर्मल अवस्थी का संपर्क है: 09685441912

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पीलिया, हिचकी, प्रदर, रक्तप्रदर, स्वप्नदोष

यह संदेश निर्मल अवस्थीजी का कस्तूरबा नगर, वार्ड क्रमांक 4, बिलासपुर से है…उनका कहना है की पीलिया होने पर आक जिसको मदार भी कहते है की नयी कोमल कोंपले पीसकर मावे में मिलकर और उसने शक्कर मिलकर खिलाकर उपर से दूध पिला दे….यह चमत्कारिक ढंग से पीलिया को समाप्त कर देगी..अगर कोई कसर रह जाये तो इसे दवा लेने के तीसरे दिन भी एक बार दे दे…पीलिया जड़ से समाप्त हो जायेगा…दूसरी औषधि भी पीलिया के लिए ही है…100 ग्राम मुली के रस में 20 ग्राम शक्कर मिलकर पिलाये…गन्ने का रस, टमाटर और पपीते का सेवन करे…अगर किसी को हिचकी आती है तो मयूर पंख का चांदोबा जलाकर बनाई 2 रत्ती भस्म, 2 रत्ती पीपल चूर्ण को शहद में मिलाकर देने से हिचकी दूर होती है….प्रदर रोग में 100 ग्राम धनिया बीज 400 ग्राम पानी में स्टील के बर्तन में उबालें…आधा शेष रहने पर 20 ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें, 3-4 दिनों में लाभ होगा…रक्त प्रदर में 10 ग्राम मुल्तानी मिट्टी 100 ग्राम पानी में रात में भिगो दे, प्रातः इसे छान ले मिट्टी छोड़कर उस पानी को सोना-गेरू एक चम्मच फांक कर यह पानी पी लें…अगर सोना-गेरू नहीं हो फिर भी यह लाभ करेगा….स्वप्नदोष दूर करने के लिए बबूल की कोमल फलियाँ जिसमे बीज न आया हो उसे छाया में सुखा लें.. फिर उसे पीसकर चूर्ण बनाकर उसमे बराबर मात्र में मिश्री मिला लें….उसे सुबह-शाम एक-एक चम्मच लेने से स्वप्नदोष में लाभ होगा….निर्मल अवस्थी का संपर्क है: 09685441912

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दोहों के माध्यम से रोग उपचार की जानकारी

यह संदेश निर्मल कुमार अवस्थी का कस्तूरबा नगर वार्ड क्रमांक 4, बिलासपुर से है…उन्होंने रोगों के उपचार के बारे में बताने के लिए दोहों के रचना की है… वह दोहों के माध्यम से रोग के उपचार की जानकारी दे रहें है उनके दोहें इस प्रकार है:

आँखों लाली बसे और धुंधली हो यदि दृष्टी,
आलू का रस डालिए तो दिखने लगती सृष्टि
 
लेकर के शरणागत को छठे आंवला युक्त,
रोगी हो जाता तुरंत बवासीर से मुक्त
 
प्रातः उठ कर करें जो जन जलपान ,
वे निरोगी रहते सदा , रोगों से अनजान
 
प्रतिदिन हम खाते रहे मात्र एक ही सेव,
बढे हमारा स्वास्थ्य , हो अनुकूल सदैव
 
काढ़ा तुलसी -अडूसे का, कुछ दिन पिये श्रीमान,
सुखी खासी दूर हो, रोगी जाये जान
 
तम्बाकू मत खाइए लीजिये दवा का काम,
तेल निलामल हम बनायें , खुजली काम-तमाम
 
चेहरे में हल्दी सहित, मन चन्दन और दुग्ध,
आकर्षण नित्य प्रति बढे, होगी जन मन मुग्ध
 
दूध पपीता रात पी, केवल चम्मच एक,
कीड़ें निकलेंगे सुबह, यह सलाह है नेक
 
तुलसी पत्ते खाइए थोड़े गुड के संग,
कीड़ें मरें पेट के, हो जाये मन चंग
 
 प्रातः कार्तिक मास में, नित तुलसी जो खाए,
एक वर्ष तक रोग फिर उसको ढूंड न पाए
 
तुलसी रस के साथ में निगले गुड और सौंठ,
होगा दूर अजीर्ण थके न कहते ओंठ
 
तुलसी को शुभदा कहें सदा सयाने लोग,
नारी तुलसी खाए नित रहे प्रजनन अंग निरोग
 

निर्मल अवस्थी का संपर्क है: 09685441912

 

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श्वेत प्रदर की पारंपरिक चिकित्सा

यह संदेश निर्मल कुमार अवस्थी का है जो चांपा छत्तीसगढ़ में पारंपरिक चिकित्सक रमेश कुमार पटेल का साक्षात्कार कर रहे है…रमेश कुमार का कहना है की श्वेत प्रदर होने पर वह अशोक की छाल, सेमल के छाल, अपामार्ग, अश्वगंधा की जड़, सतावर की जड़ का काढ़ा बना कर एक सप्ताह की खुराक देते है… यह खुराक सुबह-शाम को खाना खाने से पहले 10 मी.ली. दी जाती है…. निर्मल कुमार अवस्थी का संपर्क है:09685441912

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