Category Archives: Nirmal kumar awasthi – निर्मल कुमार अवस्थी

काली मिर्च के लाभ

यह संदेश निर्मल कुमार अवस्थी का बिलासपुर से है आज यह हमें काली मिर्च के लाभों के बारे में बता रहे है…इनका कहना है की लाल मिर्च सभी को मना नहीं की जाती बल्कि उन लोगो के लिए निषेध है जो अल्सर, बवासीर, सीने की जलन या अम्लता से पीड़ित होते है…इनका कहना है की काली मिर्च जिन घरों में अधिक उपयोग में लाई जाती है उन लोगो का डॉक्टरों के यहाँ जाना कम ही होता है….काली मिर्च न सिर्फ खाने का स्वाद बढाती है बल्कि यह एक गुणकारी औषधि भी है….काली मिर्च का पाउडर गुड में मिलकर खाने से नजला, जुकाम ठीक हो जाता है….काली मिर्च के पानी से गरारे करने या काली मिर्च के चूर्ण से मंजन करने से दाँतों का दर्द दूर हो जाता है….5-7 काली मिर्चें घी के साथ खाने से जहर का असर कम हो जाता है….काली मिर्च साफ जगह पर घिस कर लगाने से फुंसियाँ, छोटे फोड़े ठीक हो जाते है….कालीमिर्च का चूर्ण सूंघने से खासी के कारण हुआ सर का भारीपन कम हो जाता है….कालीमिर्च को पानी में बताशे के साथ उबालकर उस पानी को पीने से पसीना आता है और सुस्ती दूर हो जाती है….11 काली मिर्चें घिसकर पानी में उबालकर कर पीने से मौसमी बुखार ठीक हो जाता है….कालीमिर्च के सेवन से भूख बढती है…इससे बवासीर में भी लाभ होता है….निर्मल अवस्थी का संपर्क है: 09685441912

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नपुंसकता का उपचार

यह संदेश निर्मल कुमार अवस्थी का बिलासपुर, छत्तीसगढ़ से है…इसमें वह नपुंसकता का उपचार बता रहे है…इनका कहना है की अधिकतर नपुंसकता मानसिक और शारीरिक होती है…. इसके उपचार की औषधि बनाने के के लिए आक के पौधे का दूध इकठ्ठा कर ले फिर लगभग आधा किलो छुआरे लेकर उसे बीच में से काटकर उसकी गुठली निकाल दे और उसमे में आक का दूध भर कर उसे धागे से बांध दे…इसके बाद गेहूं का आटा गूंधकर एक गेंद बनाकर उन दूध भरे छुआरों को उसमे भरकर (जैसे कचौड़ी बनती है) सब तरफ से बंद कर दे…फिर उसे भट्टी में रख दे….जिससे उसकी भस्म बन जाये….यही औषधि है इस भस्म को 2-2 ग्राम सुबह-शाम गाय के दूध के साथ ले….इससे कमजोरी और नपुंसकता धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी…निर्मल अवस्थी का संपर्क है: 09685441912

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हड्डी के टूटने / हड्डी का टेढ़ापन और सड़े-गले घावों का उपचार

यह संदेश निर्मल कुमार अवस्थीजी ने जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़ के वैध मनहरलाल लाठिया का साक्षात्कार लेते समय का है.

मनहरलाल लाठिया का कहना है की वह टूटी हड्डी, हड्डी का टेढ़ापन और सड़े-गले घावों को ठीक करते है…इनका कहना है के वह एक लेप बनाते है और उसे घावों पर लगते है.. जिससे सडा-गला मांस पानी बनकर बह जाता है और नया मांस आने लगता है….यह अभी तक ऐसे लगभग 200 मरीजों को ठीक कर चुके है.. वह मरीजों को हठजोड़ खिलाते है और शंखपुष्पी का चूर्ण देते है….इनके अनुसार इन्होने एक चमत्कारी चूर्ण बनाया है जिसमे काला जीरा, अजमोठ और मैथी होती है…इस चूर्ण को देने से घावों का सड़ना-गलना रुक  जाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है…अगर किसी का ज्यादा खून बहने लगे तो यह उसका भी इलाज करते है…साथ ही यह अनियमित माहवारी भी का भी इलाज करते है….यह इलाज के लिए चूर्ण और अपनी बनाई गोली भी देते है…

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गुलर के गुण

यह सन्देश वैध श्री निर्मल अवस्थी का , वार्ड क्रमांक 4, कस्तूरबा नगर बिलासपुर छत्तीसगढ़ से है:

इस संदेश में निर्मलजी गुलर (Cluster Tree- Ficus racemosa) के गुणों के बारे में बता रहे है…इनका कहना है की ताजा और सूखे फल शहद, शक्कर और मिश्री के साथ खाने से प्रदर रोग मिटता है…गुलर के पके हुए फल सैंधा नमक के साथ खाने से असाध्य प्रमेह रोग भी मिटता है….गुलर के पत्तियों का रस पीने से हृदय, यकृत और वात विकार भी दूर होता है….गुलर के पत्तियों का 6 ग्राम रस प्रतिदिन पीने से रक्त प्रमेह भी मिटता है….गुलर के कच्चे फलों का समभाग शक्कर मिलकर चूर्ण बना कर रख ले इस चूर्ण को प्रतिदिन 5 ग्राम दूध के साथ लेने से शक्ति बढती है याद रखे दूध यदि गाय (Cow Milk) का हो तो ज्यादा लाभदायक है….प्रतिदिन गुलर फल खाने से मधुमेह (Diabetes) मिटता है…गुलर के कच्चे फल का साग खाने से भी मधुमेह मिटता है….सड़े-गले घावों पर गुलर की पत्तियां पीस कार लगाने से काफी आराम मिलता है….गुलर का पानी मिला दूध औटाकर पीने से पुराना बुखार (Old Fever) उतरता है…निर्मलजी का संपर्क है: 09685441912


 

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वातनाशक तेल

यह संदेश वैध श्री निर्मल अवस्थी का , वार्ड क्रमांक 4, कस्तूरबा नगर बिलासपुर छत्तीसगढ़ से है:

निर्मलजी इस संदेश में वातनाशक तेल के बारे में बता रहे है जो घुटने, कमर और शरीर दर्द में लाभदायक है जिसे हम घर में ही बना सकते है….इसके लिए सरसों का तेल (Mustered Oil) 500 ग्राम, केवड़े के बीज 25 ग्राम, धतूरे के बीज 25 ग्राम, तम्बाकू जर्दा (Tobacco Leaves)25 ग्राम और लहसुन की कलियाँ (Garlic) 25 ग्राम, इस सभी सामग्रियों को साफ़ करके सरसों के तेल में डाल कर धीमी आंच पर पकाएं जब सारे घटक (सामग्री) जल जाएँ और तेल 3/4 बच जाये तो इस तेल तो ठंडा कर के छान कर रख ले….यह तेल दर्द वाले स्थान पर लगा कर मालिश करे  और अकौए (Calotropis gigantea) के पत्ते तो थोडा गरम कर उस दर्दवाले स्थान की सिकाई करे….घर पर बने इस तेल के उपयोग से आराम होगा…..जिन भाइयों को गठियावत हो तो वह इस के साथ अश्वगंधा, विधारा और मीठी सुरंजन (Colchicum Luteum) 100-100 ग्राम और सौंठ 25 पीस कर चूर्ण बना ले और इस चूर्ण को सुबह-शाम 5 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ लेने से लाभ होगा….निर्मलजी का संपर्क है: 09685441912

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