Category Archives: Ramfal Patel – रामफल पटेल

कृमि रोग का उपचार / Treatment of Helminthiasis

यह संदेश श्री रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, पाली, जिला कोरबा छत्तीसगढ़ से है… इस संदेश में वह कृमि रोग के उपचार के लिए उपयोगी कुछ नुस्खे बता रहे है..वह इस प्रकार है…

पहला नुस्खा: पीपरामूल का चूर्ण बकरी की दूध के साथ में पीने से कृमि नष्ट होते है…

दूसरा नुस्खा: बासी पानी में 6 ग्राम खुरासानी अजवायन पीसकर उसमे 10 ग्राम पुराना गुड मिला ले, इसे लेने से कृमि नष्ट हो जाते है…

तीसरा नुस्खा: नीम के पत्तों का रस शहद के साथ लेने से कृमि नष्ट हो जाते है…

चौथा नुस्खा: पलाश के पत्तों के रस शहद के साथ लेने से कृमि नष्ट होते है…

पांचवा नुस्खा: सौंठ, कालीमिर्च, पीपरामूल , हरड, बहेड़ा, भटकटैया, नीम की छाल, रिसोद (रसना), बच और खैर का सार इन सब को मिलाकर काढ़ा बना लें… और इसे गोमूत्र में मिलाकर कम से कम 11 दिनों तक पिलाने से कृमि रोग में लाभ मिलता है….

श्री रामफल पटेलजी का संपर्क है: 8815113134

This is a message from Shri. Ramfal Patel from Pragnya Sanjeevani, Pali, Dist. Korba, Chhatisgarh. In this message Ramfalji describing us remedies for intestinal helminths as follows:

First: Combination of Long pepper & Goat milk can destroy stomach worms.

Second: Taking of  Khurasani Ajwain (Hyoscyamus Niger) 6 gms with stale water along with 10 gms  Gud (Jaggery) can  eradicate stomach worms.

Third: Taking  juice of Neem (Azadirachta indica) leaves with Honey can destroy stomach worms.

Forth: Taking juice of Palash (Butea monosperma) leaves with Honey can also destroy stomach worms.

Fifth: Mix & grind Ginger, Black pepper, Long pepper, Harad (Terminalia chebula), Baheda (Terminalia Belerica), Bark of Neem (Azadirachta indica), Bhatkattiya (Solanum virginianum), Bach (Acorus calamus), Khier (Catechu) &  Resada and pour some water and boil until syrup is formed. By taking this syrup with cow urine is beneficial for removing stomach worm.

You can reached Ramfalji on 8815113134

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पलाश के पारंपरिक औषधीय गुण / Traditional medicinal properties of Palash

यह सन्देश रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, नया बस स्टैंड पाली, कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामफलजी हमें पलाश की पारंपरिक उपयोगिता के बारे में बता रहे है. पलाश को ढाक, टेसू आदि नामो से भी जाना जाता है. इनका कहना है की पलाश के वृक्ष की पत्तियाँ, छाल, फुल, बीज और गोंद काम में लायी जाती है. मूत्र अवरोध होने पर इसके पुष्पों को पीसकर हल्का गर्म करके इसे रोगी की नाभि के निचले भाग में बांधते है. ऐसा करने से मूत्र खुलकर आता है और मूत्र विकार में लाभ मिलता है. इसके पत्तों को गर्म करके दर्द और सूजन वाले स्थानों पर बांधने से लाभ मिलता है. इस वृक्ष की छाल के क्वाथ से घाव, अर्श या योनि स्राव में संबंधित अंगो को धोने से लाभ मिलता है. चर्म रोग में इसके बीजों पीसकर इसका लेप करने से लाभ होता है. कृमि होने पर इसके बीजों को पीसकर 3-6 ग्राम की मात्रा लगातार तीन दिनों तक लें और चौथे दिन प्रातः थोडा सा एरंड का तेल पिलायें. ऐसा करने से पेट के कृमि मर कर निकल जाते है. रामफल पटेल का संपर्क है 8815113134

This is a message of Ramfal Patel from Pragya Sanjeevani, Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message he is describing us traditional uses of Palash. In English this plant is known as Flame of the Forest, Bastard Teak & Parrot Tree. He says seed, flowers, bark, leaves & resin of this tree is useful. Make paste of Palash flowers and after little warm up strapping this paste at the bottom of navel is useful in urinary obstruction. In case of swelling & pain tying leaves of Palash after warm up on affected area is useful. In case of wounds, hemorrhoids & vaginal secretions washing affected parts by using decoction of Palash bark is beneficial. To get rid of stomach worms taking Palash seeds powder in 3-6 gram quantity twice a day consecutively for 3 days & at fourth day’s morning give little caster oil to the patient to drink. It is useful for removing stomach worms with stool. Ramfal Patel’s at 8815113134

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अपामार्ग के गुण / Properties of Apamarg

यह सन्देश रामफल पटेल का नया बस स्टैंड, पाली, कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामफलजी हमें अपामार्ग जिसे चिरचिटा और लट्ठजीरा के नाम से भी जाना जाता है. इनका कहना है यह प्रायः कफ और वात दोषों के उपचार में प्रयुक्त होता है. दर्द और सूजन में इसका लेप किया जाता है. नेत्र रोगों में इसकी जड़ को घिसकर, शहद में मिलाकर इसका अंजन (काजल) लगाते है. घावों पर इसका स्वरस लगाने से घाव जल्दी ठीक होता है. काफ और श्वांस रोगों में इसका क्षार देने से कफ निकल जाता है. चर्मरोगों में इसकी जड़ को पीसकर इसका लेप लगाने से लाभ मिलता है. पेट में कृमि होने पर इसका स्वरस देने से कृमि नष्ट होते है. हड्डी टूटने से होने वाले दर्द की दशा में इससे सिकाई और इसकी पुल्टिस बांधने से आराम मिलता है. दंतरोग में इसकी टहनी की दातुन करने से लाभ मिलता है. अगर दांत हिल रहा हो तो इसकी पंचांग (पत्तियाँ, छाल, फूल, बीज और जड़) की भस्म बनाकर उससे मंजन करने से फ़ायदा होता है. अगर किसी को भस्मक रोग (ज्यादा भूख लगना) हो तो उसे इसकी बीजों की खीर बनाकर खिलने से लाभ मिलता है. रामफल पटेल का संपर्क है  8815113134

This is a message of Ramfal Patel from Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message he is telling use traditional medicinal uses of Prickly chaff flower well known as Apamarg in Hindi. He say’s Apamarg is often used for the treatment of Cough & Gastric problems. It is also useful in curing pain & inflammation. In eye disease applying mixture of Apamarg’s root paste & Honey is useful. Applying juice of Apamarg leaves on wounds is beneficial & it is also be taken to get rid of stomach worms. Brushing by using Apamarga is useful in tooth diseases. Brushing teeth by using ash of seeds, leaves, bark, flower & root of Apamarga fixes loose teeth problem. In Bulimia taking Kheer of Apamarg seed is helps to reducing apatite. Ramfal Patel’s at 8815113134

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गिलोय के औषधीय गुण / Medicinal properties of Giloy (Tinospara cordifolia)

यह सन्देश रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, नया बस स्टैंड, पाली, कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामफलजी हमें गिलोय के औषधीय गुणों के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि गिलोय एक दिर्घायु लता है. नीम के वृक्ष पर चढ़ी गिलोय में औषधीय गुण अधिक होते है. गिलोय की लता मांसल होती है. यह त्रिदोषनाशक है और यह शरीर में वात, कफ और पित्त के संतुलन को बनाये रखती है. यह शरीर के लिए अमृत के सामान है इसीलिये इस अमृता भी कहा जाता है. पीलिया होने पर अगर गिलोय की बेल के आधा-आधा इंच के टुकड़े काट कर इसके माला बनाकर रोगी के गले में पहना दी जाये तो धीरे-धीरे पीलिया समाप्त हो जाता है. गिलोय का स्वरस (गिलोय की बेल को पीसकर निकाला गया रस) पीने से पीलिया और बुखार के लाभ मिलता है. गिलोय, शिवनाक (बाजार में उपलब्ध है) और भुई आंवला का बराबर मात्रा में स्वरस 8-10 मी.ली लेने से पीलिया में लाभ मिलता है. खांसी में गिलोय, अदरक और तुलसी का बराबर मात्रा में स्वरस को शहद के साथ लेने से खांसी और फ्लू में आराम मिलता है. रामफल पटेल का संपर्क है 8815113134

This is a message of Ramfal Patel from Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message he is telling us the medicinal properties of Tinospara cordifolia which is known by the common name Giloy. It is a herbaceous vine (Climbing shrub) found throughout India. It is a fleshy vine. It keeps body’s Vaat, Pitt  & Kaf  in balanced order. In case of Jaundice, make a necklace of Giloy vine by cutting it into half inch pieces & worn this to Jaundice patient. It can helps for reducing Jaundice gradually. Giloy juice is useful in Jaundice & fever. In cough juice of Giloy vine, Ginger & Basil in equal parts can be given with honey to get relief from cough & flu. Ramfal Patel’s at 8815113134

 

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हर्रा के औषधीय गुण / Medicinal properties of Harra

यह सन्देश रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, नया बस स्टैंड, पाली, कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामफलजी हमें हर्रा जिसे हरड, हरितिकी, अभया के नामो से भी जाना जाता है. वह आज हर्रा के ऋतुनुसार सेवन और इसकी पारंपरिक औषधीय उपयोगिता के बारे में बता रहें है. इनका कहना है कि दोष को हरने वाले को हर्रा कहते है. इसे ऋतुओं के अनुसार अलग-अलग अनुपान के साथ लिया जाता है. जैसे वर्षा ऋतु में सैंधा नमक के साथ, शरद ऋतु में शक्कर के साथ, हेमंत ऋतु में सौंठ के साथ, वसंत ऋतु में शहद के साथ और ग्रीष्म ऋतु में गुड के साथ लेने से यह और भी प्रभावशाली हो जाता है. खांसी होने पर हर्रा को भूनकर चूसना चाहिए. पाचन के लिए हर्रा को काले नमक के साथ चबा-चबा कर खाने से पाचन तंत्र सक्रिय हो जाता है. दस्त होने पर हर्रा को पानी में उबालकर उसका क्वाथ (हर्रा का उबला पानी) देने से लाभ मिलता है. कब्ज होने पर हर्रा को एरंड के तेल में भूनकर उसका चूर्ण बना लें और इस एक चम्मच चूर्ण को रात को सोते समय लेने से कब्ज में तो लाभ मिलता ही है साथ ही यह बवासीर के रोगियों के लिए भी लाभदायक है. हर्रा का लेप बना कर लगाने से सूजन और दर्द में भी लाभ मिलता है. रामफल पटेल का संपर्क है 8815113134

This is a message of Ramfal Patel from Pragya Sanjeevani, Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message he is describing us traditional usages of Harra or Harad (Terminalia chebula). It is consumed in different ways in different seasons. As in rainy season it has to be taken with rock salt, in early winter season with dry ginger, in winter with sugar, in spring season with honey & in summer with jaggery. Licking roasted Harra is useful in cough. Taking Harra with rock salt is useful to activate digestion system. Taking Harra treated water is a effective remedy of dysentery. Roast Harra in Castor oil and grind well to make fine powder. Taking this spoonful powder with water at bed time is useful to get relief from constipation and it is also beneficial for piles patients as well. Applying  Harra paste can be useful to minimize pain & swelling. Ramfal Patel’s at 8815113134

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भृंगराज के औषधीय गुण / Medicinal properties of False daisy

यह सन्देश रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, पाली, कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामफलजी हमें भृंगराज के विषय में जानकारी दे रहें है. इनका कहना है कि भृंगराज को केशराज, केशरंजन आदि नामो से जाना जाता है. यह सम्पूर्ण भारतवर्ष में पाया जाता है. भृंगराज का स्वरस (पत्तियों का रस) का सेवन दही के साथ करने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है. भृंगराज, बहेड़ा, आंवला और हर्रा को समभाग लेकर उसका चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को 1-1 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम लेने से अम्लपित्त और यकृत की सूजन में लाभ मिलता है. भृंगराज के बीज मिश्री के साथ लेने से पौरुष शक्ति बढ़ती है. भृंगराज, प्याज और तुलसी के स्वरस में बराबर मात्रा में शहद मिलाकर इसकी बूंदे आँख में डालने से नेत्र ज्योति बढ़ती है. रामफल पटेल का संपर्क है: 8815113134

This is a message of Ramfal Patel from Pragya Sanjeevani, Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message he is telling us medicinal properties of  False daisy commonly  known as Bhrungraj in Hindi. It is also known as Keshraj, Keshranjan etc. It is found across India. Juice of Bhrungraj leaves could be taken with with curd to get rid of Jaundice. Mix Bhrungraj, Amla, Bahera & Harra in equal parts and after making powder this combination can be taken for getting relief in case of Liver swelling & Hyper acidity. By taking Bhrungraj seeds with sugar candy can be increasing potency. Make an eye drops by using Bhrungraj, Onion, Basil juice add Honey in equal parts. This eye drops can increase eye sight. Ramfal Patel is at 8815113134

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नीम की पारंपरिक औषधीय उपयोगिता / Traditional medicinal usages of Indian Lilac

यह सन्देश रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, पाली, कोरबा, छतीसगढ़ से है. इस सन्देश में रामफलजी हमें नीम के गुणों के विषय में बता रहें है. इनका कहना है कि नीम अमृततुल्य है. नीम में कई रोगों को ठीक करने की क्षमता है. चैत माह में जब नीम के वृक्ष में जो नर्म कोपलें निकलती है उसे पानी में घोंटकर पीने से चेचक, रक्तविकार, वातपित्त और कफ नष्ट हो जाता है. नीम के पत्तों के रस में मिश्री मिलाकर सात दिन पीने से शरीर की गर्मी शांत होती है. नीम की पत्तियों का रस लगातार तीन माह तक पीने, नीम के वृक्ष की छाया में सोने से तथा नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर उस पानी से स्नान करने से रक्तपित्त और कोढ़ में लाभ मिलता है. नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर उस उबलते पानी के झाग को ठंडा करके जले हुए स्थान पर लगाने से जलन में आराम मिलता है. नीम की छाल के काढ़े में धनिया और सौंठ मिलाकर जाड़े के बुखार, मलेरिया में आराम मिलता है. नीम की पत्तियाँ पीसकर उसमे शहद मिलाकर घावों पर लगाने से पुराने घावों के ठीक होने में असाधारण मदद मिलती है. रामफल पटेल का संपर्क है: 8815113134

This is a message of Ramfal Patel from Pragya Sanjeevani, Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message he is describing us medicinal usages of  Indian Lilac well known as Neem. Neem has the ability to heal many diseases. Drinking paste of soft seedlings of Neem can helpful for curing haemopathy & cough diseases. Continuously drinking Neem juice for three months, sleeping under Neem tree shadow& Bathing with Neem treated water is very helpful for Haemorrhage & Leprosy patients. Boil Neem leaves in water until foam formed. After cool down apply this froth on burn area can helpful for reducing inflammation. Decoction of the bark of Neem tree with Coriander & dry Ginger powder can helping to control fever & malaria. Applying paste of Neem leaves with honey on wounds is helpful to heal wounds.

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सर्दी और खांसी का उपचार / Treatment of Cough & Cold

यह संदेश रामफल पटेलजी का प्रज्ञा संजीवनी नया बस स्टैंड पाली जिला कोरबा, छत्तीसगढ़ से है… इस सन्देश में रामफलजी सर्दी और खांसी के उपचार के बारे में बता रहें है…इनका कहना है की सौंठ 50 ग्राम, पीपर 50 ग्राम, कालीमिर्च 50 ग्राम, अडूसा 25 ग्राम, गिलोय 25 ग्राम और मुलेठी 25 ग्राम इन सबको पीसकर कर चूर्ण बना लें…और सुबह-शाम 2-3 ग्राम शहद के साथ ले…आवश्कता पड़ने पर 3 बार भी लिया जा सकता है…इसको लेने से सर्दी-खांसी में आराम मिलेगा….रामफल पटेलजी का संपर्क है: 8815113134

This message is by Shri. Ramfal Patel from Pragya Sanjeevani, New Bus Stand, Korba distt., Chhatisgarh. In this message he is telling us about a traditional remedy to treat cough & cold. He suggests – Take 50gms Dry Ginger, 50gms  Piper (longum), 50gms Black pepper, 25gms Justicia (adhatoda), 25gms Tinospora cordifolia and 25gms Glycyrrhiza glabra and grind them until a powder is formed. Take 2-3 gms of this powder with Honey. This medicine is very helpful to alleviate cough.

Ramfal Patel ji’s contact number is: 8815113134

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