Category Archives: Deepak Acharya – दीपक आचार्य

भिंडी के बीजों से बुद्धिवर्धक टॉनिक / Memory enhancing tonic from Ladyfinger seeds.

यह संदेश श्री दीपक आचार्या का अभुमका हर्बल्स, अहमदाबाद से है. अपने इस संदेश में दीपकजी हमें बता रहें है की किस प्रकार भिंडी के बीजों से बच्चों के लिए पौष्टिक टॉनिक तैयार किया जा सकता है. इनका कहना है की भिंडी को चीरा लगाकर इसके बीजो को एकत्रित कर सुखाकर इसका चूर्ण बना लें और यह चूर्ण बच्चों को दिन में दो बार 2-2 ग्राम मात्रा में दें. इसमें काफी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. गुजरात के हर्बल जानकार डांग आदिवासी यह मानते है की यह नुस्खा बच्चों में याददाश्त बढाने में टॉनिक जैसा काम करता है. दीपकजी का कहना है इस नुस्खे को आजमाकर अवश्य देखें…यह लाभदायक है.

Deepak Aacharya of Abhumka Helbals, Ahmedabad is telling us memory enhancing properties of Ladyfinger. Remove seeds from Ladyfingers and dry them. Grind dray seeds to fine powder. This powder is rich in protein & giving this powder to children – 2 gms twice a day is beneficial for improving memory power.  “Dang” tribe of Gujarat use this powder to enhance memory of their children.

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हृदय रोग का पारंपरिक उपचार / Traditional remedy of Heart diseases

यह सन्देश दीपक आचार्य का अभूमका हर्बल्स, अहमदाबाद से है. अपने इस सन्देश में दीपकजी हमें हृदय रोग का पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि अर्जुन का वृक्ष हृदय रोगियों के लिए वरदान स्वरूप है. हृदय रोगों के उपचार के लिए इस वृक्ष की छाल और फल उपयोग में लाए जाते है. आदिवासी इसका उपयोग उच्च रक्तचाप और विभिन्न हृदय विकारों के उपचार के लिए करते है. अर्जुन छाल और जंगली प्याज के कंद को समान मात्रा में लेकर उसका चूर्ण बना ले. इस चूर्ण को प्रतिदिन आधे चम्मच की मात्रा में दूध के साथ लेने हृदय रोगियों के लिए हितकर होता है. पुनर्नवा की पंचांग (पत्तियाँ, छाल, फुल, बीज, जड़) का रस में अर्जुन छाल समान मात्रा में मिलाकर दिन में एक बार लेना हृदय के विकारो में लाभदायक होता है. दिन धड़कन असामान्य होने पर 1 गिलास टमाटर के रस में एक चम्मच अर्जुन छाल का चूर्ण मिलाकर नियमित सेवन किया जाए तो दिल की धड़कन सामान्य होने लगती है. अगर हृदयाघात के लक्षण उभरे तो अर्जुन की छाल का चूर्ण जीभ पर रखने से आराम मिलता है. दीपक आचार्य का संपर्क है 9824050784

This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message Deepakji telling us tribal traditional remedy for Heart related problems. He say’s Arjun tree (Terminalia arjuna) is very useful for Heart patients. For medicinal purpose its bark & fruit is useful. As per tribal knowledge make fine powder of Arjun’s bark & wild onion in equal quantity. Taking this powder in half spoon quantity with milk daily is useful for Heart patients. Taking Panchang (leaves, bark, flowers, seeds & root) juice of Punarnava  (Boerhavia diffusa) after adding Arjun’s bark powder in equal quantity is beneficial for heart patients. In case of irregular heart beating taking glassful Tomato juice after adding 1 spoon Arjun’s bark powder regularly is useful for controlling irregular heart beat. If heart attack symptoms is appears putting little Arjun’s bark powder on tongue is useful. Deepak Acharya’s at 9824050784

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हृदय रोगों की रोकथाम में लहसुन का प्रयोग / Usefulness of Garlic in the prevention of cardiovascular diseases.

यह सन्देश दीपक आचार्य का अभूमका हर्बल्स, अहमदाबाद से है. अपने इस सन्देश में दीपकजी हमें बता रहे है कि किस प्रकार आदिवासी क्षेत्रों में लोग लहसुन का प्रयोग हृदय रोगों की रोकथाम में करते है. इनका कहना है कि लहसुन की सुखी हुई 15 कलियों को ½ लीटर दूध और 4 लीटर पानी के मिश्रण में इसे उबालकर इसके बने काढ़े को हृदय रोगियों को दिया जाए तो उनको काफी आराम मिलता है. लहसुन की कच्ची कलियों को चबाने से भी हृदय रोग में लाभ मिलता है. जिनको रक्त में प्लेटलेट्स की कमी हो उन्हें कच्चे लहसुन की कलियाँ नमक मिलाकर खानी चाहिए. उच्च रक्तचाप और रक्त विकारों को दूर करने के लिए लहसुन को काफी कारगर माना गया है. लहसुन के नियमित सेवन से शरीर में अच्छे और बुरे (एल.डी.एल और एच.डी.एल) कोलेस्ट्रॉल में सामंजस्य बना रहता है. दीपक आचार्य का संपर्क है 9824050784

This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message he is telling us how tribal people using Garlic for the prevention of cardiovascular diseases. He say’s boil 15 dried Garlic buds in the mixture of ½ liter Milk & 4 liter water until decoction is formed. Taking this decoction is very effective in cardiovascular diseases. Chewing of raw Garlic buds is also useful. Persons who has deficiency of platelets count, chewing raw Garlic buds after adding salt is beneficial. It is also useful for controlling high blood pressure & for blood purification as well. Deepak Acharya is at 9824050784

 

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गाजर के आदिवासी औषधीय उपयोग / Traditional medicinal uses of Carrot.

यह संदेश दीपक आचार्य का अभूमका हर्बल्स, अहमदाबाद से है. अपने इस संदेश में दीपकजी हमें गाजर के पारंपरिक औषधीय गुणों के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि गाजर एक चिरपरिचित सब्जी अनेक व्यंजनों को बनाने में इस्तेमाल की जाती है. गाजर में कई प्रकार के विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस और कैल्शियम के अलावा कैरोटिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. गाजर के सेवन से शरीर मुलायम और सुंदर बना रहता है. छोटे बच्चों को गाजर का रस पिलाने से उनके दांत आसनी से निकलते है और दूध भी आसानी से पच जाता है. जिनके पेट में गैस बनने की शिकायत हो उन्हें गाजर का रस या गाजर को उबालकर उसका पानी पीना चाहिए. आदिवासी मान्यता के अनुसार यह गाजर के रस की 4-5 बुँदे नाक के दोनों छिद्रों में डालने से हिचकी आनी बंद हो जाती है. गाजर को पीसकर उसे सूंघने से भी हिचकी में लाभ मिलता है. पातालकोट के हर्बल जानकारों के अनुसार गाजर का रस शहद के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है. गुजरात के डांग आदिवासी महिलाओं में मासिक धर्म की परेशानियों में गाजर के बीजों का रस पीने की सलाह देते है. दीपक आचार्य का संपर्क है  9824050784

This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals,, Ahmedabad. In this message he is telling us traditional medicinal uses of Carrot. He says Carrot is used for preparing many delicacies. It is enriched in many vitamins, carbohydrates, phosphorus & calcium. Apart from this it is a good source of beta carotene. Consumption of Carrot is useful to keep our body soft & beautiful. Giving Carrot juice to small children is beneficial for good growth of teethes & helping in digestion of milk as well. As per tribal belief putting 4-5 drops of Carrot juice in both nostrils can stops Hiccups. As per herbal experts of Patalkot taking Carrot juice with Honey is beneficial in impotence. As per Daang tribes of Gujrat giving Carrot seed juice is useful in mensuration related problems. Deepak Acharya’s at  9824050784

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टमाटर के पारंपरिक औषधीय उपयोग / Traditional medicinal uses of Tomatoes

यह सन्देश दीपक आचार्य का अभूमका हर्बल्स अहमदाबाद से है. अपने इस सन्देश में दीपकजी हमें टमाटर के पारंपरिक औषधीय उपयोगो के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि टमाटर का उपयोग हर भारतीय रसोई में होता है. टमाटर में पाए जाने वाले विटामिन गर्म होने पर भी नष्ट नहीं होते है. आदिवासियों के अनुसार टमाटर संतरे और अंगूर से ज्यादा लाभदायक होता है. पातालकोट के आदिवासी मानते है यह दातों और हड्डियों की कमजोरी को दूर करता है. जिन्हें रक्ताल्पता की शिकायत हो उन्हें 1 गिलास टमाटर का रस प्रतिदिन पीना चाहिए. इससे रक्तहीनता दूर होकर रक्त की वृद्धि होती है. कम वजन के व्यक्तियों को टमाटर का सेवन प्रतिदिन करना चाहिए. गुजरात के डांग हर्बल जानकारों के अनुसार लाल टमाटर पर अदरक और सैंधा नमक डालकर खाने से अपेंडिक्स में लाभ मिलता है. चेहरे पर यदि काले दाग-धब्बे हो तो टमाटर के रस में रुई भिगोकर कर चेहरे पर लगाने से दाग-धब्बे कम हो जाते है. टमाटर की चटनी में कालीमिर्च और सैंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम खाने से पेट के कृमि नष्ट हो जाते है. जिन लोगो को अक्सर मुहँ में छाले होने की शिकायत रहती हो उन्हें टमाटर का अधिक सेवन करना चाहिए. दीपक आचार्य का संपर्क है 9824050784

This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message he is telling us traditional medicinal uses of Tomato. He says Tomato is used in every Indian kitchen. Vitamins found in Tomato are not destroyed even after heating. According to tribal belief Tomato is more useful than Orange & Grapes. As per tribal knowledge of Patalkot it is useful for removing weakness of teethes & bones. Anemic persons should drink 1 glass Tomato juice everyday. As per herbal experts of Daang Gujrat, Eating Tomato after sprinkling little ginger & rock salt is beneficial to get relax in Appendices. Applying Tomato juice on face using cotton Pledget is useful to get rid of blot & stains. Eating tomato sauce after adding black pepper & rock salt twice a day is useful for destroying stomach worms. Regular consumption of Tomatoes is beneficial for curing mouth blisters. Deepak Acharya’s at 9824050784.

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केले की औषधीय उपयोगिता / Medicinal properties of Banana

यह सन्देश दीपक आचार्य का अभूमका हर्बल्स, अहमदाबाद से है अपने इस सन्देश में दीपकजी हमें केले के पारंपरिक औषधीय गुणों के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि केले के औषधीय गुणों को कम लोग जानते है. केला चाहे कच्चा हो या पका हुआ इन दोनों की अपनी औषधीय उपयोगिता है. यही नहीं केले के फूल भी गुणकारी होते है. ताजा कच्चा केला दस्तरोधी  होता है इसमें ऐसे स्टार्च पाए जाते है जिनमे दस्त रोकने के गुण होते है. बंगलादेश के देहाती क्षेत्रों में  में आज भी नवजात शिशुओं को दस्त होने पर कच्चे केले को पीसकर चटाते है. ऐसा माना जाता है कि केले का छीलका प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि को रोकने में मददगार होता है. केले के छिलके को सुखाकर पीस लिया जाये और इस चूर्ण का आधा चम्मच की मात्र में सेवन किया जाये तो यह प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि को रोकने में मदद करता है. केले के तने का रस पथरी में कारगर होता है. एक शोध के अनुसार केले के तने का रस गुर्दे  की पथरी को तोड़कर उसे मूत्र मार्ग से बाहर निकाल देता है. केले की जड़ और कच्चे केले में मधुमेह को नियंत्रित करने के के गुण होते है. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के वैज्ञानिकों के केले के पौधे के इन हिस्सों को मधुमेह को नियंत्रित करने वाली औषधि ग्लिबेनक्लेमाइड के समरूप पाया है. दीपक आचार्य का संपर्क है 9824050784

This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message he is traditional medicinal properties of Banana. Raw & ripen bananas both have medicinal properties & banana flowers are also equally beneficial as well. Fresh raw banana has antidiarrheal properties. In rural areas of Bangladesh people are using raw banana for diarrheal treatment of infants. Powder of dried banana skin is helpful for controlling the growth of prostate gland. Banana stem juice is effective in Kidney stone. Raw banana & banana root has diabetes controlling properties. Deepak Acharya’s at 9824050784

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दैनिक दिनचर्या में उपयोगी पारंपरिक नुस्खे / Useful traditional tips in daily routine

यह सन्देश दीपक आचार्य का अभूमका हर्बल्स, अहमदाबाद, से है. अपने इस सन्देश में दीपकजी हमें दैनिक दैनिक दिनचर्या में मददगार कुछ पारंपरिक नुस्खों के बारे में बता रहे है. इनका कहना है की सिरका जिसे एसिटिक एसिड कहा जाता है. इसका इस्तेमाल पारंपरिक तौर पर कई तरीके से किया जाता है. अगर कपड़ों को धोने के पानी 1½ कप सिरका मिला दिया जाये तो कपडे साफ़ धुलते है और उनकी सफेदी बरकरार रहती है. इसी प्रकार अगर बर्तनों को धोते समय साबुन में 1 चम्मच सिरका मिला देने से बर्तन चिकनाई रहित साफ़ और चमकदार धुलते है. हथेलियों से मछली, प्याज, लहसुन की दुर्गन्ध मिटाने के लिए पानी में थोडा सा सिरका मिलाकर हाथो को धोने से यह दुर्गन्ध समाप्त हो जाती है. नाखूनों की सुन्दरता को बढ़ाने के लिए अगर नाखूनों की अरंडी के तेल से थोड़ी देर मालिश की जाये तो नाख़ून चमकदार हो जाते है. दीपक आचार्य का संपर्क है 9824050784

This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message he is suggesting some traditional tips that can helpful in our daily routine. He says  Acetic acid also known as Vinegar is used traditionally in many ways. If  1½ cup vinegar is added to water before washing cloth wares it is useful for retaining their brightness. Similarly, before washing utensils If you add one spoon vinegar to the washing soap before washing results non-greasy and shining utensils. For removing stench of fish, onion or garlic from palms just add little vinegar to the water before washing your hands. Massaging nails using castor oil is useful to get beautiful nails. Deepak Acharya’s at 9824050784

 

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लसोड़े के पारंपरिक औषधीय उपयोग / Traditional medicinal uses of Indian cherry

यह सन्देश दीपक आचार्य का अभूमका हर्बल्स, अहमदाबाद से है. अपने इस सन्देश में दीपकजी लसोड़े के पारंपरिक आदिवासी औषधीय उपयोगों के बारे में बता रहे है. लसोड़े के मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में रेठू के नाम से भी जाना जाता है. इनका कहना है कि लसोड़े की छाल को पानी में घिसकर अगर अतिसार से पीड़ित व्यक्ति को पिलाया जाये तो लाभ मिलता है. इसी प्रकार अगर छाल को अधिक मात्रा में घिसकर इसे उबालकर इसका काढ़ा बनाकर सेवन किया जाये तो गले से सम्बंधित रोगों में आराम मिलता है. लसोड़े के बीजों को पीसकर दाद, खाज और खुजली वाले स्थानों पर लगाया जाए तो लाभ मिलता है. गुजरात के डांग आदिवासी लसोड़े के फलों को सुखाकर इसका चूर्ण बनाते है इसमें मैदा, बेसन और घी मिलाकर इसके लड्डू बनाते है. इनका मानना है की इन लड्डुओं का सेवन करने से शरीर को ताकत और स्फूर्ति मिलती है. लसोड़े की 200 ग्राम छाल को इतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर उबाला जाये और जब यह एक चौथाई शेष बचे तो इस पानी से कुल्ले किये जाये तो इससे मसूड़ों की सूजन, दांत का दर्द और मुहँ के छालों में आराम मिलता है. माना जाता है की लसोड़े की छाल के काढ़े को कपूर मिलाकर अगर इससे शरीर के सूजन वाले हिस्सों की मालिश की जाये तो आराम मिलता है. दीपकजी का संपर्क है 9824050784

This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message he is telling us tribal medicinal uses of Indian cherry or Glue berry commonly known as Lasoda in Hindi. He says rubbing bark of Glue berry on any rough surface using water & giving this paste to Diarrhea patient. It can benefit a person suffering from Diarrhea. In the same way giving decoction of Glue berry bark is useful in throat related problems. Applying powder of Glue berry seeds on herpes, itching & eczema suffering body parts is beneficial. As per Daang tribe of Gujrat is making sweet by using powder of dried Glue berry fruit, Maida flour, Gram flour & Ghee. As per their belief this sweet is very useful for getting strength.  Boil 200 gms Glue berry bark after water in equal quantity, when one fourth water remains gargling by using this water is beneficial in toothache, swelling gums & mouth ulcers. Massaging inflamed body by using decoction of Glue berry’s bark after adding camphor is useful to get rid of inflammation. Deepakji’s at 9824050784

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तुरई की आदिवासी औषधीय उपयोगिता / Tribal medicinal uses of Ridge gourd

यह सन्देश दीपक आचार्य का अभूमका हर्बल्स, अहमदाबाद से है. अपने इस सन्देश में दीपकजी हमें तुरई के आदिवासी औषधीय उपयोगो के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि आधा किलो तुरई को बारीक पीसकर 2 लीटर पानी में उबालकर छान लें फिर इस पानी में बैंगन को पकाएं और इन बैंगन को घी में भूनकर गुड़ के साथ खाने से बवासीर के दर्द में आराम मिलता है. आदिवासी जानकारी के अनुसार पीलिया होने पर तुरई को पीसकर इसका 2-3 बूंद रस रोगी की नाक में दिन में 3-4 बार डालने से रोगी की नाक से पीले रंग का द्रव्य बाहर आता है और इससे पीलिया रोग में लाभ मिलता है. आदिवासी जानकारों के अनुसार तुरई का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है. तुरई रक्त शुद्धिकरण और यकृत के लिए हितकर है. पातालकोट के आदिवासियों के अनुसार तुरई के छोटे-छोटे टुकड़े काट कर इसे छाँव में सुखा लें फिर इन टुकड़ों को नारियल के तेल में डालकर कर 5 दिनों के रखे फिर इन्हें गर्म कर छान ले. इस तेल से बालों की मालिश करने से बाल काले और चमकदार होते है और बालों का झड़ना कम हो जाता है. तुरई में इंसुलिन की तरह पेपटाइडस पाए जाते है इसीलिए इसे मधुमेह नियंत्रण में उपयोगी माना जाता है. तुरई के पत्तों और बीजों को पानी में पीसकर त्वचा पर लगाने से दाद, खाज और खुजली जैसे रोगों में आराम मिलता है. इसे कुष्ठ रोग में भी उपयोगी माना जाता है. अपचन में तुरई की सब्जी का सेवन हितकर होता है. सांघी आदिवासियों के अनुसार तुरई की अधपकी सब्जी खाने से पेट दर्द में आराम मिलता है. दीपक आचार्य का संपर्क है 9824050784

This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message Deepakji telling us tribal medicinal uses of Ridge gourd well known as Turai in Hindi. He says boil fine grind Ridge gourd in 2 liter water then cook Brinjal using this water later on fry this boiled Brinjal’s in Ghee. Eating this Brinjal’s after adding Jaggery is useful in Pile’s pain.  According to tribal knowledge instillation 2-3 drops of Ridge gourd juice into the nose of Jaundice patient 3-4 times a day. By doing so yellow liquid comes out of the patient’s nose. It is useful in Jaundice. As per tribal knowledge regular consumption of Ridge gourd is beneficial for health.  Ridge gourd is beneficial for blood purification & for liver as well. As per tribes of Patalkot cut Ridge gourd into pieces & after shadow drying put this dry pieces in coconut oil and has to be left for 5 days then after little warming & filtration massaging hairs by using this oil is useful to get black shiny hairs & it is reducing hair fall as well. Ridge gourd contains insulin like element called Peptides. That’s why it considered to be useful in controlling diabetes. Consumption of Ridge gourd is beneficial in indigestion. As per Sanghi tribes taking half-cooked Ridge gourd as a vegetable is useful in stomachache. Deepak Acharya’s at 9824050784

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चावल के पारंपरिक आदिवासी औषधीय उपयोग / Tribal medicinal uses of Rice

यह सन्देश दीपक आचार्य का अभुमका हर्बल्स, अहमदाबाद से है. अपने इस सन्देश में दीपकजी हम चावल की पारंपरिक औषधीय गुणों के बारे में बता रहें है. इनका कहना है कि धान के छिलके उतार दिए जाये तो चावल प्राप्त होता है. चावल शीतल और गुणकारी माना जाता है. चावल की फसल विशेषकर बारिश के मौसम में उगाई जाती पर इसकी उपलब्धता वर्ष भर रहती है. आदिवासी चावल की किनकी यानि चावल की जो छोटे-छोटे टुकडें होते है उसके छाछ में पकाकर महेरी नामक व्यंजन बनाते है. इसे बच्चों और बीमार व्यक्तियों को दिया जाता है. माना जाता है यह अत्यंत गुणकारी होता है. यदि चावल को पीस कर इससे नियमित चेहरे की मालिश की तो माना जाता है इससे चेहरे के दाग-धब्बे मिट जाते है. पातालकोट के आदिवासी मानते है कि चावल के आटे को पानी में मिलाकर उसे छानकर उसमे नमक मिलाकर पकाकर इसे बच्चो को आधा कप और वयस्कों को एक कप की मात्रा में दिया जाये तो इससे शक्ति मिलती है और दस्त में भी यह लाभदायक होता है. गुजरात के डांग आदिवासी मानते है चावल का गुनगुना पानी लगातार रोज पिया जाये तो मोटापा कम हो जाता है. कच्चे चावल के कुछ दानो को दिन में दो-तीन बार चबाने से प्यास कम लगती है. दीपक आचार्य का संपर्क है 9824050784

This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message Deepakji telling tribal medicinal uses of Rice. He says rice is especially grown in rainy season but it is available throughout year. As per tribal belief of Patalkot boil small broken pieces of rice cooked in whey & giving it to children in half cup quantity & to adults in a cup quantity. Supposedly it is extremely beneficial & it is also useful in diarrhea as well. Massaging face by using rice flour is useful for removing scars & stains. Daang tribes of Gujrat believes regular drinking rice boiled water is useful for reducing extra body fat. Chewing few grains of rice 2-3 times a day is helping to control thrust. Deepak Acharya’s at 9824050784

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