Category Archives: Anantram Shrimali – अनन्तराम श्रीमाली

वायु विकारों का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of abdominal gas problem

यह सन्देश वैद अनंतराम श्रीमाली का सागर मध्यप्रदेश से है. अपने इस सन्देश में अनंतराम जी हमें पेट में होने वाले वायु-विकारों का पारंपरिक उपचार बता रहे है. इनका कहना है कि उपचार के लिए 5 ग्राम हींग, 1 किलो आंवले के सूखे छिलके का चूर्ण, 200 ग्राम पीपर, 500 ग्राम छोटी हरड और 10 ग्राम सौंठ लें. 200 ग्राम पीपर, 500 ग्राम छोटी हरड को मट्ठे में भिगोकर सुखाएं ऐसा 4 बार करें फिर इनका चूर्ण बनाकर इसमें सौंठ, आंवले और हींग का चूर्ण और स्वादानुसार काला नमक मिलाकर किसी काँच की बोतल में भर कर रख ले. इसे भोजन के बाद 1 छोटे चम्मच की मात्रा में पानी के साथ लेने से वायु-विकारों में लाभ मिलता है इसके साथ ही इसके सेवन करने से भूख में भी वृद्धि होती है.

This is a message of Anantram Shrimali from Sagar, Madhya Pradesh. In this message he is suggesting us traditional remedy for abdominal gas problems. He says take 5 gms Asafoetida, 1 Kg dried skin powder of Indian gooseberry, 200 gms Piper longum, 500 gms Terminalia chebula & 10 gms dry ginger. First, soak 200 gms Piper longum & 500 gms Terminalia chebula in butter water (Whey) & after shadow drying repeat this process for 4 times & grind well to make powder then add remaining all ingredients & add rock salt to taste. Store this combination in any air tight glass bottle. After each meal taking this powder in 1 small spoon quantity is useful in  abdominal  gas problem & it is increasing apatite as well. 

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पारंपरिक शक्तिवर्धक नुस्खा – Traditional tips for vitality

यह सन्देश वैद्य अनंतराम श्रीमाली का सागर, मध्यप्रदेश से है. अपने इस सन्देश में अनंतरामजी हमें पारंपरिक शुक्रवर्धक पौष्टिक नुस्खा बता रहे है जिनका प्रयोग स्त्री और पुरुष दोनों ही कर सकते है. इसके लिए 5 लीटर दूध को 1 लीटर बचने तक औटाएं और जब दूध 1 लीटर बचे तो उसमे 200 ग्राम अश्वगंध चूर्ण, 200 ग्राम सतावर चूर्ण, 200 ग्राम कच्चे सूखे हुए गूलर फल का चूर्ण अच्छे से मिलाकर 20-20 ग्राम के पेढे बनाकर किसी काँच की बोतल में सुरक्षित रखे. इसे 1 पेढा सुबह निराहार प्रतिदिन 6 माह तक 200 मी.ली गाय के दूध अथवा 5 ग्राम घी के साथ लगातार लेने से शुक्राणुओं की वृद्धि होती है. स्त्री और पुरुष दोनों को शरीर पुष्ट होता है.

This is a message of vaid Anantram Shrimali from Sagar, Madhya Pradesh. In this message he is suggesting traditional nutritional tips for men & women. It is also useful for increasing sperm count. Boil 5 liter milk until it remains 1 liter. Hereafter, add 200 gms Ashwagandha (Withania somnifera) also known as winter cherry, 200 gms Satawar (Asparagus racemosus) also known as wild asparagus & 200 gms dried raw Cluster fig fruit powder & mix well. Make 20 gms pills from this combination. Taking this pills in 1 pill daily morning empty stomach with 200 ml cow milk or 5 gms ghee continuously for 6 months is beneficial for increasing sperm count & vitality.

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गुडहल के औषधीय प्रयोग / Medicinal uses of Hibiscus

यह सन्देश अनंतराम श्रीमाली का सागर मध्यप्रदेश से है. अपने इस सन्देश में वह हमें गुडहल की पारंपरिक उपयोगिता के बारे में बता रहें है. इनका कहना है कि सूजन होने पर गुडहल की पत्तियों को पानी के साथ पीसकर सूजन वाले स्थान पर लगाने से सूजन में आराम मिलता है. गुडहल का शरबत बनाने के लिए गुडहल के 100 ग्राम फूल लेकर उनके डंठल निकालकर उसकी पंखुड़ियों को रात्रि के समय किसी कांच के बर्तन में नीबू के रस में भिगोकर उसे ढककर किसी खुले और साफ़ स्थान पर रात भर रखें. प्रातः उसे मसलकर छान लें फिर उसमे 500 ग्राम चीनी या मिश्री मिलाए फिर इसमें गुलाबजल मिलाकर बोतल मे भरकर दो दिनों तक धूप में रखे. इसे बीच-बीच में हिलाते रहें ताकि शक्कर या मिश्री अच्छी तरह इसमें घुल जाये. इस शरबत को 15-40 मी.ली मात्रा में पीते रहने से लू, सीने की जलन, सर की पीड़ा, जी मचलाना, चक्कर आना, नेत्र विकारों में लाभ मिलता है. अनंतराम श्रीमाली का संपर्क है 8462970635

This is a message of Anantram Shrimali from Sagar, Madhya Pradesh. In this message he is telling us traditional usages of Hibiscus. He says applying paste of Hibiscus leaves on swelling & pain affected body parts is useful. For making syrup take 100 gram Hibiscus flowers after removing stalks soak these collected petals in Lemon juice & after putting this combination in any glass jar keep this jar overnight in open place. In the morning mash all items together & after filtration add 500 gram sugar or sugar candy to it & after adding Rose water fill this mixture in transparent bottle & keep this bottle under sunlight for 2 more days. Taking this syrup in 15-40 ml quantity is useful in sun stroke, nauseate, dizziness & eye disorders. Anantram Shrimali’s at 8462970635

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निमोनिया और श्वांस रोगों का पारंपरिक उपचार / Traditional remedy of Pneumonia

यह सन्देश अनंतराम श्रीमाली का सागर, मध्यप्रदेश से है अपने इस सन्देश में अनंतरामजी हमें बच्चों को होने वाले निमोनिया और श्वांस रोगों का पारंपरिक उपचार बता रहे है. इनका कहना है कि बच्चो को निमोनिया यह श्वांस का रोग होने पर सुहागा और मुलैठी 2-3 ग्राम की मात्रा शहद के साथ सुबह-शाम को देने से लाभ होता है. इस उपचार के दौरान दही, चावल और अन्य ठंडी वस्तुओं के सेवन से बचना चाहिए. तुलसी की पत्तियों के 1-2 बूंद रस में शहद मिलाकर बच्चों को चटाने से उनको सर्दी-खांसी और कंठ रोगों में लाभ मिलता है. बच्चों को दमा, माईग्रेन, साइनस, एलर्जी होने पर उन्हें तुलसी की पत्तियों का रस शहद के साथ लगातार सुबह-शाम देते रहने से लाभ मिलता है. अनंतराम श्रीमाली का संपर्क है 8462970635

This is a message of Anantram Shrimali from Sagar, Madhya Pradesh, In this message Anantramji is suggesting us traditional remedy of Pneumonia, Sinus, Cold & Cough, Allergy especially for children’s. He says in case of Pneumonia & respiratory diseases in children giving Borax & Mulethi in 2-3 gram quantity with honey is useful. During the treatment curd, rice and other cold items should be avoided. Licking 1-2 drops Basil leaves juice with honey is useful to get relief from cold & cough and it is also relaxing in throat related disorders as well. In case of Asthma, Migraine, Sinus & Allergy giving Basil leaves juice with honey twice a day continuously is beneficial. Anantram Shrimali’s at 8462970635

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पेचिश का पारंपरिक उपचार / Traditional remedy for Dysentery

यह संदेश श्री अनंतराम श्रीमाली का सागर मध्यप्रदेश से है… अपने इस संदेश में श्रीमालीजी हमें पेचिश और पेट में होने वाली मरोड़ के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है… इनका का कहना है की काला जीरा भूनकर 50 ग्राम और 10 ग्राम कुंदस (पंसारी की दुकान में उपलब्ध होता हैका चूर्ण बनाकर उसमे 20 ग्राम मिश्री मिलाकर इसे 10ग्राम सुबहशाम पानी के साथ लेने से मरोड़ वाली पेचिश ठीक होगी… अगर पेचिश खून के साथ हो रही हो तो उसके उपचार के लिए रालसौंठसौंफअनार का छिलका और खसखस 5-5 ग्राम लेकर उसका चूर्ण बना लें… उसमे 15 ग्राम मिश्री मिलाकर सुबहशाम10 ग्राम लेने से खूनी पेचिश ठीक होती है…अनंतराम श्रीमालीजी का संपर्क है 9179607522

This is a message of Shri. Anantram Shrimali from Sagar, Madhya Pradesh… In this message he is telling us traditional remedy to cure Dysentery… He said take roasted Black Cumin seed 50 gram, Kundes (Easily available at grocery shop) 10 gram & after making fine powder add 20 gram sugar candy… By taking this combination in 10 gram quantity with water twice a day can cure Dysentery… If Dysentery with mucus & blood take Rasin, Dry Ginger, Fennel seeds, Poppy seeds & Pomegranate skin 5 gram each & make fine powder of these all ingredients add 15 gram sugar candy & take 10 gram twice a day…It can be useful to cure Dysentery with blood & mucus… Anantram Shrimali’s at 9179607522

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खसरे की परंपरागत चिकित्सा / Traditional remedy of Measles

यह संदेश अनंतराम श्रीमाली का सागरमध्यप्रदेश से हैइस संदेश में अनंतरामजी हमें खसरे से बचने का परंपरागत उपाय बता रहे है इनका कहना है की जब बुखार लगातार2-3 दिनों तक आये और खसरे यह चेचक के लक्षण हो तो गुडहल जिसे जासवंद भी कहा जाता है इसके फूल का हरा छिलका निकालकर फूल उसे खिला दे..इससे खसरे का प्रकोप कम होगा… दूसरा उपाय के तहत अगर खसरा हो गया है और शरीर पर दाने दिखने लगे हो तो नीम के पानी से ही उसको स्नान कराये और रोगी के कमरे में गुडहल के फूल और नीम की पत्तियाँ रखे क्योंकि इसमें कीटनाशक गुण होता है… इससे रोगी को दाह (जलननहीं होगी.. अगर खसरा होने की संभावना भी हो तो उसके रोकथाम की दृष्टी से रोग संभावित व्यक्ति को दो गुडहल के फूल खिला देएक सावधानी रखे की रोगी से अन्य स्वास्थय व्यक्ति यथासंभव दूर रहे जिससे इस रोग को फैलने से रोका जा सकेअनंतराम श्रीमाली का संपर्क है 9179607522

This is a message of Anantram Shrimali from Sagar, Madhya Pradesh…In this message Anantramji is suggesting us traditional remedy for curing Measles. He said if fever persists for 2-3 days and if there could be possibility of Measles then 2 flowers of Hibiscus (Jaswand) after removing green rind can be given to the patient. Secondly, Bathing with Azadirachta indica (Neem) treated water can be very useful for the patient as Neem has disinfectant properties…& it can reducing burning sensation as well. Healthy person should keep distance from patient as much as possible to prevent spreading of disease…Shrimaliji’s at 9179607522

 

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दूर्वा / दूब की उपयोगिता – Properties of (Coach Grass) Cynodon dactylon

यह संदेश श्री अनंतराम श्रीमाली का सागर, मध्यप्रदेश से है इस संदेश में वह दूर्वा जिसे दूब भी कहते है उसकी उपयोगिता के बारे में बता रहें है.. दूर्वा सभी जगह आसानी से मिल जाती है…और लगभग सभी लोग इस घास के बारे में जानते है…अनंतरामजी का कहना है की दूर्वा 5 ग्राम, बेलपत्र 5 और लौकी 5 ग्राम सभी को ताजा पीसकर लेने से समस्त प्रकार के रक्तविकार दूर होते है… रुके हुए मासिक धर्म को  शुरू करने के लिए दूर्वा 15 ग्राम और उतनी मात्रा में चावल को पीसकर घी में भुनकर लेने से रुका हुआ मासिक धर्म शुरू हो जाता है और यह कमजोरी को भी दूर करता है… अनंतराम श्रीमाली का संपर्क है: 9179607522

This is a message of Shri. Anantram Srimali from Sagar, Madhya Pradesh. In this message Anantramji telling us about the medicinal properties of Coach Grass. This grass is commonly known as “Durva” in Hindi language…He said by taking grind mixture of 5 gm Durva, 5 gm Bael (Aegle marmelos) Leaves & 5 gm Louki (Bottle Gourd) that can cure blood related disorders. To continue stopped Mensuration take 15 gm Durva and same amount of Rice and grind well and roast this mixture using ghee. Anantram Shrimali is at 9179607522

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नवजात बच्चों के लिए सामान्य चिकित्सा

यह सन्देश अनंतराम श्रीमाली का सागर, मध्यप्रदेश से है…इस सन्देश में अनंतरामजी ठण्ड के इस मौसम में दूध पीते नवजात बच्चों को होनी वाली बीमारियों के निदान के बारे में बता रहें है…इनका कहना है की कस्तूरी गोली 1, कायफल 1 ग्राम को दूध में घिसकर इसे माँ अपने दूध में मिलाकर दिन में एक बार पिलायें इससे नवजात बच्चों को ठण्ड के कारण होने वाले रोगों से छुटकारा मिलेगा…बच्चो को होने वाले अतिसार या दस्त में अमरुद 50 ग्राम पत्तों को कूट कर काढ़ा बना लें और लगभग 20-25 ग्राम काढ़े में 1 ग्राम आवंला चूर्ण मिलाकर बच्चों को दिन में दो बार दें यह नवजात बच्चों को होने वाले अतिसार को रोकता है..

This is a message of Anantram Shrimali from Sagar, Madhya Pradesh. In this message Anantramji is telling us how to cure infants in winter season. He said to cure infants from winter related problems take 1 tablet Kasturi and 1 gram Myrica esculenta (Kayephal) and mix together and give it to infants with breast milk. By doing so new born babies can get rid of diseases caused by cold.. To treat Diarrhea in new born babies crush 50 gram Guava leaves and boil it with some water until decoction formed then mix 1 gram Phyllanthus emblica (Amla) powder and give it to new born babies. This can cure them from Diarrhea… Contact of Anantram Shrimali is 9179607522

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बवासीर का परंपरागत उपचार / Traditional treatment of Piles

यह संदेश श्री अनंतराम श्रीमालीजी का सागर मध्यप्रदेश से है इस सन्देश में अनंतरामजी हमें बवासीर रोग के कारक, परहेज और उसके पारंपरिक इलाज की जानकारी दे रहे हैइनका कहना है की बवासीर रोग अक्सर रहने वाली कब्ज के कारण होता हैइलाज के आभाव में बवासीर के मस्से आगे चलकर खूनी बवासीर में तब्दील हो जाते है जो पीड़ादायक होते हैखूनी या बादी दोनों ही प्रकार के बवासीर में औषधी के साथसाथ खानपान का परहेज लाभप्रद होता हैइसमें रोगी को गुड, बेसन, मिर्च, अधिक तेलयुक्त भोज्य सामग्री, अरहर की दाल, उड़द की दाल और वातकारक भोज्य पदार्थो का सेवन तत्काल रोक देवेइसके उपचार के लिए मुली के रस का गाय के घी के साथ सुबहशाम सेवन करें, एवं माजूफल का चूर्ण गुदा स्थान पर लगाये इससे लाभ होगादूसरा सफ़ेद सुरमा और नागकेसर को समभाग में लेकर कूटपीसकर बारीक़ कर लेंइसमें शहद मिलकर 1 ग्राम मात्रा में सुबहशाम चाटें साथ ही कडवी तुरई के बीज को रात को पानी में फुलाकर सुबह इन्हें बारीक पीसकर गुदा स्थान पर लगायें.. यह उपचार बवासीर रोग में अत्यंत प्रभावी है….अनंतराम श्रीमालीजी का संपर्क है..9179607522

 This is a message of Shri. Anantram Shrimali from Sagar, Madhya Pradesh…this message is about probable cause, regimen and traditional treatment of piles.. According to him persistent constipation often leads to piles and in absence of proper treatment, piles could transform into hemorrhoid… Along with treatment piles & hemorrhoid, patients should avoid Jaggery (Gur), Gram floor(Besan), spicy & oily food and people should abstain from Arhar Daal and Urad Daal. For treatment Radish juice with pure cow ghee should be taken in morning and evening. Majuphal Churn could be applied directly on the piles. Secondly mix Nagkesar (Mesua ferra) and white kohl commonly known as surma in equal quantity and grind well and lick this 1 gram mixture with honey in morning and evening. Soak Turai seeds (Luffa) in water and apply its paste on rectum.. above treatments have proven effective in cure of piles and hemorrhoid… Contact of Shrimaliji is 9179607522

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धातु रोग का घरेलु उपचार

यह संदेश अनंतराम श्रीमाली का सागर से है:

इनका कहना है की यह समस्त रोगों का उपचार जड़ी-बूटियों से करते है इनका कहना है की धातु रोग का उपचार करने के लिए तुलसी के बीज 2 ग्राम, शाम को एक मुट्ठी धनिया (Coriander Seeds)  200 ग्राम पानी में फुलाएं और उस पानी से धनिया को निकाल कर उसी पानी में तुलसी के (Basil Seeds) बीज पीस कर लेने से धातु रोग ठीक होने लगते है…..अनंतराम श्रीमालीजी का संपर्क है: 9179607522

 

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