Category Archives: Ramprasad Nishad – रामप्रसाद निषाद

शुक्रक्षय रोग का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Sperm loss (Spermatorrhea)

यह सन्देश रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, जिला कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामप्रसादजी हमें शुक्रक्षय बीमारी का पारंपरिक उपचार बता रहे है. इनका कहना है की इस बीमारी में वीर्य पतला हो जाता तथा यह मूत्र के साथ भी जाने लगता है. इस रोग में पुरुष कमजोर हो जाता है और उत्तेजना के साथ कामशक्ति क्षीण हो जाती है. इसके उपचार के लिए 8-10 ग्राम काली मूसली का चूर्ण दूध में डालकर उबालने के पश्चात जब दूध रबड़ी की तरह गाढ़ा होने पर उसमे 25-30 ग्राम मिश्री, 25 ग्राम बादाम का चूर्ण, 10 ग्राम घी, 1-2 ग्राम जायफल और इलायची का चूर्ण को मिलाकर इसके 2 हिस्से बनाकर सुबह-शाम दूध के साथ लेने से वीर्य में वृद्धि होती है और कामशक्ति सामान्य होने लगती है.

This is a message of Ramprasad Nishad from Farasgaon, Dist. Kondagaon, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional treatment of Spermatorrhea. He says in this disease semen becomes diluted & often released with urine causing lack in sexual power & men becomes weak. For treatment boil 8-10 gms  Kali Musli (Orchid palm grass) powder in milk until milk becomes thicker after that add 25-30 gms sugar candy, 25 gms almond powder, 10 gms ghee, 1-2 gms nutmeg & cardamom powder. Divide this combination into 2 parts. Taking each part twice a day with milk is useful to make semen thicker & regaining sexual power.

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यकृत की दुर्बलता का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Liver weakness

यह सन्देश रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामप्रसादजी हमें यकृत की दुर्बलता और सूजन का पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि इसके उपचार के लिए जटामांसी और नागरमोथा के चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाकर इसे सुरक्षित बोतल में भरकर रख लें. इसे 1-1 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम ठन्डे पानी से देने से लाभ मिलता है. 50 चने को पकाकर उसमे स्वादानुसार नमक मिलाकर 5 दिनों तक प्रतिदिन सुबह खिलाएं 5 दिनों के बाद चने को घी में भुनकर लगातार 20 खिलाएं इस प्रकार करने से यकृत को बल मिलता है. रामप्रसाद निषाद का संपर्क है 7879412247

This is a message of Ramprasad Nishad from Farasgaon, Kondagaon, Chhatisgarh. In this message he is suggesting use traditional treatment of Liver weakness & swelling. He says grind Muskroot & Nutgrass in equal quantity to make powder & Keep it in any airtight bottle. Taking this powder in 1 spoon quantity twice a day with cold water is useful in Liver weakness. Cook 50 gms Gram and add salt to taste. Taking this cooked grams daily for 5 days & after 5 days ghee roasted grams to be taken for 20 days is beneficial for Liver. Ramprasad Nishad is @ 7879412247

 

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सहदेवी की पारंपरिक उपयोगिता – Traditional uses of Sahdevi (Vernonia cinerea)

यह सन्देश रामप्रसाद निषाद का वन औषधालय, फारसगाँव, कोंडागांव से है. अपने इस सन्देश में रामप्रसादजी हमें सहदेवी नामक औषधि की विभिन्न रोगोपचार में उपयोगिता के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि जंगल और खेतो में मिलने वाली सहदेवी औषधि में कई रोगों को ठीक करने के गुण छिपे हुए है. इसकी पत्तियों का 2 चम्मच स्वरस और 2 चम्मच तुलसी की पत्तियों का स्वरस को पथरी के मरीज को सुबह-शाम देने से लाभ होता है. इसकी जड़ को सर पर बांध देने से अनिद्रा के रोगियों को आराम मिलता है. इसके काढ़े में घी मिलाकर पीने से पेट से सम्बंधित रोगों में आराम मिलता है. रामप्रसाद निषाद का संपर्क है

This is a message of Ramprasad Nishad form Farasgaon, Kondagaon, Chhatisgarh. In this  message he is suggesting us uses of Sahdevi (Vernonia cinerea) also known as Little ironweed. He says taking 2 table spoon Little ironweed leaves juice after adding 2 table spoon Basil leaves juice twice a day is useful in kidney stone related problems. Tying root of Little ironwood plant on the head is useful in Insomnia. Taking its decoction after adding ghee is beneficial in stomach disorders.

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टूटी हड्डी और मोच का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Sprain & Broken bones

यह सन्देश रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश रामप्रसादजी हमें टूटी हुई हड्डी को ठीक करने में मददगार पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि अगर किसी व्यक्ति की हड्डी टूट गई हो & मोच हो तो परेशानी हो जाती है इसके उपचार के लिए अर्जुन छाल का प्रयोग किया जाता है. इसके लिए अर्जुन छाल को महीन पीसकर इसका 3 ग्राम चूर्ण में 5 ग्राम शक्कर और 6 ग्राम घी मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम गाय के दूध के साथ देने से रोगी को आराम मिलता है. इसी के साथ अर्जुन छाल को पीसकर उसमे सम मात्रा में घी मिलाकर उसका लेप बनाकर उसे प्रभावित अंग पर लगाकर मजबूत पट्टी बांधने से हड्डी को जुड़ने में मदद मिलती है. इस स्थिति में खटाई का सेवन पुर्णतः बंद कर देना चाहिए. रामप्रसाद निषाद का संपर्क है 7879412247

This is a message of Ramprasad Nishad from Farasgaon, Kondagaon, Chhatisgarh. In this message he is suggesting some traditional tips helpful for the treatment of sprain &  bone fractures. He says grind bark of Arjun tree (Terminalia arjuna) to make fine powder & mix 3 gms this powder with 5 gms sugar & 6 gms ghee. Giving this combination to the patient twice a day with cow milk is beneficial. Similarly, mix Terminalia arjuna & ghee in equal quantity to make paste. Apply this paste on affected body parts is useful. Ramprasad Nishad @ 7879412247

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खुजली के निदान में दही का पारंपरिक प्रयोग – Traditional uses of yogurt in itching treatment

यह सन्देश रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामप्रसादजी हमें दही और मट्ठे के पारंपरिक औषधीय गुणों के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि दही और मट्ठा औषधीय गुणों से परिपूर्ण है. शरीर के किसी हिस्से में दाद या खुजली होने पर उसके उपचार के लिए 200 ग्राम खट्टा दही को किसी पात्र में रखकर तेज धूप में रख दे और जब उसमे खमीर उत्पन्न होकर झाग बनने लगे तो 12 ग्राम गंधक को बारीक़ पीसकर उसमे अच्छे से मिला दे. इसे किसी साफ बोतल में भरकर रख ले. इसे खुजली वाले स्थान पर थोडा सा खुजला कर लगाएं. इस प्रकार कुछ दिनों तक इसे लगाने से खुजली में आराम मिलेगा. इसके साथ ही सारीवादी वटी की 1-1 गोली दिन में 3 बार लें. इसी प्रकार 1 गिलास मट्ठा प्रतिदिन सुबह और शाम पीने से कफज, पितज और वातज प्रकार के बवासीर में लाभ मिलता है.

This is a message of Ramprasad Nishad from Farasgaon, Kondagaon, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional medicinal properties of yogurt & whey. He says yogurt & whey is enriched in medicinal properties. In case of itching problem keep 200 gms sour yogurt in direct bright sunlight. When yeast & foam is formed add 12 gms sulphur powder to it & stirring keep this combination in clean bottle. Apply this on itching affected body parts for some days is useful for getting relief. Along with this treatment take Sarivadi pills in 1 pill in quantity thrice a day is beneficial. Drinking whey twice a day is useful for piles patients.

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अमाशय की कमजोरी का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Stomach weakness

यह सन्देश रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामप्रसादजी हमें अमाशय की कमजोरी को दूर करने का पारंपरिक उपचार बता रहे है. इनका कहना है कि यदि अमाशय दुर्बल हो, भोजन ठीक से नहीं पचता हो, पेट में दर्द रहता हो, गैस बनती हो तो इसके उपचार के लिए एक सेवफल को छील कर उसमे चारो तरफ से लौंग चुभो दे और उसे कहीं सुरक्षित स्थान पर 40 दिनों तक रखें. 40 दिनों बाद उन लौंगो को निकालकर किसे डिब्बे में सुरक्षित रख दें. प्रदिदिन सुबह-शाम भोजन के बाद इनमे से से 1-1 लौंग खाने से अमाशय की कमजोरी दूर होकर अमाशय को बल मिलता है. इस उपचार के दौरान तेल, मीर्च-मसालों और खटाई के सेवन से बचें. रामप्रसाद निषाद का संपर्क है 7879412247

This is a message of vaidya Ramprasad Nishad from Farasgaon, Kondagaon, Chatisgarh. In this message he is telling us traditional method to get rid of stomach weakness. He says take an Apple and after peeling insert as much cloves you can in the apple & place it at safer place for 40 days. After 40 days removes all cloves & keep in airtight bottle. Taking this single clove after meals twice a day is useful to strengthen stomach. During treatment oily & spicy food should be avoided. Ramprasad Nishad is @ 7879412247

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शारीरिक कमजोरी दूर करने का पारंपरिक उपाय / Traditional method for removing physical weakness

यह सन्देश डॉ. एच. डी गाँधी का स्वास्थ्य स्वर से है वह आज कोंडागांव में है और वहाँ के फरसगांव के वैद्य रामप्रसाद निषाद से स्वास्थ्य स्वर के लिए शारीरिक कमजोरी को दूर करने का पारंपरिक नुस्खे के बारे में जान रहे हैं. शारीरिक कमजोरी को दूर करने के बारे में रामप्रसाद निषादजी का कहना है की कई बार शारीरिक कमजोरी की कारण हड्डियों का ढांचा बनकर रह जाता है इसके उपचार के लिए खामार की छाल 100 ग्राम, गूलर की छाल 100 ग्राम इन दोनों को दरदरा पीसकर आधे लीटर पानी में उबालें और जब पानी 200 मी.ली बच जाये तो इसे मसल छान कर इस में थोड़ी सी मिश्री मिलाकर 50 मी.ली सुबह-शाम शारीरिक रूप से कमजोर मरीज को देने से उसकी कमजोरी दूर होती है रामप्रसाद निषाद का संपर्क है 7879412247

This is a message of Dr. H D Gandhi from Swasthya Swara. He talking to traditional healer Ramprasad Nishad of Farasgaon, Kondagaon, Chhatisgarh. Ramprasad Nishad is telling him traditional method for removing physical weakness. He says grind 100 gms Khamar bark (Gmelina arborea) & Gular bark (Cluster Fig Tree) and boil them in 500 ml water until 200 ml water remains. Afterwards mesh all contents & after filtration add some sugar candy to it. Giving this combination in 50 ml quantity twice a day is very useful for removing physical weakness. Ramprasad Nishad is at 7879412247

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हाथ-पाँव के छालों का पारंपरिक इलाज / Traditional treatment of blisters

यह सन्देश रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है अपने इस सन्देश में रामप्रसादजी हमें हाथों और पैरों में होने वाले छालों का पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहें है. इनका कहना है हाथों और पैरों में पड़ जाने वाले छालों से कभी-कभी खून भी आने लगता है. इनका कहना है इस बीमारी के लिए एक सरल औषधि जिसे अक्कलकरा कहते है. यहवनस्पति अक्सर नदी-नालों के किनारे या नमी वाले स्थानों पर पाई जाती है. इस वनस्पति की पत्तियों को 5-10 की मात्रा में लेकर महीन पीसकर छालों पर लगाकर 2-4 मिनिट बाद साफ़ कर ले. इसे कुछ दिनों तक दोहराने से छाले ठीक होने लगते है. रामप्रसाद निषाद का संपर्क है 7879412247

This is a message of Ramprasad Nishad from Farasgaon, Kondagaon. In this message he is suggesting us traditional remedy of blister affected hands & legs. He says sometimes blood comes out from blister affected organs. Leaves of Acmella oleracea commonly known as Akkalkara in Hindi is the appropriate remedy of blisters. This plant often found around river banks & moist places. Make paste of 5-10 grams Akkalkara leaves & apply on blister affected body parts and wash after 2-4 minutes. Repeat it for some days. This is very useful remedy of Blisters. Ramprasad Nishad’s at 7879412247

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पेचिश का पारंपरिक उपचार / Traditional treatment of Diarrhea

यह सन्देश रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है अपने इस सन्देश में रामप्रसादजी हमें पेचिश के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है की आंवयुक्त खूनी पेचिश होने पर 10 ग्राम राल, 10 ग्राम कुटज, 3 ग्राम नीलगिरी गोंद का चूर्ण को मिलाकर इसे किसी डब्बे में भरकर रखें. इस चूर्ण को 1 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार सुबह, दोपहर और शाम को गुनगुने पानी से लेने से आराम मिलता है. इसे एक दिन ही लेने से इसका प्रभाव दिखाई देने लगता है. रामप्रसाद निषाद का संपर्क है 7879412247

This is a message of Ramprasad Nishad from Farasgaon, Kondagaon, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us tribal traditional treatment of severe diarrhea with blood. He says make powder of 10 gram Rosin known as Raal in Hindi, 10 gram Holarrhena antidysenterica (Kutaj) & 3 gms Eucalyptus resin. Taking this mixture in 1 gram quantity  with lukewarm water thrice a day is very useful. Ramprasad Nishad is at 7879412247

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अमाशय की कमजोरी का पारंपरिक उपचार / Traditional remedy of Abdominal weakness

यह सन्देश रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामप्रसादजी हमें अमाशय की दुर्बलता के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि जिनका अमाशय कमजोर हो जाता है और उसमे विष बनने लगता है. इस स्थिति में सौंठ और अजवाइन का चूर्ण बना ले. इसमें नीबू का इतना रस डालें कि यह चूर्ण उसमे अच्छे से मिल जाये. इसे छाया में सुखा कर पीस ले और इसमें थोडा सा नमक मिलाकर इसे 1 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार रोगी को पानी के साथ देने से अमाशय की कमजोरी में लाभ मिलता है और यह नुस्खा वायु विकार को भी दूर करता है. रामप्रसाद निषाद का संपर्क है 7879412247

This is a message of Ramprasad Nishad from Farasgaon, Kondagaon, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional remedy for abdominal weakness. He says make powder of Dry ginger & Carom seeds & add sufficient amount of lemon juice in it & after shadow drying add little salt to it. Giving this combination to the patient in 1 gram quantity using water twice a day is beneficial. Ramprasad Nishad’s at 7879412247

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