सिरदर्द और माईग्रेन का पारंपरिक उपचार / Traditional treatment of Headache & Migraine

यह सन्देश वैद्य रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, पाली, कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामफलजी हमें सामान्य सिरदर्द और अर्धकपाली (माइग्रेन) के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि अपामार्ग की पत्तियों का रस को नाक में डालने अथवा रीठे का चूर्ण को सूंघने से सिरदर्द में लाभ मिलता है. घृतकुमारी का गुदे, गिलोय और भुईनीम को सामान मात्रा में मिलाकर उसका काढ़ा बनाकर पीने से भी सिरदर्द में लाभ होता है. भारंगी की ताजी जड़ को गर्म जल में घिसकर या पीसकर इसका लेप माथे पर लगाने से भी सिरदर्द में लाभ मिलता है. द्रोणपुष्पी की ताज़ी पत्तियों को पीसकर प्रातः माथे पर लगाने से माईग्रेन में लाभ मिलता है. हरड, बहेड़ा, आंवला, चिरायता, हल्दी, नीम की छाल और गिलोय को समान मात्रा में मिलाकर उसका काढ़ा बनाकर उसमे गुड मिलाकर पीने से सिरदर्द में लाभ मिलता है रामफल पटेल का संपर्क है 8815113134

This is a message of vaidya Ramphal Patel from Pragya Sanjeevani, Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional treatment of normal headache & migraine. He says dropping prickly chaff flower’s juice in nostrils or sniffing powder of Reetha (Fruit of Soap nut tree) is beneficial in headache. Taking decoction of  Aloe vera pulp,  Giloy or Guduchi (Tinospora cordifolia) & Chiraita (Swertia chirata) in equal quantities is also useful in headache. Grind fresh root of Bharangi (Blue fountain bush) in warm water & applying this paste on forehead is useful. Applying fresh leaves paste of Dronpushpi (Leucas cephalotes) on forehead at early morning is useful to get rid of migraine. Drinking decoction of harad, baheda, amla, chiraita, haldi, neem chhal & giloy in equal quantities after adding jaggery is useful in headache. Ramphal is @ 8815113134

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