अरंड की पारंपरिक औषधीय उपयोगिता / Traditional medicinal properties of Castor

यह सन्देश रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, पाली कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामफलजी हमें अरंड के पारंपरिक उपयोग की जानकारी दे रहे है. इनका कहना है की अरंड की दो जातियां होती है एक वर्षीय और बहुवर्षीय. इनकी बहुवर्षीय जाति के बीजों में तेल की मात्रा अधिक होती है. इसकी पत्तियां पंजे के आकार की होती है. इनके लाल कोमल पत्तों का रस 1 चम्मच की मात्रा में पीलिया के रोगियों के सुबह-शाम देने से लाभ मिलता है. अरंड की पत्तियों को पीसकर थोडा सा गर्म करके साइटिका, चर्मरोगो, संधिशोथ और सूजन आदि मे रोग से सम्बंधित अंगो पर बांधने  से लाभ मिलता है. वात रोगियों को इसके तेल के मालिश करने से आराम मिलता है. बवासीर में इसके तेल का उपयोग विरेचक के तौर पर होता है. इसकी जड़ का क्वाथ वात रोगियों को पिलाने से आराम मिलता है.

This is a message of Ramfal Patel from Pragya Sanjeevani, Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message Ramfalji telling us traditional medicinal properties of Castor oil plant. He says there are two sub-species of Castor oil plant in which one is yearly & second one is perennial. Seeds of perennial plant contains more oil compare to yearly species. Leaves of Castor oil plant is claw shaped. Giving soft seedling juice of Castor oil plant to Jaundice patients in one spoon quantity twice a day is useful. Make paste of Castor oil plant leaves and after warming applying this on pain affected body parts is useful. Decoction of Castor oil plant’s root is beneficial in Arthritis.

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