यकृत की दुर्बलता का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Liver weakness

यह सन्देश रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामप्रसादजी हमें यकृत की दुर्बलता और सूजन का पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि इसके उपचार के लिए जटामांसी और नागरमोथा के चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाकर इसे सुरक्षित बोतल में भरकर रख लें. इसे 1-1 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम ठन्डे पानी से देने से लाभ मिलता है. 50 चने को पकाकर उसमे स्वादानुसार नमक मिलाकर 5 दिनों तक प्रतिदिन सुबह खिलाएं 5 दिनों के बाद चने को घी में भुनकर लगातार 20 खिलाएं इस प्रकार करने से यकृत को बल मिलता है. रामप्रसाद निषाद का संपर्क है 7879412247

This is a message of Ramprasad Nishad from Farasgaon, Kondagaon, Chhatisgarh. In this message he is suggesting use traditional treatment of Liver weakness & swelling. He says grind Muskroot & Nutgrass in equal quantity to make powder & Keep it in any airtight bottle. Taking this powder in 1 spoon quantity twice a day with cold water is useful in Liver weakness. Cook 50 gms Gram and add salt to taste. Taking this cooked grams daily for 5 days & after 5 days ghee roasted grams to be taken for 20 days is beneficial for Liver. Ramprasad Nishad is @ 7879412247

 

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