सामान्य उदर रोगों का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of common stomach disorders

यह सन्देश वैद्य लोमेश बच का कोरबा, छत्तीसगढ़ से है अपने इस सन्देश में लोमेशजी हमें उदर रोग और उदर पीड़ा में उपयोगी पारंपरिक धन्वंतरी वटी के बारे में बता रहे है. इनका कहना है की इसके मुख्य घटक है सौंठ, सुहागे का फूल (सुहागे को गर्म तवे पर रखने पर वह फूलकर फूल जैसा बन जाता है), सैंधा नमक और उत्तम हींग सभी बराबर मात्रा में लेकर इनसे आधी मात्रा में शंखभस्म और एक भाग लौंग मिलाकर इसका वस्त्रकूट (कपडे में रखकर कूटकर) चूर्ण बना लें और इसमें बराबर मात्रा में सहजन की छाल का  रस मिलाकर छोटे झाड़ी बेर जिसे (झरबेर) भी कहते है इसके आकार की गोलियाँ बनाकर रख ले. इन गोलियों को दिन में दो बार गुनगुने पानी के साथ लेने से उदार विकारों में लाभ मिलता है. लोमेश बच का संपर्क है 9753705914

This is a message of vaidya Lomesh Kumar Bach from Korba, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional “Dhanwantari” pills useful in stomach related problems. He says for making this pills take dry Ginger, Roasted borax, Rock Salt & quality Asafoetida in equal quantity & afterward mix conch ash in half of all amount & one part Clove powder. After grinding  add Drumstick’s bark juice & make Indian plum sized pills. Taking this pills in one pill quantity twice a day with lukewarm water is useful in stomachache & other common stomach related problems. Lomesh Kumar Bach is @ 9753705914

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