शक्तिवर्धक महुआ – Enhance body Immunity power with Mahua

ह सन्देश रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, नया बस स्टैंड, पाली, कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामफलजी हमें महुआ जिसे मधुका के नाम से भी जाना जाता है. यह दक्षिण भारत और छत्तीसगढ़ में विशेषकर पाया जाता है. इस वृक्ष की छाल, बीज फूल  में लाये जाते है. इसके फूलों में चूना, लोहा, पोटाश और सोडा अधिक मात्रा में पाया जाता है. इसके फूलों में मौजूद शर्करा जल्दी ही मद्य (शराब) में परिवर्तित हो जाती है. इसके बीजों का तेल वात और चर्म रोगों में लगाने के काम आता है. इन रोगों में आराम पाने में यह प्रभावी है. दस्त होने की स्थिति में इसके पुष्पों का स्वरस एवं इसकी छाल का क्वाथ देने से लाभ मिलता है. रक्तपित्त होने की स्थिति में इसके फूलों का स्वरस पिलाने से लाभ मिलता है. वात व्याधि और नाडी दौर्बल्यता के लिए इसके क्षीरपाक बनाने की विधि है. इसके फूलों को रात्रि में दूध के साथ पका लें और रातभर खुले में रख दें. प्रातः इसे 50-100 ग्राम की मात्रा में खाली पेट लेने से नाडी दौर्बल्यता और वात रोगों में लाभ होता है. छत्तीसगढ़ में पारंपरिक तरीके से महुआ का क्षीरपाक बनाया जाता है जिसकी विधि है आधा किलो महुए को साफ़ करके पानी से धो लें. तिल 100 ग्राम, इमली के बीज 100 ग्राम और अलसी 50 ग्राम को पानी मिश्रित दूध में पकाएं इसे प्रतिदिन 50-100 ग्राम की मात्रा में खाने से शारीरक शक्ति में बढ़ोतरी होती है.

Ramfal Patel of Pali, Chhatisgarh tells us about Mahua (Madhuca longifolia). It is found abundantly in Madhya Pradesh, Chhatisgarh & Southern regions of India. The tree’s bark, flowers and seeds are used widely in tribal region as it contains Iron, Potash, Line and Soda in large amount. Taking Mahua Ksheerpak regularly increases body resistance and makes one immune to common diseases. Traditional method of making Mahua Ksheerpak is take 500 grams clean washed Mahua flowers, 100 grams Sesame seeds, 100 grams Tamarind seed &  Flax seeds in 50 grams and cook these items in milk till it thickens. Taking 1 ~ 2 tablespoon of Mahua Ksheerpak daily is very effective in enhancing body power.

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