जामुन के पारंपरिक औषधीय उपयोग / Traditional medicinal uses of Black plum

यह सन्देश रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, नया बस स्टैंड, पाली, कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामफलजी हमें जामुन के पारंपरिक औषधीय गुणों के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि जामुन की कई प्रजातियाँ होती है जिनमे प्रमुख है राजा जामुन, क्षुद्र जामुन और भुई जामुन. सन्निपात ज्वर होने पर साफ़ जामुन के गुदे को मसलकर उसका रस निकालकर उसे कपडे से छान ले. इसे कुछ दिनों तक रखने से यह सिरका बन जाता है. इसे ज्यादा दिनों तक सुरक्षित रखने के लिए इसमें सिट्रिक एसिड या सोडियम बेन्जोएट का उपयोग परिरक्षक के रूप में कर सकते है. इस सिरके को तिल के तेल के साथ मिलाकर किसी सूती कपडे में भिगोकर माथे पर लगाने से सन्निपात ज्वर में आराम मिलता है. जामुन का रस पाचक होता है. जामुन की गुठली को शक्कर के साथ खिलाने से पाचन में सुधार होता है. जामुन अधिक मात्रा में खाने से कब्ज हो सकती है. इसके बीज का चूर्ण लेने से मधुमेह में लाभ होता है. अधिक उल्टियाँ होने की दशा में जामुन की कोमल पत्तियाँ खाने से लाभ होता है. रक्तपित्त होने पर जामुन की पत्तियों का रस देने से लाभ मिलता है. रामफल पटेल का संपर्क है 8815113134

This is a message of Ramfal Patel from Pragya Sanjeevani, Korba, Chhatisgarh. In this message he is telling use traditional medicinal properties of Black plum well known as Jamun in Hindi. In case of Typhus fever make Black plum vinegar by using fresh Mulberry juice. In order to protect it longer add some citric acid or sodium benzoate as a preservative. Applying this vinegar after adding sesame oil on forehead by using any cotton cloth is useful to getting relief in Typhus fever. Eating Black plum seed with sugar improves digestion. Over eating or Black plum can cause constipation. Black plum seed powder is beneficial for diabetic patients. In excessive vomiting chewing soft Black plum leaves is useful. Taking Black plum leaves juice is useful in Haemoptysis. Ramfal Patel’s at 8815113134

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