चावल के पारंपरिक आदिवासी औषधीय उपयोग / Tribal medicinal uses of Rice

यह सन्देश दीपक आचार्य का अभुमका हर्बल्स, अहमदाबाद से है. अपने इस सन्देश में दीपकजी हम चावल की पारंपरिक औषधीय गुणों के बारे में बता रहें है. इनका कहना है कि धान के छिलके उतार दिए जाये तो चावल प्राप्त होता है. चावल शीतल और गुणकारी माना जाता है. चावल की फसल विशेषकर बारिश के मौसम में उगाई जाती पर इसकी उपलब्धता वर्ष भर रहती है. आदिवासी चावल की किनकी यानि चावल की जो छोटे-छोटे टुकडें होते है उसके छाछ में पकाकर महेरी नामक व्यंजन बनाते है. इसे बच्चों और बीमार व्यक्तियों को दिया जाता है. माना जाता है यह अत्यंत गुणकारी होता है. यदि चावल को पीस कर इससे नियमित चेहरे की मालिश की तो माना जाता है इससे चेहरे के दाग-धब्बे मिट जाते है. पातालकोट के आदिवासी मानते है कि चावल के आटे को पानी में मिलाकर उसे छानकर उसमे नमक मिलाकर पकाकर इसे बच्चो को आधा कप और वयस्कों को एक कप की मात्रा में दिया जाये तो इससे शक्ति मिलती है और दस्त में भी यह लाभदायक होता है. गुजरात के डांग आदिवासी मानते है चावल का गुनगुना पानी लगातार रोज पिया जाये तो मोटापा कम हो जाता है. कच्चे चावल के कुछ दानो को दिन में दो-तीन बार चबाने से प्यास कम लगती है. दीपक आचार्य का संपर्क है 9824050784

This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message Deepakji telling tribal medicinal uses of Rice. He says rice is especially grown in rainy season but it is available throughout year. As per tribal belief of Patalkot boil small broken pieces of rice cooked in whey & giving it to children in half cup quantity & to adults in a cup quantity. Supposedly it is extremely beneficial & it is also useful in diarrhea as well. Massaging face by using rice flour is useful for removing scars & stains. Daang tribes of Gujrat believes regular drinking rice boiled water is useful for reducing extra body fat. Chewing few grains of rice 2-3 times a day is helping to control thrust. Deepak Acharya’s at 9824050784

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