गाजर के आदिवासी औषधीय उपयोग / Traditional medicinal uses of Carrot.

यह संदेश दीपक आचार्य का अभूमका हर्बल्स, अहमदाबाद से है. अपने इस संदेश में दीपकजी हमें गाजर के पारंपरिक औषधीय गुणों के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि गाजर एक चिरपरिचित सब्जी अनेक व्यंजनों को बनाने में इस्तेमाल की जाती है. गाजर में कई प्रकार के विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस और कैल्शियम के अलावा कैरोटिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. गाजर के सेवन से शरीर मुलायम और सुंदर बना रहता है. छोटे बच्चों को गाजर का रस पिलाने से उनके दांत आसनी से निकलते है और दूध भी आसानी से पच जाता है. जिनके पेट में गैस बनने की शिकायत हो उन्हें गाजर का रस या गाजर को उबालकर उसका पानी पीना चाहिए. आदिवासी मान्यता के अनुसार यह गाजर के रस की 4-5 बुँदे नाक के दोनों छिद्रों में डालने से हिचकी आनी बंद हो जाती है. गाजर को पीसकर उसे सूंघने से भी हिचकी में लाभ मिलता है. पातालकोट के हर्बल जानकारों के अनुसार गाजर का रस शहद के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है. गुजरात के डांग आदिवासी महिलाओं में मासिक धर्म की परेशानियों में गाजर के बीजों का रस पीने की सलाह देते है. दीपक आचार्य का संपर्क है  9824050784

This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals,, Ahmedabad. In this message he is telling us traditional medicinal uses of Carrot. He says Carrot is used for preparing many delicacies. It is enriched in many vitamins, carbohydrates, phosphorus & calcium. Apart from this it is a good source of beta carotene. Consumption of Carrot is useful to keep our body soft & beautiful. Giving Carrot juice to small children is beneficial for good growth of teethes & helping in digestion of milk as well. As per tribal belief putting 4-5 drops of Carrot juice in both nostrils can stops Hiccups. As per herbal experts of Patalkot taking Carrot juice with Honey is beneficial in impotence. As per Daang tribes of Gujrat giving Carrot seed juice is useful in mensuration related problems. Deepak Acharya’s at  9824050784

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