हृदय रोग का पारंपरिक उपचार / Traditional remedy of Heart diseases

यह सन्देश दीपक आचार्य का अभूमका हर्बल्स, अहमदाबाद से है. अपने इस सन्देश में दीपकजी हमें हृदय रोग का पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि अर्जुन का वृक्ष हृदय रोगियों के लिए वरदान स्वरूप है. हृदय रोगों के उपचार के लिए इस वृक्ष की छाल और फल उपयोग में लाए जाते है. आदिवासी इसका उपयोग उच्च रक्तचाप और विभिन्न हृदय विकारों के उपचार के लिए करते है. अर्जुन छाल और जंगली प्याज के कंद को समान मात्रा में लेकर उसका चूर्ण बना ले. इस चूर्ण को प्रतिदिन आधे चम्मच की मात्रा में दूध के साथ लेने हृदय रोगियों के लिए हितकर होता है. पुनर्नवा की पंचांग (पत्तियाँ, छाल, फुल, बीज, जड़) का रस में अर्जुन छाल समान मात्रा में मिलाकर दिन में एक बार लेना हृदय के विकारो में लाभदायक होता है. दिन धड़कन असामान्य होने पर 1 गिलास टमाटर के रस में एक चम्मच अर्जुन छाल का चूर्ण मिलाकर नियमित सेवन किया जाए तो दिल की धड़कन सामान्य होने लगती है. अगर हृदयाघात के लक्षण उभरे तो अर्जुन की छाल का चूर्ण जीभ पर रखने से आराम मिलता है. दीपक आचार्य का संपर्क है 9824050784

This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message Deepakji telling us tribal traditional remedy for Heart related problems. He say’s Arjun tree (Terminalia arjuna) is very useful for Heart patients. For medicinal purpose its bark & fruit is useful. As per tribal knowledge make fine powder of Arjun’s bark & wild onion in equal quantity. Taking this powder in half spoon quantity with milk daily is useful for Heart patients. Taking Panchang (leaves, bark, flowers, seeds & root) juice of Punarnava  (Boerhavia diffusa) after adding Arjun’s bark powder in equal quantity is beneficial for heart patients. In case of irregular heart beating taking glassful Tomato juice after adding 1 spoon Arjun’s bark powder regularly is useful for controlling irregular heart beat. If heart attack symptoms is appears putting little Arjun’s bark powder on tongue is useful. Deepak Acharya’s at 9824050784

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