Tag Archives: अदरक / Ginger

हृदय रोगों से बचाव का पारंपरिक नुस्खा – Traditional tip for preventing ardiovascular diseases

यह सन्देश लोमेश कुमार बच का कोरबा छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में लोमेशजी हमें हृदय रोगों से बचाव का पारंपरिक नुस्खा बता रहे है. इनका कहना है कि यह  साधारण पर असरकारक योग है. इसे बनाने के लिए 1 चम्मच लहसुन  का रस, 1 चम्मच बंगला पान का रस, 1 चम्मच अदरक का रस और 1 चम्मच शहद को मिलाकर 1 मात्रा बनाकर 21 दिनों तक सुबह शाम और  21 दिनों के पश्चात इसकी 1 मात्रा प्रतिदिन लेने से हृदय रोगों से बचाव होता है इसे अन्य चल रही औषधियों के साथ भी लिया जा सकता है. इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं है.

This is a message of Lomesh Kumar Bach from Korba, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional tip for preventing cardiovascular diseases. He says for preparing this combination take 1 spoon Garlic juice, 1 spoon Bengal betel leaves juice, 1 spoon Ginger juice & 1 spoon Honey & mixed well.  Taking this combination twice a day for 21 consecutive days & hereafter once a day is beneficial for the prevention of cardiovascular disease. This combination can be taken along with other ongoing medicines. This combination does not have any side effects.

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मलेरिया का पारंपरिक उपचार / Traditional treatment of Malaria

यह सन्देश चन्द्रकान्त शर्मा का मुंगेली, छत्तीसगढ़ से है. इस सन्देश में चंद्रकांतजी हमें मलेरिया के ज्वर के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि मलेरिया होने पर हरसिंगार के पत्ते का सेवन अदरक के रस के साथ शक्कर मिलाकर किया जाये तो मलेरिया में लाभ होता है. फिटकरी को तवे पर फुला कर उसके 1-2 रत्ती चूर्ण को बताशे में डालकर दिन में 3 बार सेवन करने से लाभ मिलता है. 11 तुलसी की पत्तियों और 11 दाने कालीमिर्च को पीसकर उसका काढ़ा बनाकर दिन में 2 बार लेने से मलेरिया में आराम मिलता है. चंद्रकांत शर्मा का संपर्क है 9893327457

This is a message of Chandrakant Sharma from Mungeli, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional treatment of Malaria. He says taking one leaf of Night jasmine (Nyctanthes arbor-tristis) with little ginger juice & sugar is useful. Taking 250 mg roasted alum powder after pouring in Batasha (It is a puffed sugar commonly known as sweet sugar drop) 3 times a day is beneficial. Drinking decoction of 11 basil leaves & 11 nos black pepper twice a day is useful. Chandrakant Sharma @ 9893327457

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खाँसी का पारंपरिक उपचार / Traditional treatment of Cough

यह सन्देश वैद्य हरीश चावड़ा का ग्राम गुंडरदेही, जिला बालोद, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में वह हमें खाँसी के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि किसी भी प्रकार के खाँसी होने पर मुल्हैठी और त्रिकुट (कालीमिर्च, लौंग पीपर और अदरक का चूर्ण) को समभाग लेकर उसे गुड के साथ मिलाकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें. इन गोलियों 2-2 गोली की मात्रा में सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ लें. अगर इस उपचार से लाभ न मिले तो बाजार से लाल फिटकरी लाकर उसे तवे पर गर्म करके फुला लें. इसके ठन्डे होने पर इसे चिकना पीसकर यह 1 चुटकी चूर्ण एक चम्मच शहद में मिलाकर चटाने से किसी भी प्रकार की खांसी में लाभ होता है. हरीश चावड़ा का संपर्क है 9893765366

This is a message of vaid Harish Chawada from village Gundardehi, Dist. Balod, Chhatisgarh. In this message he is suggesting traditional treatment method of Cough. He says take Licorice & Trikut (mixture of black peeper, dry ginger & long pepper) in equal ratio and after adding jaggery make gram sized pills. Taking 2 pills with lukewarm water twice a day is useful. If you get no benefit by doing so, buy Potash alum from local market & inflate it on hot pan & grind well until fine powder is formed. Taking 1 pinch of this powder with one spoon honey is beneficial. Harish Chawda is @ 9893765366

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मोतीझरा का पारंपरिक उपचार / Traditional treatment of Typhoid

यह सन्देश रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, पाली, कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. इस सन्देश में रामफलजी हमें मोतीझरा के में होने वाले बुखार में उपयोगी पारंपरिक उपचार की विधि बता रहे है. पहली विधि है 10 मी.ली तुलसी की पत्तियों का रस, 10 मी.ली. अदरक का रस, 5 कालीमिर्च के दाने इन सभी को 1 चम्मच शहद के साथ मोतीझरा से पीड़ित रोगी को पिलाए और चादर ओढाकर सुला दें. इससे मोतीझरा के बुखार में लाभ मिलता है. दूसरी विधि है 10 मी.ली तुलसी की पत्तियों का रस, 10 ग्राम दालचीनी, 10 ग्राम जावित्री को 1 लीटर पानी में उबालें और जब ¼ पानी शेष बचे तो इसे मोतीझरा के रोगी को थोड़े-थोड़े अंतराल में पिलाएं इससे मोतीझरा में लाभ मिलता है. रामफल पटेल का संपर्क है 8815113134

This is a message of vaid Ramfal Patel from Pragya Sanjeevani, Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message is is suggesting us traditional treatment tips for Typhoid. First tip he is giving is take 10 ml basil leaves juice, 10 ml ginger juice, 5 nos black pepper and giving this combination after adding 1 spoon honey to the Typhoid patient is beneficial for reducing fever. Second one is boil 10 ml basil leaves juice, 10 gms cinnamon & 10 gms mace in 1 liter water & when  ¼ water remains giving this to Typhoid patient in little quantity in short intervals is useful. Ramfal Patel is @ 8815113134

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श्वांसरोग का पारंपरिक उपचार / Traditional treatment of Respiratory disorders

यह सन्देश वैद्य हरीश चावड़ा का गुंडरदेही, जिला बालोद, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में हरीशजी हमें श्वांसरोग के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि अगर श्वांस लेने में कठिनाई होना, रात में खांसी अघिक आना, घबराहट होना ऐसा होने पर अडूसे की पत्तियों के रस का काढ़ा बनाकर पीना चाहिए. त्रिकुट (कालीमिर्च, लौंग पीपर और अदरक का चूर्ण) को गुड के साथ मिलाकर गर्म दूध के साथ पीना चाहिये. अगर इससे से भी लाभ नहीं मिले तो एक गिलास गर्म दूध में ½ चम्मच खाने का सोडा मिलाकर पीने से कफ साफ़ होने लगता है और श्वांसरोग में आराम मिलता है. रोज अकौए जिसे मदार भी कहते है इसका 1 सफ़ेद फूल रोज सुबह गुड के साथ 8-10 दिनों तक खाने से आराम मिलता है. हरीश चावड़ा का संपर्क है 9893765366

This is a message of Harish Chawda from village Gundardehi, Dist. Balod, Chhatisgarh. In this message he is telling use traditional treatment of Respiratory disorders. He says if you have difficulty in taking breath, more cough, anxiety drinking decoction of Malabar nut (Justicia adhatoda) tree leaves is useful. Drinking warm milk after adding Trikut (mixture of black peeper, dry ginger & long pepper) & jaggery is helpful. If you get no benefit by doing so, drink warm milk after mixing ½ spoon baking soda it is helpful in removing cough. Eat daily 1 White crown flower daily with jaggery for consecutive 8-10 days is beneficial. Harish Chadwa is @ 9893765366

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टमाटर के पारंपरिक औषधीय उपयोग / Traditional medicinal uses of Tomatoes

यह सन्देश दीपक आचार्य का अभूमका हर्बल्स अहमदाबाद से है. अपने इस सन्देश में दीपकजी हमें टमाटर के पारंपरिक औषधीय उपयोगो के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि टमाटर का उपयोग हर भारतीय रसोई में होता है. टमाटर में पाए जाने वाले विटामिन गर्म होने पर भी नष्ट नहीं होते है. आदिवासियों के अनुसार टमाटर संतरे और अंगूर से ज्यादा लाभदायक होता है. पातालकोट के आदिवासी मानते है यह दातों और हड्डियों की कमजोरी को दूर करता है. जिन्हें रक्ताल्पता की शिकायत हो उन्हें 1 गिलास टमाटर का रस प्रतिदिन पीना चाहिए. इससे रक्तहीनता दूर होकर रक्त की वृद्धि होती है. कम वजन के व्यक्तियों को टमाटर का सेवन प्रतिदिन करना चाहिए. गुजरात के डांग हर्बल जानकारों के अनुसार लाल टमाटर पर अदरक और सैंधा नमक डालकर खाने से अपेंडिक्स में लाभ मिलता है. चेहरे पर यदि काले दाग-धब्बे हो तो टमाटर के रस में रुई भिगोकर कर चेहरे पर लगाने से दाग-धब्बे कम हो जाते है. टमाटर की चटनी में कालीमिर्च और सैंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम खाने से पेट के कृमि नष्ट हो जाते है. जिन लोगो को अक्सर मुहँ में छाले होने की शिकायत रहती हो उन्हें टमाटर का अधिक सेवन करना चाहिए. दीपक आचार्य का संपर्क है 9824050784

This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message he is telling us traditional medicinal uses of Tomato. He says Tomato is used in every Indian kitchen. Vitamins found in Tomato are not destroyed even after heating. According to tribal belief Tomato is more useful than Orange & Grapes. As per tribal knowledge of Patalkot it is useful for removing weakness of teethes & bones. Anemic persons should drink 1 glass Tomato juice everyday. As per herbal experts of Daang Gujrat, Eating Tomato after sprinkling little ginger & rock salt is beneficial to get relax in Appendices. Applying Tomato juice on face using cotton Pledget is useful to get rid of blot & stains. Eating tomato sauce after adding black pepper & rock salt twice a day is useful for destroying stomach worms. Regular consumption of Tomatoes is beneficial for curing mouth blisters. Deepak Acharya’s at 9824050784.

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तुलसी के औषधीय गुण / Medicinal properties of Basil

यह सन्देश डॉ. एच डी गाँधी का धर्मार्थ दवाखाना मोतीनगर जिला रायपुर, छत्तीसगढ़ से है…इस सन्देश में डॉ. गाँधी हमें तुलसी के औषधीय गुणों के बारे में बता रहे है…इनका कहना है की तुलसी के पौधे सामान्यतः सभी हिन्दू घरों में पाए जाते है…तुलसी के कई प्रकार होते है पर श्वेत तुलसी और श्यामा तुलसी ही प्रायः ज्यादा जानी जाती है… श्यामा तुलसी शीत, कफ एवं ज्वर नाशक है…फेफड़े से कफ को निकालने के लिए श्यामा तुलसी का काली मिर्च के साथ प्रयोग किया जाता है… तुलसी के अन्य उपयोग इस प्रकार है.

पहला: यदि बच्चों को लू लग जाये तो तुलसी के पत्तों का रस चीनी मिलाकर पिलाना फायदेमंद होता है..इस प्रकार करने से लू का प्रकोप कम हो जाता है…

दूसरा: मलेरिया और ठण्ड लगकर आने वाले ज्वर में तथा बच्चों के पसली के दर्द में तुलसी की 5-10 पत्तियों का रस शहद में मिलाकर दिन में 3 बार देने से आराम मिलता है…

तीसरा: खांसी होने पर तुलसी, अदरक और पान की पत्तियों का रस काली मिर्च और शहद के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है…

चौथा: तुलसी की पत्तियों का रस दाद पर लगाने से दाद कुछ दिनों में ठीक हो जाता है…

पांचवा: बच्चों के यकृत के रोग में तुलसी और ग्वारपाठे का रस सेवन कराने से लाभ होता है…

छठा: मूर्छा या बेहोशी की अवस्था में पर तुलसी की पत्तियों का रस सैंधा नमक मिलाकर दो बूंद नाक में डालने से मूर्छा दूर हो जाती है…

सातवाँ: तुलसी के पत्तों और सैंधा नमक मिलाकर बनाया काढ़ा पेट दर्द, वायु विकार, आँतों की सूजन और श्वांस रोग में लाभदायक है…

आँठवा: तुलसी की पत्तियों के रस को पुदीने और सौंठ के अर्क में मिलाकर पीने से वमन (उल्टी) रुक जाती है…

नवां: तुलसी के बीजों का 1 ग्राम चूर्ण दूध या मक्खन के साथ सुबह और शाम कुछ माह लेने से नपुंसकता और शीघ्रपतन में लाभ होता है…

दसवां: फेफड़ों में कफ होने पर तुलसी के सूखे पत्ते, कत्था, कपूर और इलायची के दाने, इससे दस गुना शक्कर मिलाकर पीस ले और इसको 1-1 चम्मच पानी के साथ सुबह-शाम लेने से कफ में आराम मिलता है…

ग्याहरवा: किसी भी रोग होने पर अगर प्यास ज्यादा लगती हो तो..तुलसी के पत्तों का रस पानी, नीबू और मिश्री मिलाकर पीने से प्यास का अधिक लगना कम हो जाता है…

This is a message from Dr. H D Gandhi from “Darmarth Dawakhana” Motinagar, Dist Raipur, Chhatisgarh… In this message Dr. Gandhi telling us about medicinal properties of Basil. In Hindu homes this plant is usually found due to its mythological values. There are different type of Basil are found  but mainly two types of them is much known White Basil and second one is Dark Basil. Dark Basin along with Black pepper can be used to expel cough from lungs. Many other medicinal properties of Basil are given below:

In case of sunstroke juice of Basil leaves and sugar is an effective remedy to reduce the effect of sunstroke. In Malaria, Cold & fever giving juice of 5-10 Basil leaves with honey three times a day is useful. In cough giving juice of Basil leaves, Ginger & Betel leaf after adding black pepper & honey is beneficial. Applying juice of Basil leaves on eczema is useful. Juice of Basil leaves & Aloe vera can be given to children for liver problems. Giving decoction of Basil leaves after adding rock salt is useful to get rid of stomachache, swelling of intestine, respiratory diseases. In case of vomiting giving juice of Basil leaves with Ginger & Mint extract is useful.

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कमरदर्द का पारंपरिक उपचार / Traditional treatment of Lower joint pain

यह सन्देश निर्मल महतो का नवाडी, बोकारो, झारखण्ड से है. अपने इस सन्देश में निर्मलजी हमें कमरदर्द का पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहें है. इनका कहना है कि कमरदर्द होने की स्थिति में तली हुए वस्तुएं और चावल का सेवन न करें. पानी को उबालकर ठंडा करके पियें. रात को 60~70 ग्राम गेहूँ को साफ़ करके पानी में भीगा दें और सुबह इन भीगे हुए गेहूँ को 30 ग्राम खसखस और 30 ग्राम सूखी धनियाँ के बीजों के साथ पीस लें. जिससे यह चटनी की भांति हो जाएगी. इसे आधा लीटर दूध में डाल कर उबालें. इस प्रकार बनी खीर का 2 सप्ताह तक नियमित सेवन करने से कमरदर्द में असाधारण लाभ मिलता है. एक जायफल को पानी में घीसकर तिल के तेल में पकाएं. इस तेल से मालिश करने से भी कमरदर्द में लाभ मिलता है. एक चम्मच अदरक के रस का आधे चम्मच शहद के साथ दिन में तीन बार सेवन करें. इससे भी कमरदर्द में आराम मिलेगा. निर्मल महतो का संपर्क है 9204332389

This is a message of Nirmal Mahto from Nawadi, Bokaro, Jharkhand. In this message he is telling us traditional remedy of lower back pain (Lumbar). He say’s in case of lower back pain the affiliated person should avoid rice & oily products. Use cooled boiled water. Soak 60~70 gms wheat overnight in water. In morning grind this soaked wheat with 30 gms Poppy seeds & 30 gms dried Coriander seeds together and boil this preparation in half liter milk. Taking this condensed milk regularly for 2 weeks is useful for getting relief from lower back pain. Rub Nutmeg on any clean rough surface using little water until paste is formed & fry this paste using in Sesame oil. This oil is effective for reducing lower back pain. Taking spoonful Ginger juice with half spoon Honey thrice a day is also effective in lower joint pain. Nirmal Mahto’s at 9204332389

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Tribal procedure of making Tea / चाय बनाने का पारंपरिक तरीका

यह संदेश श्री दीपक आचार्य का अभुमका हर्बल्स प्रा. ली, अहमदाबाद से हैइस संदेश में दीपकजी का कहना है की ठण्ड का मौसम जोरो पर है और ऐसे में चाय का अपना अलग ही महत्व है यह हमें आदिवासी अंचलों में लोगो द्वारा बनाई जाने वाली चाय के बारे में बता रहे हैइनका कहना है की इनके द्वारा बनाई जाने वाली चाय न केवल ठण्ड से निजात दिलाती है बल्कि यह चाय सेहत के लिए भी लाभदायक होती हैइसे बनाने के लिए दो कप पानी में एक चम्मच चाय मिलाकर खौलाते है जब यह एक कप बच जाती है तो फिर उसमे 3 चम्मच शक्कर मिलाई जाती हैआदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार इस तरह की मीठी चाय न केवल दिमाग को शांत रखने में सक्रिय भूमिका निभाती है बल्कि यह तनाव को भी कम करती हैदूसरे प्रकार की चाय बुंदेलखंड के ग्रामीण तैयार करते है वह इसे गौती चाय कहते हैइसके लिए लेमन ग्रास की 2-3 पत्तियों को कुचलकर 2 कप पाने में उबाला जाता हैफिर इसमें शक्कर मिलाई जाती है स्वादानुसार इसमें कुछ बूंदे नीबू रस और थोडा अदरक भी डालते हैइस चाय में दूध का उपयोग नहीं किया जाता हैयह चाय एंटीआक्सीडेंट से भरपूर होती है जो हमें बाहरी संक्रमणों से बचाती हैदीपकजी का संपर्क है 9824050784

This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals Pvt. Ltd, Ahmedaba …In this message Deepakji is telling us traditional procedure of tea making in Tribal areas… He said this sweet tea not only helpful to beat cold but it is very beneficial for health as well… To make this sweet tea boil 2 cup water with 1 spoon tea leaves when water remains 1 cup add 3 spoons sugar…as per Tribal analysts this tea keeps our mind calm & reduce depression…Second type of tea commonly used in the rural areas of Bundelkand and well known as “Gauti”…To prepare this tea boil 2 cup water by adding 2 -3 crushed leaves of Lemon grass then add sugar, lemon juice & ginger as per taste… This “Gauti” tea is full of Anti-oxidant properties and helping to fight infections…Deepakji’s at 9824050784

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अदरक के गुण

यह संदेश सरोजनी गोयल का बाल्को, जिला कोरबा, छत्तीसगढ़ से है…इस संदेश में सरोजनीजी अदरक के गुणों के बारे में बता रहीं है…उनका कहना है की अदरक सामान्यतः सभी घरों में आसानी से उपलब्ध होता है…इसे अक्सर चाय में डालकर पिया जाता है..और यह कई रोगों की अचूक दवा भी है…गठियावात के रोगी इसे गाय के घी में भुनकर खाए और तेल में तलकर उससे जोड़ो की मालिश करें तो उन्हें आराम मिलेगा…लकवा होने की दशा में रोगी को अदरक शहद में मिलकर खिलाये लाभ होगा..अगर पेट में तकलीफ या उल्टियाँ हो रही हो तो 5 ग्राम अदरक के रस में 5 ग्राम पुदीने का रस 2 ग्राम सैंधा नमक मिलकर खिलाये लाभ होगा…अगर खांसी हो रही हो तो अदरक के रस में उतना ही निम्बू का रस मिलकर दे खांसी में आराम होगा…नजला और जुकाम होने पर अदरक के छोटे-छोटे टुकडे काट ले और उसी के वजन के बराबर देशी घी में भुन ले..और उसमे सौंठ, जीरा, कालीमिर्च, नागकेसर, इलाइची, धनिया और तेजपत्ता मिलाकर काढ़ा बना ले और इसका प्रयोग करें…अगर उल्टियाँ हो रही हो तो अदरक का रस प्याज के रस में मिलकर पियें आराम होगा…सरोजनी गोयल का संपर्क है: 9165058483

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