Tag Archives: अश्वगंधा / Withania somnifera

शीतकाल में उपयोगी शक्तिवर्धक चूर्ण – Health energizer for winter season

स्वास्थ्य स्वर से डॉ. एच डी गाँधी आज हमें शीतकाल में उपयोगी शक्तिवर्धक चूर्ण बनाने की विधि बता रहें है. इनका कहना है की इस चूर्ण का उपयोग करने से पहले 3 दिनों तक एक कप गुनगुने दूध में 2 चम्मच अरंड का तेल मिलाकर सुबह-शाम लेने से पेट साफ़ कर लें. यह चूर्ण बनाने के लिए 50 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण, 50 ग्राम विधारा चूर्ण, 50 ग्राम मुलैठी चूर्ण, 25 ग्राम सौंठ चूर्ण, 25 ग्राम गिलोय सत्व, 50 ग्राम सफ़ेद मूसली चूर्ण और 50 ग्राम सतावर चूर्ण को एक साथ मिलाकर रखे. इस 1 चम्मच चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम लेना शीतकाल में लाभदायक है.

Dr. H D Gandi of Swasthya Swara is suggesting health energizer useful especially in winter season. For making this combination take 50 gms Ashwagandha (Withania somnifera) also known as Indian ginseng, 50 gms Vidhara (Argyreia Speciosa), 50 gms Mulheti (Liquorice), 25 gms dried Ginger, 25 gms Giloy (Tinospora cordifolia) extract, 50 gms Musli (Chlorophytum borivilianum) & 50 gms Satavar (Asparagus racemosus) all in powder form & mix them together and keep in any airtight container. Taking this combination in 1 spoon quantity with lukewarm milk is beneficial in winter season. It is advisable that three days prior to start taking this combination clean your stomach by taking 2 spoon castor oil in lukewarm milk twice a day. 

Asparagus racemosus

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गठियावात के उपचार लिए पारंपरिक मिठाई – Traditional sweet for Arthritis

यह सन्देश वैद्य एच डी गाँधी का तामिया, छिंदवाडा, मध्यप्रदेश से है. अपने इस सन्देश में वह वहाँ के वैद्य मोहम्मद लतीफ़ खान से गठियावात के उपचार के सम्बन्ध में जानकारी ले रहे है. लतीफ़ खानजी का कहना है कि गठियावात होने की स्थिति में  1 किलो गेंहू के आटे में  25 ग्राम बड़ी पीपर, 25 ग्राम छोटी पीपर, 50 ग्राम असगंध मिलाकर इसे ग्वारपाठे के गुदे से गुंथे इसके बाद काजू, किशमिश, बादाम, अखरोड़ और पिस्ता सभी को 100 ग्राम की मात्रा में लेकर उसके छोटे टुकड़े काटकर इसे 250 मी.ली घी में हल्का भूनकर उसमे उस गुंथे हुए आटे और 1 किलो पुराना गुड मिलाकर लगभग 60-60 ग्राम के लड्डू बना लें. 21 दिनों तक प्रतिदिन इन 1-1 लड्डू को सुबह-शाम खाली पेट खाकर 250 ग्राम दूध दूध पीने से गठियावात में आराम मिलता है.

Vaidya Mohd. Lateef Khan is telling how to prepare traditional sweet useful in Arthrits to Dr. H D Gandhi of Swasthya Swara. As per him add small & big Peepar (Piper longam) 25 each, 50 gms Asgangh also known as Ashwagandha (Withania somnifera) to 1 Kg wheat flour & after adding Aloe vera pulp mix all together to make hard dough. Afterwards light roast 100 gms each pieces of Cashew, Walnut, Almond, Raisins (Dried grapes) & Pistachios in 250 ml Ghee. Thereafter adding prepared dough and 1 kg old Jaggery make lemon sized balls (Laddu) of 60 gms. Taking  1 Laddu empty stomach twice a day with 250 ml milk for 21 days is beneficial in Arthritis.

 

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दर्द का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of pain

यह सन्देश वैद्य आर के पवार का भीमडोंगरी, मंडला, मध्यप्रदेश से है. अपने इस सन्देश में वह हमें दर्द  के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि इस उपचार के लिए 25 ग्राम ग्वारपाठे का उपरी सूखी छाल, 10 ग्राम सूखी अर्जुन छाल, 10 ग्राम पीपर मूल, 10 ग्राम निर्गुन्डी के बीज, 10 ग्राम अश्वगंधा, 20 ग्राम त्रिफला, 20 ग्राम मूसली, 5 ग्राम मंडूर भस्म और 5 ग्राम अभ्रक भस्म को पीसकर इसे किसी सूती कपडे से छान कर रख ले. इसे पीड़ित व्यक्ति को दिन में दो बार 5-5 ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ देने से लाभ मिलता है. इस उपचार के दौरान इमली, बैंगन और शराब का सेवन न करें और यह उपचार गर्भवती स्त्री को नहीं देना चाहिए.

This is a message of vaidya R K Pawar, from Bheemdongri, Mandla, Madhya Pradesh. In this message he is suggesting us traditional treatment to get rid of pain. He says grind 25 gms dried Aloevera skin, 10 gms dried Arjun chhal (Terminalia arjuna), 10 gms Peeper mul (Piper longum), 10 gms Nirgundi seeds (Vitex negundo), 10 gms Ashwagandha (Indian ginseng), 20 gms Triphala, 20 gms Musli (Chlorophytum borivilianum), 5 gms Mandur bhasm (prepared from iron oxide) & 5 gms Mica ash to make powder after cloth filtration keep this powder in any glass bottle. Taking this combination twice a day in 5 gms quantity with cow milk is useful. Precaution should be taken while treatment avoid tamarind, brinjal & liquor. This combination cannot be given to pregnant women. 

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पारंपरिक शक्तिवर्धक नुस्खा – Traditional tips for vitality

यह सन्देश वैद्य अनंतराम श्रीमाली का सागर, मध्यप्रदेश से है. अपने इस सन्देश में अनंतरामजी हमें पारंपरिक शुक्रवर्धक पौष्टिक नुस्खा बता रहे है जिनका प्रयोग स्त्री और पुरुष दोनों ही कर सकते है. इसके लिए 5 लीटर दूध को 1 लीटर बचने तक औटाएं और जब दूध 1 लीटर बचे तो उसमे 200 ग्राम अश्वगंध चूर्ण, 200 ग्राम सतावर चूर्ण, 200 ग्राम कच्चे सूखे हुए गूलर फल का चूर्ण अच्छे से मिलाकर 20-20 ग्राम के पेढे बनाकर किसी काँच की बोतल में सुरक्षित रखे. इसे 1 पेढा सुबह निराहार प्रतिदिन 6 माह तक 200 मी.ली गाय के दूध अथवा 5 ग्राम घी के साथ लगातार लेने से शुक्राणुओं की वृद्धि होती है. स्त्री और पुरुष दोनों को शरीर पुष्ट होता है.

This is a message of vaid Anantram Shrimali from Sagar, Madhya Pradesh. In this message he is suggesting traditional nutritional tips for men & women. It is also useful for increasing sperm count. Boil 5 liter milk until it remains 1 liter. Hereafter, add 200 gms Ashwagandha (Withania somnifera) also known as winter cherry, 200 gms Satawar (Asparagus racemosus) also known as wild asparagus & 200 gms dried raw Cluster fig fruit powder & mix well. Make 20 gms pills from this combination. Taking this pills in 1 pill daily morning empty stomach with 200 ml cow milk or 5 gms ghee continuously for 6 months is beneficial for increasing sperm count & vitality.

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शीघ्रपतन का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Premature Ejaculation

यह सन्देश वैद्य दिलीप गुप्ता का रायपुर से है. अपने इस सन्देश में दिलीपजी हमें शीघ्रपतन में लाभदायक पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि शीघ्रपतन की समस्या होने पर 50 ग्राम गोखरू, 50 ग्राम ताल मखाना, 50 ग्राम सतावर, 50 ग्राम विदारीकन्द,  50 ग्राम अश्वगंधा, 50 ग्राम विधारा, 50 ग्राम सफ़ेद चिरमिटी, 100 ग्राम मिश्री को मिलाकार बारीक़ चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को 4-5 की मात्रा में सुबह नाश्ते और रात्रि भोजन के बाद लगातार 40 दिनों तक लेने से शीघ्रपतन की समस्या में लाभ मिलता है. दिलीप गुप्ता का संपर्क है 8109855459

This is a message of Dilip Gupta from Raipur. In this message he is suggesting traditional remedy to treat premature ejaculation. He says in case of this problem grind 50 gms (Tribulus terrestris) also known as puncture vine, 50 gms Talmakhana (Astercantha longifolia), 50 gms Satavar (Asparagus racemosus), 50 gms Vidarikand (Pueraria tuberosa) also known as Indian kudzu, 50 gms also Ashwagandha (Withania somnifera) also known as Indian ginseng, 50 gms Vidhara (Argyreia speciosa) also known as Morning glory, 50 gms Safed chirmiti (Abrus precatorius) also known as Coral bead vine to make powder. Taking this powder in 4-5 gms quantity after breakfast & dinner for 40 is is useful in premature ejaculation problem. Dilip Gupta @ 8109855459

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दुर्बलता का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of weakness

यह सन्देश वैद्य दिलीप गुप्ता का का रायपुर, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में दिलीपजी हमें कसाय रोग (दुबलापन और दुर्बलता) को दूर करने का उपचार बता रहे है. इनका कहना है कि इसके उपचार के लिए अश्वगंधा 50 ग्राम, काली मूसली 50 ग्राम, सफ़ेद मूसली 50 ग्राम और मुलैठी 50 ग्राम इन सभी का बारीक़ चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को 3-5 ग्राम की मात्रा में सुबह नाश्ते के बाद और रात्रि के भोजन के बाद 3-5 ग्राम की मात्रा में लेने से दुर्बलता दूर होती है. यह एक शक्ति प्रदान करने वाली औषधि है.

This is a message of vaid Dilip Gupta from Raipur, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional remedy of weakness. He says grind 50 gms Ashwagandha (Withania somnifera) also known as Indian ginseng, 50 gms Kaali Musli known as Orchid palm grass, 50 gms, 50 gms Safed musli (Chlorophytum borivilianum) & 50 gms Liquorice to make powder. Taking this powder in 3-5 gms quantity after breakfast & 3-5 gms at bed time is useful. 

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अश्वगंधा की उपयोगी गुण / Medicinal properties of Indian ginseng

यह सन्देश चंद्रकांत शर्मा का ब्लाक लोरमी, जिला मुंगेली, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में चंद्रकांतजी हमें अश्वगंधा के उपयोगी गुणों के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि अश्वगंधा शरीर को बल प्रदान करने वाली, मस्तिष्क की शक्ति को बढ़ाने वाली तथा वजन बढ़ाने वाली औषधि है. अश्वगंधा की जड़ को कूट-पीसकर इसे कपडे से छान कर इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर इसे ½ ग्राम मात्रा में लेते रहने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है और धातु दोषों और स्वप्नदोष में लाभ होता है. अश्वगंधा के नियमित सेवन करने से वृद्धावस्था की कमजोरी कम हो जाती है. इसे खाते रहने से मनुष्य पक्षाघात, अर्धांगवात, कमरदर्द और वात रोगों से बचा रहता है. अश्वगंधा स्नायु तंत्र को मजबूत करता है. इससे स्तनपान कराने वाली स्त्रियों के दूध में वृद्धि होती है. इसके सेवन से क्षय रोग, लंबी बीमारी से उबरे व्यक्तियों और प्रसूता की कमजोरी को दूर होती है. इसके चूर्ण को गोमूत्र में घोट कर लेप करने से कंठमाला की गिल्टियाँ और जोड़ो की सूजन दूर होती है. चंद्रकांत शर्मा का संपर्क है 9893327457

This is a message of Chandrakant Sharma from block Lormi, Mungeli, chhatisgarh. In this message he is describing us medicinal properties of Indian Ginseng well known as Ashwagandha in Hindi. He says Indian Ginseng is useful to strengthen body & for enhancing brain power. Grind Indian Ginseng root & after filtration add equal amount of sugar candy. Giving this combination in ½ gms quantity using milk continuous for few days is useful in sexual problems. Regular intake of Indian Ginseng decreases old age weakness. Regular intake of Indian Ginseng is useful for abstaining Paralysis & lumber pain & it is strengthen nervous system as well. Indian Ginseng is increasing milk flow of lactating women. Chandrakant Sharma’s at 9893327457

 

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पारंपरिक पुष्ठिवर्धक नुस्खे / Traditional method to enhancing vitality

यह सन्देश चंद्रकांत शर्मा का जिला मुंगेली, छत्तीसगढ़ से है अपने इस सन्देश में चंद्रकांतजी हमें शरीर को पुष्ट करने का पारंपरिक नुस्खे बता रहें है.

पहला: इनका कहना है की 1-2 ग्राम सौंठ या उतनी ही शिलाजीत या 2-5 ग्राम शहद में समभाग अदरक लेने से शरीर             पुष्ट होता है.

दूसरा: 3-5 अंजीर को दूध में उबालकर या अंजीर खाकर दूध पीने से शक्ति बढती है.

तीसरा: 1-2 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण को आंवले के 10-40 मी.ली. रस से 15 दिनों तक लेने से शरीर को बल मिलता है.

चौथा: एक गिलास पानी में एक नीबू निचोड़कर उसने 2 किशमिश रात भर भिगो कर रखें. प्रातः उस पानी को भिगोए              हुए किशमिश के साथ चबाकर पी लें यह एक शक्तिवर्धक प्रयोग है.

पांचवा: शाम को गुनगुने पानी में 2 चुटकी हल्दी मिलाकर कर पीने से शरीर निरोगी रहता है.

चंद्रकांत शर्मा का संपर्क है: 9893327457

This is a message of Chandrakant Sharma from Mungeli, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us some traditional tips to Energize our body. He say’s taking 1-2 gms Dry Ginger powder or Mumijo in same quantity or 2-5 gms Ginger & Honey in equal ratio is very effective way to energize our body. Mix 1-2 gms Indian ginseng powder well known as Ashwagandha in 10-40 ml Indian gooseberry (Amla) juice and take this combination for 15 days to energize our body. Squeeze a lemon in glassful water and soak 2 Raisins overnight in it. In the morning eat soaked raisins with water. In evening take 2 pinch Turmeric powder in lukewarm water to enhance vitality. Chandrakant Sharma is at 9893327457

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श्वेत प्रदर की पारंपरिक चिकित्सा

यह संदेश निर्मल कुमार अवस्थी का है जो चांपा छत्तीसगढ़ में पारंपरिक चिकित्सक रमेश कुमार पटेल का साक्षात्कार कर रहे है…रमेश कुमार का कहना है की श्वेत प्रदर होने पर वह अशोक की छाल, सेमल के छाल, अपामार्ग, अश्वगंधा की जड़, सतावर की जड़ का काढ़ा बना कर एक सप्ताह की खुराक देते है… यह खुराक सुबह-शाम को खाना खाने से पहले 10 मी.ली. दी जाती है…. निर्मल कुमार अवस्थी का संपर्क है:09685441912

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वातनाशक तेल

यह संदेश वैध श्री निर्मल अवस्थी का , वार्ड क्रमांक 4, कस्तूरबा नगर बिलासपुर छत्तीसगढ़ से है:

निर्मलजी इस संदेश में वातनाशक तेल के बारे में बता रहे है जो घुटने, कमर और शरीर दर्द में लाभदायक है जिसे हम घर में ही बना सकते है….इसके लिए सरसों का तेल (Mustered Oil) 500 ग्राम, केवड़े के बीज 25 ग्राम, धतूरे के बीज 25 ग्राम, तम्बाकू जर्दा (Tobacco Leaves)25 ग्राम और लहसुन की कलियाँ (Garlic) 25 ग्राम, इस सभी सामग्रियों को साफ़ करके सरसों के तेल में डाल कर धीमी आंच पर पकाएं जब सारे घटक (सामग्री) जल जाएँ और तेल 3/4 बच जाये तो इस तेल तो ठंडा कर के छान कर रख ले….यह तेल दर्द वाले स्थान पर लगा कर मालिश करे  और अकौए (Calotropis gigantea) के पत्ते तो थोडा गरम कर उस दर्दवाले स्थान की सिकाई करे….घर पर बने इस तेल के उपयोग से आराम होगा…..जिन भाइयों को गठियावत हो तो वह इस के साथ अश्वगंधा, विधारा और मीठी सुरंजन (Colchicum Luteum) 100-100 ग्राम और सौंठ 25 पीस कर चूर्ण बना ले और इस चूर्ण को सुबह-शाम 5 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ लेने से लाभ होगा….निर्मलजी का संपर्क है: 09685441912

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