Tag Archives: इमली / Tamarind

महुए के शक्तिवर्धक लड्डू – Health energizing sweet of Mahua

यह सन्देश वैद्य एच. डी गाँधी का स्वास्थ्य स्वर से है. अपने इस सन्देश में डॉ. गाँधी हमें महुए की पारंपरिक उपयोगिता के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि महुए के वृक्ष मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बहुतायत से पाए जाते हैं और आदिवासी बहुल क्षेत्रो में इन वृक्षों को सम्मान की दृष्टी से देखा जाता है. इस वृक्ष के फूल, फल और बीज समान रूप से उपयोगी होते है. आदिवासी क्षेत्रों में महुए के फूल से शक्तिवर्धक लड्डू बनाए जाते है. इन लड्डुओं को बनाने के लिए 250 ग्राम भुना हुआ महुआ, 250 ग्राम साल बीज की गिरी, 250 ग्राम इमली बीज गिरी को पीसकर चूर्ण बना ले. इस चूर्ण में 250 ग्राम गुड को मिलाकर इससे एक मध्यम आकार के नीबू के बराबर लड्डू बना लें. इन लड्डुओं को 1-1 लड्डू की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से लाभ होता है. यह सर्दियों में विशषकर कारगर है.

Vaid H D Gandhi from Swasthya Swara is telling us about uses of Mahua (Madhuca longifolia). According to him  Mahua tree is abundant in states of Madhya Pradesh and Chattisgarh. Mahua trees are reverred in tribal areas. All parts of this tree is useful especially flowers. Tribals use Mahua flowers as a health energizer by making sweet/laddu. For making sweet/laddu  coarse grind 250 gms Mahua, 250 gms Tamarind, 250 gms Sal (Shorea robusta) seeds and add 250 gms Jaggery to it to hand roll medium lemon sized laddus. Taking 1 laddu with milk twice a day is beneficial especially in winters.

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महुआ की पारंपरिक उपयोगिता / Traditional uses of Mahua

यह सन्देश रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, नया बस स्टैंड, पाली, कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामफलजी हमें महुआ जिसे मधुका के नाम से भी जाना जाता है. यह दक्षिण भारत और छत्तीसगढ़ में विशेषकर पाया जाता है. इस वृक्ष की छाल, बीज फूल  में लाये जाते है. इसके फूलों में चूना, लोहा, पोटाश और सोडा अधिक मात्रा में पाया जाता है. इसके फूलों में मौजूद शर्करा जल्दी ही मद्य (शराब) में परिवर्तित हो जाती है. इसके बीजों का तेल वात और चर्म रोगों में लगाने के काम आता है. इन रोगों में आराम पाने में यह प्रभावी है. दस्त होने की स्थिति में इसके पुष्पों का स्वरस एवं इसकी छाल का क्वाथ देने से लाभ मिलता है. रक्तपित्त होने की स्थिति में इसके फूलों का स्वरस पिलाने से लाभ मिलता है. वात व्याधि और नाडी दौर्बल्यता के लिए इसके क्षीरपाक बनाने की विधि है. इसके फूलों को रात्रि में दूध के साथ पका लें और रातभर खुले में रख दें. प्रातः इसे 50-100 ग्राम की मात्रा में खाली पेट लेने से नाडी दौर्बल्यता और वात रोगों में लाभ होता है. छत्तीसगढ़ में पारंपरिक तरीके से महुआ का क्षीरपाक बनाया जाता है जिसकी विधि है आधा किलो महुए को साफ़ करके पानी से धो लें. तिल 100 ग्राम, इमली के बीज 100 ग्राम और अलसी 50 ग्राम को पानी मिश्रित दूध में पकाएं इसे प्रतिदिन 50-100 ग्राम की मात्रा में खाने से शारीरक शक्ति में बढ़ोतरी होती है. रामफल पटेल का संपर्क है.

Mahua is very effective in following diseases.
In case of Diarrhea giving Juice of Mahua leaves & bark decoction is useful. Giving juice of Mahua flowers is beneficial in Haemorrhage. Cook 500 grams Mahua flowers using milk and keep this overnight in an open area. 50-100 gms of this preparation taken in empty stomach early morning is useful in stomach weakness and Gastric problems. Mahua Kheerpak is recommended to enhance body resistance. To make Mahua Ksheerpak take 500 gms clean washed Mahua flowers, 100 gms Sesame seeds, 100 gms Tamarind seed &  50 gms Flax seeds and cook these items in milk till it thickens. Taking 50 gms daily of this mixture is effective in enhancing body resistance.

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इमली के वृक्ष की पारंपरिक चिकित्सीय गुण / Traditional medicinal properties of Tamarind

यह सन्देश श्री दीपक आचार्य का अभुमका हर्बल्स, अहमदाबाद से है. इस सन्देश में दीपकजी हमें बता रहे है की कैसे आदिवासी इमली के वृक्ष के विभिन्न अंगो जैसे फुल, पत्तियाँ, छाल और फल का पारंपरिक उपचार विधियों में कैसे उपयोग करते है. इमली के फूलों और पत्तियों को एकत्रित कर उसे समान मात्रा में उबाल कर काढ़ा तैयार किया जाता है. इन फूलों और पत्तियों को चार गुना पानी में एक चौथाई पानी शेष रहने तक उबला जाता है. आदिवासी मानते है की यह काढ़ा पीलिया रोग के उपचार में फायदेमंद होता है इसे रोगी को दिन में दो बार एक सप्ताह तक पिलाने से लाभ मिलता है. भूख न लगने की शिकायत होने पर पकी हुई इमली के गुदे को पानी में मसलकर इसमें थोडा सा काला नमक मिलाकर दिन में दो बार देने से लाभ मिलता है. इसी प्रकार पकी हुई इमली का रस बुखार से ग्रस्त व्यक्ति को देने से बुखार में आराम मिलता है गुजरात के डांग आदिवासी मानते है की इस रस में अगर थोड़ी सी इलायची और खजूर भी मिला दिया जाये तो ज्यादा आराम मिलता है. इसी प्रकार इमली के बीजों को भूनकर उसका चूर्ण 3 ग्राम मात्रा में दस्त के रोगी को देने से आराम मिलता है..दीपकजी का संपर्क है 9824050784

This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message Deepakji is telling us traditional tribal usage of different parts of Tamarind tree. Take tamarind flowers & leaves in equal ratio and boil this until quarter water remains. By giving this decoction twice a day for a week can be useful for the treatment of Jaundice. Chafed ripen tamarind with little rock salt can be given to stimulate apatite. Powder of roasted seeds oftamarind can be given in 3 gms quantity for curing Diarrhea. Dang tribe of Gujrat believes juice of ripen tamarind with some cardamom & dates can cure fever. Depakji’s at 9824050784

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विभिन्न प्रकार के विष का उपचार

यह संदेश डॉ. एच.डी. गाँधी का धर्मार्थ दवाखाना, संजय नगर (रायपुर) छत्तीसगढ़ से है:

इस संदेश में डॉ. एच.डी. गाँधी का कहना है की अगर बिच्छु काटे स्थान पर अकौए (Calotropis gigantea) का दूध लगाने से लाभ मिलता है…काटे हुए स्थान पर पोटेशियम पेर्मेगनेट (Potassium Permanganate) या कार्बोलिक एसिड (Carbolic Acid) लगाने से लाभ होता है….तीसरा इमली का बीज पत्थर पर पानी से साथ रगड़कर दंश वाले स्थान पर लगाने से वह चिपककर सारा विष खीच लेता है….चौथा इन्द्रायण के फल का 5 ग्राम गुदा खाने से लाभ होता है….सांप काटने पर कालीमिर्च और प्याज़ पीसकर दंश वाले स्थान पर लगाये इससे प्याज़ का रंग हरा हो जायेगा…यह प्रक्रिया दोहराते रहे जब तक प्याज़ का रंग बदलना जारी रहे….सांप काटे स्थान पर अकौए (Calotropis gigantea) का दूध टपकाते रहे जब तक दूध कर रंग सफ़ेद न होने लगे….कनखजूरा काटने पर अकौए का दूध लगाने पर लाभ होगा.. यदि कनखजूरा चिपक गया है तो उस पर सरसों का तेल लगाये….मधुमक्खी के काटने पर तुलसी की पत्तियों को नमक में पीसकर लगाने से लाभ होगा….घर में लहसुन का चूर्ण पोटली में बांध कर रखने से चींटी-तिलचट्टे घर में नहीं आते है….भांग के नशे में दही पिलाने से लाभ होता है… तम्बाकू का नशा प्याज़ का रस 10 मी.ली. पिलाने से नशा उतर जाता है….मकड़ी का विष सौंठ और जीरा पानी में पीसकर लगाने से उतर जाता है…सूरजमुखी के 15 ग्राम बीज पीसकर खाने से सभी प्रकार के विष उतर जाते है….डॉ. एच.डी. गाँधी का संपर्क है 9424631467 है…

 

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