Tag Archives: एरंड / Castor oil

गठियावात का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Arthritis

यह सन्देश वैद्य चंद्रकांत शर्मा का मुंगेली छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में चंद्रकांतजी हमें गठियावात के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इसके उपचार के लिए रात को 250 ग्राम खजूर पानी में भिगोकर रखे और सुबह यह खजूर निचोड़कर मरीज को दें. अगर वेदना ज्यादा हो तो कपूर, अफीम और कडवे तेल को गर्म करके प्रभावित स्थान की मालिश करने से लाभ मिलता है.

As per Vaid Chandrakant Sharma, Mungeli, Chhatisgarh – Non diabetic people suffering from Arthiritis can benefit by regularly taking dates  soaked overnight in plain water. Relief can also be had by massaging the effected parts by combination of warm camphor, opium and mustard oil. Diabetic patients can try.

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गठियावात का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Arthritis

यह सन्देश चंद्रकांत शर्मा का मुंगेली, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में चंद्रकांतजी हमें गठियावात के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि निर्गुन्डी की पत्तियों का 10-40 मी.ली रस देने अथवा सेंकी हुई मेथी का चूर्ण कपडे से छानने के बाद 3-3 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी से लेने से वात रोग में आराम मिलता है. यह मेथी वाला नुस्खा घुटनों के वात में भी उपयोगी है. सौंठ के 20-50 मी.ली. काढ़े में 5-10 मी.ली. अरंडी का तेल डालकर सोने से पहले लेना भी लाभदायक होता है. चंद्रकांत शर्मा का संपर्क है 9893327457

This is a message of vaidya Chandrakant Sharma from Mungeli, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional remedy of Arthritis. He says taking 10-40 ml juice of Five leaved chaste tree or taking 3-3 gms fine powder of roasted fenugreek after filtered by cotton cloth twice a day with water is useful. This can also be used in knee arthritis. Taking 20-50 ml decoction of dry ginger after adding 5-10 ml castor oil at bed time is also beneficial. Chandrakant Sharma @ 9893327457

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अरंड की पारंपरिक औषधीय उपयोगिता / Traditional medicinal properties of Castor

यह सन्देश रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, पाली कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामफलजी हमें अरंड के पारंपरिक उपयोग की जानकारी दे रहे है. इनका कहना है की अरंड की दो जातियां होती है एक वर्षीय और बहुवर्षीय. इनकी बहुवर्षीय जाति के बीजों में तेल की मात्रा अधिक होती है. इसकी पत्तियां पंजे के आकार की होती है. इनके लाल कोमल पत्तों का रस 1 चम्मच की मात्रा में पीलिया के रोगियों के सुबह-शाम देने से लाभ मिलता है. अरंड की पत्तियों को पीसकर थोडा सा गर्म करके साइटिका, चर्मरोगो, संधिशोथ और सूजन आदि मे रोग से सम्बंधित अंगो पर बांधने  से लाभ मिलता है. वात रोगियों को इसके तेल के मालिश करने से आराम मिलता है. बवासीर में इसके तेल का उपयोग विरेचक के तौर पर होता है. इसकी जड़ का क्वाथ वात रोगियों को पिलाने से आराम मिलता है.

This is a message of Ramfal Patel from Pragya Sanjeevani, Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message Ramfalji telling us traditional medicinal properties of Castor oil plant. He says there are two sub-species of Castor oil plant in which one is yearly & second one is perennial. Seeds of perennial plant contains more oil compare to yearly species. Leaves of Castor oil plant is claw shaped. Giving soft seedling juice of Castor oil plant to Jaundice patients in one spoon quantity twice a day is useful. Make paste of Castor oil plant leaves and after warming applying this on pain affected body parts is useful. Decoction of Castor oil plant’s root is beneficial in Arthritis.

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आँखों में तिनका-कचरा जाने का उपचार / Treatment of any foreign particle is gone into eyes

यह सन्देश निर्मल महतो का नवाडी, बोकारो, झारखण्ड से है. अपने इस सन्देश में निर्मलजी का कहना है कि अगर आँखों में अगर कोई तिनका, कचरा, मसाला चला जाये तो आँखों में दर्द और सूजन आ जाती है और आँखों से कीचड़ भी ज्यादा आने लगता है. ऐसी स्थति में आँखों पर कच्चे दूध में भीगा हुआ रुई का फाहा रखने से आराम मिलता है. आँखों में भी 2-3 बुँदे कच्चे दूध की डाल देनी चाहिए. अगर आँख में मिट्टी या बारीक कंकड़, रेत चली जाये तो अत्याधिक पीड़ा का अनुभव होता है. ऐसे में आँख में अरंड के तेल की एक बूंद डाल कर आँख की सिकाई करने से लाभ मिलता है. निर्मल महतो का संपर्क है 9204332389

This is a message of Nirmal Mahto from Nawadi, Bokaro, Jharkhand. He says if any foreign particle like dust, whit, spice or any sand particle dust particle is gone into eyes then it is very painful & in some cases eyes become swollen. In this case soak cotton pledget in raw milk and put it on the eyes & drip 2-3 drops of raw milk in affected eye as well. In the same way any sand particle or mud dust particle is gone into eyes then excessive pain is experienced. Drip 1 drop of Castor oil in affected eye and  fomenting eye with warm cotton cloth is useful. Nirmal Mahato’s at 9204332389

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हर्रा के औषधीय गुण / Medicinal properties of Harra

यह सन्देश रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, नया बस स्टैंड, पाली, कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामफलजी हमें हर्रा जिसे हरड, हरितिकी, अभया के नामो से भी जाना जाता है. वह आज हर्रा के ऋतुनुसार सेवन और इसकी पारंपरिक औषधीय उपयोगिता के बारे में बता रहें है. इनका कहना है कि दोष को हरने वाले को हर्रा कहते है. इसे ऋतुओं के अनुसार अलग-अलग अनुपान के साथ लिया जाता है. जैसे वर्षा ऋतु में सैंधा नमक के साथ, शरद ऋतु में शक्कर के साथ, हेमंत ऋतु में सौंठ के साथ, वसंत ऋतु में शहद के साथ और ग्रीष्म ऋतु में गुड के साथ लेने से यह और भी प्रभावशाली हो जाता है. खांसी होने पर हर्रा को भूनकर चूसना चाहिए. पाचन के लिए हर्रा को काले नमक के साथ चबा-चबा कर खाने से पाचन तंत्र सक्रिय हो जाता है. दस्त होने पर हर्रा को पानी में उबालकर उसका क्वाथ (हर्रा का उबला पानी) देने से लाभ मिलता है. कब्ज होने पर हर्रा को एरंड के तेल में भूनकर उसका चूर्ण बना लें और इस एक चम्मच चूर्ण को रात को सोते समय लेने से कब्ज में तो लाभ मिलता ही है साथ ही यह बवासीर के रोगियों के लिए भी लाभदायक है. हर्रा का लेप बना कर लगाने से सूजन और दर्द में भी लाभ मिलता है. रामफल पटेल का संपर्क है 8815113134

This is a message of Ramfal Patel from Pragya Sanjeevani, Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message he is describing us traditional usages of Harra or Harad (Terminalia chebula). It is consumed in different ways in different seasons. As in rainy season it has to be taken with rock salt, in early winter season with dry ginger, in winter with sugar, in spring season with honey & in summer with jaggery. Licking roasted Harra is useful in cough. Taking Harra with rock salt is useful to activate digestion system. Taking Harra treated water is a effective remedy of dysentery. Roast Harra in Castor oil and grind well to make fine powder. Taking this spoonful powder with water at bed time is useful to get relief from constipation and it is also beneficial for piles patients as well. Applying  Harra paste can be useful to minimize pain & swelling. Ramfal Patel’s at 8815113134

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