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शहद की उपयोगिता

यह संदेश श्री निर्मल अवस्थी का कस्तूरबा नगर, वार्ड क्रमांक 4, बिलासपुर से है…वह आज शहद के बारे में जानकारी दे रहें है…उनका कहना है की शहद आयुर्वेदिक चिकित्सा का महत्वपूर्ण अवयव है इसके बिना आयुर्वेदिक उपचार अधुरा माना गया है…मधुमक्खियाँ विभिन्न प्रकार के फूलों से यह मधुरस एकत्रित करती है…शहद में वह सभी पोषक तत्व पाए जाते है हो शरीर के विकास और पाचन क्रिया को सुचारू रखने के लिए आवश्यक होते है….यह रोगाणुनाशक और उत्तम भोज्य पदार्थ है…आयुर्वेद में माँ के दूध के बाद शहद को ही बच्चे के लिए सर्वाधिक पोषक बताया गया है.. शीतकाल में सोते समय ठन्डे दूध के शहद लेने से यह शरीर को मोटा और सुडौल बनाता है…इसके विपरीत सुबह शौच के पहले एक चम्मच शहद पानी के साथ लेने से यह मोटापा कम करता है…इसके अलावा शहद को हलके गर्म दूध, पानी, दही, दलिया, नीबू के रस, खीर, सलाद में भी अलग-अलग समय प्रयोग किया जाता है…. शहद को पके आम के रस साथ खाने से पीलिया दूर होता है…गोखरू के चूर्ण में शहद मिलकर खाने से पथरी में लाभ होता है…अदरक के रस के साथ शहद को चाटने से यह पेट के लिए उपयोगी है…अडूसे के काढ़े में शहद मिलकर पीने से खांसी में लाभ होता है…बैंगन के भर्ते में शहद मिलाकर खाने से अनिद्रा रोग में फ़ायदा होता है…थकान होने पर शहद के सेवन से ताजगी आती है…शहद को केवड़ा रस व पानी के साथ पीने से मांसपेशियों को ताकत मिलती है… काली खांसी होने पर 2 बादाम के साथ शहद लेने पर लाभ होता है… बवासीर में एक चुटकी त्रिफला चूर्ण के साथ शहद लेने से आराम मिलता है… शरीर के किसी जले हुए भाग पर शहद लगाने से आराम मिलता है… निर्मल अवस्थी का संपर्क है: 09685441912

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