Tag Archives: गुड / Jaggery

जोड़ो-घुटनों की सूजन का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Knee-Joint pain

इस सन्देश में गुंडरदेही, जिला बालोद, छत्तीसगढ़ के वैद्य हरीश चावड़ा जोड़ो और घुटनों की सूजन के उपचार का पारंपरिक नुस्खा बता रहे है.  इसके लिए 80 ग्राम शुद्ध शोधित भिलवा, 50 ग्राम गुड,  10 ग्राम पीपर, 10 ग्राम अकरकरा, 10 सौंठ, 10 ग्राम मालकांगनी इन सभी को पीसकर इसकी लगभग 125 मिलीग्राम की गोलियाँ बनाकर रख लें. इन गोलियों को 2-2 गोली की मात्रा में सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ लेने से लाभ होता है.

In this message vaid Harish Chawda of Gunderdehi, Balod, Chhatisgarh suggesting traditional treatment of joint & knee swelling.  Grind 80 gms detoxified Bhilwa (Semecarpus anacardium) also known marking nut, 50 gms Jaggery, 10 gms flower of Toothache plant, 10 gms dried Ginger & 10 gms Malkangani (Celastrus paniculatus) and after proper mixing make 125 milligram sized pills. Taking this pills in 2 pills quantity twice a day with lukewarm water is beneficial. 

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सर्दी-खाँसी का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Cold & Cough

इस सन्देश में स्वास्थ्य स्वर के एच डी गाँधी शीतकाल में होने वाले सर्दी-जुकाम का पारंपरिक उपचार की विधि बता रहें है जो इस प्रकार है तुलसी की 7 पत्तियाँ, 5 कालीमिर्च के दाने और 25 ग्राम गुड को एक गिलास पानी में उबालें और जब ¼ पानी बचे तो उस गुनगुने पानी को भोजन के बाद सुबह-शाम पीने से शीतकाल में होने वाले सर्दी-जुकाम में लाभ मिलता है. सर्दी-जुकाम के साथ ही खाँसी होने पर 1 चम्मच सितोप्लादी चूर्ण (बाजार में उपलब्ध), 1 चम्मच शहद और ½ चम्मच पान के रस को मिलाकर लेने से खाँसी में लाभ मिलता है.

As per vaid H D Gandhi of Swasthya Swara is suggesting us traditional treatment of Cough & Cold often caused in winter. Boil 7 Basil leaves, 5 Nos Black pepper & 25 gms Jaggery in 1 glass water & when  ¼ water remains drinking this lukewarm combination after meal twice a day is useful. In case of cough taking 1 spoon Sitopladi powder (Available in local market) after mixing with 1 spoon Honey &  ½  spoon Betel leaves juice is helping in get rid of cough. Swasthya Swara @ 8602008999

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दमे और एलर्जी का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Asthma & Allergy

स्वास्थ्य स्वर से डॉ एच डी गाँधी हमें आज अस्थमा के उपचार का पारंपरिक नुस्खा बता रहें है. इसको बनाने के लिए 250 ग्राम सफ़ेद फूल के मदार पेड़ की सूखी जड़ का चूर्ण, 500 ग्राम अजवाईन,  250 ग्राम तुलसी की सूखी पत्तियों का चूर्ण, 250 ग्राम सौंठ का चूर्ण, 250 ग्राम भुनी हुई हल्दी का चूर्ण इन सभी सामग्रियों को पुराने गुड में अच्छी तरह मिलाकर छोटे-छोटे 30 लड्डू बनाकर रखें. प्रतिदिन रात को 1 लड्डू का गुनगुने पानी के साथ एक माह तक सेवन करने से अस्थमा और एलर्जी की समस्या में लाभ मिलता है. इस उपचार के दौरान गरिष्ठ, ठंडी खाद्य सामग्रियों और नशे के सेवन से बचें.

In Asthma: As per Dr. H D Gandhi of Swasthya Swara for the traditional treatment of Asthma mix 250 gms Madar (White Crown Plant) root powder, 500 gms Carom seeds, 250 gms dried Basil leaves powder, 250 gms dried Ginger powder, 250 gms roasted Turmeric powder & old Jaggery together and make 30 small balls shaped Laddu. Taking this 1 laddu with lukewarm water every night for 1 month is beneficial in Asthma & Allergic problems.

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गठियावात के उपचार लिए पारंपरिक मिठाई – Traditional sweet for Arthritis

यह सन्देश वैद्य एच डी गाँधी का तामिया, छिंदवाडा, मध्यप्रदेश से है. अपने इस सन्देश में वह वहाँ के वैद्य मोहम्मद लतीफ़ खान से गठियावात के उपचार के सम्बन्ध में जानकारी ले रहे है. लतीफ़ खानजी का कहना है कि गठियावात होने की स्थिति में  1 किलो गेंहू के आटे में  25 ग्राम बड़ी पीपर, 25 ग्राम छोटी पीपर, 50 ग्राम असगंध मिलाकर इसे ग्वारपाठे के गुदे से गुंथे इसके बाद काजू, किशमिश, बादाम, अखरोड़ और पिस्ता सभी को 100 ग्राम की मात्रा में लेकर उसके छोटे टुकड़े काटकर इसे 250 मी.ली घी में हल्का भूनकर उसमे उस गुंथे हुए आटे और 1 किलो पुराना गुड मिलाकर लगभग 60-60 ग्राम के लड्डू बना लें. 21 दिनों तक प्रतिदिन इन 1-1 लड्डू को सुबह-शाम खाली पेट खाकर 250 ग्राम दूध दूध पीने से गठियावात में आराम मिलता है.

Vaidya Mohd. Lateef Khan is telling how to prepare traditional sweet useful in Arthrits to Dr. H D Gandhi of Swasthya Swara. As per him add small & big Peepar (Piper longam) 25 each, 50 gms Asgangh also known as Ashwagandha (Withania somnifera) to 1 Kg wheat flour & after adding Aloe vera pulp mix all together to make hard dough. Afterwards light roast 100 gms each pieces of Cashew, Walnut, Almond, Raisins (Dried grapes) & Pistachios in 250 ml Ghee. Thereafter adding prepared dough and 1 kg old Jaggery make lemon sized balls (Laddu) of 60 gms. Taking  1 Laddu empty stomach twice a day with 250 ml milk for 21 days is beneficial in Arthritis.

 

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महुए के शक्तिवर्धक लड्डू – Health energizing sweet of Mahua

यह सन्देश वैद्य एच. डी गाँधी का स्वास्थ्य स्वर से है. अपने इस सन्देश में डॉ. गाँधी हमें महुए की पारंपरिक उपयोगिता के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि महुए के वृक्ष मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बहुतायत से पाए जाते हैं और आदिवासी बहुल क्षेत्रो में इन वृक्षों को सम्मान की दृष्टी से देखा जाता है. इस वृक्ष के फूल, फल और बीज समान रूप से उपयोगी होते है. आदिवासी क्षेत्रों में महुए के फूल से शक्तिवर्धक लड्डू बनाए जाते है. इन लड्डुओं को बनाने के लिए 250 ग्राम भुना हुआ महुआ, 250 ग्राम साल बीज की गिरी, 250 ग्राम इमली बीज गिरी को पीसकर चूर्ण बना ले. इस चूर्ण में 250 ग्राम गुड को मिलाकर इससे एक मध्यम आकार के नीबू के बराबर लड्डू बना लें. इन लड्डुओं को 1-1 लड्डू की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से लाभ होता है. यह सर्दियों में विशषकर कारगर है.

Vaid H D Gandhi from Swasthya Swara is telling us about uses of Mahua (Madhuca longifolia). According to him  Mahua tree is abundant in states of Madhya Pradesh and Chattisgarh. Mahua trees are reverred in tribal areas. All parts of this tree is useful especially flowers. Tribals use Mahua flowers as a health energizer by making sweet/laddu. For making sweet/laddu  coarse grind 250 gms Mahua, 250 gms Tamarind, 250 gms Sal (Shorea robusta) seeds and add 250 gms Jaggery to it to hand roll medium lemon sized laddus. Taking 1 laddu with milk twice a day is beneficial especially in winters.

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वर्षाकालीन बुखार और सर्दी-खाँसी का पारंपरिक घरेलू उपचार – Traditional home treatment of fever, cold & cough

यह सन्देश वैद्य हरीश चावड़ा का ग्राम गुंडरदेही जिला बालोद, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में हरीशजी हमें वर्षाकाल में होने वाले बुखार, सर्दी और खांसी के घरेलू उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि यदि सर्दी लगकर बुखार आ जाए तो कम से कम 2 गिलास गुनगुना पियें और चादर ओढ़कर सो जाएँ ऐसा करने से पसीना आकर बुखार उतर जाएगा अगर ज्याद सर्दी होने के कारण नाक से पानी आ रहा हो तो अजवाइन को भूनकर उसे रुमाल में बाँध के रखें और उसे थोड़ी-थोड़ी देर से सूंघते रहें इससे आराम मिलेगा और नाक बहनी बंद हो जाएगी. बार-बार खाँसी आने पर छोटी पीपर को घी के साथ सेंककर पीस लें और इसे थोड़े से गुड या शहद के साथ थोड़े-थोड़े अंतराल से चाटने से खाँसी में आराम मिलता है.

This is a message of vaidya Harish Chawda from village Gundardehi, dist. Balod, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional home tips to get rid of cold-cough & fever often caused in rainy season. He says in case of fever drink minimum 2 glass lukewarm water and rest a while. Due to sweating fever will decreasing gradually. In case of runny nose due to cold, put some roasted carom seed in the hanker chief. Inhaling this roasted seed in short intervals is useful in runny nose problem. In cough make ghee roasted Piper longum powder. Licking this powder with Honey or Jaggery in short intervals is useful.

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दिमागी शक्ति बढ़ाने की पारंपरिक मिठाई – Traditional sweet for enhancing brain power

यह सन्देश काजल उइके का देवदरा, मंडला, मध्यप्रदेश से है अपने इस सन्देश में कजलजी हमें मस्तिष्क को बल प्रदान करने वाले पारंपरिक लड्डू के बारे में बता रही है. इनका कहना है कि इसे हर उम्र के व्यक्ति उपयोग कर सकते है. इसके प्रमुख घटक है ½ किलो चिरोंजी, ½ किलो बादाम, ½ किलो छुआरे, ½ किलो काले मुनक्का इन सभी सामग्रियों को कूटकर उसमे थोडा शहद और गुड मिलाकर इसके लड्डू बनाकर इसे किसी काँच के मर्तबान में रखे. इन लड्डुओं को प्रतिदिन 2-2 लड्डू सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से मस्तिष्क को बल मिलता है. दूसरी विधि है सेव, अनार, काली मुनक्का और केले के टुकडे करके के दूध में औटाकर खाने से भी लाभ मिलता है आप चाहे तो इसमें मिठास के लिए शहद भी मिला सकते है.

This is a message of Kajal Uikey from Deodara, Mandla, Madhya Pradesh. In this message she is telling us about traditional sweet suitable all age groups for enhancing brain power. Take ½ Kg Chironji (Seeds kernel of Buchanania lanzan tree fruit), ½ Kg Almonds, ½ Kg dried dates & ½ Kg dried black Grapes & after adding Honey & Jaggery make Indian gooseberry sized balls. Taking this sweet balls in 2 balls daily with milk twice a day is useful for increasing brain power. The second one is cut an Apple, Pomegranate, Banana & dried blacekGrapes & boil after adding milk until it become condensed. To make it sweet you can also add Honey to it. Taking this combination daily is beneficial to sustain brain power.

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शारीरिक दुर्बलता के उपचार का पारंपरिक नुस्खा – Traditional tip to get rid of weakness

यह सन्देश वैद्य रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, जिला कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामप्रसाद निषादजी हमें शारीरिक कमजोरी को दूर करने का पारंपरिक नुस्खा बता रहे है. इनका कहना है कि जिन व्यक्तियों को शारीरिक कमजोरी लगती हो, पेट में गैस बनती हो, श्वांस फूलती हो उनके लिए यह नुस्खा कारगर है. इसके लिए अजवाइन को भूनकर उसका चूर्ण बना ले और उसमे बराबर मात्रा में गुड मिलाकर इसे एक चम्मच की मात्रा में तीन माह तक पानी के साथ सुबह-शाम खाने से रक्त शुद्ध होकर शारीरिक कमजोरी में राहत मिलती है रक्त का शुद्धिकरण होने से चेहरे की चमक बढ़ती है. जिन्हें मधुमेह की शिकायत हो उन्हें इसे सैंधा नमक के साथ खाना चाहिए.

This is a message of vaidya Ramprasad Nishad from Farasgaon, dist. Kondagaon, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional tip to get rid of weakness. He says this tip is useful for persons who has weakness, respiratory & stomach gas related problems. For treatment mix roasted carom seeds powder in jaggery in equal quantity & is to be taken in 1 spoon quantity twice a day with water for three consecutive months. It is helpful in blood purification. It’s also increases face glossiness. Diabetic persons should use rock salt instead of jaggery  while taking this combination.

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कब्ज का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of constipation

यह सन्देश चंद्रकांत शर्मा का मुंगेली छत्तीसगढ़ से है. अपने इस संदेश में चंद्रकांतजी हमें कब्ज और उदर रोग के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि कब्ज होने की दशा में हर्रे का पांच तौला चूर्ण (50 ग्राम) और सौंठ का 2½ तौला चूर्ण (25 ग्राम) में आवश्यकता के अनुसार गुड़ मिलाकर इसकी चने के आकार की गोलियां बना लें. इन गोलियों को 3-6 गोली की मात्रा में रात को सोते समय लेने से कब्ज तो ठीक होती है साथ ही यह उपचार अन्य सामान्य उदररोगों में भी समान रूप से लाभदायक है.

This is a message of vaidya Chandrakant Sharma from dist. Mungeli, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional treatment of constipation & common stomach problems. He says  in case of constipation mix 50 gms Harad powder (Terminalia chebula), 25 gms dry Ginger powder & little Jaggery. After proper mixing make gram sized pills. Taking this pills in 3-6 pills quantity at bed time is useful in constipation & in common stomach related problems as well.

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पुराने बुखार का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of old fever

यह सन्देश वैद्य संतराम पैंकरा का पाली, कोरबा छत्तीसगढ़ से है. इस सन्देश में संतरामजी हमें पुराने बुखार के उपचार का पारंपरिक तरीका बता रहे है. इनका कहना है कि 100 ग्राम अजवाइन लेकर इसमें से 50 अजवाइन को तवे पर भून ले फिर इसमें 50 ग्राम बिना भुनी अजवाइन मिलाकर इसमें थोडा पुराना गुड मिलाकर अच्छे से मिला लें. इसकी छोटे बेर के आकर में गोलियाँ बनाकर मरीज को 1-1 गोली सुबह शाम देने से आराम मिलता है.

This is a message of vaid Santram Painkra from Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional method to get rid of old fever. He says take 100 gms carom seeds & after roasting half of these seeds on pan, add remaining half to it and grind to make powder. After adding some old Jaggery make small Ber (Ziziphus mauritiana) sized pills. Giving this 1 pill to the patient twice a day is useful.

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