Tag Archives: गोखरू / Tribulus terrestris

पथरी का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Stone

यह सन्देश वैद्य चंद्रकांत शर्मा का मुंगेली, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में चंद्रकांतजी हमें पथरी के उपचार की पारंपरिक औषधी बता रहे है. इनका कहना है की पथरी होने पर  पत्थरचट्टा जिसे पत्थरचूर भी कहा जाता है इसके पत्तियों का 20 मी.ली रस अथवा सहजन की जड़ का 20-50 मी.ली काढ़ा अथवा काली मुनक्का (सूखे हुए काले अंगूर) के 50 मी.ली काढ़े का सेवन करने से पथरी में लाभ मिलता है. गोखरू के बीजों का 3 ग्राम चूर्ण भेड़ के दूध के साथ लगातार 7 दिन तक सेवन करने से भी लाभ मिलता है. नीबू के रस में सैंधा नमक मिलाकर कुछ दिनों तक नियमित पीने से पथरी के गल कर निकलने में मदद मिलती है.

This is a message of vaidya Chandrakant Sharma from Mungali, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional treatment method to get rid of stone. He says taking 20-50 ml juice of Pattharchatta (Elytraria acaulis) or 50 ml decoction of Drumstick plant root or 50 ml decoction of dried black grapes is useful. Taking 3 gms Gokhru (Tribulus terrestris) seeds powder using sheep milk for 7 days is beneficial. Taking lemon juice after adding some rock salt for some days is also helping in stone removal.

 

Share This:

बड़ी दूधी के औषधीय गुण – Traditional medicinal properties of Asthma weed

यह सन्देश वैद्य रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामप्रसादजी हमें बड़ी दूधी की पारंपरिक चिकित्सा में उपयोगिता के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि यह बड़ी दूधी प्राय: घर आँगन, खेत खलिहान, पगडण्डी और रास्तो के आसपास आसानी से उग जाती है. इसके पंचांग (फूल, पत्तियाँ, बीज, छाल और जड़) को छाया में सुखाकर इसके चूर्ण में सम-मात्रा मिश्री मिलाकर 9 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ लेने से शुक्र प्रमेह में लाभ होता है. इसके पंचांग का चूर्ण, बड़े गोखरू का चूर्ण और श्वेत जीरे का चूर्ण को समभाग मिलाकर उसमे चीनी मिलाकर दिन में तीन बार दूध के साथ लेने से वीर्य में गाढ़ापन आता है. पंचांग के कल्क (इसके काढे को औटाकर बनाई गई टिकिया) की 50 ग्राम की टिकिया बनाकर 50 मी.ली तिल के तेल में जलाकर उस तेल से गठियावात में लाभ मिलता है. रजोवरोध में इसकी जड़ का चूर्ण 1 ग्राम की मात्रा में देने से लाभ होता है. इस उपचार के दौरान मिर्च-मसालेदार तैलीय भोजन और खटाई से परहेज करें.

This is a message of Ramprasad Nishad from Farasgaon, Kondagaon, Chhitisgarh. In this message he is telling us traditional uses of Badi Duddhi (Asthma Weed). This weed is often found in farms, home gardens & around road sides. Taking powder of shadow dried Panchang of (flowers, leaves, seeds, bark & root) Asthma Weed after adding equal sugar in 9 gms quantity using milk is useful in Gannoreha (Sexually transmitted disease). Taking its panchang powder with  Large Caltrops & white cumin powder in equal quantity after adding sugar with milk thrice a day is helping in semen coagulation. In irregular periods giving its bark powder in 1 gms quantity is beneficial.

 

Share This:

शीघ्रपतन का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Premature Ejaculation

यह सन्देश वैद्य दिलीप गुप्ता का रायपुर से है. अपने इस सन्देश में दिलीपजी हमें शीघ्रपतन में लाभदायक पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि शीघ्रपतन की समस्या होने पर 50 ग्राम गोखरू, 50 ग्राम ताल मखाना, 50 ग्राम सतावर, 50 ग्राम विदारीकन्द,  50 ग्राम अश्वगंधा, 50 ग्राम विधारा, 50 ग्राम सफ़ेद चिरमिटी, 100 ग्राम मिश्री को मिलाकार बारीक़ चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को 4-5 की मात्रा में सुबह नाश्ते और रात्रि भोजन के बाद लगातार 40 दिनों तक लेने से शीघ्रपतन की समस्या में लाभ मिलता है. दिलीप गुप्ता का संपर्क है 8109855459

This is a message of Dilip Gupta from Raipur. In this message he is suggesting traditional remedy to treat premature ejaculation. He says in case of this problem grind 50 gms (Tribulus terrestris) also known as puncture vine, 50 gms Talmakhana (Astercantha longifolia), 50 gms Satavar (Asparagus racemosus), 50 gms Vidarikand (Pueraria tuberosa) also known as Indian kudzu, 50 gms also Ashwagandha (Withania somnifera) also known as Indian ginseng, 50 gms Vidhara (Argyreia speciosa) also known as Morning glory, 50 gms Safed chirmiti (Abrus precatorius) also known as Coral bead vine to make powder. Taking this powder in 4-5 gms quantity after breakfast & dinner for 40 is is useful in premature ejaculation problem. Dilip Gupta @ 8109855459

Share This:

पथरी का पारंपरिक उपचार / Traditional treatment of Kidney stone

यह सन्देश वैद्य हरीश चावड़ा का गुंडरदेही, जिला बालोद, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में वह हमें पथरी रोग के उपचार के पारंपरिक नुस्खे बता रहे है. इनका कहना है कि पथरी चाहे पित्ताशय में हो या मूत्रनलिका में दोनों ही प्रकार की पथरी बड़ी पीड़ादायक होती है. इसके उपचार के लिए 100 ग्राम निशोथ और 100 इन्द्रजों को महीन पीसकर उसका चूर्ण बना ले. इस चूर्ण को 5-10 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम 10 से 15 दिनों तक लगातार लेने से पथरी में लाभ होता है. 25 ग्राम जवाखार, 25 ग्राम कच्चा सुहागा और 200 ग्राम बड़ा गोखरू को बारीक पीसकर चूर्ण बना ले. इसे 5 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन लगातार 8-10 दिनों तक लेने से पथरी के गलने में मदद मिलती है.

This is a message of Harish Chawda from Gundardehi, Dist. Balod, Chhatisgarh. In this message he is suggesting some traditional tips for getting relief in stone problems. He says whether stone of gall bladder or urinary tract both is painful. For treatment grind 100 gms Nishoth (Indian jalap) & 100 gms  Indrajav (Holarrhena pubescens) to make power. Taking this powder in 5-10 gms quantity twice a day for 10-15 days is useful. Grind 25 gms Javakhar (Easily available in the market) 25 gms raw borax & 200 gms Gokhru (Tribulus terrestris). Taking this powder in 5 gms quantity daily for continuously 8-10 days is useful to increasing possibility of removing urinary track stone while urination.  

Share This:

पथरी का उपचार / Treatment of Stone Problem

यह संदेश श्री. अवधेश कश्यप का जिला कोटा, छत्तीसगढ़ से है… इस संदेश में अवधेशजी पथरी के उपचार के बारे में बता रहें है.. इनका कहना है की इसके उपचार का परम्परागत ज्ञान अमूल्य है… इसके उपचार के लिए पाषणभेद जिसे पत्थरचूर भी कहते है की 10 पत्ते और अजवायन के 10 पत्ते  (छोटी पत्तियां अधिक उपयुक्त होती है) को पीसकर उसकी लुगदी बना ले और उस लुगदी में एक चम्मच गोखरू चूर्ण (गोखरू चूर्ण बाजार में आसानी से उपलब्ध होता है) मिलाकर 3 दिनों तक सुबह खाली पेट लेना है जिसे पित्ताशय में पथरी हो उसे यह योग 15 दिनों तक लेना है…यह विरेचक और दस्तावर है इस प्रक्रिया में दस्त और उल्टियाँ भी हो सकती है…

पत्तियों का चयन करते समय अनुपात का ध्यान रखे अगर पत्तियां छोटी हो तो भी दस ही लेनी है…अवधेश कश्यप का संपर्क है: 7587038414

This is a message of Vidhya Awadhesh Kashyap from Kota, Chhatisgarh.. In this message Awdheshji is telling about the treatment of stone. He say’s traditional healing knowledge is invaluable…Here, he suggests remedy for the treatment of stone related problems. Take 10 leaves of Pashanbhed (Bergenia ciliata), 10 leaves of Carom plant (Trachyspermum ammi), for this small leaves are suggested the grind them well until a paste is formed then mix one spoon of Gkhuru powder (Tribulus terrestris) & mix them well. Take this preparation at morning with empty stomach for 3 days & for those who has stone in Gallbladder they can continue this remedy for 15 days. Due to the cathartic nature of this remedy symptoms of vomiting and loose motions could be possible.

Care should be taken when choosing leaves, even  if leaves are smaller in size they should be always 10 nos.

Share This:

शहद की उपयोगिता

यह संदेश श्री निर्मल अवस्थी का कस्तूरबा नगर, वार्ड क्रमांक 4, बिलासपुर से है…वह आज शहद के बारे में जानकारी दे रहें है…उनका कहना है की शहद आयुर्वेदिक चिकित्सा का महत्वपूर्ण अवयव है इसके बिना आयुर्वेदिक उपचार अधुरा माना गया है…मधुमक्खियाँ विभिन्न प्रकार के फूलों से यह मधुरस एकत्रित करती है…शहद में वह सभी पोषक तत्व पाए जाते है हो शरीर के विकास और पाचन क्रिया को सुचारू रखने के लिए आवश्यक होते है….यह रोगाणुनाशक और उत्तम भोज्य पदार्थ है…आयुर्वेद में माँ के दूध के बाद शहद को ही बच्चे के लिए सर्वाधिक पोषक बताया गया है.. शीतकाल में सोते समय ठन्डे दूध के शहद लेने से यह शरीर को मोटा और सुडौल बनाता है…इसके विपरीत सुबह शौच के पहले एक चम्मच शहद पानी के साथ लेने से यह मोटापा कम करता है…इसके अलावा शहद को हलके गर्म दूध, पानी, दही, दलिया, नीबू के रस, खीर, सलाद में भी अलग-अलग समय प्रयोग किया जाता है…. शहद को पके आम के रस साथ खाने से पीलिया दूर होता है…गोखरू के चूर्ण में शहद मिलकर खाने से पथरी में लाभ होता है…अदरक के रस के साथ शहद को चाटने से यह पेट के लिए उपयोगी है…अडूसे के काढ़े में शहद मिलकर पीने से खांसी में लाभ होता है…बैंगन के भर्ते में शहद मिलाकर खाने से अनिद्रा रोग में फ़ायदा होता है…थकान होने पर शहद के सेवन से ताजगी आती है…शहद को केवड़ा रस व पानी के साथ पीने से मांसपेशियों को ताकत मिलती है… काली खांसी होने पर 2 बादाम के साथ शहद लेने पर लाभ होता है… बवासीर में एक चुटकी त्रिफला चूर्ण के साथ शहद लेने से आराम मिलता है… शरीर के किसी जले हुए भाग पर शहद लगाने से आराम मिलता है… निर्मल अवस्थी का संपर्क है: 09685441912

Share This: