Tag Archives: घृतकुमारी / Aloe vera

मुहाँसो के उपचार के लिए पारंपरिक लेप – Traditional liniment for Pimple treatment

स्वास्थ्य स्वर से वैद्य एच डी गाँधी आज हमें मुहाँसो के उपचार के लिए पारंपरिक लेप बनाने की विधि बता रहें है. इसके लिए 1 चम्मच दालचीनी का चूर्ण, 3 चम्मच शहद, 10 ग्राम एलोवेरा का गूदा, 2 ग्राम हल्दी का चूर्ण और 10 नग नीम की पत्तियों को पीसकर उसके लेप को रोज नियमित रात को सोने के पहले चेहरे पर लगाएँ और सुबह गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें इससे लाभ होगा. चेहरे को साफ़ करने के लिए साबुन की जगह मुलतानी मिट्टी का प्रयोग करें. यदि चेहरे पर दाग-धब्बे हो गए हो तो 1 चम्मच चने का आटा,  1 चम्मच मलाई, 1 चम्मच शहद, 10 बूंद नीबू का रस और एक चम्मच दालचीनी का चूर्ण को मिलाकर इस लेप को चेहरे पर लगाना लाभदायक है.
Vaid H D Gandhi of Swasthya Swara is telling traditional liniment for Pimple treatment. Mix 1 spoon Cinnamon powder, 3 spoon Honey, 10 gms Aloevera pulp or gel, 2 gms Turmeric powder & 10 nos Neem leaves paste together to make liniment & regularly applying  this on face daily before bed time and in the morning washing your face with lukewarm water is useful for Pimple treatment. Precaution should be taken avoid using soap. In case of stains on face applying paste of 1 spoon Gram flour, 1 spoon milk cream, 10 drops lemon juice & 1 spoon Cinnamon powder is beneficial.

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दर्द का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of pain

यह सन्देश वैद्य आर के पवार का भीमडोंगरी, मंडला, मध्यप्रदेश से है. अपने इस सन्देश में वह हमें दर्द  के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि इस उपचार के लिए 25 ग्राम ग्वारपाठे का उपरी सूखी छाल, 10 ग्राम सूखी अर्जुन छाल, 10 ग्राम पीपर मूल, 10 ग्राम निर्गुन्डी के बीज, 10 ग्राम अश्वगंधा, 20 ग्राम त्रिफला, 20 ग्राम मूसली, 5 ग्राम मंडूर भस्म और 5 ग्राम अभ्रक भस्म को पीसकर इसे किसी सूती कपडे से छान कर रख ले. इसे पीड़ित व्यक्ति को दिन में दो बार 5-5 ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ देने से लाभ मिलता है. इस उपचार के दौरान इमली, बैंगन और शराब का सेवन न करें और यह उपचार गर्भवती स्त्री को नहीं देना चाहिए.

This is a message of vaidya R K Pawar, from Bheemdongri, Mandla, Madhya Pradesh. In this message he is suggesting us traditional treatment to get rid of pain. He says grind 25 gms dried Aloevera skin, 10 gms dried Arjun chhal (Terminalia arjuna), 10 gms Peeper mul (Piper longum), 10 gms Nirgundi seeds (Vitex negundo), 10 gms Ashwagandha (Indian ginseng), 20 gms Triphala, 20 gms Musli (Chlorophytum borivilianum), 5 gms Mandur bhasm (prepared from iron oxide) & 5 gms Mica ash to make powder after cloth filtration keep this powder in any glass bottle. Taking this combination twice a day in 5 gms quantity with cow milk is useful. Precaution should be taken while treatment avoid tamarind, brinjal & liquor. This combination cannot be given to pregnant women. 

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माहवारी के समय होने वाली समास्याओं का इलाज / Treatment of Mensuration Problems

यह संदेश डॉ एच.डी गाँधी का मंडला मध्यप्रदेश से है जो अपने प्रवास के दौरान काजल इनवासी से साक्षात्कार कर रहे हैइस संदेश में काजल इनवासी महिलाओं को माहवारी में आने वाली समस्याओं के उपचार के बारे में बता रहीं है….इनका कहना है की माहवारी लगभग पांच दिनों तक रहती है इसमें राहत पाने के लिए महिलाओं को सुबहशाम एलोवेरा (धृतकुमारीदूध एवं अनार के रस का सेवन करना चाहिए पर कुछ परहेज भी है जिनका ध्यान रखना भी आवश्यक है जैसे इस काल में खटाई एवं गर्म तासीर वाली वस्तुओं का सेवन न किया जाये.. इनका यह भी कहना है की इनके इस नुस्खे से अभी तक 50-60 महिलाओं को लाभ हुआ है

This is a message of Dr. H D Gandhi from Mandla Distt., Madhya Pradesh. During his tour he is interviewing a lady named Kajal Invasi… She is telling us how to get relief from problems occurring during mensuration… She said mensuration period is approximately of 5 days & women who is undergoing this period should take Aloe Vera juice, Milk & Pomegranate juice twice a day & must avoid sour & hot things..She adds about 50-60 women’s have benefited so far by her remedy…Contact of Kajal Invasi is 8817468389

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घृतकुमारी के चिकित्सीय गुण / Medicinal Properties of Aloe vera

यह सन्देश लोमेश कुमार बच का जिला कोरबा, छत्तीसगढ़ से है…वह आज हमें एक बहुउपयोगी वनस्पति के औषधीय गुणों के बारे में बता रहे है जिसे घृतकुमारी / ग्वारपाठा / कुमारिका आदि नामो से जाना जाता है…इसका वैज्ञानिक नाम है एलो वेरा इनका कहना है की यह सम्पूर्ण भारतवर्ष में पाया जाता है… यह वनस्पति त्रिदोषनाशक है, सरदर्द होने पर ग्वारपाठे के रस में थोड़ी दारुहल्दी मिलाकर सहने योग्य गरम करके दर्द वाले स्थान पर बांधने से आराम मिलता है….फोड़े-फुंसी या घाव होने के दशा में ग्वारपाठे का गुदा सहने योग्य गर्म कर बाँध देने और उसे थोड़े-थोड़े  अंतराल में बदलते रहने से फोड़ा ठीक होने लगता है और यदि फोड़ा पकने लगा हो तो यह जल्दी पककर फूट जाता है…फोड़े के फूटने पर उसपर ग्वारपाठे के गुदे में हल्दी मिलाकर उसपर बांध देना चाहिए…इससे से रक्त का शोधन होकर शीघ्र घाव भर जाता है…इसी प्रकार अगर किसी उभरते हुए फोड़े को पकाना हो तो ग्वारपाठे के गुदे में थोडा सा सज्जीखार जिसे पापड़ खार भी कहते है उसे और हल्दी को मिलाकर सूजन वाले स्थान पर बांध देने से फोड़ा जल्दी पककर फूट जाता है…

This is a message of Lomesh Kumar Bach from Dist. Korba, Chhatisgarh…Lomeshji telling us about medicinal usages of Aloe vera. It is commonly found across India & mainly known as “Gwarpatha” in Hindi…In case of headache take extract of Aloe vera (Juice) and mix small amount of Berberis aristata (Daru Haldi) in it and bearable warm this combination and tie it on the place of pain. To cure Boil warm the pulp of Aloe vera  and tie it on the boil and repeat this procedure some times. By doing so the pus of boil can be washed out and wound can recover soon…Contact of Lomesh Kumar Bach is:9753705914

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