Tag Archives: तिल का तेल / Sesame Oil

घावों-नासूर के उपचार के लिए पारंपरिक तेल – Traditional oil for the treatment of Boil & Canker

स्वास्थ्य स्वर से वैद्य एच डी गाँधी हमें घाव एवं नासूर के उपचार की पारंपरिक विधि बता रहे है. उपचार विधि की मुख्य घटक इस प्रकार है 20 ग्राम भिलवा के बीज, 20 ग्राम कौंच बीज चूर्ण, 30 ग्राम खुरासानी अजवाइन चूर्ण, 30 ग्राम मुर्दाशंख, 30 ग्राम भुना नीला थोथा और 1½ लीटर तिल का तेल. सबसे पहले तिल के तेल को बर्तन में उबालें फिर उसमे भिलवा को डालकर जला लें पर जलाते समय इससे निकलने वाले धुएँ से बचें. इसके बाद इसमें कौंच और खुरासानी अजवाइन को उबलते तेल में डालें और 5-10 मिनिट बाद तेल को आँच से उतार कर ठंडा कर लें फिर इसमें मुर्दाशंख और नीला थोथा अच्छे से मिलाकर इसे छानकर किसी काँच की बोतल में भरकर रखें.

प्रयोग विधि: इस तेल का प्रयोग करने से पहले नासूर या घांव को नीम उबले पानी से धोकर सुखा लें फिर उस पर रुई के फाहे की मदद से इस तेल को दिन में 2-3 बार लगाने से लाभ होता है.

Vaid H D Gandhi is suggesting us procedure of making traditional oil for the treatment of Boil & Canker. For making this oil boil  1½ liter Sesame oil then put 20 gms Marking nut into boiling oil (Avoiding contact with smoke) & when it turns black after burning  put 20 gms Velvet been & 30 gms Khurasani ajwain (Hyoscyamus Niger) powder & afterwards allow oil to be cool and after cooling  add 30 gms Murdashankh (Available in the market), 30 gms roasted copper sulfate and mixed well. After filtration keep this oil in any glass bottle. Apply this oil 2-3 times a day after washing affected body parts with Neem treated water.

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चर्मरोगों का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Skin diseases

यह सन्देश वैद्य लोमेश कुमार बच का कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में लोमेशजी हमें चर्मरोगों के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि इस उपचार से दाद, खुजली, एक्जिमा आदि में लाभ मिलता है. इसके लिए बकायन की पत्तियों का रस 250 मी.ली., नीम की पत्तियों का रस 250 मी.ली., कनेर की पत्तियों का रस 250 मी.ली., महानीम की पत्तियों का रस 250 मी.ली. और अकौए जिसे मदार भी कहा जाता है इसकी पत्तियों का रस 100 मी.ली को लेकर तिल के तेल में पकाना है. जब सारा रस वाष्पीकृत होकर सिर्फ तेल ही बचे तब इस तेल को छानकर किसी शीशी में भरकर रख ले. इस तेल को चर्मरोग से ग्रसित अंग पर लगाने से लाभ मिलता है.

Vaid Lomesh Kumar Bach from Korba, Chhatisgarh is givng traditional remedy for skin diseases like Herpes, Eczema, Itching etc. In 500ml Sesame oil put 250ml juice of  Bakayan (Persian Lilac) leaves, 250ml  juice of Neem leaves, 250 ml juice of  Kaner (Oleander), 250 ml juice of Mahaneem leaves and 100 ml juice of Crown flower leaves and cook over slow fame till all juice evaporates. After filtration keep this oil in any bottle. Applying this oil on disease affected area is useful.

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चर्मरोगों का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Skin diseases

यह सन्देश वैद्य लोमेश कुमार बच का कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में लोमेशजी हमें चर्मरोगों के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि इस उपचार से दाद, खुजली, एक्जिमा आदि में लाभ मिलता है. इसके लिए बकायन की पत्तियों का रस 250 मी.ली., नीम की पत्तियों का रस 250 मी.ली., कनेर की पत्तियों का रस 250 मी.ली., महानीम की पत्तियों का रस 250 मी.ली. और अकौए जिसे मदार भी कहा जाता है इसकी पत्तियों का रस 100 मी.ली को लेकर तिल के तेल में इतना पकाना है. जब सारा रस वाष्पीकृत होकर सिर्फ तेल ही बचे तब इस तेल को छानकर किसी शीशी में भरकर रख ले. इस तेल को चर्मरोग से ग्रसित अंग पर लगाने से लाभ मिलता है.

This is a message of Lomesh Kumar Bach from Korba, Chhatisgarh. In this message he is telling us about traditional remedy for skin diseases like Herpes, Eczema, Itching etc. He says cook 250 ml Bakayan leaves juice (Persian lilac), 250 ml Neem leaves juice, 250 ml Kaner (Oleander), 250 ml Mahaneem leaves juice & 100 ml juice of Crown flower leaves in 500 ml Sesame oil until all juice evaporates. After filtration keep this oil in any bottle. Applying this oil on disease affected area is useful. 

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कमरदर्द का पारंपरिक उपचार / Traditional treatment of Lower joint pain

यह सन्देश निर्मल महतो का नवाडी, बोकारो, झारखण्ड से है. अपने इस सन्देश में निर्मलजी हमें कमरदर्द का पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहें है. इनका कहना है कि कमरदर्द होने की स्थिति में तली हुए वस्तुएं और चावल का सेवन न करें. पानी को उबालकर ठंडा करके पियें. रात को 60~70 ग्राम गेहूँ को साफ़ करके पानी में भीगा दें और सुबह इन भीगे हुए गेहूँ को 30 ग्राम खसखस और 30 ग्राम सूखी धनियाँ के बीजों के साथ पीस लें. जिससे यह चटनी की भांति हो जाएगी. इसे आधा लीटर दूध में डाल कर उबालें. इस प्रकार बनी खीर का 2 सप्ताह तक नियमित सेवन करने से कमरदर्द में असाधारण लाभ मिलता है. एक जायफल को पानी में घीसकर तिल के तेल में पकाएं. इस तेल से मालिश करने से भी कमरदर्द में लाभ मिलता है. एक चम्मच अदरक के रस का आधे चम्मच शहद के साथ दिन में तीन बार सेवन करें. इससे भी कमरदर्द में आराम मिलेगा. निर्मल महतो का संपर्क है 9204332389

This is a message of Nirmal Mahto from Nawadi, Bokaro, Jharkhand. In this message he is telling us traditional remedy of lower back pain (Lumbar). He say’s in case of lower back pain the affiliated person should avoid rice & oily products. Use cooled boiled water. Soak 60~70 gms wheat overnight in water. In morning grind this soaked wheat with 30 gms Poppy seeds & 30 gms dried Coriander seeds together and boil this preparation in half liter milk. Taking this condensed milk regularly for 2 weeks is useful for getting relief from lower back pain. Rub Nutmeg on any clean rough surface using little water until paste is formed & fry this paste using in Sesame oil. This oil is effective for reducing lower back pain. Taking spoonful Ginger juice with half spoon Honey thrice a day is also effective in lower joint pain. Nirmal Mahto’s at 9204332389

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एक्जिमा एवं आधासीसी दर्द का उपचार

यह संदेश श्री. निर्मल कुमार अवस्थीजी का वार्ड क्रमांक 4, कस्तूरबा नगर, छत्तीसगढ़ से है..आप वह एक्जिमा के उपचार के बारे में बता रहें है… उनका कहना है यह दो अचूक नुस्खे है जो एक्जिमा रोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है…

पहला नुस्खा है: जमीन में एक फीट का गड्ढा खोदकर एक चूल्हा बना ले.. उसमे ऊंट की सुखी लेंडी भरकर आग लगा दें…फिर पीतल की एक थाली में पानी भरकर उसे उसी चूल्हे पर  चढ़ा दें..धीरे-धीरे पीतल की थाली के निचले पेंदे में धुंए का काजल इकठ्ठा हो जायेगा…आग के बुझने पर पीतल की उस थाली से काजल को  निकालकर किसी डिबिया में रख ले…इसी काजल को नित्य एक्जिमा पर लगाने से पुराने से पुराना एक्जिमा ठीक हो जाता है…

दूसरा नुस्खा है: करेले के पत्तों का रस निकालकर गरम करें..उसी अनुपात में  तिल का तेल भी गरम करें…फिर दोनों को मिलाकर गरम करें… करेले के रस की मात्रा सुखकर कम हो जाने पर उसे एक शीशी में भरकर रख लें..इसे एक्जिमा पर लगाये अवश्य लाभ होगा….

आधासीसी के दर्द का उपचार: आधासीसी का दर्द काफी पीड़ादायक होता है…इसे ठीक करने के लिए सतावर की ताज़ी जड़ को कूटकर उसका अर्क निकल लें… और  उसी मात्रा में तिल का तेल मिलाकर गर्म करें और जब तेल से सतावर का अर्क सूखकर सिर्फ तेल रह जाये तो उसे छानकर किसी बोतल में भरकर रख लें… इसी तेल को जिस भाग में दर्द हो रहा हो वहां लगायें और सूंघे अवश्य लाभ होगा…यह स्वनुभूत योग है…

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