Tag Archives: दही / Curd

एक्जिमा का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Eczema

यह सन्देश वैद्य हरीश चावड़ा का ग्राम गुंडरदेही, जिला बालोद, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में हरीशजी  हमें एक्जिमा का पारंपरिक उपचार बता रहें है. इनका कहना है कि यदि एक्जिमा या ऐसा कोई चर्मरोग जिसमे त्वचा में बहुत ज्यादा खुजली होती हो और उसमे घाव होकर पस पड़ गया हो तो चार चम्मच अत्याधिक खट्टे दही में एक चुटकी सिन्दूर को मिलाकर उसे प्रभावित अंग पर सुबह-शाम लगाकर थोड़े समय बाद गुनगुने पानी से धो लेना चाहिए. इस उपचार को 8-10 दिनों तक लगातार करने से लाभ मिलता है. तेल-साबुन लगाना वर्जित है.

Vaid Harish Chawada, Dist. Balod, Chhatisgarh is suggesting us traditional treatment of Eczema and any other skin disease in which itching persists and often wound is formed. Mix one pinch Sindoor (Bixa orellana –also known as Lipstick tree in English) in four spoon extremely sour Curd. Apply this paste on affected body parts for a while and washout with lukewarm water. The paste should be applied twice a day for consecutively 8-10 day. Avoid applying oil or any soap.

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कब्ज, पेटदर्द और अपचन का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of constipation, stomachache & indigestion

यह सन्देश वैद्य रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, जिला कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामप्रसाद निषादजी हमें कब्ज का पारंपरिक उपचार बता रहे है. इनका कहना है कि जिसे भी कब्ज, बदहजमी, पेट में छाले हो, खट्टी डकारें और पेट दर्द की शिकायत हो वह 100 ग्राम कुटकी मूल (जड़) और 100 ग्राम मुल्हैठी का चूर्ण बनाकर रख लें. इस 1 चम्मच चूर्ण को प्रदिदिन सुबह-शाम दही के साथ लेने से लाभ मिलता है. इस उपचार के दौरान मिर्च-मसालेदार तैलीय भोजन खटाई एवं आलू, बैंगन और फूलगोभी का परहेज रखना चाहिए.

This is a message of vaidya Ramprasad Nishad from Farasgaon, dist Kondagaon, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional method to get rid of constipation, stomachache, indigestion & stomach ulcers. He says grind 100 gms Kutki (Picrarhiza kurroa) & 100 gms Mulheathi (Liquorice) to make fine powder. Taking this 1 spoon powder with yogurt twice a day is beneficial. Precautions should be taken during this treatment avoid oily-spicy, sour food & potatoes, brinjal & cauliflower is also avoided in diet.

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खुजली के निदान में दही का पारंपरिक प्रयोग – Traditional uses of yogurt in itching treatment

यह सन्देश रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामप्रसादजी हमें दही और मट्ठे के पारंपरिक औषधीय गुणों के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि दही और मट्ठा औषधीय गुणों से परिपूर्ण है. शरीर के किसी हिस्से में दाद या खुजली होने पर उसके उपचार के लिए 200 ग्राम खट्टा दही को किसी पात्र में रखकर तेज धूप में रख दे और जब उसमे खमीर उत्पन्न होकर झाग बनने लगे तो 12 ग्राम गंधक को बारीक़ पीसकर उसमे अच्छे से मिला दे. इसे किसी साफ बोतल में भरकर रख ले. इसे खुजली वाले स्थान पर थोडा सा खुजला कर लगाएं. इस प्रकार कुछ दिनों तक इसे लगाने से खुजली में आराम मिलेगा. इसके साथ ही सारीवादी वटी की 1-1 गोली दिन में 3 बार लें. इसी प्रकार 1 गिलास मट्ठा प्रतिदिन सुबह और शाम पीने से कफज, पितज और वातज प्रकार के बवासीर में लाभ मिलता है.

This is a message of Ramprasad Nishad from Farasgaon, Kondagaon, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional medicinal properties of yogurt & whey. He says yogurt & whey is enriched in medicinal properties. In case of itching problem keep 200 gms sour yogurt in direct bright sunlight. When yeast & foam is formed add 12 gms sulphur powder to it & stirring keep this combination in clean bottle. Apply this on itching affected body parts for some days is useful for getting relief. Along with this treatment take Sarivadi pills in 1 pill in quantity thrice a day is beneficial. Drinking whey twice a day is useful for piles patients.

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पानी को शुद्ध करने की पारंपरिक विधि / Traditional tribal method of water purification

यह सन्देश श्री दीपक आचार्य का अभुमका हर्बल्स, अहमदाबाद, से है. इस सन्देश में दीपकजी हमें बता रहे है की किस प्रकार से पातालकोट, मध्यप्रदेश के आदिवासी पारंपरिक तरीकों से जल का शुद्धिकरण करते है.. पातालकोट घाटी के गाँव की महिलाएँ राजखोह नामक घाटी में स्थित पोखरों से पानी भरती है सामान्यतः गहराई में होने के कारण इन पोखरों का पानी मटमैला होता है. इस पानी में कीचड और अन्य गन्दगियाँ होती है. यहाँ की महिलाएँ इस पानी को शुद्ध करने के लिए निर्गुन्डी नामक वनस्पति की पत्तियों का प्रयोग करतीं  है. पहले घड़े में पानी भर लिया जाता है फिर उसमे लगभग आधे घड़े से थोडा कम जितनी निर्गुन्डी की पत्तियाँ भर दी जाती है. गन्दा पानी पत्तियों के ऊपर फैला होता है. लगभग एक घंटे बाद पानी की सारी गन्दगी घड़े के तल में बैठ जाती है और ऊपर के साफ पानी को निकाल लिया जाता है.. इन आदिवासियों का मानना है की निर्गुन्डी की पत्तियों में मिट्टी और अन्य गन्दगी को आकर्षत करने की क्षमता होती है..जिससे पानी में मौजूद गन्दगी और अन्य सूक्ष्म जीव इन पत्तियों से चिपक जाते है और पानी शुद्ध हो जाता है. आयुर्वेद में भी निर्गुन्डी की पत्तियों और बीजों का जल शुद्धिकरण में प्रयोग के बारे में बताया गया है. इसी प्रकार पातालकोट के हर्राकछार गाँव के आदिवासी नदी के किनारों पर छोटे-छोटे गड्ढ़े खोद कर उसमे नदी का पानी एकत्रित कर उसमे एक कप दही डाल देते है उनका मानना है की दही में भी सूक्ष्म जीवों को अपनी तरफ आकर्षित करने की क्षमता होती है और यह सही भी है की यह सूक्ष्म जीव दही में अपना भोज्य पदार्थ पाते है. कुछ समय बाद गड्ढों के पानी की सारी अशुद्धियाँ तल में बैठ जाती है और पानी पीने योग्य हो जाता है.. दीपक आचार्य का संपर्क है 9824050784

 This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message Deepakji is telling us tribal traditional method of water purification. He said tribal women’s of Patalkot valley fills drinking from water ponds situated at Rajkoh valley. This pond water is muddy and contains solid waste particles. Tribal woman’s is using Nirgundi (Vitex negundo) leaves to purify this water. For doing so first the pitcher is filled with this pond water then Nirgundi leaves filled up to slightly less than half of pitcher and it has to be left for an hour. Tribal believes Nirgundi is having properties to attract mud particles & microbes. About an hour later all impurities settled down at the bottom of the pitcher & tribal women’s then drawn surface water drinking & cooking purpose. In other method the tribal of “Harrakacchar” village of Patalkot dugs small pits at riverbank for collecting river water than adds one cupful yogurt to this water filled pit & after a while all impurities settled down at the bottom of pit & surface water can be used for drinking as well as for cooking purpose. Contact of Deepak Acharya is 9824050784

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कील-मुहांसों का उपचार / Treatment of Acne & Pimples

यह संदेश सरोजनी गोयल का बाल्को कोरबा, छत्तीसगढ़ से है इस संदेश में वह कील और मुहांसो के उपचार के बारे में बता रहीं है…लाल चन्दन और जायफल को पानी में घिसकर चेहरे पर लगाने से मुहांसे नष्ट होते है…चौथाई नीबू का रस थोड़ी सी हल्दी और चुटकी भर नमक मिलाकर थोड़े से गुनगुने पानी में मिलाकर चेहरे पर लगाकर थोड़ी देर रहने दे फिर ठन्डे पानी से धो ले…इसे सप्ताह में 2 बार दोहराए लाभ होगा….नीम की जड़ को पानी में घिसकर चेहरे पर लगाये शीघ्र लाभ होगा…हल्दी और बेसन घोलकर नहाने से पहले चेहरे पर लगाने से लाभ होगा…

नीबू का रस शहद में मिलाकर चेहरे पर लगाने से झाइयाँ और झुर्रियां दूर होंगी…30 ग्राम पिसा अजवाइन 30 ग्राम दही में मिलाकर चेहरे पर रात को सोते समय लगाये और सुबह ठन्डे पाने से धो ले लाभ होगा…मसूर को नीबू के रस के साथ पीसकर चेहरे पर लगाने से लाभ होगा…त्वचा की रंगत बरकरार रखने के लिए जामुन और आप के पत्तों को हल्दी और गुड में लुगदी बनाकर त्वचा पर लेप करें इससे त्वचा कांतिमय हो जाएगी…. बरगद का दूध ऊँगली से चेहरे पर मलने से चेहरे का रंग निखर आता है…थोडा सा दूध चुटकी भर नमक मिलाकर रुई से चेहरे पर मलने से कांति बढती है…सरोजनीजी का संपर्क है: 9165058483

This is a message of Sarojini Goyal from Balko, Korba, Chhatisgarh…In this message she is telling us traditional treatment of Acne & Pimples…She said rub Red Sandalwood (Rakt Chandan) & Nutmeg (Jaayfal) on rough stone with little water until smooth paste is formed and apply this paste on face to cure pimples… Mix quarter lemon juice, little bit turmeric powder & one pinch common salt to small amount of lukewarm water & apply this on face & after few minutes wash your face with cold water…repeat this procedure twice a week…Dilute turmeric powder & gram floor in water and apply this on your face… By applying mixed combination of lemon juice & honey can reduce wrinkles…Apply Banyan tree milk on face with the help of finger tips this can useful for enhancing glossiness & shining on face…Sarojaniji’s at 9165058483

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पथरी का सरल और कारगर नुस्खा / Simple & effective remedy for Kidney stone

यह संदेश डॉ. एच डी गाँधी का रायपुर छत्तीसगढ़ से हैइस संदेश में वह डॉ. आर.डी चंद्रेश्वर से पथरी के सरल उपचार के बारे में पूछ रहे हैडॉ. आर. डी चंद्रेश्वर का कहना है की पथरी के सरल और सर्वसुलभ औषधि के लिए बबूल के वृक्ष की 50 ग्राम पत्तियाँ तोड़ लेबबूल का वृक्ष सामान्यतः सभी जगह मिल जाता है…. इन पत्तियों को बारीक़ पीस कर इसमें 250 ग्राम दही मिलाकर इसके 5 बराबर हिस्से कर लेंऔर इसके 1-1 हिस्से को 3 घंटे के अंतराल पर लेते रहेंइसे पथरी के समाप्त होने तक रखेंयह बड़ा ही कारगर सस्ता सरल नुस्खा है….पथरी के रोगियों के लिए परहेज है की वह दूध से बनी वस्तुओं का सेवन न करें…. हर किस्म की भाजी न लेचने और अरहर की दाल न लेंडॉ एच. डी गाँधी का संपर्क है 9424631467

 This is a message of Dr. H D Gandhi from Raipur, Chhatisgarh…In this message he is talking to Dr. R D Chandreshwar who is telling us the remedy for Kidney stone…He said take 50 gram Acacia leaves & grind to form paste then add 250 gram curd & mix well… Divide this combination in five equal parts… Take each part in every 3 hour interval..Continue this remedy until stone get dissolved…Avoid milk products, Gram & Pigeon pea pulses…This is a simple & effective remedy.. Dr. H D Gandhi is at 9424631467

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