Tag Archives: दालचीनी / Cinnamon

कोलेस्ट्राल को नियंत्रित करने का पारंपरिक घरेलू नुस्खा – Traditional tip for managing Cholesterol

स्वास्थ्य स्वर से वैद्य एच डी गाँधी कोलेस्ट्राल को कम करने का  घरेलू नुस्खा बता रहे हैं. जो इस प्रकार है 3 चम्मच दालचीनी, 3 चम्मच शहद और 10 तुलसी की पत्तियों को 3 गिलास पानी में मिलाकर उबालें. जब पानी सिर्फ लगभग 1 कप शेष बचे तब इसे छानकर इसका खाली पेट नियमित सेवन करने से कोलेस्ट्राल का स्तर घटाने में मदद मिलती है. सवधानी यह रखनी है की इसका सेवन करने  पश्चात एक घंटे तक कुछ नहीं खाएं.
Vaid H D Gandhi of Swasthya Swara is sharing some tips on managing cholesterol. According to him boil 3  tea spoons of Dalchini (innamon), 3 tea spoon of Honey and 10 Tulsi (Basil) leaves in 3 glass of water till only 1 cup remains. Strain the concoction and the same should be taken empty stomach daily in the morning. Food to be taken only after one hour. He also advises that intake of oil should be in limited quantity. 

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मुहाँसो के उपचार के लिए पारंपरिक लेप – Traditional liniment for Pimple treatment

स्वास्थ्य स्वर से वैद्य एच डी गाँधी आज हमें मुहाँसो के उपचार के लिए पारंपरिक लेप बनाने की विधि बता रहें है. इसके लिए 1 चम्मच दालचीनी का चूर्ण, 3 चम्मच शहद, 10 ग्राम एलोवेरा का गूदा, 2 ग्राम हल्दी का चूर्ण और 10 नग नीम की पत्तियों को पीसकर उसके लेप को रोज नियमित रात को सोने के पहले चेहरे पर लगाएँ और सुबह गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें इससे लाभ होगा. चेहरे को साफ़ करने के लिए साबुन की जगह मुलतानी मिट्टी का प्रयोग करें. यदि चेहरे पर दाग-धब्बे हो गए हो तो 1 चम्मच चने का आटा,  1 चम्मच मलाई, 1 चम्मच शहद, 10 बूंद नीबू का रस और एक चम्मच दालचीनी का चूर्ण को मिलाकर इस लेप को चेहरे पर लगाना लाभदायक है.
Vaid H D Gandhi of Swasthya Swara is telling traditional liniment for Pimple treatment. Mix 1 spoon Cinnamon powder, 3 spoon Honey, 10 gms Aloevera pulp or gel, 2 gms Turmeric powder & 10 nos Neem leaves paste together to make liniment & regularly applying  this on face daily before bed time and in the morning washing your face with lukewarm water is useful for Pimple treatment. Precaution should be taken avoid using soap. In case of stains on face applying paste of 1 spoon Gram flour, 1 spoon milk cream, 10 drops lemon juice & 1 spoon Cinnamon powder is beneficial.

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गठियावात का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Arthritis

मुंगेली जिला छत्तीसगढ़ के वैद्य चंद्रकांत शर्मा का कहना है कि गठियावात होने पर जोड़ो में दर्द और सूजन आती है और इसकी शुरुआत उँगलियों से होती है.  इसके उपचार के लिए पानी का अधिक सेवन करें और सिकाई करना भी लाभदायक है. सौंठ को अरंडी के तेल या घी के साथ लेने से अथवा  250 मी.ली. दूध में उतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर उसमे 2 लहसुन की कलियाँ, 1 चम्मच सौंठ चूर्ण, 1 चम्मच हरड चूर्ण, दालचीनी और छोटी इलायची डालकर उबालें और उसे पियें. इस उपचार को शुरू करने से पहले 3 दिनों तक मूंग उबला पानी पियें उसके बाद 7 दिनों तक उबले हुए मूंग ही खाएं इसके बाद 15 दिनों तक उबलें हुए मूंग के साथ रोटी खाएं. इस पद्धति से उपचार करने से लाभ मिलेगा.

Vaid Chandrakant Sharma of Mungeli, Chhatisgarh is suggesting us traditional treatment of Arthritis. As per him in Arthritis causes pain & swelling in joints & It begins from fingers. For the treatment boil 250 ml Milk with same amount of water after adding 2 Garlic buds, 1 spoon dried Ginger powder, 1 spoon Harad (Terminalia chebula) powder, Cinnamon & Cardamom. Drinking this combination after filtration is useful. Taking Ginger powder with Castor oil or Ghee is also beneficial. Before starting this treatment first 3 days Kidney been boiled water should be taken afterwards 7 days eat on boiled Kidney been then after 15 days eat only  boiled Kidney been with chapaties. This treatment method will benefits in Arthritis.

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स्मरणशक्ति बढ़ाने का पारंपरिक उपाय – Traditional way to increase Memory

यह सन्देश रामप्रसाद निषाद का कोंडागांव, बस्तर, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामप्रसादजी हमें स्मृति भ्रम और कुंठित बुद्धि का पारंपरिक उपचार बता रहें है. इनका कहना है कि इस रोग से ग्रस्त रोगी की स्मरण शक्ति क्षीण हो जाती है और रोगी को किसी भी विषय का ज्ञान नहीं रहता है. इसके उपचार के लिए बच और शक्कर का बराबर मात्रा में चूर्ण बनाकर रख लें. यह चूर्ण 3 ग्राम (एक चम्मच) की मात्रा में रोगी को सुबह पानी के साथ दें इससे 8-10 दिनों में आराम मिलना शुरू हो जायेगा. बच के टुकड़े को 10 -15 मिनटों तक चूसने से भी लाभ मिलता है. दालचीनी का 3 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन प्रातः रोगी को पानी के साथ देने से भी लाभ मिलता है. इसमें मिर्च मसालेदार और गरिष्ट भोजन और खाती से बचना चाहिए. सुपाच्य भोजन करना चाहिए विशेषकर विटामिन सी युक्त वस्तुओं का सेवन करना चाहिए.

Ramprasad Nishad from Kondagaon, Chhatisgarh, is giving tip for traditional remedy of memory loss. Make fine powder of equal quantity of Bach (Sweet flag) and sugar. One teaspoon of this powder taken with water early morning is beneficial. One teaspoon  of Cinnamon powder taken daily with water is also useful. During the treatment oily, spicy & heavy meals should be avoided. Preference should be given to digestive & vitamin C enriched food.

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नवजातों को होने वाली उलटी का पारंपरिक उपचार / Traditional tips to treat baby vomiting

यह सन्देश रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, पाली, कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. इस सन्देश में वह हमें नवजात बच्चों को होने वाली दूध की उल्टी को रोकने के पारंपरिक नुस्खे बता रहे है. इनका कहना है कि हींग को पानी में घोलकर बच्चों के पेट पर लेप करने से लाभ मिलता है. छोटी इलायची और दालचीनी का चूर्ण शहद के साथ देने से फायदा होता है. पिपली और मुलैठी के चूर्ण को नीबू के रस और शहद के साथ चटाने से लाभ होता है. सौंठ, सौंफ, बड़ी इलायची, तेजपत्ता, जीरा, और भुनी हींग को पीसकर मिश्री की चाशनी के साथ चटाने से आराम मिलता है. रामफल पटेल का संपर्क है  881113134

This is a message of Ramfal Patel from Pragya Sanjeevani, Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us some traditional tips for the treatment of Baby vomiting. He says dissolve Heeng (Asafoetida) in some water & applying this on infants stomach is useful. Giving powder of small cardamom & cinnamon after adding honey is useful. Licking paste of liquorice & long pepper after adding lemon juice & honey to infants is beneficial. Licking  to infants powder of dry ginger, aniseed, big cardamom, bay leaf, cumin & roasted asafoetida after adding sugar syrup is useful Ramfal is @ 881113134

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मोतीझरा का पारंपरिक उपचार / Traditional treatment of Typhoid

यह सन्देश रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, पाली, कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. इस सन्देश में रामफलजी हमें मोतीझरा के में होने वाले बुखार में उपयोगी पारंपरिक उपचार की विधि बता रहे है. पहली विधि है 10 मी.ली तुलसी की पत्तियों का रस, 10 मी.ली. अदरक का रस, 5 कालीमिर्च के दाने इन सभी को 1 चम्मच शहद के साथ मोतीझरा से पीड़ित रोगी को पिलाए और चादर ओढाकर सुला दें. इससे मोतीझरा के बुखार में लाभ मिलता है. दूसरी विधि है 10 मी.ली तुलसी की पत्तियों का रस, 10 ग्राम दालचीनी, 10 ग्राम जावित्री को 1 लीटर पानी में उबालें और जब ¼ पानी शेष बचे तो इसे मोतीझरा के रोगी को थोड़े-थोड़े अंतराल में पिलाएं इससे मोतीझरा में लाभ मिलता है. रामफल पटेल का संपर्क है 8815113134

This is a message of vaid Ramfal Patel from Pragya Sanjeevani, Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message is is suggesting us traditional treatment tips for Typhoid. First tip he is giving is take 10 ml basil leaves juice, 10 ml ginger juice, 5 nos black pepper and giving this combination after adding 1 spoon honey to the Typhoid patient is beneficial for reducing fever. Second one is boil 10 ml basil leaves juice, 10 gms cinnamon & 10 gms mace in 1 liter water & when  ¼ water remains giving this to Typhoid patient in little quantity in short intervals is useful. Ramfal Patel is @ 8815113134

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मति भ्रम का पारंपरिक उपचार / Traditional treatment of Memory loss

यह सन्देश रामप्रसाद निषाद का कोंडागांव, बस्तर, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामप्रसादजी हमें स्मृति भ्रम और कुंठित बुद्धि का पारंपरिक उपचार बता रहें है. इनका कहना है कि इस रोग से ग्रस्त रोगी की स्मरण शक्ति क्षीण हो जाती है और रोगी को किसी भी विषय का ज्ञान नहीं रहता है. इसके पारंपरिक उपचार के लिए मालकांगनी जिसे संस्कृत में ज्योतिष्मती के नाम से जाना जाता है के फलों के छिलके उतार कर उसका तेल निकालकर सुरक्षित रख लें. इस तेल की 1 से 5 बूंदे रोगी को बताशे में डालकर प्रतिदिन प्रातः खिलाएं ऐसा करने से लाभ होगा. बच और शक्कर का बराबर मात्रा में चूर्ण बनाकर रख लें. यह चूर्ण 3 ग्राम (एन चम्मच) की मात्रा में रोगी को सुबह पानी के साथ दें इससे 8-10 दिनों में आराम मिलना शुरू हो जायेगा. बच के टुकड़े को 10 -15 मिनटों तक चूसने से भी लाभ मिलता है. दालचीनी का 3 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन प्रातः रोगी को पानी के साथ देने से भी लाभ मिलता है. इसमें मिर्च मसालेदार और गरिष्ठ भोजन और खटाई से बचना एवं सुपाच्य भोजन करना चाहिए विशेषकर विटामिन सी युक्त वस्तुओं का सेवन करना चाहिए. रामप्रसाद निषाद का संपर्क है 7879412247

This is a message of Ramprasad Nishad from Kondagaon, Bastar, Chhatisgarh. In this message he is telling use traditional remedy of memory loss. He say’s in this disorder the memory of suffering patient have diminished & the patient has no knowledge of any subject. Remove skin of Black oil plant (Malkangani) fruit and grind well until oil is extracted & 1-5 drops of this oil has to be given to the patient after dripping it on Sweet biscuit (Batasha). It is very useful for the patient. Make fine powder of Sweet flag (Bach) after adding sugar in equal quantity. Giving this 3 grams powder to the patient with water early morning is beneficial. Giving 3 grams  of Cinnamon powder daily with water to the patient is useful. During the treatment oily, spicy & heavy meals should be avoided. Preference should be given to digestive & vitamin C enriched food. Ramprasad Nishad’s at  7879412247

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प्राकृतिक डिओडोरेंट / Natural Deodorant

यह सन्देश डॉ. दीपक आचार्य का अभूमका हर्बल्स अहमदाबाद से है. इस सन्देश में दीपकजी हमें प्राकृतिक डिओडोरेंट बनाने की विधि बता रहे है. इनका कहना है की इस प्राकृतिक डिओरेंडोट को बनाने के लिए एक तिहाई कप सिरका (एसिटिक एसिड) और इतनी ही मात्रा में पानी लेकर इन दोनों को आपस में मिला ले. अब एक अलग बर्तन में 3 लौंग, धनिया, पुदीने की पत्तियाँ, 4-5 नीलगिरी की पत्तियाँ और थोड़ी सी दालचीनी को पहले से बनाये सिरके और पानी के गर्म घोल में डाल दे और थोड़ी देर बाद इसे छान ले. बस बन गया आपका प्राकृतिक डिओडोरेंट इसे किसी बोतल में भरकर फ्रिज में रखा जा सकता है. इसे नहाने के बाद थोडा सा लेकर बाँहों और ज्यादा पसीना आने वाले स्थानों पर लगाया जा सकता है. इससे पसीना आना तो कम होता ही है साथ ही यह दुर्गन्ध का नाश भी करता है. प्राकृतिक रूप से बने होने के कारण यह खतरनाक और केमिकल युक्त डिओरेंडोट से कई गुना बेहतर है..दीपकजी का संपर्क है 9824050784

This is a message of Dr. Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message he is telling us method to prepare home made natural Deodorant. He says boil one third cup of Vinegar (Acetic acid) and water in equal quantity then add 3 cloves, coriander & mint leaves, little cinnamon and 4-5 eucalyptus leaves. After some time filter this preparation and fill it in the bottle & keep in refrigerator. Now your deodorant is ready. After bathing apply this natural deodorant on under arm and sweating parts of body to get rid of odor. contact of Deepak Acharya is 9824050784

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हर्बल रूम फ्रेशनर / Herbal room freshener

यह संदेश दीपक आचार्य का अभुमका हर्बल्स प्रा.लि अहमदाबाद से है… यह आज अपने संदेश में घरेलू रम फ्रेशनर बनाने का तरीका बता रहे हैं…इनका कहना है की हम फलों के छिलकों को प्रायः फेंक देते है… पर यह एक बेहतरीन और प्राकृतिक रूम फ्रेशनर बनाने के काम आ सकते है…इसे बनाने के लिए खट्टे मौसमी फलों जैसे संतरा, नीबू और मौसंबी के छिलकों को के बर्तन में पानी के साथ उबालें साथ ही इसमें कुछ दालचीनी और 2-4 लौंग भी डाल दे…जब यह खौलने लगे तो सावधानीपूर्वक इस खौलते हुए पानी को अपने घर के सभी कमरों में घुमाएँ…आप पाएँगे की आपके कमरों में एक अच्छी सुगंध फ़ैल जाएगी…इसकी यह सुगंध 12 प्रकार के सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट कर देती है… दीपक आचार्य का संपर्क है 9824050784

This is a message of Deepak Aacharya from Abhumka Herbals Pvt. Ltd., Ahmedabad… In this message he is telling us how to make household herbal room freshener by using sour fruit skins. He is saying we often throw fruits skins..but they could serve to make the best & natural room freshener.. For doing so boil some sour fruits skins like Orange, Lemon & sweet Lemon in the pot add some Cinnamon & 2-4 Cloves to it. When it starts boiling…Carefully carry this boiling combination in every room of your house… You will feel fine fragrance in your home & this fragrance has disinfectant properties and that kills about 12 types of bacteria’s as well…Deepakji’s at 9824050784

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मधुमेह को नियंत्रित रखने का पारंपरिक तरीका / Traditional method to control Diabetes

यह संदेश श्री दीपक आचार्या का अभुमका हर्बल्स अहमदाबाद से है इस अपने इस संदेश में दीपकजी हमें बता रहें है की कैसे आदिवासी पारंपरिक तरीको से मधुमेह के लिए नुस्खे बनाते है…. दीपकजी का कहना है की वह हमें दो नुस्खों के बारे में बता रहे है..

पहला नुस्खा है: एक चम्मच अलसी के बीजों को खूब चबाकर खाइए और फिर ऊपर से दो गिलास पानी पी लीजियेऐसा प्रतिदिन सुबह खाली पेट और शाम को सोने के पहले करिए..

 दूसरा नुस्खा है: दालचीनी का चूर्ण कर लीजिये और आधा चम्मच चूर्ण को आधा कप पानी में मिला लीजिये और इसे सुबह और शाम खाली पेट लेना हैइसके लिए यह ध्यान रखे की यह चूर्ण पानी में 15-20 मिनिट पहले मिला लेनुस्खों का प्रयोग करके मधुमेह को नियंत्रण में रखा जा सकता हैदीपकजी का संपर्क है 09824050784

This is a message of Shri. Deepak Aacharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad….this message is on how to control Diabetes by using Traditional Adivasi methods…he is advising two methods.

First one is to chew well one teaspoon Linseed (Alsi) followed by two glassful of water this is to be done every morning in empty stomach as well as before bedtime …

The second methodology is in use of Cinnamon (Dalchini ) powder, half a teaspoon of Cinnamon powdershould be mixed in half cup of water and should be taken after 15~20 mins every morning and evening in empty stomach.

Above methods are very effective in keeping diabetes under control….Deepak ji can be contacted on 09824050784.

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