Tag Archives: नागकेसर / Mesua ferrea

मधुमेह को नियंत्रित करने का पारंपरिक तरीका / Traditional remedy for Diabetes control

यह सन्देश लोमेश कुमार बच का पाली, कोरबा छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में लोमेशजी हमें मधुमेह को नियंत्रित करने का पारंपरिक तरीका बता रहें है. इनका कहना है कि आज के समय मधुमेह का प्रसार बढ़ रहा है. इसको नियंत्रित रखने के लिए वह हमें मधुमेह दमन वटी बनाने का सूत्र बता रहे है. इसको बनाने के लिए 100 ग्राम जामुन गुठली, 100 ग्राम गुडमार, 100 ग्राम बबूल की पत्तियाँ, 100 ग्राम हल्दी घी में भूनी हुई, 50 ग्राम शिलाजीत, 100 ग्राम सौंठ, 100 ग्राम बेल पत्तियों का चूर्ण, 100 ग्राम जामुन की पत्तियों का चूर्ण, 50 ग्राम स्वर्ण माच्छीक भस्म (बाजार में उपलब्ध है). इन सभी घटकों को एकत्रित कर के चूर्ण बना लें. इन सामग्रियों से बने चूर्ण को त्रिफला के क्वाथ (काढ़ा) में घोंटकर सूखा लें. इसके सूखने के बाद इसी प्रकार इस प्रक्रिया को तीन बार दोहराएँ (3 बार सूखाकर घोंटे). इसके बाद इसी प्रक्रिया को गोझरण का प्रयोग कर 3 बार दोहराएँ इसके बाद इसी प्राक्रिया को  तुलसी की पत्तियों के रस के साथ 3 बार दोहराएँ. इसके बाद इस सूखे हुए चूर्ण की 2-2 ग्राम की वटी (गोली) बनाकर रख लें. इन गोलियों को 1-1 गोली की मात्रा में सुबह-शाम पानी के साथ एक वर्ष तक लें. लोमेश कुमार बच का संपर्क है 9753705914

This is a message of Lomesh Kumar Bach from Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional formulation for managing Diabetes. He says at present time the prevalence of Diabetes is growing. Lomeshji is telling us method of making pilles by using forest products. Take 100 gms Blackberry seeds, 100 gms Gudmaar or Madhunashini (Gymnema sylvestre), 100 gms Acacia leaves, 100 roasted Turmeric in ghee, 50 gms Shilajeet (Mumijo), 100 gms dried Ginger, 100 gms Bael leaves (Aegle marmelos), 100 Blackberry leaves & 50 gms Swarna Machhik Bhasm (Available in the market). Make fine powder by using above said contents (Articles). Then creams up this powder in Trifala decoction until this combination becomes dried after drying repeat this process three times. Hereafter repeat this process using Gojharan (Extract of Cow urine) & Basil leaves. Hereafter make pilles using this dried combination. Taking this pills in 1-1 quantity twice a day for 1 year. This is beneficial for Diabetic persons. Lomesh Kumar Bach’s at 9753705914

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अर्श – बवासीर का पारंपरिक उपचार / Traditional remedy for Hemorrhoid & Piles

यह सन्देश लोमेश कुमार बच का पाली, कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में लोमेशजी हमें बवासीर के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि अर्श मुख्यतः 2 प्रकार का होता है. पहले प्रकार में गुदा द्वार के किनारों पर मस्से हो जाते है और उनसे खून गिरता है इसे खूनी बवासीर कहते है. दूसरे प्रकार के अर्श में मस्से तो नहीं होते है पर पेट में कड़ापन आ जाता है उसे बादी बवासीर कहते है. इनका कहना है की बवासीर में कुछ औषधियां अधिक कारगर होती है. काले तिल, नागकेसर और मिश्री को पीसकर मक्खन में मिलाकर खाने से लाभ मिलता है. कोमल बबूल की फल्लियों जिसमे बीज नहीं बने हो को सूखाकर उसका चूर्ण बना लें इस चूर्ण की 6 ग्राम मात्रा को प्रतिदिन ताजे पानी के साथ लगातार 15 दिनों तक लेने से सभी प्रकार के बवासीर में लाभ मिलता है. सेमल के दूध में हल्दी का चूर्ण मिलाकर उसकी एक बूंद मस्से पर लगाने से मस्सा नष्ट हो जाता है. डिकामाली गोंद के 2-3 ग्राम चूर्ण में 1 ग्राम सैंधा नमक मिलाकर शाम को एक बार लगातार एक सप्ताह तक खाने से आराम मिलता है. मालकांगनी के जड़ को पानी के साथ घिसकर मस्सों पर लगाने से खूनी बवासीर में लाभ होता है. 1 तोला देशी मिश्री, 1 तोला जिमीकंद का चूर्ण, 1 तोला नागकेसर का चूर्ण और चिरमिटी चूर्ण आधा तोला इन सबको पीसकर खाने से बवासीर में लाभ मिलता है.

This is a message of Lomesh Kumar Bach from Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional remedy for Piles. He says piles are mainly of two types in first type warts grows on the edges of anus & In second type stomach leads to stiffness but hemorrhoid is more painful. Traditional remedies are more effective for curing piles. Taking black Sesame, Nagkesar (Mesua ferrea) & sugar candy with butter is useful. Grind seedless soft beans of Acacia after drying. Taking this 6 grams powder with water for continuously 15 days is beneficial in Piles. Applying seed cotton milk after adding a pinch of turmeric powder on warts is useful to get rid of warts. Taking 2-3 grams resin powder of Cambi Resin tree after adding 1 gram rock salt at evening for week is useful. Rub Malkangni (Celastrus paniculata) root with water until paste is formed. Applying this paste on warts is very effective.

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कपास के पेड़ की उपयोगिता / Importance of Cotton Plant

यह संदेश श्री निर्मल कुमार अवस्थीजी का वार्ड क्रमांक 4, कस्तूरबा नगर, छत्तीसगढ़ से है…आज निर्मलजी हमें कपास के पेड़ की उपयोगिता को वर्णित कर रहे है…उनका कहना है की ईश्वर ने मानव को स्वास्थ्य रखने के लिए आलग -अलग प्रकार की वनस्पतियों की उत्त्पति की है…ईश्वर ने कुछ ऐसी वनस्पतियाँ बनाई है जिस पर पुष्प लगे बिना फल प्राप्त, तो कुछ ऐसी भी जिस पर पुष्प तो लगते है  पर फल नहीं आते है…पुष्पों में ऐसा प्रकृति प्रद्दत दिव्य गुण अन्तर्निहित रहता है जिसके यथा-विधि उपयोग से हम अपना जीवन सुखी बना सकते है…निर्मलजी, कपास के पुष्पों और बीजों के चिकित्सीय गुणों के विषय में बता रहे है…इस वनस्पति पर आधारित  नुस्खे विभिन्न प्रकार के चर्म-रोगों, विषैले जंतुओं के काटने, और गर्भाशय से संबंधित चिकित्सीय निदानों पर प्रमुखता से है.. यह मुत्रक, निष्कारक और कान की सभी प्रकार की तकलीफों को दूर करने वाले होते है…इसके बीज (बिनौले) दूध बनाने वाले होते है… कपास की जड़ को पीसकर चावल  के पानी के साथ पिलाने पर श्वेत प्रदर में लाभ होता है… इसके बिनौले की मींगी और सौंठ को जल के साथ पीसकर अंडकोष पर लगाने से अंडकोष वृद्धी रूकती है….कपास के पुष्प का शरबत पिलाने से पागलपन में लाभ होता है और चित्त प्रसन्न होता है….बिनौले को पानी में औटाकर उसके पानी से कुल्ले करने से दन्त पीड़ा कम होती है…कपास की जड़ का काढ़ा पिलाने से पेशाब करने में होने वाली जलन मिटती है और मुत्रदाह में लाभ होता है…इसके बिनौले की मींगी को पानी के साथ पीसकर जलने वाले स्थान पर लगाने से आग की जलन कम होती है…खुनी बवासीर में इसके केसर को शक्कर और मक्खन के साथ देने से लाभ होता है…. रक्त प्रदर और रक्तार्श में कमल का केसर, मुल्तानी मिट्टी और शक्कर मिलाकर फांकने से लाभ होता है…कमलडंडी और नागकेसर को पीसकर दूध के साथ पिलाने पर दूसरे महीने में होने वाला गर्भस्राव (गर्भपात) मिट जाता है… धातु रोग में कपास के बीजों की मींगी को पीसकर दूध के साथ पिलाने से लाभ होता है….श्री निर्मल अवस्थीजी का संपर्क है: 09685441912

 This message is recorded by Shri Nirmal Kumar Awasthi from ward No. 2, Kasturba Nagar , Chattisgarh …..In this message he is telling us about the medicinal properties of flowers & seeds of Cotton plant. Various parts of this plant can be used to cure different diseases….Remedy for Leucorrhoea is first grind Cotton plant add some rice water in it. This can be used as a tonic for Leucorrhoea patients. Boil cotton seed in water & this water can me used as mouthwash to strengthen teeth & gums…Squash of flowers of Cotton plant can useful in madness..For more information Nirmal Awasthi is at 09685441912

 

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सर्दियों के लिए शक्तिवर्धक पाक / Health energizing tonic in winter

यह संदेश डॉ. एच डी गाँधी का धर्मार्थ दवाखाना मोतीनगर रायपुर छत्तीसगढ़ से है….इस संदेश में वह सर्दी के मौसम में शक्ति बढाने के लिए कई उपाय बता रहे हैं…पहले नुस्खे में वह शक्तिदायक, बलवर्धक मुसली पाक बनाने की विधि वह बता रहे हैं इसके लिए मुसली चूर्ण 2.5 किलो, कौंच बीज के 1 किलो चूर्ण को 5 लीटर दूध में पकाएं फिर उसे एक किलो घी में भुनकर उसमे 5 किलो मिश्री की चाशनी डाल देउसमे विदारीकन्द , गोखरू, सतावर, सौंठ का चूर्ण, दालचीनी, इलायची, नागकेसर ,लौंग, जायफल ,जायपत्ती और वंशलोचन 100-100 ग्राम मिला देंइसे 10 ग्राम प्रतिदिन दूध के साथ सेवन करने से शरीर बलवान होता हैदूसरा नुस्खा है बालसेमर का चूर्ण में दुगुनी मात्रा में मिश्री मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से शक्ति बढती हैतीसरा नुस्खा है अश्वगंधा, सतावर सफ़ेद मूसली और विदारीकन्द सभी को 100-100 ग्राम तथा सौंठ, केसर, जायफल, लौंग को 10-10 ग्राम सभी का चूर्ण बनाकर एकसाथ रख लें फिर 10 ग्राम शहद और 200 ग्राम दूध के साथ प्रतिदिन सेवन करें सर्दियों के  लिए यह बहुत अच्छा नुस्खा है…5 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण को 50 ग्राम आंवले के रस के साथ प्रातः काल खाली पेट सेवन करने से शक्ति बढती हैचौथा नुस्खा है त्रिफला एवं मुलैठी दोनों को 2-2 ग्राम तथा उसमे 5 ग्राम मिश्री मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से मनुष्य स्वस्थ्य रहता है….पाँचवा नुस्खा है अश्वगंधा का 5 ग्राम के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर दूध के साथ प्रातः काल एवं सायंकाल भोजन से पूर्व सेवन करने लाभ होता है छटवां नुस्खा है 5 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री और शहद मिलाकर 6 माह तक सेवन करने के से दुर्बलता 1 वर्ष के लिए दूर हो जाती है सातवा नुस्खा है….सफ़ेद मुसली और मिश्री में बड़ी इलायची के बीज मिलाकर पीसकर प्रातः और सायं सेवन करने से शीघ्र लाभ होगाडॉ. एच. गाँधी का संपर्क है 9424631467

This is a message of Dr. H D Gandhi from Dharmath Dawakhana Motinagar, Raipur, Chhatisgarh…In this message he is telling us how to make traditional health tonic to increase our power & immunity during winter season..To make Musli Paak boil 1 kg Musli (Chlorophytum borivilianum) & 1 kg Kounch seed (Mucuna pruriens) powder in milk…then roast this combination in 5 kg pure ghee & add 5 kg sugar candy…now add Vidarikand (Pueraria tuberose) , Gokhru, Satavar (Asparagus racemosus), Dry Ginger powder, Cinnamon powder, Cardamom powder, Nagkeser (Mesua ferrea), Clove powder, Nutmeg powder, Jaypatti and Vanshlochan (Bambusa arundinacea) each in 100 gm quantity…To boost your immunity take this preparation 10 gms with milk…Dr. H D Gandhi is at 9424631467

 

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बवासीर का परंपरागत उपचार / Traditional treatment of Piles

यह संदेश श्री अनंतराम श्रीमालीजी का सागर मध्यप्रदेश से है इस सन्देश में अनंतरामजी हमें बवासीर रोग के कारक, परहेज और उसके पारंपरिक इलाज की जानकारी दे रहे हैइनका कहना है की बवासीर रोग अक्सर रहने वाली कब्ज के कारण होता हैइलाज के आभाव में बवासीर के मस्से आगे चलकर खूनी बवासीर में तब्दील हो जाते है जो पीड़ादायक होते हैखूनी या बादी दोनों ही प्रकार के बवासीर में औषधी के साथसाथ खानपान का परहेज लाभप्रद होता हैइसमें रोगी को गुड, बेसन, मिर्च, अधिक तेलयुक्त भोज्य सामग्री, अरहर की दाल, उड़द की दाल और वातकारक भोज्य पदार्थो का सेवन तत्काल रोक देवेइसके उपचार के लिए मुली के रस का गाय के घी के साथ सुबहशाम सेवन करें, एवं माजूफल का चूर्ण गुदा स्थान पर लगाये इससे लाभ होगादूसरा सफ़ेद सुरमा और नागकेसर को समभाग में लेकर कूटपीसकर बारीक़ कर लेंइसमें शहद मिलकर 1 ग्राम मात्रा में सुबहशाम चाटें साथ ही कडवी तुरई के बीज को रात को पानी में फुलाकर सुबह इन्हें बारीक पीसकर गुदा स्थान पर लगायें.. यह उपचार बवासीर रोग में अत्यंत प्रभावी है….अनंतराम श्रीमालीजी का संपर्क है..9179607522

 This is a message of Shri. Anantram Shrimali from Sagar, Madhya Pradesh…this message is about probable cause, regimen and traditional treatment of piles.. According to him persistent constipation often leads to piles and in absence of proper treatment, piles could transform into hemorrhoid… Along with treatment piles & hemorrhoid, patients should avoid Jaggery (Gur), Gram floor(Besan), spicy & oily food and people should abstain from Arhar Daal and Urad Daal. For treatment Radish juice with pure cow ghee should be taken in morning and evening. Majuphal Churn could be applied directly on the piles. Secondly mix Nagkesar (Mesua ferra) and white kohl commonly known as surma in equal quantity and grind well and lick this 1 gram mixture with honey in morning and evening. Soak Turai seeds (Luffa) in water and apply its paste on rectum.. above treatments have proven effective in cure of piles and hemorrhoid… Contact of Shrimaliji is 9179607522

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अदरक के गुण

यह संदेश सरोजनी गोयल का बाल्को, जिला कोरबा, छत्तीसगढ़ से है…इस संदेश में सरोजनीजी अदरक के गुणों के बारे में बता रहीं है…उनका कहना है की अदरक सामान्यतः सभी घरों में आसानी से उपलब्ध होता है…इसे अक्सर चाय में डालकर पिया जाता है..और यह कई रोगों की अचूक दवा भी है…गठियावात के रोगी इसे गाय के घी में भुनकर खाए और तेल में तलकर उससे जोड़ो की मालिश करें तो उन्हें आराम मिलेगा…लकवा होने की दशा में रोगी को अदरक शहद में मिलकर खिलाये लाभ होगा..अगर पेट में तकलीफ या उल्टियाँ हो रही हो तो 5 ग्राम अदरक के रस में 5 ग्राम पुदीने का रस 2 ग्राम सैंधा नमक मिलकर खिलाये लाभ होगा…अगर खांसी हो रही हो तो अदरक के रस में उतना ही निम्बू का रस मिलकर दे खांसी में आराम होगा…नजला और जुकाम होने पर अदरक के छोटे-छोटे टुकडे काट ले और उसी के वजन के बराबर देशी घी में भुन ले..और उसमे सौंठ, जीरा, कालीमिर्च, नागकेसर, इलाइची, धनिया और तेजपत्ता मिलाकर काढ़ा बना ले और इसका प्रयोग करें…अगर उल्टियाँ हो रही हो तो अदरक का रस प्याज के रस में मिलकर पियें आराम होगा…सरोजनी गोयल का संपर्क है: 9165058483

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