Tag Archives: निर्गुन्डी / Vitex negundo

गठियावात का घरेलु उपचार – Domestic treatment of Arthritis

मुंगेली, छत्तीसगढ़ के वैद्य चंद्रकांत शर्माजी का कहना है कि गठियावात होने पर प्रतिदिन रात को गुनगुने दूध में 2 चम्मच एरंड का तेल मिलाकर सेवन करें इससे वातदोष का नाश होता है.  सौंठ का क्वाथ बनाकर इसे 20-40 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करें. तारपीन के तेल में थोडा कपूर और पिपरमेंट मिलाकर उससे प्रभावित अंग की मालिश करने से भी लाभ मिलता है. इसी प्रकार कॉडलीवर तेल की मालिश भी लाभदायक है. निर्गुन्डी की पत्तीयों का क्वाथ लेने से भी लाभ मिलता है.

This is a message of Vaidya Chandrakant Sharma from Mungeli,Chhatishgarh giving domestic tips for Arthritis. 

1. Taking 2 teaspoon Castor oil in lukewarm milk at bed time is useful.
2. Prepare decoction of dried Ginger. Taking 2 – 3 tablespoon of the mixture twice daily is            useful.
3. Taking decoction of Nirgundi leaves (Vitex negundo) is also beneficial.
4. Massage affected body part with mixture of Turpentine oil, little Camphor and                              Peppermint. In same way massaging with Cod liver oil is also useful.

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दर्द का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of pain

यह सन्देश वैद्य आर के पवार का भीमडोंगरी, मंडला, मध्यप्रदेश से है. अपने इस सन्देश में वह हमें दर्द  के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि इस उपचार के लिए 25 ग्राम ग्वारपाठे का उपरी सूखी छाल, 10 ग्राम सूखी अर्जुन छाल, 10 ग्राम पीपर मूल, 10 ग्राम निर्गुन्डी के बीज, 10 ग्राम अश्वगंधा, 20 ग्राम त्रिफला, 20 ग्राम मूसली, 5 ग्राम मंडूर भस्म और 5 ग्राम अभ्रक भस्म को पीसकर इसे किसी सूती कपडे से छान कर रख ले. इसे पीड़ित व्यक्ति को दिन में दो बार 5-5 ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ देने से लाभ मिलता है. इस उपचार के दौरान इमली, बैंगन और शराब का सेवन न करें और यह उपचार गर्भवती स्त्री को नहीं देना चाहिए.

This is a message of vaidya R K Pawar, from Bheemdongri, Mandla, Madhya Pradesh. In this message he is suggesting us traditional treatment to get rid of pain. He says grind 25 gms dried Aloevera skin, 10 gms dried Arjun chhal (Terminalia arjuna), 10 gms Peeper mul (Piper longum), 10 gms Nirgundi seeds (Vitex negundo), 10 gms Ashwagandha (Indian ginseng), 20 gms Triphala, 20 gms Musli (Chlorophytum borivilianum), 5 gms Mandur bhasm (prepared from iron oxide) & 5 gms Mica ash to make powder after cloth filtration keep this powder in any glass bottle. Taking this combination twice a day in 5 gms quantity with cow milk is useful. Precaution should be taken while treatment avoid tamarind, brinjal & liquor. This combination cannot be given to pregnant women. 

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गठियावात का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Arthritis

यह सन्देश चंद्रकांत शर्मा का मुंगेली, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में चंद्रकांतजी हमें गठियावात के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि निर्गुन्डी की पत्तियों का 10-40 मी.ली रस देने अथवा सेंकी हुई मेथी का चूर्ण कपडे से छानने के बाद 3-3 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी से लेने से वात रोग में आराम मिलता है. यह मेथी वाला नुस्खा घुटनों के वात में भी उपयोगी है. सौंठ के 20-50 मी.ली. काढ़े में 5-10 मी.ली. अरंडी का तेल डालकर सोने से पहले लेना भी लाभदायक होता है. चंद्रकांत शर्मा का संपर्क है 9893327457

This is a message of vaidya Chandrakant Sharma from Mungeli, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional remedy of Arthritis. He says taking 10-40 ml juice of Five leaved chaste tree or taking 3-3 gms fine powder of roasted fenugreek after filtered by cotton cloth twice a day with water is useful. This can also be used in knee arthritis. Taking 20-50 ml decoction of dry ginger after adding 5-10 ml castor oil at bed time is also beneficial. Chandrakant Sharma @ 9893327457

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वातरोग का परंपरागत उपचार / Traditional treatment of Rheumatoid arthritis

यह सन्देश वैद्य हेमंत यादव का ग्राम पोस्ट उमरगांव, जिला कोंडागांव से है. अपने इस सन्देश में हेमंत यादव हमें वात रोग के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि वात से ग्रसित अंग की करेले के रस से निर्गुन्डी के पत्तों की मदद से से मालिश करने के बाद में निर्गुन्डी की पत्तियों को आंच में थोडा गरम करके उससे मालिश किये गए स्थान की 2-3 बार सिकाई करने से दर्द में आराम मिलेगा और सूजन भी उतर जाएगी और यदि हड्डी भी बढ़ गई है तो भी धीरे-धीरे ठीक हो जाएगी. हेमंत यादव का संपर्क है 7805855243

This is a message of Hemant Yadav from Umargaon, Dist. Kondagaon, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional remedy of Musculoskeletal disorders or Rheumatoid Arthritis. He says massaging affected body parts by Bitter gourd juice with the help of Vitex negundo leaves, commonly known as the Five-leaved chaste tree. After massaging fomenting affected area using Five-leaved chaste tree leaves is very effective in reducing pain & inflammation. Hemant Yadav is @ 7805855243

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पानी को शुद्ध करने की पारंपरिक विधि / Traditional tribal method of water purification

यह सन्देश श्री दीपक आचार्य का अभुमका हर्बल्स, अहमदाबाद, से है. इस सन्देश में दीपकजी हमें बता रहे है की किस प्रकार से पातालकोट, मध्यप्रदेश के आदिवासी पारंपरिक तरीकों से जल का शुद्धिकरण करते है.. पातालकोट घाटी के गाँव की महिलाएँ राजखोह नामक घाटी में स्थित पोखरों से पानी भरती है सामान्यतः गहराई में होने के कारण इन पोखरों का पानी मटमैला होता है. इस पानी में कीचड और अन्य गन्दगियाँ होती है. यहाँ की महिलाएँ इस पानी को शुद्ध करने के लिए निर्गुन्डी नामक वनस्पति की पत्तियों का प्रयोग करतीं  है. पहले घड़े में पानी भर लिया जाता है फिर उसमे लगभग आधे घड़े से थोडा कम जितनी निर्गुन्डी की पत्तियाँ भर दी जाती है. गन्दा पानी पत्तियों के ऊपर फैला होता है. लगभग एक घंटे बाद पानी की सारी गन्दगी घड़े के तल में बैठ जाती है और ऊपर के साफ पानी को निकाल लिया जाता है.. इन आदिवासियों का मानना है की निर्गुन्डी की पत्तियों में मिट्टी और अन्य गन्दगी को आकर्षत करने की क्षमता होती है..जिससे पानी में मौजूद गन्दगी और अन्य सूक्ष्म जीव इन पत्तियों से चिपक जाते है और पानी शुद्ध हो जाता है. आयुर्वेद में भी निर्गुन्डी की पत्तियों और बीजों का जल शुद्धिकरण में प्रयोग के बारे में बताया गया है. इसी प्रकार पातालकोट के हर्राकछार गाँव के आदिवासी नदी के किनारों पर छोटे-छोटे गड्ढ़े खोद कर उसमे नदी का पानी एकत्रित कर उसमे एक कप दही डाल देते है उनका मानना है की दही में भी सूक्ष्म जीवों को अपनी तरफ आकर्षित करने की क्षमता होती है और यह सही भी है की यह सूक्ष्म जीव दही में अपना भोज्य पदार्थ पाते है. कुछ समय बाद गड्ढों के पानी की सारी अशुद्धियाँ तल में बैठ जाती है और पानी पीने योग्य हो जाता है.. दीपक आचार्य का संपर्क है 9824050784

 This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message Deepakji is telling us tribal traditional method of water purification. He said tribal women’s of Patalkot valley fills drinking from water ponds situated at Rajkoh valley. This pond water is muddy and contains solid waste particles. Tribal woman’s is using Nirgundi (Vitex negundo) leaves to purify this water. For doing so first the pitcher is filled with this pond water then Nirgundi leaves filled up to slightly less than half of pitcher and it has to be left for an hour. Tribal believes Nirgundi is having properties to attract mud particles & microbes. About an hour later all impurities settled down at the bottom of the pitcher & tribal women’s then drawn surface water drinking & cooking purpose. In other method the tribal of “Harrakacchar” village of Patalkot dugs small pits at riverbank for collecting river water than adds one cupful yogurt to this water filled pit & after a while all impurities settled down at the bottom of pit & surface water can be used for drinking as well as for cooking purpose. Contact of Deepak Acharya is 9824050784

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निर्गुन्डी के गुण / Medicinal properties of Nirgundi

यह संदेश शकील रिज़वीजी का कोंडागांव, बस्तर, छत्तीसगढ़ से है. इस संदेश में शकीलजी डोंगरीपारा कोंडागांव के शत्रुघ्न कोर्राम का साक्षात्कार कर रहे है जोकि पिछले 16 वर्षों से पारंपरिक जड़ी-बूटियों से लोगो का उपचार कर रहे है. इनकी विशेषकर हड्डियों से संबंधित समस्त रोगों के उपचार में विशेषज्ञता है. जिसके लिए शत्रुघ्नजी कावराकंद, धनसुली, ढिबरीकंद, कावाजड़ी, बादरा जैसी जड़ीयों का उपयोग करते है. आज वह हमें निर्गुन्डी जिसे स्थानीय भाषा में जात-हरड के नाम से जाना जाता है के फायदों के विषय में बता रहे है. इनका कहना है की निर्गुन्डी एक प्रतिजीव (एंटीबायोटिक) जड़ी है. यह समस्त विकारों और दर्द, कई प्रकार की चोट, साधारण बुखार और मलेरिया के उपचार में काम आती है. इनका कहना है की निर्गुन्डी को लोग अपने घर पर भी लगा सकते है जिससे यह यथासमय उपचार के काम भी आ सकती है और इससे इसका संरक्षण भी होगा.

शत्रुघ्न कोर्रामजी से संपर्क 9479098741 पर किया जा सकता है.

This is a message by Shakeel Rizvi from Kondagaon, Bastar, Chhatisgarh. In this message he is interviewing Shatrughna Korram of Dongripara, Kondagaon who is specialized in bone related diseases & is practicing since 16 years. Today he is describing us the medicinal properties of Nirgundi (Vitex negundo) commonly known as Jaat-harad in local language. He says Nirgundi is a antibiotic herb and can be used for the treatment of many kinds of pain, cut & wounds, general fever and for the treatment of Malaria. He suggests every family should have Nirgundi in their garden. Contact Shatrughan Korram on 9479098741

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