Tag Archives: पपीता / Papaya

पेट की गैस का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Flatulence

यह सन्देश वैद्य रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, जिला कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश वह हमें पेट की गैस के उपचार का पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि पेट में गैस होने से व्यक्ति को  काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. मरीज का खाना नहीं पचने के कारण पीड़ा होने के कारण वह बैचैन रहता है. इसके उपचार के लिए पपीते का 100 छिलका, कच्ची हल्दी 100 ग्राम को पीसकर उसमे नौसादर 10 ग्राम और 10 ग्राम खाने के सोडे को मिलाकर चने के आकार की गोलियाँ बना ले. इन गोलियों को 1 गोली की मात्रा को सुबह-दोपहर-शाम को गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट में गैस बनने की समस्या में लाभ मिलता है. इस उपचार के दौरान तेल, मिर्च मसाले और खटाई युक्त भोजन से परहेज करना चाहिए लेकिन नीबू और टमाटर का सेवन किया जा सकता है.

This is a message of Ramprasad Nishad from Farasgaon, dist. Kondagaon, Chhatisgarh. In this message Ramprasadji telling us traditional remedy of stomach gas (Flatulence). He says flatulence is creating very panic condition for suffered person. In this condition patient remains restless. For treatment grind 100 gms Papaya skin & 100 gms raw Turmeric & after adding 10 gms Nausadar (Ammonium chloride) & 10 gms Baking soda (Sodium bicarbonate) make gram sized pills. Taking this pills in 1 pill quantity thrice a day using lukewarm warm water is useful. Precaution should be taken during the treatment avoid oily, spicy & sour food items but the lemon & tomatoes can be eaten.

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पीलिया रोग में आहार

यह संदेश सरोजनी गोयल का बाल्को, जिला कोरबा, छत्तीसगढ़ से है..इस संदेश में वह पीलिया रोग में लिए जा सकने वाले आहार के बारे में बता रहीं है… उनका कहना है की बदलते मौसम में कई रोगों के साथ पीलिया भी बढ़ रहा है… इससे बचने के लिए मकोय की पत्तियों को पानी में उबालकर उसे पिये तो लाभ होता है… मकोय पीलिया के लिए उत्तम औषधि है इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाये लाभदायक होता है… यदि पीलिया की लक्षण दिखाई देने लगे तो पानी पीने की मात्र बढ़ा दे इससे शरीर के हानिकारक तत्व उसर्जित हो जाते है… कच्चे पपीते का ज्यादा उपयोग करना रोगी के लिए अच्छा होता है…एक धारणा है की पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिये… पर वास्तविकता है की रोगी यदि गाय के दूध से बना पनीर व छेने से बनी मिठाई खाए तो फ़ायदा होता है… इसके बारे में ज्यादा जानकारी अपने चिकित्सक से ले..

परंपरागत उपचार: पीलिया के रोगी को मुली के रस का सेवन करना खासा लाभदायक होता है..यह रक्त और यकृत से अतिरिक्त रक्तिम-पित्तवर्णकता (Bilirubin) को निकलता है..पीलिया के रोगी को धनिया, टमाटर, प्याज यह सब्जियां देना चाहिये…. सरोजनी गोयल का संपर्क है: 9165058483

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रसपान से रोग उपचार

यह संदेश लोमेश कुमार बच का लिमरू वन औषधालय, जिला कोरबा, छतीसगढ़ से है…इस संदेश में वह विभिन्न रोगों का फलों-सब्जियों के रस से उपचार के बारे में बता रहे है… कौन से रोगों में कैसा रसोपचार किया जाये निम्नलिखित है:

गठियावात: अनन्नास, नीबू, खीरा, गाजर, पालक, चुकंदर का रस उपयोगी है.

मधुमेह: गाजर, संतरा, पालक, मुसम्बी, अन्नानास, नीबू, का रस उपयोगी है.

उच्च रक्तचाप: संतरा, अंगूर, गाजर चुकंदर, खीरा का रस उपयोगी है.

सर्दी-जुकाम: नीबू, संतरा, अनन्नास, गाजर, प्याज, पालक का रस उपयोगी है.

आँखों के लिए: टमाटर, गाजर, पालक, खुबानी का रस उपयोगी है.

मोटापे के लिए: नीबू, संतरा, अनन्नास, टमाटर, पपीता, चुकंदर, गाजर, पालक, पत्तागोभी का रस उपयोगी है.

अल्सर के लिए: गाजर, पत्तागोभी, अंगूर, खुबानी का रस उपयोगी है.

टांसिल के लिए: नीबू, संतरा, अनन्नास, गाजर, पालक, मूली, खुबानी का रस उपयोगी है.

सिरदर्द: अंगूर, नीबू, गाजर, पालक का रस उपयोगी है.

अनिद्रा: सेव, गाजर, अंगूर, नीबू कर रस उपयोगी है.

रक्ताल्पता: गाजर, पालक, काले अंगूर, चुकंदर, खुबानी का रस उपयोगी है.

कब्ज: अंगूर, गाजर, चुकंदर, पपीता का रस उपयोगी है.

बुखार: संतरा, नीबू, मुसम्बी, गाजर, अनन्नास, प्याज, पालक, खुबानी का रस उपयोगी है.

पीलिया: गन्ना, नीबू, गाजर, अंगूर, चुकंदर, खीर, मुली, पालक, नाशपाती का रस उपयोगी है.

लोमेश कुमार बच का संपर्क है: 9753705914

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दोहों के माध्यम से रोग उपचार की जानकारी

यह संदेश निर्मल कुमार अवस्थी का कस्तूरबा नगर वार्ड क्रमांक 4, बिलासपुर से है…उन्होंने रोगों के उपचार के बारे में बताने के लिए दोहों के रचना की है… वह दोहों के माध्यम से रोग के उपचार की जानकारी दे रहें है उनके दोहें इस प्रकार है:

आँखों लाली बसे और धुंधली हो यदि दृष्टी,
आलू का रस डालिए तो दिखने लगती सृष्टि
 
लेकर के शरणागत को छठे आंवला युक्त,
रोगी हो जाता तुरंत बवासीर से मुक्त
 
प्रातः उठ कर करें जो जन जलपान ,
वे निरोगी रहते सदा , रोगों से अनजान
 
प्रतिदिन हम खाते रहे मात्र एक ही सेव,
बढे हमारा स्वास्थ्य , हो अनुकूल सदैव
 
काढ़ा तुलसी -अडूसे का, कुछ दिन पिये श्रीमान,
सुखी खासी दूर हो, रोगी जाये जान
 
तम्बाकू मत खाइए लीजिये दवा का काम,
तेल निलामल हम बनायें , खुजली काम-तमाम
 
चेहरे में हल्दी सहित, मन चन्दन और दुग्ध,
आकर्षण नित्य प्रति बढे, होगी जन मन मुग्ध
 
दूध पपीता रात पी, केवल चम्मच एक,
कीड़ें निकलेंगे सुबह, यह सलाह है नेक
 
तुलसी पत्ते खाइए थोड़े गुड के संग,
कीड़ें मरें पेट के, हो जाये मन चंग
 
 प्रातः कार्तिक मास में, नित तुलसी जो खाए,
एक वर्ष तक रोग फिर उसको ढूंड न पाए
 
तुलसी रस के साथ में निगले गुड और सौंठ,
होगा दूर अजीर्ण थके न कहते ओंठ
 
तुलसी को शुभदा कहें सदा सयाने लोग,
नारी तुलसी खाए नित रहे प्रजनन अंग निरोग
 

निर्मल अवस्थी का संपर्क है: 09685441912

 

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दूध बढ़ाने के लिए

इस संदेश में डॉ. एच.डी. गाँधी का कहना है की जिन स्तनपान कराने वाली माताओं का दूध कम आता है वह सतावर का 10 ग्राम चूर्ण दूध के साथ सेवन करने से दूध में वृद्धी होती है…दूसरा विदारीकन्द का 5 ग्राम चूर्ण दूध के साथ सेवन करने से शीघ्र लाभ होता है….कच्चे पपीते के सेवन से भी दूध में वृद्धी होती है…रक्त प्रदर होने पर 50 ग्राम चावल को पानी से धो कर उसे दुबारा 100 ग्राम पानी में 4 घंटों के लिए भिगोने के बाद उसे मसलकर उस पानी के सेवन से लाभ होता है….दूसरा केले की नर्म जड़ के 10 ग्राम रस का प्रतिदिन सेवन करने से लाभ होता है….तीसरा गुलर की 200 ग्राम छाल 250 ग्राम पानी में उबालकर 50 ग्राम शेष रहने पर उसमे 25 ग्राम मिश्री और 2 ग्राम सफ़ेद जीरे कर चूर्ण मिलकर सेवन करने से शीघ्र लाभ होता है…चौथा प्रसव में पुदीने का रस पिलाने से प्रसव आसानी से हो जाता है…. डॉ. एच.डी. गाँधी का संपर्क है  9424631467

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