Tag Archives: बबूल / Acacia arabia

गठियावात का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Arthritis

यह सन्देश वैद्य चंद्रकांत शर्मा का मुंगेली, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में चंद्रकांतजी हमें गठियावात के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि 5 ग्राम भुनी फिटकरी, 2 ग्राम बबूल गोंद, 15 ग्राम सुरजान मीठी (बाजार में पंसारी के यहाँ उपलब्ध) इन तीनो को मिलाकर इसमें कुछ बूंद पानी मिलाकर इसकी चने के आकर की गोलियाँ बना ले. इसे 2 गोली की मात्रा में दिन में 3 बार खाने के बाद लेने से लाभ मिलता है. हरसिंगार की पत्तियों का क्वाथ 20 से 80 मी.ली की मात्रा में रोज 2-3 बार पिलाने से लाभ होता है. लहसुन की कुछ कलियों को सरसों के तेल में जलाकर उस तेल से प्रभावित अंग की मालिश करने से आराम मिलता है.

This message from Chandrakant Sharma, Mungeli, Chhatisgarh is about Arthritis. Mix 5 gms roasted Alum, 2 gms Babool (Acacia arabia) glue and 15 gms Surjan Meethi (Available at selected Grocery shop) together and after adding few drops of water make Gram sized pills. Taking 2 pills thrice a day after meals is useful. Taking decoction of Harsingar leaves (Nyctanthes arbor-tristis) also known as Night flowering jasmine in English in 20-80 ml quantity 2-3 times a day is useful. Burn some Garlic buds in Mustard oil and massaging affected body parts using this oil is beneficial.

Share This:

मधुमेह को नियंत्रित करने का पारंपरिक तरीका / Traditional remedy for Diabetes control

यह सन्देश लोमेश कुमार बच का पाली, कोरबा छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में लोमेशजी हमें मधुमेह को नियंत्रित करने का पारंपरिक तरीका बता रहें है. इनका कहना है कि आज के समय मधुमेह का प्रसार बढ़ रहा है. इसको नियंत्रित रखने के लिए वह हमें मधुमेह दमन वटी बनाने का सूत्र बता रहे है. इसको बनाने के लिए 100 ग्राम जामुन गुठली, 100 ग्राम गुडमार, 100 ग्राम बबूल की पत्तियाँ, 100 ग्राम हल्दी घी में भूनी हुई, 50 ग्राम शिलाजीत, 100 ग्राम सौंठ, 100 ग्राम बेल पत्तियों का चूर्ण, 100 ग्राम जामुन की पत्तियों का चूर्ण, 50 ग्राम स्वर्ण माच्छीक भस्म (बाजार में उपलब्ध है). इन सभी घटकों को एकत्रित कर के चूर्ण बना लें. इन सामग्रियों से बने चूर्ण को त्रिफला के क्वाथ (काढ़ा) में घोंटकर सूखा लें. इसके सूखने के बाद इसी प्रकार इस प्रक्रिया को तीन बार दोहराएँ (3 बार सूखाकर घोंटे). इसके बाद इसी प्रक्रिया को गोझरण का प्रयोग कर 3 बार दोहराएँ इसके बाद इसी प्राक्रिया को  तुलसी की पत्तियों के रस के साथ 3 बार दोहराएँ. इसके बाद इस सूखे हुए चूर्ण की 2-2 ग्राम की वटी (गोली) बनाकर रख लें. इन गोलियों को 1-1 गोली की मात्रा में सुबह-शाम पानी के साथ एक वर्ष तक लें. लोमेश कुमार बच का संपर्क है 9753705914

This is a message of Lomesh Kumar Bach from Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional formulation for managing Diabetes. He says at present time the prevalence of Diabetes is growing. Lomeshji is telling us method of making pilles by using forest products. Take 100 gms Blackberry seeds, 100 gms Gudmaar or Madhunashini (Gymnema sylvestre), 100 gms Acacia leaves, 100 roasted Turmeric in ghee, 50 gms Shilajeet (Mumijo), 100 gms dried Ginger, 100 gms Bael leaves (Aegle marmelos), 100 Blackberry leaves & 50 gms Swarna Machhik Bhasm (Available in the market). Make fine powder by using above said contents (Articles). Then creams up this powder in Trifala decoction until this combination becomes dried after drying repeat this process three times. Hereafter repeat this process using Gojharan (Extract of Cow urine) & Basil leaves. Hereafter make pilles using this dried combination. Taking this pills in 1-1 quantity twice a day for 1 year. This is beneficial for Diabetic persons. Lomesh Kumar Bach’s at 9753705914

Share This:

अर्श – बवासीर का पारंपरिक उपचार / Traditional remedy for Hemorrhoid & Piles

यह सन्देश लोमेश कुमार बच का पाली, कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में लोमेशजी हमें बवासीर के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि अर्श मुख्यतः 2 प्रकार का होता है. पहले प्रकार में गुदा द्वार के किनारों पर मस्से हो जाते है और उनसे खून गिरता है इसे खूनी बवासीर कहते है. दूसरे प्रकार के अर्श में मस्से तो नहीं होते है पर पेट में कड़ापन आ जाता है उसे बादी बवासीर कहते है. इनका कहना है की बवासीर में कुछ औषधियां अधिक कारगर होती है. काले तिल, नागकेसर और मिश्री को पीसकर मक्खन में मिलाकर खाने से लाभ मिलता है. कोमल बबूल की फल्लियों जिसमे बीज नहीं बने हो को सूखाकर उसका चूर्ण बना लें इस चूर्ण की 6 ग्राम मात्रा को प्रतिदिन ताजे पानी के साथ लगातार 15 दिनों तक लेने से सभी प्रकार के बवासीर में लाभ मिलता है. सेमल के दूध में हल्दी का चूर्ण मिलाकर उसकी एक बूंद मस्से पर लगाने से मस्सा नष्ट हो जाता है. डिकामाली गोंद के 2-3 ग्राम चूर्ण में 1 ग्राम सैंधा नमक मिलाकर शाम को एक बार लगातार एक सप्ताह तक खाने से आराम मिलता है. मालकांगनी के जड़ को पानी के साथ घिसकर मस्सों पर लगाने से खूनी बवासीर में लाभ होता है. 1 तोला देशी मिश्री, 1 तोला जिमीकंद का चूर्ण, 1 तोला नागकेसर का चूर्ण और चिरमिटी चूर्ण आधा तोला इन सबको पीसकर खाने से बवासीर में लाभ मिलता है.

This is a message of Lomesh Kumar Bach from Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional remedy for Piles. He says piles are mainly of two types in first type warts grows on the edges of anus & In second type stomach leads to stiffness but hemorrhoid is more painful. Traditional remedies are more effective for curing piles. Taking black Sesame, Nagkesar (Mesua ferrea) & sugar candy with butter is useful. Grind seedless soft beans of Acacia after drying. Taking this 6 grams powder with water for continuously 15 days is beneficial in Piles. Applying seed cotton milk after adding a pinch of turmeric powder on warts is useful to get rid of warts. Taking 2-3 grams resin powder of Cambi Resin tree after adding 1 gram rock salt at evening for week is useful. Rub Malkangni (Celastrus paniculata) root with water until paste is formed. Applying this paste on warts is very effective.

Share This:

पथरी का सरल और कारगर नुस्खा / Simple & effective remedy for Kidney stone

यह संदेश डॉ. एच डी गाँधी का रायपुर छत्तीसगढ़ से हैइस संदेश में वह डॉ. आर.डी चंद्रेश्वर से पथरी के सरल उपचार के बारे में पूछ रहे हैडॉ. आर. डी चंद्रेश्वर का कहना है की पथरी के सरल और सर्वसुलभ औषधि के लिए बबूल के वृक्ष की 50 ग्राम पत्तियाँ तोड़ लेबबूल का वृक्ष सामान्यतः सभी जगह मिल जाता है…. इन पत्तियों को बारीक़ पीस कर इसमें 250 ग्राम दही मिलाकर इसके 5 बराबर हिस्से कर लेंऔर इसके 1-1 हिस्से को 3 घंटे के अंतराल पर लेते रहेंइसे पथरी के समाप्त होने तक रखेंयह बड़ा ही कारगर सस्ता सरल नुस्खा है….पथरी के रोगियों के लिए परहेज है की वह दूध से बनी वस्तुओं का सेवन न करें…. हर किस्म की भाजी न लेचने और अरहर की दाल न लेंडॉ एच. डी गाँधी का संपर्क है 9424631467

 This is a message of Dr. H D Gandhi from Raipur, Chhatisgarh…In this message he is talking to Dr. R D Chandreshwar who is telling us the remedy for Kidney stone…He said take 50 gram Acacia leaves & grind to form paste then add 250 gram curd & mix well… Divide this combination in five equal parts… Take each part in every 3 hour interval..Continue this remedy until stone get dissolved…Avoid milk products, Gram & Pigeon pea pulses…This is a simple & effective remedy.. Dr. H D Gandhi is at 9424631467

Share This:

पीलिया, हिचकी, प्रदर, रक्तप्रदर, स्वप्नदोष

यह संदेश निर्मल अवस्थीजी का कस्तूरबा नगर, वार्ड क्रमांक 4, बिलासपुर से है…उनका कहना है की पीलिया होने पर आक जिसको मदार भी कहते है की नयी कोमल कोंपले पीसकर मावे में मिलकर और उसने शक्कर मिलकर खिलाकर उपर से दूध पिला दे….यह चमत्कारिक ढंग से पीलिया को समाप्त कर देगी..अगर कोई कसर रह जाये तो इसे दवा लेने के तीसरे दिन भी एक बार दे दे…पीलिया जड़ से समाप्त हो जायेगा…दूसरी औषधि भी पीलिया के लिए ही है…100 ग्राम मुली के रस में 20 ग्राम शक्कर मिलकर पिलाये…गन्ने का रस, टमाटर और पपीते का सेवन करे…अगर किसी को हिचकी आती है तो मयूर पंख का चांदोबा जलाकर बनाई 2 रत्ती भस्म, 2 रत्ती पीपल चूर्ण को शहद में मिलाकर देने से हिचकी दूर होती है….प्रदर रोग में 100 ग्राम धनिया बीज 400 ग्राम पानी में स्टील के बर्तन में उबालें…आधा शेष रहने पर 20 ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें, 3-4 दिनों में लाभ होगा…रक्त प्रदर में 10 ग्राम मुल्तानी मिट्टी 100 ग्राम पानी में रात में भिगो दे, प्रातः इसे छान ले मिट्टी छोड़कर उस पानी को सोना-गेरू एक चम्मच फांक कर यह पानी पी लें…अगर सोना-गेरू नहीं हो फिर भी यह लाभ करेगा….स्वप्नदोष दूर करने के लिए बबूल की कोमल फलियाँ जिसमे बीज न आया हो उसे छाया में सुखा लें.. फिर उसे पीसकर चूर्ण बनाकर उसमे बराबर मात्र में मिश्री मिला लें….उसे सुबह-शाम एक-एक चम्मच लेने से स्वप्नदोष में लाभ होगा….निर्मल अवस्थी का संपर्क है: 09685441912

Share This: