Tag Archives: बरगद / Banyan

मधुमेह को नियंत्रित करने का पारंपरिक उपाय – Traditional method for managing diabetes

यह सन्देश वैद्य चंद्रकांत शर्मा का मुंगेली, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में चंद्रकांतजी हमें मधुमेह को नियंत्रण में रखने के पारंपरिक उपायों के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि गूलर अथवा मूली की पत्तियों का 3 मी.ली पीने अथवा सुबह बेल की 10 पत्तियों के रस में 2-10 कालीमिर्च मिलाकर पीने से मधुमेह में लाभ मिलता है. 20-50 मी.ली बड के छाल का काढ़ा पीने से अथवा बड के 2-10 फल खाने से भी मधुमेह में लाभ होता है. प्रतिदिन सुबह करेले का रस लेने से अथवा अगर करेले का रस उपलब्ध न हो तो करेले के टुकड़ों को छाँव में सुखाकर उसका बारीक़ चूर्ण बनाकर उसे सुबह-शाम 10-10 ग्राम की मात्रा में 3-4 महीनो तक लेने से मधुमेह में लाभ मिलता है.

This is a message of vaidya Chandrakant Sharma from Mungeli, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional treatment tips for managing diabetes. He says taking 3 ml juice of Cluster fig leaves or Radish leaves is useful in managing diabetes. At morning taking juice of 10  Aegle marmelos leaves also known as Bael tree after adding 2-10 black pepper is useful. Taking 20-50 ml decoction of banyan’s bark or eating 2-10 banyan fruit is also beneficial. Taking bitter gourd juice every morning or In case of unavailability of bitter gourd juice you can take 10 gms powder of shadow dried bitter gourd continuously 3-4 month is also useful.

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स्मरणशक्ति बढ़ाने का पारंपरिक उपाय – Traditional method for enhancing memory

यह सन्देश चंद्रकांत शर्मा का जिला मुंगेली, छत्तीसगढ़ से है. वह हमें स्मरणशक्ति को बढ़ाने का पारंपरिक उपाय बता रहे है. इनका कहना है कि बरगद की छाल को छाया में सुखाकर उसे पीसकर कपड़े छान लें फिर इसने दुगनी मात्रा में मिश्री का चूर्ण मिलाकर रखें. इस चूर्ण को 6 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम दूध या जल के साथ लेने से लाभ होता है. बहेड़े का चूर्ण 3-8 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से भी लाभ मिलता है. बच का चूर्ण ½ ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम शहद अथवा मिश्री मिले दूध के साथ सेवन करने से स्मरणशक्ति को बढ़ाने में मदद मिलती है.

Vaid Chandrakant Sharma from Mungeli, Chhatisgarh is giving us some traditional tips for enhancing memory. Fine grind and cloth filter dry Banyan bark and add to it double amount of Misri powder. Take 1 teaspoon of this powder with milk or water twice daily. 1 teaspoon of  Baheda powder (Terminalia Belerica) with honey twice a day is also useful. ½ gms  Bachh (Sweet flag) powder with Honey or Misri with milk twice daily is beneficial.

 

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स्मरणशक्ति बढ़ाने का पारंपरिक उपाय – Traditional method for enhancing memory

यह सन्देश चंद्रकांत शर्मा का जिला मुंगेली, छत्तीसगढ़ से है. वह हमें स्मरणशक्ति को बढ़ाने का पारंपरिक उपाय बता रहे है. इनका कहना है कि बरगद की छाल को छाया में सुखाकर उसे पीसकर कपड़े छान लें फिर इसने दुगनी मात्रा में मिश्री का चूर्ण मिलाकर रखें. इस चूर्ण को 6 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम दूध या जल के साथ लेने से लाभ होता है. बहेड़े का चूर्ण 3-8 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से भी लाभ मिलता है. बच का चूर्ण ½ ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम शहद अथवा मिश्री मिले दूध के साथ सेवन करने से स्मरणशक्ति को बढ़ाने में मदद मिलती है.

Vaid Chandrakant Sharma from Mungeli, Chhatisgarh is giving us some traditional tips for enhancing memory. Fine grind and cloth filter dry Banyan bark and add to it double amount of Misri powder. Take 1 teaspoon of this powder with milk or water twice daily. 1 teaspoon of  Baheda powder (Terminalia Belerica) with honey twice a day is also useful. ½ gms  Bachh (Sweet flag) powder with Honey or Misri with milk twice daily is beneficial.

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पीपल के वीर्यवर्धक गुण – Semen enhancing properties of Ficus religiosa (Peepal)

यह सन्देश वैद्य रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामप्रसादजी हमें वीर्यवर्धक पीपल के औषधीय गुणों के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि पीपल के वृक्ष को दैवीय मान्यता मिली है और इसे पूजा जाता है इसके अलावा इसके कई औषधीय गुण है. पीपल के फल, छाल, जड़ और कोमल पत्तियों को समान मात्रा पीसकर इसके दसवें भाग में बड का दूध मिला लें. जिन व्यक्तियों को उनके दांपत्य जीवन में परेशानी का सामना करना पड़ता है उनके द्वारा इस नुस्खे को सुबह-शाम खाली पेट गुनगुने दूध के साथ लेने साथ ही इन्द्रजों के चूर्ण को भी सुबह-शाम गुनगुने दूध के साथ लेने से वीर्य की वृद्धि होती है इसके साथ ही उड़द की दाल का सेवन अधिक करें. मिर्च-मसालेदार तैलीय भोजन और खटाई का परहेज करें.

This is a message of vaidya Ramprasad Nishad from Farasgaon, Kondagaon, Chhatisgarh. In this message he is describing us traditional medicinal properties of Ficus religiosa also known as Peepal in Hindi. He says apart from its mythological & divine properties this plant has many medicinal properties & semen enhancing property is one of them. Grind its leaves, bark, fruit & root in equal quantity & hereafter add Banyan milk in 1/10 of total quantity & mix well. Taking this combination twice a day empty stomach in 1 spoon quantity with lukewarm milk is beneficial. Precaution should be taken avoid oily-spicy & sour items.

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श्वेतप्रदर का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Leukorrhea

यह सन्देश वैद्य चंद्रकांत शर्मा का मुंगेली, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में चंद्रकांतजी हमें महिलायों को होने वाले श्वेतप्रदर में लाभदायक पारंपरिक उपचार बता रहे है. इनका कहना है कि इस उपचार को प्रारंभ करने के पहले 3 दिनों तक प्रतिरात्रि 1 चम्मच अरंडी के तेल का सेवन करे. आंवला और मिश्री के 2-5 ग्राम चूर्ण का सेवन करने अथवा चावल के धोवन के साथ जीरा और मिश्री के ½ ग्राम चूर्ण का सेवन करने से श्वेतप्रदर में लाभ मिलता है. बड की छाल का 50 मी.ली काढ़ा बनाकर उसमे 2 ग्राम लोध चूर्ण मिलाकर पीने से लाभ मिलता है.

This is a message of vaidya Chandrakant Sharma from Mungeli, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional remedy of women related common disease Leukorrhea. He says 3 days before starting this treatment patient should take 1 spoon castor oil for three nights. Taking 2-5 gms mixed powder of Indian gooseberry & sugar candey or rice washed water with  ½  gms mixed powder of Cumin & sugar candy is useful. Taking 50 ml decoction of Banyan tree bark  after adding 2 gms Lodh (Symplocos racemosa) is beneficial for treating Leukorrhea.

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वमन का पारंपरिक उपचार / Traditional treatment of vomiting

यह सन्देश रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, पाली, कोरबा छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामफलजी हमें अम्लपित्त, अपच के कारण होने वाले वमन (उल्टी) का पारंपरिक उपचार बता रहे है. इनका कहना है कि अम्लपित्त या या अपच के कारण होने वाले वमन में बरगद की जटाओं के सिरों के नर्म अंकुरों को पीसकर उसे छानकर पीने से वमन में लाभ होता है. नारियल के पानी को पीने से भी वमन में लाभ होता है. नारियल को आग में सेंककर उसका छिलका उतार कर उसकी मींगी को पीसकर शहद के साथ चाटने से फायदा होता है. रामफल पटेल का संपर्क है 8815113134

This is a message of Ramfal Patel from Pragya Sanjeevani, Pali, Korba, Chhatisgarh. In this message he is suggesting traditional tips for the treatment of vomiting caused due to indigestion & acidity. Grind soft Banyan tresses & after filtration drinking its juice is useful. Drinking coconut water is also useful. Roast whole coconut along with hard shell on fire. After removing hard shell grind inner soft white kernel. Licking this kernel paste with honey is beneficial in vomiting. Ramfal Patel @ 8815113134

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