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बड़ी दूधी के औषधीय गुण – Traditional medicinal properties of Asthma weed

यह सन्देश वैद्य रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामप्रसादजी हमें बड़ी दूधी की पारंपरिक चिकित्सा में उपयोगिता के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि यह बड़ी दूधी प्राय: घर आँगन, खेत खलिहान, पगडण्डी और रास्तो के आसपास आसानी से उग जाती है. इसके पंचांग (फूल, पत्तियाँ, बीज, छाल और जड़) को छाया में सुखाकर इसके चूर्ण में सम-मात्रा मिश्री मिलाकर 9 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ लेने से शुक्र प्रमेह में लाभ होता है. इसके पंचांग का चूर्ण, बड़े गोखरू का चूर्ण और श्वेत जीरे का चूर्ण को समभाग मिलाकर उसमे चीनी मिलाकर दिन में तीन बार दूध के साथ लेने से वीर्य में गाढ़ापन आता है. पंचांग के कल्क (इसके काढे को औटाकर बनाई गई टिकिया) की 50 ग्राम की टिकिया बनाकर 50 मी.ली तिल के तेल में जलाकर उस तेल से गठियावात में लाभ मिलता है. रजोवरोध में इसकी जड़ का चूर्ण 1 ग्राम की मात्रा में देने से लाभ होता है. इस उपचार के दौरान मिर्च-मसालेदार तैलीय भोजन और खटाई से परहेज करें.

This is a message of Ramprasad Nishad from Farasgaon, Kondagaon, Chhitisgarh. In this message he is telling us traditional uses of Badi Duddhi (Asthma Weed). This weed is often found in farms, home gardens & around road sides. Taking powder of shadow dried Panchang of (flowers, leaves, seeds, bark & root) Asthma Weed after adding equal sugar in 9 gms quantity using milk is useful in Gannoreha (Sexually transmitted disease). Taking its panchang powder with  Large Caltrops & white cumin powder in equal quantity after adding sugar with milk thrice a day is helping in semen coagulation. In irregular periods giving its bark powder in 1 gms quantity is beneficial.

 

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