Tag Archives: मदार / Calotropis gigantea

दमे और एलर्जी का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Asthma & Allergy

स्वास्थ्य स्वर से डॉ एच डी गाँधी हमें आज अस्थमा के उपचार का पारंपरिक नुस्खा बता रहें है. इसको बनाने के लिए 250 ग्राम सफ़ेद फूल के मदार पेड़ की सूखी जड़ का चूर्ण, 500 ग्राम अजवाईन,  250 ग्राम तुलसी की सूखी पत्तियों का चूर्ण, 250 ग्राम सौंठ का चूर्ण, 250 ग्राम भुनी हुई हल्दी का चूर्ण इन सभी सामग्रियों को पुराने गुड में अच्छी तरह मिलाकर छोटे-छोटे 30 लड्डू बनाकर रखें. प्रतिदिन रात को 1 लड्डू का गुनगुने पानी के साथ एक माह तक सेवन करने से अस्थमा और एलर्जी की समस्या में लाभ मिलता है. इस उपचार के दौरान गरिष्ठ, ठंडी खाद्य सामग्रियों और नशे के सेवन से बचें.

In Asthma: As per Dr. H D Gandhi of Swasthya Swara for the traditional treatment of Asthma mix 250 gms Madar (White Crown Plant) root powder, 500 gms Carom seeds, 250 gms dried Basil leaves powder, 250 gms dried Ginger powder, 250 gms roasted Turmeric powder & old Jaggery together and make 30 small balls shaped Laddu. Taking this 1 laddu with lukewarm water every night for 1 month is beneficial in Asthma & Allergic problems.

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दमे का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Asthma.

कोरबा, छत्तीसगढ़ के वैद्य लोमेश कुमार बच का कहना है कि दमा होने की स्थिति में 10 ग्राम मदार के फूल, 5 ग्राम पीपली, 10 ग्राम कटेरी के फूल और 10 ग्राम मुल्हैठी के चूर्ण को पीसकर धूप में सुखाकर इसमें शहद मिलाकर इसकी चने के आकार की गोलियाँ बनाकर रख लें. दौरा पड़ने की स्थिति में इन 2 गोलियों को गुनगुने पानी के साथ देने से मरीज को लाभ होता है.

This tip is about Asthma from Vaid Lomesh Bach of Korba, Chhatisgarh. Shadow dry and grind 10 gms Madar (Calotropis gigantea) flowers, 5 gms Kateri flowers (Solanum virginianum) also known as Thorny nightshade in English, Mulethi (Liquorice) and Peepli (Piper longum). Mix 10 gms of each powder with little Honey to make Gram sized pills. During Asthma attack taking 2 pills with lukewarm water will be helpful.

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कब्ज का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of constipation

यह सन्देश वैद्य हरीश चावड़ा का गुंडरदेही, जिला बालोद, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में हरीशजी हमें कब्ज के उपचार का पारंपरिक नुस्खे बता रहे है. इसके उपचार के लिए काकड़ासिंघी, अतीस, पीपर, नागरमोथा, सनाय की पत्तियां, जवाखार और वायविडंग इन सभी को सामान मात्रा में पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रख ले. प्रतिदिन भोजन करने के पश्चात ½ चम्मच यह चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लेने से कब्ज में आराम मिलता है. निशोथ, अजवाइन, वायविडंग, सौंठ, काला नमक, कालीमिर्च, छोटी हरड इन सभी को 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर उसमे 40 ग्राम सनाय के पत्तियाँ मिलाकर बारीक पीसने के बाद कपडे से छान कर रख ले. इस चूर्ण को रोज रात्रि भोजन के बाद ½ चम्मच की मात्रा में लेने से कब्ज में लाभ मिलता है. आक (मदार) की जड़ को छाया में सुखाकर इसका चूर्ण बना ले. इस  ½ चूर्ण को गर्म दूध में मिलाकर लेने से भी कब्ज में लाभ मिलता है. हरीश चावड़ा का संपर्क है 9893765366

This is a message of vaidya Harish Chawda from Gundardehi, Dist. Balod, Chhatisgarh. In this message he is suggesting some traditional tips for the treatment of constipation. He says in case of constipation grind Kakda singi (Pistacia chinensis), Indian Atis (Aconitum heterophyllum), Piper longum, Nagarmotha (Cyperus scariosus), Senna leaves, Javakhar, False black pepper in equal quantity & keep this combination in any bottle. Taking this powder in  ½ tea spoon quantity twice a day after meal with lukewarm water is useful. Grind Indian jalap, Carom, False black peeper, dry ginger, black salt, black pepper & Terminalia chebula in 10 gram each in  & senna leaves in 40 gms quantity & after cloth filtration taking this  ½ table spoon combination after dinner is useful. Grind shadow dried root of crown flower tree & taking this  ½  table spoon powder after mixing in lukewarm milk is beneficial. Harish Chawda 9893765366 

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गठियावात और जोड़ो के दर्द का पारंपरिक इलाज / Traditional treatment of Arthritis & Joint pain

यह सन्देश ब्रह्मान मरकाम का पातालकोट, तामिया छिंदवाडा, मध्यप्रदेश से है. इस संदेश में ब्रह्मानजी हमें गठियावात का पारंपरिक इलाज के बारे में बता रहें है. इनका कहना है कि इनको भी गठियावात था और वह भी इसी इलाज से ठीक हुए है. इसके लिए अकौआ जिसे मदार भी कहते है की 5 किलो जड़ को लेकर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काट कर इसे तीन दिनों तक 5 लीटर पानी में रख कर सड़ाते है. तीन दिनों के बाद इसमें झाग उत्पन्न होने लगता है फिर इसमें 1 किलोग्राम गेहूँ मिलाकर 2 दिनों तक रखते है. 2 दिन बाद इस फूलें हुए गेहूँ को निकालकर सूखा कर इसका आटा बना लिया जाता है. इस आटे से बनी 1 बाटी सुबह-शाम गाय के घी और गुड के साथ लगातार 11 दिनों तक खाने से गठियावात और जोड़ों के दर्द में आश्चर्यजनक लाभ मिलता है. ब्रह्मान मरकाम का संपर्क है 8305936172

This is a message of Brahman Markam from Patalkot, Tamiia, Chhindwara, Madha Pradesh. In this message he is suggesting us traditional treatment method of Joint pain & Arthritis. He says soak 5 Kg Madar plant root (Calotropis gigantea) in water for 3 days. After 3 days add 1 Kg Wheat and it has to be left for 2 more days. After that remove all wheat and after drying grind this wheat to making floor. Make a pancake using this floor. Taking this pancake with Ghee & Jaggery twice a day empty stomach continuously for 11 days is very effective to get rid of Arthritis & Joint pain. This remedy is self-tested by Brahman Markam. Contact of Brahman Markam is 8305936172

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पीलिया रोग का पारंपरिक उपचार / Traditional treatment of Jaundice

यह सन्देश चंद्रकांत शर्मा का जिला मुंगेली, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में चंद्रप्रकाशजी हमें पीलिया रोग का पारंपरिक उपचार बता रहें है. इनका कहना है कि पीलिया होने पर एक केले का छिलका जरा सा हटाकर उसमे चने के बराबर मात्र में भीगा चूना लगाकर उसे रातभर ओस में रखें. प्रातः उस केले का सेवन करने से पीलिया में लाभ होता है. आक के 1 ग्राम जड़ को शहद के साथ खाने अथवा चावल के धोवन में घीसकर उसकी बूंदे नाक में डालने से लाभ मिलता है. 5 ग्राम कलमी सोडे को मिश्री मिलाकर नीबू के रस के साथ लेने से पीलिया रोग में आराम मिलता है. इसके साथ 30-50 मी.ली. गिलोय का काढ़ा पीना चाहिए. शहद के साथ 2-5 ग्राम त्रिफला देने या दही में मीठा सोडा डालकर खाने, गन्ने को छीलकर उसके टुकड़ों को रात भर ओस में रखकर खाने से भी पीलिया में लाभ मिलता है. पीलिया रोग होने पर मूंग और चने का विशेषकर सेवन करना चाहिए. चंद्रप्रकाश शर्मा का संपर्क है: 9893327457

This is a message of Chandrakant Sharma from Dist. Mungeli, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional methods of healing Jaundice. He say’s take a Banana and peel it slightly and insert lime equivalent to the size of Gram and place this Banana overnight in dew. Taking this Banana early morning is helpful for Jaundice patients. Taking 1 gms Root of Crown flower plant with Honey can be helpful. Taking 5 gms Baking soda (Sodium Bicarbonate) with lemon juice & 30-50 ml decoction of Giloy is beneficial in Jaundice. Taking 2-5 gms Trifala (Powder of Amla, Harrra & Bahera) with Honey or Curd with Baking soda is useful in Jaundice. Cut peeled Sugarcane and place this overnight in dew. Eating this sugarcane early morning is also beneficial for Jaundice patients. Chandrakant Sharma’s at  9893327457

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पीलिया, हिचकी, प्रदर, रक्तप्रदर, स्वप्नदोष

यह संदेश निर्मल अवस्थीजी का कस्तूरबा नगर, वार्ड क्रमांक 4, बिलासपुर से है…उनका कहना है की पीलिया होने पर आक जिसको मदार भी कहते है की नयी कोमल कोंपले पीसकर मावे में मिलकर और उसने शक्कर मिलकर खिलाकर उपर से दूध पिला दे….यह चमत्कारिक ढंग से पीलिया को समाप्त कर देगी..अगर कोई कसर रह जाये तो इसे दवा लेने के तीसरे दिन भी एक बार दे दे…पीलिया जड़ से समाप्त हो जायेगा…दूसरी औषधि भी पीलिया के लिए ही है…100 ग्राम मुली के रस में 20 ग्राम शक्कर मिलकर पिलाये…गन्ने का रस, टमाटर और पपीते का सेवन करे…अगर किसी को हिचकी आती है तो मयूर पंख का चांदोबा जलाकर बनाई 2 रत्ती भस्म, 2 रत्ती पीपल चूर्ण को शहद में मिलाकर देने से हिचकी दूर होती है….प्रदर रोग में 100 ग्राम धनिया बीज 400 ग्राम पानी में स्टील के बर्तन में उबालें…आधा शेष रहने पर 20 ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें, 3-4 दिनों में लाभ होगा…रक्त प्रदर में 10 ग्राम मुल्तानी मिट्टी 100 ग्राम पानी में रात में भिगो दे, प्रातः इसे छान ले मिट्टी छोड़कर उस पानी को सोना-गेरू एक चम्मच फांक कर यह पानी पी लें…अगर सोना-गेरू नहीं हो फिर भी यह लाभ करेगा….स्वप्नदोष दूर करने के लिए बबूल की कोमल फलियाँ जिसमे बीज न आया हो उसे छाया में सुखा लें.. फिर उसे पीसकर चूर्ण बनाकर उसमे बराबर मात्र में मिश्री मिला लें….उसे सुबह-शाम एक-एक चम्मच लेने से स्वप्नदोष में लाभ होगा….निर्मल अवस्थी का संपर्क है: 09685441912

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वातनाशक तेल

यह संदेश वैध श्री निर्मल अवस्थी का , वार्ड क्रमांक 4, कस्तूरबा नगर बिलासपुर छत्तीसगढ़ से है:

निर्मलजी इस संदेश में वातनाशक तेल के बारे में बता रहे है जो घुटने, कमर और शरीर दर्द में लाभदायक है जिसे हम घर में ही बना सकते है….इसके लिए सरसों का तेल (Mustered Oil) 500 ग्राम, केवड़े के बीज 25 ग्राम, धतूरे के बीज 25 ग्राम, तम्बाकू जर्दा (Tobacco Leaves)25 ग्राम और लहसुन की कलियाँ (Garlic) 25 ग्राम, इस सभी सामग्रियों को साफ़ करके सरसों के तेल में डाल कर धीमी आंच पर पकाएं जब सारे घटक (सामग्री) जल जाएँ और तेल 3/4 बच जाये तो इस तेल तो ठंडा कर के छान कर रख ले….यह तेल दर्द वाले स्थान पर लगा कर मालिश करे  और अकौए (Calotropis gigantea) के पत्ते तो थोडा गरम कर उस दर्दवाले स्थान की सिकाई करे….घर पर बने इस तेल के उपयोग से आराम होगा…..जिन भाइयों को गठियावत हो तो वह इस के साथ अश्वगंधा, विधारा और मीठी सुरंजन (Colchicum Luteum) 100-100 ग्राम और सौंठ 25 पीस कर चूर्ण बना ले और इस चूर्ण को सुबह-शाम 5 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ लेने से लाभ होगा….निर्मलजी का संपर्क है: 09685441912

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