Tag Archives: मिश्री / Sugar candy

उच्च रक्तचाप में उपयोगी अर्जुन क्षीरपाक – Usefulness of Arjun Ksheerpak in Hypertension

यह सन्देश डॉ. एच डी गाँधी का स्वास्थ्य स्वर से है. आज वह उच्च रक्तचाप में उपयोगी अर्जुन के वृक्ष छाल से बनने वाले अर्जुन क्षीरपाक को बनाने का नुस्खा बता रहे है. इसको बनाने की विधि इस प्रकार है. इसके लिए 250 मी.ली दूध और 250 मी.ली पानी को मिलाकर उसमे 15 ग्राम अर्जुन की छाल  के चूर्ण को डालकर उबालें. जब एक कप पानी बचे तो उसमे 10 ग्राम मिश्री मिलाकर इसका सुबह-शाम नियमित सेवन करने से उच्च रक्तचाप में लाभ मिलता है. मधुमेह के रोगी इसका बिना मिश्री डाले प्रयोग करें. इसका प्रयोग अवरुद्ध हुई धमनियों को खोलने में भी मदद करता है.

In this message Dr. H D Gandhi of Swasthya Swara is telling us procedure of making “Ksheerpak” useful in Hypertension. For making Ksheerpak boil  250 ml Milk & 250 ml water after adding 15 gms Arjun (Terminalia arjuna) bark powder until it remains 1 cup in quantity & not Diabetic persons can mix 10 gms sugar candy to taste. Taking this combination twice a day is useful in High blood pressure. It is also beneficial in the cleaning of  block Arteries.  

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स्मरणशक्ति बढ़ाने के उपाय – Tips for enhancing Memory

जिला मुंगेली के वैद्य चंद्रकांत शर्मा का कहना है कि बरगद की छाल को छाया में सुखाकर उसका उसका चूर्ण बनाकर उसे कपडे से छानकर इसमें खांड या मिश्री मिलाकर रखें. इस चूर्ण को 6-6 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम दूध या पानी के साथ सेवन करने से स्मरणशक्ति में वृद्धि होती है. इसी प्रकार बहेड़े का 3 से 8 ग्राम चूर्ण शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से भी लाभ मिलता है. सौंफ चबाना भी स्मरणशक्ति बढाने में मददगार है.

As per vaid Chandrakant Sharma of Dist. Mungeli, Chhatisgarh taking shadow dried and cloth filtered powder Banyan bark after adding Mishri or Sugar in 6 gms quantity with Milk or water twice a day is helps in increasing memory power. Similarly, taking 6-8 gms Bahera (Terminalia belerica) powder twice a day with Honey is useful. Chewing Fennel is also beneficial.

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स्मरणशक्ति बढ़ाने का पारंपरिक उपाय – Traditional method for enhancing memory

यह सन्देश चंद्रकांत शर्मा का जिला मुंगेली, छत्तीसगढ़ से है. वह हमें स्मरणशक्ति को बढ़ाने का पारंपरिक उपाय बता रहे है. इनका कहना है कि बरगद की छाल को छाया में सुखाकर उसे पीसकर कपड़े छान लें फिर इसने दुगनी मात्रा में मिश्री का चूर्ण मिलाकर रखें. इस चूर्ण को 6 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम दूध या जल के साथ लेने से लाभ होता है. बहेड़े का चूर्ण 3-8 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से भी लाभ मिलता है. बच का चूर्ण ½ ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम शहद अथवा मिश्री मिले दूध के साथ सेवन करने से स्मरणशक्ति को बढ़ाने में मदद मिलती है.

Vaid Chandrakant Sharma from Mungeli, Chhatisgarh is giving us some traditional tips for enhancing memory. Fine grind and cloth filter dry Banyan bark and add to it double amount of Misri powder. Take 1 teaspoon of this powder with milk or water twice daily. 1 teaspoon of  Baheda powder (Terminalia Belerica) with honey twice a day is also useful. ½ gms  Bachh (Sweet flag) powder with Honey or Misri with milk twice daily is beneficial.

 

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महुए की औषधीय उपयोगिता – Medicinal uses of Mahua

यह सन्देश वैद्य लोमेश कुमार बच का कोरबा छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में लोमेशजी हमें महुए के वृक्ष की औषधीय उपयोगिता के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि इस वृक्ष के फल, फूल, छाल और पत्तियाँ सभी समान रूप से उपयोगी है. चर्मरोग होने पर महुए के वृक्ष और तिल्सा वृक्ष के छाल समान मात्रा में मिलाकर उसमे आठ गुना पानी डालकर उसका काढ़ा बनाए जब यह काढ़ा ¼ बचने पर उस काढ़े की आधी मात्रा में करंज का तेल मिलाकर पकाएं और जब सिर्फ तेल ही शेष बचे तो उसे आँच से उतारकर छान कर रख लें. यह तेल सभी प्रकार के चर्मरोगों में कारगर है. सिरदर्द और चक्कर आने पर महुए के फूल के 1 चम्मच रस में मुनक्का और मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से लाभ मिलता है.

This message from Vaid Lomesh Kumar Bach, Korba, Chhatisgarh. is about medicinal uses of Mahua tree (Madhuca longifoila). All parts of this tree are equally useful. In case of skin disease make decoction of equal quantity of Mahua tree and Tilsa tree barks by boiling in 8 times water. When about  ¼ quantity remains add half quantity of Karanj (Beech tree) oil. Boil it till all water evaporates: store it in any glass bottle. Applying this oil on disease affected body parts is useful. In case of headache and vertigo taking 1 spoon Mahua flower juice with Munakka and Misri.

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स्मरणशक्ति बढ़ाने का पारंपरिक उपाय – Traditional method for enhancing memory

यह सन्देश चंद्रकांत शर्मा का जिला मुंगेली, छत्तीसगढ़ से है. वह हमें स्मरणशक्ति को बढ़ाने का पारंपरिक उपाय बता रहे है. इनका कहना है कि बरगद की छाल को छाया में सुखाकर उसे पीसकर कपड़े छान लें फिर इसने दुगनी मात्रा में मिश्री का चूर्ण मिलाकर रखें. इस चूर्ण को 6 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम दूध या जल के साथ लेने से लाभ होता है. बहेड़े का चूर्ण 3-8 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से भी लाभ मिलता है. बच का चूर्ण ½ ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम शहद अथवा मिश्री मिले दूध के साथ सेवन करने से स्मरणशक्ति को बढ़ाने में मदद मिलती है.

Vaid Chandrakant Sharma from Mungeli, Chhatisgarh is giving us some traditional tips for enhancing memory. Fine grind and cloth filter dry Banyan bark and add to it double amount of Misri powder. Take 1 teaspoon of this powder with milk or water twice daily. 1 teaspoon of  Baheda powder (Terminalia Belerica) with honey twice a day is also useful. ½ gms  Bachh (Sweet flag) powder with Honey or Misri with milk twice daily is beneficial.

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स्मरणशक्ति बढाने का पारंपरिक उपाय – Traditional method for increasing memory power

यह सन्देश वैद्य एच डी गाँधी का स्वास्थ्य स्वर से है. अपने इस सन्देश में गाँधीजी हमें स्मरण शक्ति को बढ़ाने में सहायक पारंपरिक नुस्खा बता रहे है. यह नुस्खा विशेषकर बच्चों और बुजुर्ग व्यक्तियों के लिए हितकर है. इनका कहना है कि इस नुस्खे को आजमाने से पहले तीन दिन पहले से पेट भली-भांति साफ़ रखना चाहिए. ऐसा करने के लिए तीन दिन तक 4 चम्मच अरंडी का तेल गुनगुने दूध में मिलाकर सुबह और शाम लेना चाहिए. बच्चों को देते समय तेल की मात्रा ½ चम्मच रखनी चाहिए. इस नुस्खे को बनाने के लिए 250 ग्राम शंखपुष्पी चूर्ण, 250 ग्राम बच, 250 ग्राम बादाम, 250 ब्रम्ही पंचांग चूर्ण, 2½ ग्राम अभ्रक भस्म और 300 ग्राम मिश्री इन सभी का बारीक़ चूर्ण बनाकर सूती कपडे से छानकर किसी हवाबंद डब्बे में रखे. बड़ों को यह चूर्ण 2 छोटे चम्मच की मात्रा (बच्चों को 1 चम्मच) में शहद में मिलाकर एक पाव दूध के साथ लगातार 3 माह तक देने से स्मरण शक्ति बढाने में मदद मिलती है.

This is a message of vaidya H D Gandhi from Swasthya Swara. In this message he is suggesting traditional tips for increasing memory power. It can be useful for children & old age persons as well. Before started using this traditional medicine person should clean their stomach by taking 4 tea spoon Castor oil (1 tea spoon in case of children) after mixing in lukewarm milk twice a day for 3 days. To prepare this medicine grind 250 gms Shankhpushpi (Convolvulus pluricaulis), 250 gms Bach (Acorus calamus) also known as sweet flag, 250 gms Almonds, 250 gms dried Bramhi (Bacopa monnieri) panchang (leaves, bark, flowers, seeds & root), 2½ gms Abhrak Bhasm (Mica ash) & 300 gms sugar candy to make powder & after filtration keep this combination in air tight container. Taking this combination in 2 spoon quantity (1 spoon in case of children) with honey & 250 ml milk is useful. 

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श्वेतप्रदर का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Leukorrhea

यह सन्देश वैद्य चंद्रकांत शर्मा का मुंगेली, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में चंद्रकांतजी हमें महिलायों को होने वाले श्वेतप्रदर में लाभदायक पारंपरिक उपचार बता रहे है. इनका कहना है कि इस उपचार को प्रारंभ करने के पहले 3 दिनों तक प्रतिरात्रि 1 चम्मच अरंडी के तेल का सेवन करे. आंवला और मिश्री के 2-5 ग्राम चूर्ण का सेवन करने अथवा चावल के धोवन के साथ जीरा और मिश्री के ½ ग्राम चूर्ण का सेवन करने से श्वेतप्रदर में लाभ मिलता है. बड की छाल का 50 मी.ली काढ़ा बनाकर उसमे 2 ग्राम लोध चूर्ण मिलाकर पीने से लाभ मिलता है.

This is a message of vaidya Chandrakant Sharma from Mungeli, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional remedy of women related common disease Leukorrhea. He says 3 days before starting this treatment patient should take 1 spoon castor oil for three nights. Taking 2-5 gms mixed powder of Indian gooseberry & sugar candey or rice washed water with  ½  gms mixed powder of Cumin & sugar candy is useful. Taking 50 ml decoction of Banyan tree bark  after adding 2 gms Lodh (Symplocos racemosa) is beneficial for treating Leukorrhea.

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बच्चों की खाँसी का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of cough in children

यह सन्देश वैद्य लोमेश बच का कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. इस सन्देश में लोमेशजी हमें बच्चो को होने वाली खांसी का पारंपरिक उपचार बता रहे है. इनका कहना है की इसके उपचार के लिए  20 ग्राम मुल्हैठी, 10 ग्राम सौंठ, 10 ग्राम कंचनभस्म, 10 ग्राम कालीमिर्च, 10 ग्राम वंशलोचन, 10 ग्राम पिप्पली चूर्ण और 20 ग्राम मिश्री को बारीक़ पीसकर सूती कपडे से छानकर इसे किसी काँच की बोतल में रखे. इसे  ¼ – ½ ग्राम की मात्रा में शहद या गुनगुने पानी से दिन में तीन बार देने से खांसी में लाभ मिलता है.

This is a message of Lumesh Kumar Buch from Korba, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional remedy of cough often caused in children. He says for the treatment of this cough grind 20 gms Liquorice, 10 gms Dry ginger, 10 gms, 10 gms Tankan bhasm (prepared from borax & easily available in market), 10 gms Piper longum & 20 gms Sugar candy to make fine powder. After cloth filtration store this combination in any airtight glass bottle. Giving this combination three times a day in ¼ – ½ gms quantity with Honey or lukewarm water to the children is useful in cough.

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शुक्रक्षय रोग का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Sperm loss (Spermatorrhea)

यह सन्देश रामप्रसाद निषाद का फरसगांव, जिला कोंडागांव, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामप्रसादजी हमें शुक्रक्षय बीमारी का पारंपरिक उपचार बता रहे है. इनका कहना है की इस बीमारी में वीर्य पतला हो जाता तथा यह मूत्र के साथ भी जाने लगता है. इस रोग में पुरुष कमजोर हो जाता है और उत्तेजना के साथ कामशक्ति क्षीण हो जाती है. इसके उपचार के लिए 8-10 ग्राम काली मूसली का चूर्ण दूध में डालकर उबालने के पश्चात जब दूध रबड़ी की तरह गाढ़ा होने पर उसमे 25-30 ग्राम मिश्री, 25 ग्राम बादाम का चूर्ण, 10 ग्राम घी, 1-2 ग्राम जायफल और इलायची का चूर्ण को मिलाकर इसके 2 हिस्से बनाकर सुबह-शाम दूध के साथ लेने से वीर्य में वृद्धि होती है और कामशक्ति सामान्य होने लगती है.

This is a message of Ramprasad Nishad from Farasgaon, Dist. Kondagaon, Chhatisgarh. In this message he is telling us traditional treatment of Spermatorrhea. He says in this disease semen becomes diluted & often released with urine causing lack in sexual power & men becomes weak. For treatment boil 8-10 gms  Kali Musli (Orchid palm grass) powder in milk until milk becomes thicker after that add 25-30 gms sugar candy, 25 gms almond powder, 10 gms ghee, 1-2 gms nutmeg & cardamom powder. Divide this combination into 2 parts. Taking each part twice a day with milk is useful to make semen thicker & regaining sexual power.

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पीलिया का पारंपरिक वन वनौषधिक उपचार / Traditional forest medicinal treatment of Jaundice

यह सन्देश लोमेश बच का कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में लोमेशजी हमें पीलिया के पारंपरिक वनऔषधिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि पीलिया होने की दशा में पेट में कब्ज नहीं होने देना चाहिये. इसके उपचार के लिए कुटकी चूर्ण 3 ग्राम, मिश्री 6 ग्राम और भुईआवंला की जड़ का 3 ग्राम चूर्ण दिन में 2 बार फांक कर लाजवंती के पंचांग (फूल, पत्ते, छाल, बीज और जड़) का काढ़ा बनाकर पीना चाहिए. इसे 14 दिनों तक लगातार लेने से पीलिया में आशातीत लाभ मिलता है. दूसरा योग है मदार (सफ़ेद आक) के 20 ग्राम पत्तियों में 20 ग्राम मिश्री और 2 ग्राम कालीमिर्च पीसकर मटर के दाने समान गोली बनाकर सुबह-शाम मट्ठे के साथ एक सप्ताह तक लेने से  भी पीलिया रोग में लाभ होता है.

This is a message of Lomesh Kumar Bach from Korba, Chhatisgarh. In this message he is suggesting use some traditional forest medicine for the treatment Jaundice. He says constipation should me avoided in Jaundice. Mix Kutki (Picrarhiza kurroa) 3 gms, sugar candy 3 gms & 3 gms bark powder of Bhuiamla  (Phyllanthus niruri) commonly known as seed under leaf in English. Taking this mixture twice a day with  decoction of leaves, seed, bark, flower & root  of Lajwanti (Mimosa pudica)  well known as touch-me-not plant twice a day for 14 days is useful. Grind 20 gms Madar also known as Crown flower tree  leaves with 20 gms sugar candy & 2 gms black pepper and make pea sized pill. Taking this pill with butter water twice a day continuously for week is beneficial.

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