Tag Archives: मूली / Raphanus sativus

बवासीर का परंपरागत उपचार / Traditional treatment of Piles

यह संदेश श्री अनंतराम श्रीमालीजी का सागर मध्यप्रदेश से है इस सन्देश में अनंतरामजी हमें बवासीर रोग के कारक, परहेज और उसके पारंपरिक इलाज की जानकारी दे रहे हैइनका कहना है की बवासीर रोग अक्सर रहने वाली कब्ज के कारण होता हैइलाज के आभाव में बवासीर के मस्से आगे चलकर खूनी बवासीर में तब्दील हो जाते है जो पीड़ादायक होते हैखूनी या बादी दोनों ही प्रकार के बवासीर में औषधी के साथसाथ खानपान का परहेज लाभप्रद होता हैइसमें रोगी को गुड, बेसन, मिर्च, अधिक तेलयुक्त भोज्य सामग्री, अरहर की दाल, उड़द की दाल और वातकारक भोज्य पदार्थो का सेवन तत्काल रोक देवेइसके उपचार के लिए मुली के रस का गाय के घी के साथ सुबहशाम सेवन करें, एवं माजूफल का चूर्ण गुदा स्थान पर लगाये इससे लाभ होगादूसरा सफ़ेद सुरमा और नागकेसर को समभाग में लेकर कूटपीसकर बारीक़ कर लेंइसमें शहद मिलकर 1 ग्राम मात्रा में सुबहशाम चाटें साथ ही कडवी तुरई के बीज को रात को पानी में फुलाकर सुबह इन्हें बारीक पीसकर गुदा स्थान पर लगायें.. यह उपचार बवासीर रोग में अत्यंत प्रभावी है….अनंतराम श्रीमालीजी का संपर्क है..9179607522

 This is a message of Shri. Anantram Shrimali from Sagar, Madhya Pradesh…this message is about probable cause, regimen and traditional treatment of piles.. According to him persistent constipation often leads to piles and in absence of proper treatment, piles could transform into hemorrhoid… Along with treatment piles & hemorrhoid, patients should avoid Jaggery (Gur), Gram floor(Besan), spicy & oily food and people should abstain from Arhar Daal and Urad Daal. For treatment Radish juice with pure cow ghee should be taken in morning and evening. Majuphal Churn could be applied directly on the piles. Secondly mix Nagkesar (Mesua ferra) and white kohl commonly known as surma in equal quantity and grind well and lick this 1 gram mixture with honey in morning and evening. Soak Turai seeds (Luffa) in water and apply its paste on rectum.. above treatments have proven effective in cure of piles and hemorrhoid… Contact of Shrimaliji is 9179607522

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पीलिया रोग में आहार

यह संदेश सरोजनी गोयल का बाल्को, जिला कोरबा, छत्तीसगढ़ से है..इस संदेश में वह पीलिया रोग में लिए जा सकने वाले आहार के बारे में बता रहीं है… उनका कहना है की बदलते मौसम में कई रोगों के साथ पीलिया भी बढ़ रहा है… इससे बचने के लिए मकोय की पत्तियों को पानी में उबालकर उसे पिये तो लाभ होता है… मकोय पीलिया के लिए उत्तम औषधि है इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाये लाभदायक होता है… यदि पीलिया की लक्षण दिखाई देने लगे तो पानी पीने की मात्र बढ़ा दे इससे शरीर के हानिकारक तत्व उसर्जित हो जाते है… कच्चे पपीते का ज्यादा उपयोग करना रोगी के लिए अच्छा होता है…एक धारणा है की पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिये… पर वास्तविकता है की रोगी यदि गाय के दूध से बना पनीर व छेने से बनी मिठाई खाए तो फ़ायदा होता है… इसके बारे में ज्यादा जानकारी अपने चिकित्सक से ले..

परंपरागत उपचार: पीलिया के रोगी को मुली के रस का सेवन करना खासा लाभदायक होता है..यह रक्त और यकृत से अतिरिक्त रक्तिम-पित्तवर्णकता (Bilirubin) को निकलता है..पीलिया के रोगी को धनिया, टमाटर, प्याज यह सब्जियां देना चाहिये…. सरोजनी गोयल का संपर्क है: 9165058483

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रसपान से रोग उपचार

यह संदेश लोमेश कुमार बच का लिमरू वन औषधालय, जिला कोरबा, छतीसगढ़ से है…इस संदेश में वह विभिन्न रोगों का फलों-सब्जियों के रस से उपचार के बारे में बता रहे है… कौन से रोगों में कैसा रसोपचार किया जाये निम्नलिखित है:

गठियावात: अनन्नास, नीबू, खीरा, गाजर, पालक, चुकंदर का रस उपयोगी है.

मधुमेह: गाजर, संतरा, पालक, मुसम्बी, अन्नानास, नीबू, का रस उपयोगी है.

उच्च रक्तचाप: संतरा, अंगूर, गाजर चुकंदर, खीरा का रस उपयोगी है.

सर्दी-जुकाम: नीबू, संतरा, अनन्नास, गाजर, प्याज, पालक का रस उपयोगी है.

आँखों के लिए: टमाटर, गाजर, पालक, खुबानी का रस उपयोगी है.

मोटापे के लिए: नीबू, संतरा, अनन्नास, टमाटर, पपीता, चुकंदर, गाजर, पालक, पत्तागोभी का रस उपयोगी है.

अल्सर के लिए: गाजर, पत्तागोभी, अंगूर, खुबानी का रस उपयोगी है.

टांसिल के लिए: नीबू, संतरा, अनन्नास, गाजर, पालक, मूली, खुबानी का रस उपयोगी है.

सिरदर्द: अंगूर, नीबू, गाजर, पालक का रस उपयोगी है.

अनिद्रा: सेव, गाजर, अंगूर, नीबू कर रस उपयोगी है.

रक्ताल्पता: गाजर, पालक, काले अंगूर, चुकंदर, खुबानी का रस उपयोगी है.

कब्ज: अंगूर, गाजर, चुकंदर, पपीता का रस उपयोगी है.

बुखार: संतरा, नीबू, मुसम्बी, गाजर, अनन्नास, प्याज, पालक, खुबानी का रस उपयोगी है.

पीलिया: गन्ना, नीबू, गाजर, अंगूर, चुकंदर, खीर, मुली, पालक, नाशपाती का रस उपयोगी है.

लोमेश कुमार बच का संपर्क है: 9753705914

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पीलिया, हिचकी, प्रदर, रक्तप्रदर, स्वप्नदोष

यह संदेश निर्मल अवस्थीजी का कस्तूरबा नगर, वार्ड क्रमांक 4, बिलासपुर से है…उनका कहना है की पीलिया होने पर आक जिसको मदार भी कहते है की नयी कोमल कोंपले पीसकर मावे में मिलकर और उसने शक्कर मिलकर खिलाकर उपर से दूध पिला दे….यह चमत्कारिक ढंग से पीलिया को समाप्त कर देगी..अगर कोई कसर रह जाये तो इसे दवा लेने के तीसरे दिन भी एक बार दे दे…पीलिया जड़ से समाप्त हो जायेगा…दूसरी औषधि भी पीलिया के लिए ही है…100 ग्राम मुली के रस में 20 ग्राम शक्कर मिलकर पिलाये…गन्ने का रस, टमाटर और पपीते का सेवन करे…अगर किसी को हिचकी आती है तो मयूर पंख का चांदोबा जलाकर बनाई 2 रत्ती भस्म, 2 रत्ती पीपल चूर्ण को शहद में मिलाकर देने से हिचकी दूर होती है….प्रदर रोग में 100 ग्राम धनिया बीज 400 ग्राम पानी में स्टील के बर्तन में उबालें…आधा शेष रहने पर 20 ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें, 3-4 दिनों में लाभ होगा…रक्त प्रदर में 10 ग्राम मुल्तानी मिट्टी 100 ग्राम पानी में रात में भिगो दे, प्रातः इसे छान ले मिट्टी छोड़कर उस पानी को सोना-गेरू एक चम्मच फांक कर यह पानी पी लें…अगर सोना-गेरू नहीं हो फिर भी यह लाभ करेगा….स्वप्नदोष दूर करने के लिए बबूल की कोमल फलियाँ जिसमे बीज न आया हो उसे छाया में सुखा लें.. फिर उसे पीसकर चूर्ण बनाकर उसमे बराबर मात्र में मिश्री मिला लें….उसे सुबह-शाम एक-एक चम्मच लेने से स्वप्नदोष में लाभ होगा….निर्मल अवस्थी का संपर्क है: 09685441912

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