Tag Archives: सैंधा नमक / Rock Salt

कब्ज और अजीर्ण का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Indigestion & Constipation

वैद्य एच डी गाँधी आज हमें कब्ज और अजीर्ण के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहें है. इसके लिए दालचीनी, सौंठ, जीरा, छोटी इलायची यह सभी घटक 50 ग्राम की मात्रा में और  सैंधा नमक 10 ग्राम और 30 ग्राम सनाय की पत्तियाँ इन सभी का चूर्ण बनाकर काँच की बोतल में भरकर रखें. इस ½ चम्मच चूर्ण को खाली पेट गुनगुने पानी से सुबह-शाम लगातार 7 दिनों तक लेने से लाभ मिलता है. इसका प्रयोग 7 दिनों के बाद एक सप्ताह तक छोड़कर फिर से 7 दिनों तक किया जा सकता है. इस उपचार के दौरान मिर्च-मसालेदार और तैलीय भोजन से परहेज करें.

In Indigestion & Constipation: Vaid H D Gandhi suggesting grind cinnamon, dry ginger, small cardamom all in 50 gms, rock salt 10 gms & senna leaves in 30 gms quantity and keep this combination in any glass bottle. Taking this in ½ spoon quantity twice a day with lukewarm water is useful in Indigestion & Constipation. Precaution should be taken avoids spicy & oily food during the treatment. 

Share This:

डकार का पारंपरिक उपचार / Traditional treatment of belching

यह सन्देश वैद्य लोमेश कुमार बच का कोरबा छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में लोमेशजी हमें डकार को रोकने का पारंपरिक उपाय बता रहे है. इनका कहना है कि कई लोगो को बार-बार डकार आने की समस्या होती है. इस समस्या के उपचार के लिए 10 तोला सौंठ, 10 तोला विधारा, 3 तोला हरड, 4 तोला घी में भुनी हुई हींग, 1 तोला चित्रक और 1 तोला सैंधा नमक इन सभी को पीसकर किसी हवाबंद पात्र में रखे. इसे 3-4 ग्राम की मात्रा में नियमित सेवन करने से डकार आने की समस्या में राहत मिलती है.

This is a message of vaidya Lomesh Kumar Bach from Korba, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional method to get rid of belching problem. He says many people have frequent belching problem. For treatment grind 100 gms dry Ginger, 100 gms Vidhara also known as Elephant creeper, 30 gms Harad (Terminalia chebula), 40 gms ghee roasted Asafoetida, 10 gms Chitrak also known as  White leadwort & 10 gms Rock salt until fine powder is formed. Taking this powder daily in 3-4 gms quantity is very effective in belching problem. 

Share This:

पथरी का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Stone

यह सन्देश वैद्य चंद्रकांत शर्मा का मुंगेली, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में चंद्रकांतजी हमें पथरी के उपचार की पारंपरिक औषधी बता रहे है. इनका कहना है की पथरी होने पर  पत्थरचट्टा जिसे पत्थरचूर भी कहा जाता है इसके पत्तियों का 20 मी.ली रस अथवा सहजन की जड़ का 20-50 मी.ली काढ़ा अथवा काली मुनक्का (सूखे हुए काले अंगूर) के 50 मी.ली काढ़े का सेवन करने से पथरी में लाभ मिलता है. गोखरू के बीजों का 3 ग्राम चूर्ण भेड़ के दूध के साथ लगातार 7 दिन तक सेवन करने से भी लाभ मिलता है. नीबू के रस में सैंधा नमक मिलाकर कुछ दिनों तक नियमित पीने से पथरी के गल कर निकलने में मदद मिलती है.

This is a message of vaidya Chandrakant Sharma from Mungali, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional treatment method to get rid of stone. He says taking 20-50 ml juice of Pattharchatta (Elytraria acaulis) or 50 ml decoction of Drumstick plant root or 50 ml decoction of dried black grapes is useful. Taking 3 gms Gokhru (Tribulus terrestris) seeds powder using sheep milk for 7 days is beneficial. Taking lemon juice after adding some rock salt for some days is also helping in stone removal.

 

Share This:

सामान्य उदर रोगों का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of common stomach disorders

यह सन्देश वैद्य लोमेश बच का कोरबा, छत्तीसगढ़ से है अपने इस सन्देश में लोमेशजी हमें उदर रोग और उदर पीड़ा में उपयोगी पारंपरिक धन्वंतरी वटी के बारे में बता रहे है. इनका कहना है की इसके मुख्य घटक है सौंठ, सुहागे का फूल (सुहागे को गर्म तवे पर रखने पर वह फूलकर फूल जैसा बन जाता है), सैंधा नमक और उत्तम हींग सभी बराबर मात्रा में लेकर इनसे आधी मात्रा में शंखभस्म और एक भाग लौंग मिलाकर इसका वस्त्रकूट (कपडे में रखकर कूटकर) चूर्ण बना लें और इसमें बराबर मात्रा में सहजन की छाल का  रस मिलाकर छोटे झाड़ी बेर जिसे (झरबेर) भी कहते है इसके आकार की गोलियाँ बनाकर रख ले. इन गोलियों को दिन में दो बार गुनगुने पानी के साथ लेने से उदार विकारों में लाभ मिलता है. लोमेश बच का संपर्क है 9753705914

This is a message of vaidya Lomesh Kumar Bach from Korba, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional “Dhanwantari” pills useful in stomach related problems. He says for making this pills take dry Ginger, Roasted borax, Rock Salt & quality Asafoetida in equal quantity & afterward mix conch ash in half of all amount & one part Clove powder. After grinding  add Drumstick’s bark juice & make Indian plum sized pills. Taking this pills in one pill quantity twice a day with lukewarm water is useful in stomachache & other common stomach related problems. Lomesh Kumar Bach is @ 9753705914

Share This:

टमाटर के पारंपरिक औषधीय उपयोग / Traditional medicinal uses of Tomatoes

यह सन्देश दीपक आचार्य का अभूमका हर्बल्स अहमदाबाद से है. अपने इस सन्देश में दीपकजी हमें टमाटर के पारंपरिक औषधीय उपयोगो के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि टमाटर का उपयोग हर भारतीय रसोई में होता है. टमाटर में पाए जाने वाले विटामिन गर्म होने पर भी नष्ट नहीं होते है. आदिवासियों के अनुसार टमाटर संतरे और अंगूर से ज्यादा लाभदायक होता है. पातालकोट के आदिवासी मानते है यह दातों और हड्डियों की कमजोरी को दूर करता है. जिन्हें रक्ताल्पता की शिकायत हो उन्हें 1 गिलास टमाटर का रस प्रतिदिन पीना चाहिए. इससे रक्तहीनता दूर होकर रक्त की वृद्धि होती है. कम वजन के व्यक्तियों को टमाटर का सेवन प्रतिदिन करना चाहिए. गुजरात के डांग हर्बल जानकारों के अनुसार लाल टमाटर पर अदरक और सैंधा नमक डालकर खाने से अपेंडिक्स में लाभ मिलता है. चेहरे पर यदि काले दाग-धब्बे हो तो टमाटर के रस में रुई भिगोकर कर चेहरे पर लगाने से दाग-धब्बे कम हो जाते है. टमाटर की चटनी में कालीमिर्च और सैंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम खाने से पेट के कृमि नष्ट हो जाते है. जिन लोगो को अक्सर मुहँ में छाले होने की शिकायत रहती हो उन्हें टमाटर का अधिक सेवन करना चाहिए. दीपक आचार्य का संपर्क है 9824050784

This is a message of Deepak Acharya from Abhumka Herbals, Ahmedabad. In this message he is telling us traditional medicinal uses of Tomato. He says Tomato is used in every Indian kitchen. Vitamins found in Tomato are not destroyed even after heating. According to tribal belief Tomato is more useful than Orange & Grapes. As per tribal knowledge of Patalkot it is useful for removing weakness of teethes & bones. Anemic persons should drink 1 glass Tomato juice everyday. As per herbal experts of Daang Gujrat, Eating Tomato after sprinkling little ginger & rock salt is beneficial to get relax in Appendices. Applying Tomato juice on face using cotton Pledget is useful to get rid of blot & stains. Eating tomato sauce after adding black pepper & rock salt twice a day is useful for destroying stomach worms. Regular consumption of Tomatoes is beneficial for curing mouth blisters. Deepak Acharya’s at 9824050784.

Share This:

तुलसी के औषधीय गुण / Medicinal properties of Basil

यह सन्देश डॉ. एच डी गाँधी का धर्मार्थ दवाखाना मोतीनगर जिला रायपुर, छत्तीसगढ़ से है…इस सन्देश में डॉ. गाँधी हमें तुलसी के औषधीय गुणों के बारे में बता रहे है…इनका कहना है की तुलसी के पौधे सामान्यतः सभी हिन्दू घरों में पाए जाते है…तुलसी के कई प्रकार होते है पर श्वेत तुलसी और श्यामा तुलसी ही प्रायः ज्यादा जानी जाती है… श्यामा तुलसी शीत, कफ एवं ज्वर नाशक है…फेफड़े से कफ को निकालने के लिए श्यामा तुलसी का काली मिर्च के साथ प्रयोग किया जाता है… तुलसी के अन्य उपयोग इस प्रकार है.

पहला: यदि बच्चों को लू लग जाये तो तुलसी के पत्तों का रस चीनी मिलाकर पिलाना फायदेमंद होता है..इस प्रकार करने से लू का प्रकोप कम हो जाता है…

दूसरा: मलेरिया और ठण्ड लगकर आने वाले ज्वर में तथा बच्चों के पसली के दर्द में तुलसी की 5-10 पत्तियों का रस शहद में मिलाकर दिन में 3 बार देने से आराम मिलता है…

तीसरा: खांसी होने पर तुलसी, अदरक और पान की पत्तियों का रस काली मिर्च और शहद के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है…

चौथा: तुलसी की पत्तियों का रस दाद पर लगाने से दाद कुछ दिनों में ठीक हो जाता है…

पांचवा: बच्चों के यकृत के रोग में तुलसी और ग्वारपाठे का रस सेवन कराने से लाभ होता है…

छठा: मूर्छा या बेहोशी की अवस्था में पर तुलसी की पत्तियों का रस सैंधा नमक मिलाकर दो बूंद नाक में डालने से मूर्छा दूर हो जाती है…

सातवाँ: तुलसी के पत्तों और सैंधा नमक मिलाकर बनाया काढ़ा पेट दर्द, वायु विकार, आँतों की सूजन और श्वांस रोग में लाभदायक है…

आँठवा: तुलसी की पत्तियों के रस को पुदीने और सौंठ के अर्क में मिलाकर पीने से वमन (उल्टी) रुक जाती है…

नवां: तुलसी के बीजों का 1 ग्राम चूर्ण दूध या मक्खन के साथ सुबह और शाम कुछ माह लेने से नपुंसकता और शीघ्रपतन में लाभ होता है…

दसवां: फेफड़ों में कफ होने पर तुलसी के सूखे पत्ते, कत्था, कपूर और इलायची के दाने, इससे दस गुना शक्कर मिलाकर पीस ले और इसको 1-1 चम्मच पानी के साथ सुबह-शाम लेने से कफ में आराम मिलता है…

ग्याहरवा: किसी भी रोग होने पर अगर प्यास ज्यादा लगती हो तो..तुलसी के पत्तों का रस पानी, नीबू और मिश्री मिलाकर पीने से प्यास का अधिक लगना कम हो जाता है…

This is a message from Dr. H D Gandhi from “Darmarth Dawakhana” Motinagar, Dist Raipur, Chhatisgarh… In this message Dr. Gandhi telling us about medicinal properties of Basil. In Hindu homes this plant is usually found due to its mythological values. There are different type of Basil are found  but mainly two types of them is much known White Basil and second one is Dark Basil. Dark Basin along with Black pepper can be used to expel cough from lungs. Many other medicinal properties of Basil are given below:

In case of sunstroke juice of Basil leaves and sugar is an effective remedy to reduce the effect of sunstroke. In Malaria, Cold & fever giving juice of 5-10 Basil leaves with honey three times a day is useful. In cough giving juice of Basil leaves, Ginger & Betel leaf after adding black pepper & honey is beneficial. Applying juice of Basil leaves on eczema is useful. Juice of Basil leaves & Aloe vera can be given to children for liver problems. Giving decoction of Basil leaves after adding rock salt is useful to get rid of stomachache, swelling of intestine, respiratory diseases. In case of vomiting giving juice of Basil leaves with Ginger & Mint extract is useful.

Share This:

हरड के औषधीय गुण / Medicinal properties of Harad (Terminalia chebula)

यह सन्देश लोमेश कुमार बच का कोरबा छत्तीसगढ़ से है. इस सन्देश में लोमेशजी हमें हरड के गुणों के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि हरड एक अत्यंत गुणकारी औषधी है इसे हरितिकी के नाम से भी जाना जाता है. इसका नियमित सेवन करना अत्यंत लाभकारी है. इसको अलग-अलग मिश्रणों और अनुपानो से लेने से यह विविध रोगों के उपचार में लाभदायक है. यह उदर रोगों के उपचार में भी असरकारक है. हरड की सेवन से पेट दर्द तो ठीक होता ही है साथ ही इससे अन्य उदर विकारों का शमन हो जाता है. हरड, आंवला और बहेड़ा के सामान अनुपात में चूर्ण करने से त्रिफला बनता है. त्रिफला का नियमित सेवन करने से पेट साफ़ रहता है. कब्ज होने पर हरड का 15 ग्राम चूर्ण 200 मी.ली पानी में मिलाकर उबालें और जब यह एक-चौथाई रह जाये तो इसमें 1 ग्राम सौंठ या 2 ग्राम सैंधा नमक मिलाकर सेवन करने से कब्ज में लाभ होता है. हरड का 3 ग्राम चूर्ण रात को सोते समय गुनगुने पानी के साथ लेने से सुबह पेट भली प्रकार साफ़ हो जाता है. लोमेश कुमार बच का संपर्क है 9753705914

This is a message of Lomesh Kumar Bach from Korba, Chhatisgarh. In this message he is telling us medicinal properties of Harad which is also known as Haritiki. He say’s regular consumption of Harad is very useful in stomach related problems. Boil 15 gram Harad powder in 200 ml water & when quarter water remains taking this by adding 1 gram dry ginger powder or 2 grams rock salt is useful to get rid of constipation. Taking 3 grams Harad powder with lukewarm water at bed time is beneficial to clean stomach early morning. Lomesh Kumar Bach’s at 9753705914

Share This:

गुर्दों के दर्द का पारंपरिक उपचार / Traditional remedy of Kidney pain

यह सन्देश निर्मल महतो का बोकारो, झारखण्ड से है. अपने इस सन्देश में निर्मलजी हमें गुर्दों के दर्द को ठीक करने के पारंपरिक उपचार के विषय में बता रहें है. इनका कहना है कि 20 ग्राम अजवाइन, 10 ग्राम सैंधा नमक और 20 ग्राम तुलसी की सूखी पत्तियों का चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को 2-2 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ लें. इनका कहना है की इस चूर्ण का 1-2 बार प्रयोग करने से ही लाभ होने लगता है. खरबूजे के उपरी छिलके को सुखाकर उसे 10 ग्राम की मात्रा में 250 मी.ली पानी में उबालें फिर उसे छानकर थोड़ी सी मिश्री मिलाकर उसे आधा-आधा कप सुबह-शाम पीने से गुर्दों के दर्द में आराम मिलता है. कद्दू और सीताफल को बारीक काट कर थोडा सा गर्म करके दर्द वाले स्थान पर बांधने से दर्द कम हो जाता है. अंगूर की बेल के 30 ग्राम पत्तियों को पानी में पीसकर छानकर उसमे थोडा सा नमक मिलाकर गुर्दे से दर्द से ग्रसित व्यक्ति को पिलाने से आराम मिलता है. निर्मल महतो का संपर्क है: 8674868359

This is a message of Nirmal Mahto from Bokaro, Jharkhand. In this message Nirmalji is telling us traditional remedy for Kidney pain. He say’s make powder of 20 gms Carom seeds, 10 gms Rock salt & 20 gms dry Basil leaves. By taking this powder in 2-2 gms quantity with lukewarm water twice a day can be useful in Kidney pain. Make a powder of dried upper skin of Musk melon seeds and boil this 10 gms powder in 250 ml water add little sugar candy and after filtration this half cup water can be given to the patient twice a day. Chop Pumpkin & Custard apple and after warming tie this on pain site. Grind the leaves of Grape vine with water and after filtration add little salt. By giving this combination can be useful for Kidney pain patient. Nirmal Mahato’s at 8674868359

Share This:

पेट के कृमियों का परंपरागत उपचार / Traditional treatment of stomach worms

यह सन्देश निर्मल महतोजी का बोकारो झारखण्ड से हैअपने इस सन्देश में निर्मलजी हमें पेट में होने वाले कीड़ो से बचने का उपचार के बारे में बता रहे हैपेट में कीड़े या कृमि यह रोग ज्यादातर बच्चों में ही पाया जाता हैइस रोग के कारण शरीर का वजन कम होने लगता है तथा मल में साथ में कीड़े भी निकलने लगते हैइसके उपचार के लिए आधा ग्राम अजवाइन में उतने वजन का गुड मिलाकर दिन में तीन बार खिलाने से लाभ होता हैयह 3-5 वर्षों के बच्चों को खिलाना चाहिएबच्चों को सुबह 10 ग्राम गुड खिलाना चाहिए इससे पेट के सारे कीड़े एकत्रित हो जाते है इसके बाद आधा ग्राम अजवाइन का चूर्ण बासी पानी से खिलाने से कीड़े मल के साथ निकल जाते हैअगर यही समस्या वयस्कों को हो तो उन्हें 50 ग्राम गुड खाने के बाद 2 ग्राम अजवाइन का चूर्ण बासी पानी के साथ लेना चाहिएबच्चों को रात को सोने से पहले आधा ग्राम अजवाइन के चूर्ण में चुटकी भर काला नमक मिलाकर गुनगुने पाने से देना चाहिए इससे सारे कीड़े मरकर सुबह मल के साथ निकल जायेंगेवयस्क इससे दुगनी मात्रा में इसका प्रयोग करेंअजवाइन का चूर्ण मट्ठे के साथ लेने से भी लाभ मिलता हैटमाटर के साथ कालीमिर्च और सैंधा नमक मिलकर खाने से भी आराम मिलता हैनिम्बू के बीजो को पीसकर उसका चूर्ण 1 ग्राम बच्चों को और 3 ग्राम वयस्कों को गुनगुने पानी के साथ देने से आराम मिलता हैबच्चो को एक सेव फल रात को छिलके समेत खिलाना चाहिए..पर उसके बाद पानी नहीं पिलाना चाहिए ऐसा करने से एक सप्ताह में पेट के कीड़े नष्ट हो जाते है.. अनार का रस पीने से भी इस रोग में आराम मिलता है….

 This message is from Shri Nirmal Mahoto of Bokaro, Jharkhand …. He is advising about treatment for stomach worms … the problem of stomach worms (krimi) is generally found in children …generally loss of weight is observed alongwith worms are seen in stool ….. for treatment take half gram Ajwain with equal amount of Gur (Jaggery) three times daily … this is effective for 3~5 years children … children should be given 10 gms of Gur (Jaggery) in the morning so that the worms accumulate and then if given 1/2 gm Ajwain powder with water would result in the worms being excreted with stool … for adults the dosage is 50 gms of Gur and then 2gms of Ajwain (Carom Seeds) powder. Giving 1/2 gm Ajwain powder with a pinch of Rock Salt in warm water at night will also help in excreting the worms with stool … for adults the dosage is double that for children. Ajwain churn could also be taken with butter milk (matha) Tomato with black pepper and rock salt (saindha namak) also provides relief … crushed lemon seeds taken with warm water also gives relief – 1 gm for children and 3 gms for adults … For children one unpealed apple taken during bedtime for one week also helps in destroying the worms – however no water should be taken afterwards …. Anar (Pomegranate) juice is also helpful

Share This:

पीपल के गुण

यह संदेश सरोजनी गोयल का बाल्को कोरबा, छत्तीसगढ़ से है…इस संदेश में सरोजनीजी पीपल के गुणों के बारे में बता रहीं है…उनका कहना है की पीपल बहुत सारे रोगों को दूर करता है….पीपल का फल बाँझपन को दूर करने में मददगार है…जिन स्त्रियों को गर्भ धारण नहीं होता है वह इसके फलो को बारीक़ पीसकर दिन के एक बार खाए तो उनको शीघ्र गर्भ धारण करने में मदद मिलेगी….वहीँ आजकल पुरषों में शीघ्रपतन होना आम है वह पीपल के दूध को बताशे के साथ पकाकर खाए उनको लाभ होगा…पीपल दमे को भी ठीक करने में मददगार है, पीपल के छाल का चूर्ण थोड़े गरम पानी के साथ दिन में तीन बार लेने से दमा ठीक हो जाता है….पेट में कृमि होने पर पीपल के पंचांग का चूर्ण थोड़े गुड और सौंफ के साथ खाने से लाभ होता है….जिनको पीलिया हो रहा हो तो वह पीपल और नीम के 5-5 पत्ते पीसकर सैंधा नमक मिलाकर नियमित खाए तो लाभ होगा….सरोजनी गोयल का संपर्क है: 9165058483

Share This: