Tag Archives: हरड / Terminalia chebula

मोटापा घटाने का पारंपरिक उपाय – Traditional method of loosing weight

वैद्य लोमेश बच कोरबा, छत्तीसगढ़ से हमें मोटापा घटाने के कुछ पारंपरिक उपायों के बारे में बता रहें है. इनके अनुसार त्रिकटू चूर्ण (कालीमिर्च-लौंग पीपर-सौंठ का मिश्रण) और त्रिफला चूर्ण (बहेड़ा-हर्रा-आंवला का मिश्रण) को समभाग और थोडा सा सैंधा नमक मिलाकर रखें. प्रतिदिन इस चूर्ण को 1 चम्मच की मात्रा में  नियमित इसे 6 माह तक लेना मोटापा घटाने में मददगार है. प्रतिदिन प्रातः 250 मी.ली गुनगुने पानी में 20 ग्राम शहद मिलाकर इसे लगातार 3 माह तक लेने से भी मोटापा घटाने में मदद मिलती है. 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण शहद के साथ या शहद मिले पानी में मिलाकर प्रतिदिन चालीस दिन तक लगातार लें. वायविडंग, सौंठ, यवक्षार, जौं और आंवला को समभाग मिलाकर इसका चूर्ण बनाकर सूती कपडे से छानकर किसी काँच को बोतल में भरकर रखें. इसे प्रतिदिन 3 ग्राम की मात्रा में शहद मिलाकर नियमित 6 माह तक लेने से मोटापा घटाने में मदद मिलती है.

Vaid Lomesh Bach of Korba, Chhatisgarh is telling us traditional tips which is helping in to get rid of Obesity. As per him mix Trikatu powder (Mixture of Black peeper- Piper longum & Dry ginger) and Triphala powder (Mixture of Terminalia Belerica-Indian gooseberry & Terminialia chebula) in equal quantity and after adding little Rock salt taking this powder daily in 1 spoon quantity for 6 months is useful. Taking 250 ml lukewarm water after adding 20 gms Honey in early morning for consecutively 3 months is also beneficial. Taking 10 gms Triphala powder with Honey or Honey mix water for 40 days is useful.  Grind False black pepper, Yavkshara  (Potassium carbonate), Barley & Indian gooseberry and after cloth filtration keep this in any glass bottle. Taking this powder in 3 gms quantity with Honey regularly for 6 months helps in reducing weight.

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मोटापा घटाने का पारंपरिक उपाय – Traditional tips for reducing weight

वैद्य लोमेश बच कोरबा, छत्तीसगढ़ से हमें मोटापा घटाने के कुछ पारंपरिक उपायों के बारे में बता रहें है. इनके अनुसार त्रिकटू चूर्ण (कालीमिर्च-लौंग पीपर-सौंठ का मिश्रण) और त्रिफला चूर्ण (बहेड़ा-हर्रा-आंवला का मिश्रण) को समभाग और थोडा सा सैंधा नमक मिलाकर रखें. प्रतिदिन इस चूर्ण को 1 चम्मच की मात्रा में  नियमित इसे 6 माह तक लेना मोटापा घटाने में मददगार है. प्रतिदिन प्रातः 250 मी.ली गुनगुने पानी में 20 ग्राम शहद मिलाकर इसे लगातार 3 माह तक लेने से भी मोटापा घटाने में मदद मिलती है.

Vaid Lomesh Bach of Korba, Chhatisgarh is telling us traditional tips which is helping in to get rid of Obesity. As per him mix Trikatu powder (Mixture of Black peeper- Piper longum & Dry ginger) and Triphala powder (Mixture of Terminalia Belerica-Indian gooseberry & Terminialia chebula) in equal quantity and after adding little Rock salt taking this powder daily in 1 spoon quantity for 6 months is useful. Taking 250 ml lukewarm water after adding 20 gms Honey in early morning for consecutively 3 months is also beneficial.

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डकार का पारंपरिक उपचार / Traditional treatment of belching

यह सन्देश वैद्य लोमेश कुमार बच का कोरबा छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में लोमेशजी हमें डकार को रोकने का पारंपरिक उपाय बता रहे है. इनका कहना है कि कई लोगो को बार-बार डकार आने की समस्या होती है. इस समस्या के उपचार के लिए 10 तोला सौंठ, 10 तोला विधारा, 3 तोला हरड, 4 तोला घी में भुनी हुई हींग, 1 तोला चित्रक और 1 तोला सैंधा नमक इन सभी को पीसकर किसी हवाबंद पात्र में रखे. इसे 3-4 ग्राम की मात्रा में नियमित सेवन करने से डकार आने की समस्या में राहत मिलती है.

This is a message of vaidya Lomesh Kumar Bach from Korba, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional method to get rid of belching problem. He says many people have frequent belching problem. For treatment grind 100 gms dry Ginger, 100 gms Vidhara also known as Elephant creeper, 30 gms Harad (Terminalia chebula), 40 gms ghee roasted Asafoetida, 10 gms Chitrak also known as  White leadwort & 10 gms Rock salt until fine powder is formed. Taking this powder daily in 3-4 gms quantity is very effective in belching problem. 

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गठियावात का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Arthritis

मुंगेली जिला छत्तीसगढ़ के वैद्य चंद्रकांत शर्मा का कहना है कि गठियावात होने पर जोड़ो में दर्द और सूजन आती है और इसकी शुरुआत उँगलियों से होती है.  इसके उपचार के लिए पानी का अधिक सेवन करें और सिकाई करना भी लाभदायक है. सौंठ को अरंडी के तेल या घी के साथ लेने से अथवा  250 मी.ली. दूध में उतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर उसमे 2 लहसुन की कलियाँ, 1 चम्मच सौंठ चूर्ण, 1 चम्मच हरड चूर्ण, दालचीनी और छोटी इलायची डालकर उबालें और उसे पियें. इस उपचार को शुरू करने से पहले 3 दिनों तक मूंग उबला पानी पियें उसके बाद 7 दिनों तक उबले हुए मूंग ही खाएं इसके बाद 15 दिनों तक उबलें हुए मूंग के साथ रोटी खाएं. इस पद्धति से उपचार करने से लाभ मिलेगा.

Vaid Chandrakant Sharma of Mungeli, Chhatisgarh is suggesting us traditional treatment of Arthritis. As per him in Arthritis causes pain & swelling in joints & It begins from fingers. For the treatment boil 250 ml Milk with same amount of water after adding 2 Garlic buds, 1 spoon dried Ginger powder, 1 spoon Harad (Terminalia chebula) powder, Cinnamon & Cardamom. Drinking this combination after filtration is useful. Taking Ginger powder with Castor oil or Ghee is also beneficial. Before starting this treatment first 3 days Kidney been boiled water should be taken afterwards 7 days eat on boiled Kidney been then after 15 days eat only  boiled Kidney been with chapaties. This treatment method will benefits in Arthritis.

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गठियावात का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of Arthritis

यह सन्देश वैद्य चंद्रकांत शर्मा का मुंगेली छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में चंद्रकांतजी हमें गठियावात के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इसके उपचार के लिए रात को 250 ग्राम खजूर पानी में भिगोकर रखे और सुबह यह खजूर निचोड़कर मरीज को दें. अगर वेदना ज्यादा हो तो कपूर, अफीम और कडवे तेल को गर्म करके प्रभावित स्थान की मालिश करने से लाभ मिलता है.

As per Vaid Chandrakant Sharma, Mungeli, Chhatisgarh – Non diabetic people suffering from Arthiritis can benefit by regularly taking dates  soaked overnight in plain water. Relief can also be had by massaging the effected parts by combination of warm camphor, opium and mustard oil. Diabetic patients can try.

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कब्ज का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of constipation

यह सन्देश चंद्रकांत शर्मा का मुंगेली छत्तीसगढ़ से है. अपने इस संदेश में चंद्रकांतजी हमें कब्ज और उदर रोग के पारंपरिक उपचार के बारे में बता रहे है. इनका कहना है कि कब्ज होने की दशा में हर्रे का पांच तौला चूर्ण (50 ग्राम) और सौंठ का 2½ तौला चूर्ण (25 ग्राम) में आवश्यकता के अनुसार गुड़ मिलाकर इसकी चने के आकार की गोलियां बना लें. इन गोलियों को 3-6 गोली की मात्रा में रात को सोते समय लेने से कब्ज तो ठीक होती है साथ ही यह उपचार अन्य सामान्य उदररोगों में भी समान रूप से लाभदायक है.

This is a message of vaidya Chandrakant Sharma from dist. Mungeli, Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional treatment of constipation & common stomach problems. He says  in case of constipation mix 50 gms Harad powder (Terminalia chebula), 25 gms dry Ginger powder & little Jaggery. After proper mixing make gram sized pills. Taking this pills in 3-6 pills quantity at bed time is useful in constipation & in common stomach related problems as well.

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वायु विकारों का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of abdominal gas problem

यह सन्देश वैद अनंतराम श्रीमाली का सागर मध्यप्रदेश से है. अपने इस सन्देश में अनंतराम जी हमें पेट में होने वाले वायु-विकारों का पारंपरिक उपचार बता रहे है. इनका कहना है कि उपचार के लिए 5 ग्राम हींग, 1 किलो आंवले के सूखे छिलके का चूर्ण, 200 ग्राम पीपर, 500 ग्राम छोटी हरड और 10 ग्राम सौंठ लें. 200 ग्राम पीपर, 500 ग्राम छोटी हरड को मट्ठे में भिगोकर सुखाएं ऐसा 4 बार करें फिर इनका चूर्ण बनाकर इसमें सौंठ, आंवले और हींग का चूर्ण और स्वादानुसार काला नमक मिलाकर किसी काँच की बोतल में भर कर रख ले. इसे भोजन के बाद 1 छोटे चम्मच की मात्रा में पानी के साथ लेने से वायु-विकारों में लाभ मिलता है इसके साथ ही इसके सेवन करने से भूख में भी वृद्धि होती है.

This is a message of Anantram Shrimali from Sagar, Madhya Pradesh. In this message he is suggesting us traditional remedy for abdominal gas problems. He says take 5 gms Asafoetida, 1 Kg dried skin powder of Indian gooseberry, 200 gms Piper longum, 500 gms Terminalia chebula & 10 gms dry ginger. First, soak 200 gms Piper longum & 500 gms Terminalia chebula in butter water (Whey) & after shadow drying repeat this process for 4 times & grind well to make powder then add remaining all ingredients & add rock salt to taste. Store this combination in any air tight glass bottle. After each meal taking this powder in 1 small spoon quantity is useful in  abdominal  gas problem & it is increasing apatite as well. 

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कब्ज का पारंपरिक उपचार – Traditional treatment of constipation

यह सन्देश वैद्य हरीश चावड़ा का गुंडरदेही, जिला बालोद, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में हरीशजी हमें कब्ज के उपचार का पारंपरिक नुस्खे बता रहे है. इसके उपचार के लिए काकड़ासिंघी, अतीस, पीपर, नागरमोथा, सनाय की पत्तियां, जवाखार और वायविडंग इन सभी को सामान मात्रा में पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रख ले. प्रतिदिन भोजन करने के पश्चात ½ चम्मच यह चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लेने से कब्ज में आराम मिलता है. निशोथ, अजवाइन, वायविडंग, सौंठ, काला नमक, कालीमिर्च, छोटी हरड इन सभी को 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर उसमे 40 ग्राम सनाय के पत्तियाँ मिलाकर बारीक पीसने के बाद कपडे से छान कर रख ले. इस चूर्ण को रोज रात्रि भोजन के बाद ½ चम्मच की मात्रा में लेने से कब्ज में लाभ मिलता है. आक (मदार) की जड़ को छाया में सुखाकर इसका चूर्ण बना ले. इस  ½ चूर्ण को गर्म दूध में मिलाकर लेने से भी कब्ज में लाभ मिलता है. हरीश चावड़ा का संपर्क है 9893765366

This is a message of vaidya Harish Chawda from Gundardehi, Dist. Balod, Chhatisgarh. In this message he is suggesting some traditional tips for the treatment of constipation. He says in case of constipation grind Kakda singi (Pistacia chinensis), Indian Atis (Aconitum heterophyllum), Piper longum, Nagarmotha (Cyperus scariosus), Senna leaves, Javakhar, False black pepper in equal quantity & keep this combination in any bottle. Taking this powder in  ½ tea spoon quantity twice a day after meal with lukewarm water is useful. Grind Indian jalap, Carom, False black peeper, dry ginger, black salt, black pepper & Terminalia chebula in 10 gram each in  & senna leaves in 40 gms quantity & after cloth filtration taking this  ½ table spoon combination after dinner is useful. Grind shadow dried root of crown flower tree & taking this  ½  table spoon powder after mixing in lukewarm milk is beneficial. Harish Chawda 9893765366 

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रक्त विकारों का पारंपरिक उपचार / Traditional treatment of blood related disorders

यह सन्देश रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, नया बस स्टैंड, पाली, कोरबा, छत्तीसगढ़ से है. अपने इस सन्देश में रामफलजी हमें रक्त विकारो के उपचार के पारंपरिक उपाय बता रहे है. इनका कहना है कि इसके उपचार के लिए 6 ग्राम नीम की कोपलें और 21 नग कालीमिर्च को पीसकर 125 मी.ली पानी में मिलाकर छानकर लेने से लाभ मिलता है. चिरायता, मंजीठा, खैर, रसना, हरड, बकुची, नीम के फूल,  मुल्हैठी और सरफोंक का काढ़ा बनाकर पीने से भी लाभ मिलता है.

This is a message of Ramfal Patel from Pragya Sanjeevani, Pali, Korba Chhatisgarh. In this message he is suggesting us traditional remedy for Blood related disorders. Grind 6 gms Neem seedlings with 21 nos black pepper & mix it in 125 ml water. After filtration drinking this combination is useful.  Make decoction using  Chirayata (Swertia chirayita), Manjitha (Rubia manjith), Cutch tree, Rasna (Pluchea lanceolata), Harad (Terminalia chebula), Bakuchi (Psoralea coryifolia), Neem flowers, Licorice & Wild indigo powder. Taking this decoction is useful in blood related disorders.

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कृमि रोग का उपचार / Treatment of Helminthiasis

यह संदेश श्री रामफल पटेल का प्रज्ञा संजीवनी, पाली, जिला कोरबा छत्तीसगढ़ से है… इस संदेश में वह कृमि रोग के उपचार के लिए उपयोगी कुछ नुस्खे बता रहे है..वह इस प्रकार है…

पहला नुस्खा: पीपरामूल का चूर्ण बकरी की दूध के साथ में पीने से कृमि नष्ट होते है…

दूसरा नुस्खा: बासी पानी में 6 ग्राम खुरासानी अजवायन पीसकर उसमे 10 ग्राम पुराना गुड मिला ले, इसे लेने से कृमि नष्ट हो जाते है…

तीसरा नुस्खा: नीम के पत्तों का रस शहद के साथ लेने से कृमि नष्ट हो जाते है…

चौथा नुस्खा: पलाश के पत्तों के रस शहद के साथ लेने से कृमि नष्ट होते है…

पांचवा नुस्खा: सौंठ, कालीमिर्च, पीपरामूल , हरड, बहेड़ा, भटकटैया, नीम की छाल, रिसोद (रसना), बच और खैर का सार इन सब को मिलाकर काढ़ा बना लें… और इसे गोमूत्र में मिलाकर कम से कम 11 दिनों तक पिलाने से कृमि रोग में लाभ मिलता है….

श्री रामफल पटेलजी का संपर्क है: 8815113134

This is a message from Shri. Ramfal Patel from Pragnya Sanjeevani, Pali, Dist. Korba, Chhatisgarh. In this message Ramfalji describing us remedies for intestinal helminths as follows:

First: Combination of Long pepper & Goat milk can destroy stomach worms.

Second: Taking of  Khurasani Ajwain (Hyoscyamus Niger) 6 gms with stale water along with 10 gms  Gud (Jaggery) can  eradicate stomach worms.

Third: Taking  juice of Neem (Azadirachta indica) leaves with Honey can destroy stomach worms.

Forth: Taking juice of Palash (Butea monosperma) leaves with Honey can also destroy stomach worms.

Fifth: Mix & grind Ginger, Black pepper, Long pepper, Harad (Terminalia chebula), Baheda (Terminalia Belerica), Bark of Neem (Azadirachta indica), Bhatkattiya (Solanum virginianum), Bach (Acorus calamus), Khier (Catechu) &  Resada and pour some water and boil until syrup is formed. By taking this syrup with cow urine is beneficial for removing stomach worm.

You can reached Ramfalji on 8815113134

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